Wednesday, April 15, 2026
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काम की बात: 15 साल पुरानी कार अब नहीं होगी बेकार, इंजन बदलकर दोबारा सड़क पर दौड़ेगी; सरकार खर्चा भी देगी

नई दिल्ली : केंद्र सरकार स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक अथवा क्लीन फ्यूल (सीएनजी-एलएनजी) में बदलने (रिट्रोफिटमेंट) का अवसर प्रदान करने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि 10 और 15 साल पुराने वाहन जो तकनीकी रूप से फिट हैं, ऐसे वाहनों को पूरी तरह से स्क्रैप करने के बजाय इंजन में बदलाव कर उपयोग में लाना समझदारी होगी। इससे करोड़ों निजी और व्यावसायिक वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर स्क्रैपेज पॉलिसी में बदलाव लाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।

मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस, टेम्पो, ट्रेवलर) को इलेक्ट्रिक किट से लैस करने पर आने वाली लागत का 15 से 25 फीसदी हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में रिट्रोफिटमेंट एक महंगा और जटिल काम है। नई नीति के तहत मंत्रालय देशभर में अधिकृत रिट्रोफिटमेंट सेंटर का नेटवर्क तैयार करेगा, जहां से प्रमाणित किट लगवाने पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।

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नई नीति की घोषणा जल्द

विशेषज्ञों का दावा है कि स्क्रैप पॉलिसी की सुस्त रफ्तार को देखते हुए रिट्रोफिटमेंट को बढ़ावा देना ही सरकार के समक्ष एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा है। वहीं, ट्रांसपोर्ट यूनियनों की ओर से लगातार पुराने वाहनों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय लाइफ एक्सटेंशन (जीवन विस्तार) का मौका देने की मांग लगातार उठ रही है। निजी निवेशकों ने स्क्रैपेज सेंटर खोलने में रुचि नहीं दिखाई। यही कारण है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा इलेक्ट्रिक रिट्रोफिटमेंट किट्स के लिए मानक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार नई नीति की जल्द घोषणा कर सकती है।

मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद

सरकार के इस प्रस्ताव से मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टर्स को भारी राहत मिलेगी। स्क्रैपेज पॉलिसी के कारण छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर नया वाहन खरीदने का भारी आर्थिक बोझ है। रिट्रोफिटमेंट की लागत नए वाहन की तुलना में मात्र 30-40 फीसदी होती है। इससे एक तरफ प्रदूषण कम होगा और दूसरी तरफ देश में रिट्रोफिटमेंट इंडस्ट्री के रूप में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। हालांकि, सरकार की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा मानकों को लेकर है। पुराने चेचिस पर भारी बैटरी पैक का वजन और ब्रेकिंग सिस्टम का तालमेल कैसे बैठेगा।

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लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन

आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन (30 लाख ट्रैक्टर सहित) ऐसे हैं, जो स्क्रैपेज पॉलिसी के मानकों (15-20 साल पुराने) के दायरे में आते हैं।

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Noida Protest: नोएडा में हिंसा हुई नहीं थी, करवाई गई थी…? उत्‍तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार को हजारों की संख्‍या में सड़कों पर उतार आए और उन्‍हीं फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने लगे, जिनमें वो काम करते हैं. ये वहीं, फैक्ट्रियां हैं, जिनसे उनका घर चलता है, उनकी रोजी-रोटी का इंतजाम होता है. कैसे मजदूरों का ज़मीर ऐसी जगह पर तोड़फोड़ करने के लिए कैसे मान गया. इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. जांच में सामने आया है कि हिंसक प्रदर्शन में शामिल कई लोग मजदूर थे ही नहीं. कई व्हाट्सएप ग्रुपों ने भी हिंसा की आग में घी डालने का काम किया.

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रातोंरात WhatsApp ग्रुपों में लोगों किया गया शामिल

पुलिस जांच में पता चला है कि नोएडा में प्रदर्शनकारियों को जुटाने और विरोध को हिंसक बनाने के लिए WhatsApp ग्रुपों का बड़ी संख्‍सा में इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया. यह प्रक्रिया बेहद तेजी से की गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को रातोंरात इन ग्रुपों में शामिल कर लिया गया. इन ग्रुपों के नाम भी अलग-अलग थे, जिससे उनकी पहचान करना शुरुआती दौर में मुश्किल हो गया.

