Sunday, October 4, 2026
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Flydubai Flight Hijack: कॉकपिट के अंदर क्या हुआ था? कैप्टन स्मित ने बताई पूरी कहानी, बोले- ‘आखिरी कोशिश की ताकत बची थी’

Flydubai Flight Hijack: फ्लाईदुबई फ्लाइट को कथित तौर पर कब्जे में लेने की कोशिश नाकाम करने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट के अंदर के उन खौफनाक पलों का खुलासा किया है, जब उनके को-पायलट ने अचानक उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान घटना की पूरी कहानी साझा की।

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कैप्टन मच्छार ने बताया कि उड़ान की शुरुआत पूरी तरह सामान्य थी। वह कॉकपिट में सामने की ओर देख रहे थे, जबकि उनके को-पायलट ने उनसे प्रार्थना करने की अनुमति मांगी थी। स्थानीय यात्रियों और क्रू के बीच इस तरह प्रार्थना करना असामान्य नहीं होने के कारण उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

मच्छार के मुताबिक, उन्होंने को-पायलट के सम्मान में पीछे देखने के बजाय सामने की तरफ ध्यान रखा। करीब चार-पांच मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।

उन्होंने बताया, “जब वह प्रार्थना कर रहा था, तो सम्मान के तौर पर मैं पीछे नहीं बल्कि सामने देख रहा था। अचानक करीब चार-पांच मिनट बाद मेरे सिर के पीछे बहुत जोर से वार हुआ।”

शुरुआत में कैप्टन को लगा कि शायद विमान में कोई बड़ी तकनीकी या अन्य समस्या आ गई है। लेकिन लगातार हो रहे हमलों के बाद उन्हें समझ आया कि खतरा विमान में नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद उनके को-पायलट से है।

उन्होंने बताया कि हमले के शुरुआती वारों के कारण उनकी नजर बुरी तरह प्रभावित हो गई थी और उन्हें साफ दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय की उनकी यादें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और कई बातें उन्हें टुकड़ों में याद हैं।

कैप्टन मच्छार ने बताया कि उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की और एक बार दरवाजा खुल भी गया, लेकिन उन्हें लगता है कि हमलावर ने उसे दोबारा बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें याद है कि वह कॉकपिट के फर्श पर पड़े थे। विमान की तेज आवाज के बीच यात्रियों के चीखने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं।

इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि विमान को नीचे जाने से रोकने के लिए उनके पास शायद सिर्फ एक आखिरी मौका बचा है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दोबारा कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने का फैसला किया।

कैप्टन मच्छार ने कहा, “मेरे अंदर एक आखिरी कोशिश की ताकत बची थी। इसे आप अपने लिए कहें या लोगों के लिए, मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अगर मैं कुछ नहीं करता, तो मेरी मौत तय थी। मैंने अपने अंदर बची पूरी ताकत लगा दी और दरवाजे तक पहुंचकर उसे खोल दिया।”

उन्होंने बताया कि कॉकपिट के बाहर मौजूद लोग स्थिति संभालने के लिए तैयार थे। दरवाजा खुलते ही उन्होंने तुरंत कार्रवाई की और हालात को काबू में कर लिया।

कैप्टन की पूरी कहानी सुनने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनके साहस की जमकर सराहना की। नेतन्याहू ने कहा कि इतने गंभीर हालात में भी कैप्टन ने जिस तरह शांत रहकर फैसला लिया, वह बेहद असाधारण है।

नेतन्याहू ने कहा कि कैप्टन मच्छार ने विमान में सवार लोगों की जान बचाने के साथ-साथ दुनिया को यह संदेश भी दिया कि बहादुर लोग कितनी भी खतरनाक और हिंसक परिस्थिति का सामना कर सकते हैं।

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उन्होंने कैप्टन को संबोधित करते हुए कहा, “आप इजरायल के हीरो हैं। आप भारत के हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं।”

नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार के परिवार के प्रति भी शुभकामनाएं व्यक्त कीं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कैप्टन को दोबारा इजरायल आने का न्योता भी दिया।

इसके अलावा, नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि कैप्टन की अगली इजरायल यात्रा उनके लिए और भी खास और यादगार होगी।

बातचीत के अंत में इजरायल के प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार के साहस के लिए उनका आभार जताया और कहा कि उन्होंने जिस तरह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी, उसके लिए वह धन्यवाद के पात्र हैं।

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