भड़काऊ पोस्‍ट भेज मजदूरों को उकसाया

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक ग्रुप ‘मजदूर आंदोलन’ के नाम से संचालित किया जा रहा था, जिसमें विभिन्न मजदूर संगठनों और समूहों को जोड़ा गया था. इन समूहों में लगातार मैसेज भेजे जा रहे थे, जिनमें लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा था. जांच में यह भी सामने आया है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में कई भड़काऊ और उत्तेजक पोस्ट शेयर किये गए. इन मैसेज का मकसद भीड़ को उकसाना और विरोध को अधिक आक्रामक बनाना था. कुछ पोस्ट में गलत जानकारी और अफवाहें भी फैलाई गईं, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई.

सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया विरोध प्रदर्शन

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ये अहम सबूत मिले हैं. डिजिटल फॉरेंसिक जांच में इन ग्रुपों की गतिविधियों, संदेशों और एडमिन की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया प्रयास दिखाई देता है. वहीं, पुलिस अब इन ग्रुपों के एडमिन और ऑपरेटर्स की पहचान कर रही है. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय थे. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ मैसेजों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.

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7 थानों में FIR, 300 लोग गिरफ्तार

नोएडा सेक्टर-63 में मारुति सुजुकी के वर्कशॉप में उपद्रवियों ने वहां खड़ी कारों में आग लगा दी, दर्जन भर कारों के शीशे भी तोड़ दिए. सेक्टर-63 के पुलिस थाने पर भी पत्थरबाजी हुई, पुलिस ने भी पत्थर फेंकने वालों को खूब दौड़ाया. सेक्टर-15 के आसपास कमर्शियल सेक्टरों से आए लोगो ने एक्सप्रेस-वे जाम कर दिया. शहर के दूसरे कोने पर सेक्टर-62 में फैक्ट्री कर्मचारियों ने नेशनल हाइवे को भी पूरी तरह जाम करने की कोशिश की, जिससे कई घंटों तक जाम लगा रहा.  पुलिस ने बताया कि 300 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस के मुताबिक, 80 से अधिक जगह पर उपद्रव हुआ है. 42 हज़ार के करीब कर्मचारियों इस प्रदर्शन में शामिल थे. नोएडा के 7 थानों में FIR दर्ज कराई गई है. नोएडा से 300 लोगों को प्रीवेंटिव अरेस्ट कर न्यायिक हिरासत में भेज में दिया गया है. प्रदर्शन में शामिल और कानून को हाथ में लेने वाले लोगों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने के निर्देश प्रशासन ने दिये हैं.

अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की प्रांतीय अध्यक्ष उमा छापरिया का पहला प्रांतीय दौरा

​प्रांतीय अध्यक्ष के प्रथम आधिकारिक प्रांतीय दौरे के अंतर्गत कोरबा शाखा में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सेवा और आध्यात्मिकता का भी अनूठा संगम रहा।

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​इसी अवसर पर 2026-28 के लिए प्रीति मोदी जी को शाखा अध्यक्ष के शपथ एवम एक नई ‘सृजन शाखा’ की स्थापना की गई, जो नारी शक्ति के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। ​दौरे का शुभारंभ गौशाला में गौ-माता के दर्शन से हुआ।
​प्रेमा जी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने सभी का हृदय स्पर्श कर लिया, वहीं पंखुड़ी जी ने कुशल मंच संचालन से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
​यह संपूर्ण आयोजन राष्ट्रीय नेत्र दान एवं अंगदान प्रमुख सरोज जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रांतीय उपाध्यक्ष शशि जी, प्रांतीय सचिव सीमा गुप्ता, प्रांतीय कोषाध्यक्ष रेखा सिंघानिया, कोरबा अध्यक्ष अनिता जी, सत्र 2026-28 की अध्यक्ष प्रीति मोदी जी, कोरबा सृजन शाखा अध्यक्ष मुक्ता जी एवं सीमा गुप्ता जी सहित सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।

​प्रांतीय अध्यक्ष ने अपना उद्बोधन मे कहा धन दौलत विरासत से मिल सकती है लेकिन मान सम्मान हमे सस्कार से ही मिल सकता है बेटियों की बढ़ती उम्र को देखते हुवे बेटी बचाओ,बहु पढ़ाओ के नारे से किया,साथ ही समिति की सभी बहनों को कम खर्च में अधिक लाभ के कार्य करने का संदेश दिया।उसी के साथ कोरबा शाखा की ऊर्जा और सेवा भाव की उन्होंने प्रशंसा की,और सरोज जी के मार्गदर्शन और सभी बहनों के स्नेह का उन्होंने आभार व्यक्त किया।”

Amarnath Yatra 2026: बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए गुड न्यूज!इस दिन शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, जानें कैसे करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा की शुरुआत इस साल तीन जुलाई से होगी। वहीं, 28 अगस्त को यात्रा का आखिरी दिन होगा। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक के ब्रांच में जाकर श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होगा। इस यात्रा में शामिल होने के लिए कम से कम 13 साल उम्र जरूरी है। 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को भी इस यात्रा में शामिल नहीं किया जाएगा।

मनोज सिन्हा ने कहा कि दक्षिण कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर की तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होकर 57 दिन बाद 28 अगस्त को संपन्न होगी। उपराज्यपाल ने लोक भवन में संवाददाताओं को बताया कि 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु यात्रा कर सकेंगे और पंजीकरण 15 अप्रैल से शुरू होगा। यात्रा की तिथियों पर निर्णय मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) की बैठक में लिया गया। सिन्हा ने कहा, “अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त होगी। इस बार यात्रा की अवधि पिछले वर्षों की तुलना में कुछ अधिक करीब 57 दिन होगी।”

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15 अप्रैल से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

मनोज सिन्हा ने बताया कि यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा और यह 15 अप्रैल से शुरू किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष और अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित की गई है। सिन्हा ने कहा, ”देशभर में करीब 556 नामित बैंक शाखाओं के माध्यम से अग्रिम पंजीकरण कराया जा सकेगा, जबकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।”

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कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ने बताया कि यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक अपनी शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेंगे। उपराज्यपाल ने कहा कि पहली पूजा 19 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर की जाएगी। उन्होंने बताया कि यात्रा दो मार्गों से संचालित होगी। पहला-अनंतनाग जिले का पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग और दूसरा- गांदरबल जिले का अपेक्षाकृत छोटा 14 किलोमीटर लंबा, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाला बालटाल मार्ग।

LPG पर राहत की खबर: कुल खपत का 60 फीसदी देश में ही हो रहा उत्पादन, आयात पर निर्भरता घटी

देश में एलपीजी की किल्लत के बीच एक राहत वाली खबर है। भारत में कुल खपत की लगभग 60 फीसदी रसोई गैस का अब घर में ही उत्पादन होने लगा है ऐसे में आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। 40 दिन के इस युद्ध में दुनिया के कई देशों की हालत खराब हो गई। भारत में रसोई गैस की किल्लत जरूर हुई लेकिन ज्यादा दिनों तक अफरा-तफरी का माहौल नहीं रहा। कालाबाजारी पर रोक लगने के बाद लोगों के घरों तक सिलेंडर पहुंचने लगे।

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पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से अब पीएनजी पाइपलाइन का भी भी काम तेजी से चल रहा है। पिछले पांच सप्ताह में ही लगभग 4.41 लाख ने कस्टर रजिस्टर हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी की कमी नहीं है। कमर्शल सप्लाई बाधित हुई थी जो कि अब 70 फीसदी तक सुधर गई है। इसके अलावा अस्पतालों, शैक्षिक संस्थानों, होटल, ढाबा, फार्मा कंपननियों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

लोगों को रसोई गैस वितरकों से सीधे गैस सिलेंडर लेने के लिए हतोत्साहित किये जाने के बाद से देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढकर लगभग 98 प्रतिशत पहुंच गयी है। पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि देश में विद्युत प्रणाली मज़बूत, विविधीकृत और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक मांग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है। अप्रैल से तापीय, जलविद्युत, नवीकरणीय, बीईएसएस और पीएसपी परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी आई है।

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98 फीसदी तक ऑनलाइन बुकिंग

देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग लगभग 98 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ देश भर में अभियान जारी है और गुरुवार को लगभग 1.2 लाख छापे मारे गये और 57,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। पीएनजी कनेक्शनों को बढावा दिये जाने की मुहिम के तहत 4.05 लाख पीएनजी कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की गयी और लगभग 4.41 लाख अतिरिक्त ग्राहकों ने नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण कराया है।

अधिकारियों ने बताया कि देश की स्थापित क्षमता 531 गीगावाट से अधिक है, जो एक सुविविधीकृत पोर्टफोलियो को दर्शाती है, जिसमें कोयला, नवीकरणीय, जलविद्युत और परमाणु स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है, तथा गैर-जीवाश्म स्रोत 50 प्रतिशत से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षमता को लगभग 5 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) के मजबूत पारेषण ढांचे और 120 गीगावाट से अधिक अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता का समर्थन प्राप्त है, जिससे क्षेत्रों के बीच विश्वसनीय विद्युत प्रवाह सुनिश्चित होता है।

Mumbai Fire Incident : झुग्गियों में भीषण आग, सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप; 3 लोगों की दर्दनाक मौत

Mumbai Fire Incident : मुंबई के मीरा भायंदर इलाके में बड़ा हादसा हुआ है. शुक्रवार देर रात झुग्गियों में भयानक भीषण आग लग गई. इस हादसे में 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है. झुग्गियों में आग मीरा भायंदर के इंद्रलोक फेज-4 में लगी. आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. इस भीषण हादसे में झुलसने की वजह से दो बच्चों और एक 40 वर्षीय व्यक्ति सहित को मिलाकर कुल तीन लोगों की मौत हो गई.

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मुंबई की झुग्गियों में भीषण आग

आग इतनी भयानक थी कि इसकी चपेट में आने से कई गैस सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, हालांकि दमकल विभाग ने कई सिलेंडरों को समय रहते बाहर निकाल लिया. दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और देर रात 1 बजे तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया.

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आग में 3 लोगों की मौत

झुग्गियों में आग लगते ही इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया. हर तरफ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी. आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को कॉल किया, तब जाकर दमकल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. आग की भयावहता का अंदाजा ऊंची उठती लपटों को देखकर लगाया जा सकता है.

ISRO MIssion Gaganyan: गगनयान मिशन को बड़ी सफलता, दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट सफल, अंतरिक्ष की ओर भारत की मजबूत छलांग

ISRO MIssion Gaganyan: अंतरिक्ष में जाना देखने और सुनने में जितना रोमांचक लगता है, वहां से सुरक्षित वापसी उतनी ही मुश्किलों से भरी है. कोई भी मानव अंतरिक्ष मिशन जब अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी कर लेता है तब वह अपनी परीक्षा में पास नहीं माना जाता. इसी वजह से भारत अपने महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान के हर परीक्षण पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. अंतरिक्ष में भारत को बड़ी सफता हासिल हुई है. ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट कर लिया है. यह इस बात का संकेत है कि कल्पना चावला की तरह भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की स्पेस से सुरक्षित वापसी होना महज सपना नहीं रह जाएगा. इसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है.

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने ISRO को दी बधाई

ISRO को यह सफलता एक या दो दिन में नहीं मिली है, इसके लिए वह महीनों से तैयारी में जुटा हुआ था. इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो को बधाई दी है. उन्होंने गगनयान मिशन के लिए इसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है. भारत भी जल्द उन देशों में शुमार होने जा रहा है. जो मानव को स्पेस में भेजने और वहां से सुरक्षित वापस लाने में सक्षम हैं. टेस्ट की हर सफलता देश की तकनीकी ताकत और आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाती है.

इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफल 

इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) आंध्र प्रदेश के  श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन पर हुआ. टेस्ट के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराया गया. इस दौरान पैराशूट सिस्टम सही समय पर खुल गया. दरअसल जब कोई अंतिरिक्ष यान स्पेस से पृथ्वी की ओर लौटता है तो उसकी स्पीड बहुत तेज होती है. तब पैराशूट ही उसकी स्पीड को कंट्रोल करता है, जिसकी वजह से सुरक्षित लैंडिंग संभव हो पाती है. इसरो के इस टेस्ट की सफलता से यह साबित हो गया है कि पूरा सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है.

गगनयान मिशन पर ISRO चीफ का बयान

इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बुधवार को कहा कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान से पहले तीन मानवरहित (अनक्रूड) मिशन भेजे जाएंगे. क्रूड मिशन से पहले तीन अनक्रूड मिशन निर्धारित किए गए हैं. फिलहाल हम पहले मानवरहित मिशन पर काम कर रहे हैं और सभी गतिविधियां सुचारु रूप से चल रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मिशनों की समय-सीमा और अन्य जानकारियां उचित समय पर साझा की जाएंगी.

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मंगल ऑर्बिटर मिशन का जिक्र

इसरो प्रमुख ने कहा कि किसी भी अंतरिक्ष मिशन में यह बेहद अहम भूमिका निभाता है. लॉन्च व्हीकल केवल 20-25 मिनट तक काम करता है, जबकि मिशन ऑपरेशन लंबे समय तक जारी रहता है. उदाहरण के तौर पर, 15 साल तक काम करने वाले संचार उपग्रहों के लिए लगातार ऑपरेशन जरूरी होता है. नारायणन ने मंगल ऑर्बिटर मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इस मिशन में करीब 300 दिनों तक ऑपरेशन चलाना पड़ा था, तब जाकर यह सफल हो सका था.

अब नही लगनी पड़ेगी लाइन! राशन दुकान या मोबाइल से मिनटों में बनाएं आयुष्मान कार्ड, 5 लाख तक इलाज फ्री

Ayushman Card: सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए आयुष्मान भारत योजना को और आसान बना दिया है। अब लोगों को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए दूर-दूर के सेंटर या अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत अब राशन की दुकानों पर भी आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की जा रही है। इस फैसले का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस योजना का फायदा पहुंचाना है, खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह कदम काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। बता दें कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लोगों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। अब आइए जानते हैं कि राशन की दुकानों पर आयुष्मान कार्ड कैसे बनेगा और ऑनलाइन भी आप इसके लिए कैसे अप्लाई कर सकते हैं।

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ऐसे बनवाएं राशन दुकान से आयुष्मान कार्ड

अब आयुष्मान कार्ड बनवाना पहले से काफी आसान हो गया है। आपको बस अपने नजदीकी राशन की दुकान पर जाना होगा और जरूरी दस्तावेज दिखाने होंगे। जैसे:-

आधार कार्ड

राशन कार्ड

मोबाइल नंबर

राशन डीलर आपकी जानकारी सिस्टम में डालेंगे और अगर आप पात्र होंगे, तो आपका आयुष्मान कार्ड बन जाएगा। कई जगहों पर यह कार्ड तुरंत डाउनलोड या प्रिंट भी किया जा सकता है।

घर बैठे Online ऐसे बनाएं आयुष्मान कार्ड

Step 1: सबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप में आयुष्मान भारत की ऑफिशियल वेबसाइट https://beneficiary.nha.gov.in ओपन करें।

Step 2: वेबसाइट खुलने के बाद आपको Login / Sign In का ऑप्शन दिखेगा। अब अपना मोबाइल नंबर डालें और OTP डालकर लॉगिन करें।

Step 3: लॉगिन के बाद आपको “Search Beneficiary” का ऑप्शन मिलेगा। यहां आप मोबाइल नंबर, राशन कार्ड, आधार नंबर या नाम से सर्च कर सकते हैं। अगर आपका नाम लिस्ट में आता है, तो स्क्रीन पर आपकी डिटेल दिख जाएगी। अगर नाम नहीं आता, तो आप इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

Step 4: अगर आपका नाम लिस्ट में है, तो आगे बढ़ने के लिए e-KYC करना होगा। इसके लिए आधार नंबर डालें, OTP या बायोमेट्रिक से वेरिफिकेशन करें। अब आपकी पर्सनल डिटेल स्क्रीन पर दिखेगी। अब नाम, पता और बाकी जानकारी चेक करें। अगर सब सही है, तो Confirm पर क्लिक करें। इसके बाद आपका Ayushman Card बन जाएगा।

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आयुष्मान कार्ड के फायदे

आयुष्मान कार्ड गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होता है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिससे उन्हें महंगे अस्पताल खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ती। इस कार्ड की मदद से सरकारी ही नहीं, बल्कि कई प्राइवेट अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज कराया जा सकता है, यानी इलाज के समय जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा इसमें कई गंभीर बीमारियों और ऑपरेशन का खर्च भी कवर होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि पूरे परिवार को इसका लाभ मिलता है और इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं होती। कुल मिलाकर, आयुष्मान कार्ड उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अच्छे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।

Toll Plaza New Rule: 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर बड़ा बदलाव, कैश पेमेंट बंद, FASTag और UPI से ही होगा भुगतान

Toll Plaza New Rule: राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर शुल्क भुगतान को लेकर व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। नकद भुगतान बंद होने जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर दस अप्रैल से टोल प्लाजा पर नकद भुगतान नहीं होगा। जबकि यूपीआइ से भुगतान पर ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा। मंत्रालय के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, अगर कोई वाहन फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करता है तो यूजर यूपीआइ के माध्यम से भुगतान कर सकता है। लेकिन टोल शुल्क का 1.25 गुना भुगतान करना होगा।

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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को कम करना और यात्रियों के लिए राजमार्ग की यात्रा को सुगम बनाना है। दस अप्रैल से टोल बूथ पर नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। फास्टैग टोल वसूली का प्राथमिक माध्यम बना रहेगा। वैध फास्टैग के बगैर आने वाले वाहनों के लिए यूपीआइ भुगतान विकल्प के रूप में काम करेगा।

उन्होंने कहा, ‘अगर कोई वाहन चालक बगैर फास्टैग या वैध फास्टैग के टोल प्लाजा में दाखिल होता है और यूपीआइ के माध्यम से शुल्क का भुगतान का विकल्प चुनता है तो उसे नियम चार के उप-नियम (दो) के प्रविधानों के अनुसार, उस श्रेणी के वाहन पर लागू शुल्क का 1.25 गुना भुगतान करना होगा।’

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वार्षिक फास्टैग के सब्सक्राइबर 50 लाख के पार

एनएचएआइ ने हाल ही में अपने वार्षिक फास्टैग पास के सब्सक्राइबर की संख्या को 50 लाख के पार किया है। यह यूजर को सालाना तीन हजार रुपये में 200 बार टोल से गुजरने की अनुमति देता है।

ईरान युद्ध का असर अब रसोई तक! चावल-गेहूं के स्टॉक पर सवाल, LPG सप्लाई को लेकर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली : ईरान युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया की निरंतर बदल रही स्थिति के बीच सरकार ने देश के लोगों को बड़ा भरोसा दिलाया है। सरकार ने कहा है कि भारत खाद्य सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति, भारतीय नागरिकों और समुद्री परिसंपत्तियों की सुरक्षा पर कड़ी नजर रख रहा है और देश में खाद्य और ऊर्जा उत्पादों के पर्याप्त भंडार और पुख्ता व्यवस्था है। सरकार ने इस दौरान कहा है कि देश में पर्याप्त मात्रा में चावल और गेहूं जैसे खाद्यान्न भंडार मौजूद हैं। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने एक बयान में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश का खाद्यान्न भंडार संतोषजनक और निर्धारित बफर मानकों से काफी अधिक है। मौजूदा समय में लगभग 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडार उपलब्ध है, जो कुल मिलाकर लगभग 602 लाख मीट्रिक टन है जो निर्धारित आवश्यकता का लगभग तीन गुना है।

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कीमतें बनी हुई हैं स्थिर

संयुक्त सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के माध्यम से कमजोर वर्गों को निरंतर सहायता दी जा रही है, जबकि खुला बाजार बिक्री योजना के तहत नियंत्रित रूप से अनाज जारी कर कीमतों को स्थिर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और राज्यों को अतिरिक्त वितरण के लिए रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं राज्य एजेंसियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है और इसकी तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है। सुचारु खरीद सुनिश्चित करने के लिए विविध स्रोतों और आकस्मिक योजनाओं के माध्यम से पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।

LPG पर क्या अपडेट?

इस बीच पश्चिम एशिया से एलपीजी लेकर आ रहे भारतीय ध्वज वाले पोत ‘ग्रीन संघवी’ और ‘ग्रीन आशा’ पिछले दो दिनों में सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार कर चुके हैं। सरकार ने कहा है कि एलपीजी की आपूर्ति पर्याप्त है और मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त खेप पहले ही सुनिश्चित कर ली गई हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति की जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति पर्याप्त है और मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त खेप पहले ही सुनिश्चित कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि तेल और गैस कम्पनियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और राज्यों द्वारा नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि वितरण सुचारु रहे और जमाखोरी या कालाबाजारी को रोका जा सके।

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LPG की कमी नहीं- सरकार

उन्होंने कहा कि एलपीजी वितरण केंद्रों पर किसी प्रकार की कमी नहीं है और व्यापक स्तर पर आपूर्ति कार्य जारी है। प्रतिदिन लगभग 50 लाख गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है, जिसमें ऑनलाइन बुकिंग का प्रतिशत 97 तक पहुंच गया है। आपूर्ति में गड़बड़ी रोकने के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन लगभग 90 प्रतिशत वितरण में लागू किया जा चुका है। बिना रुकावट सेवा सुनिश्चित करने के लिए वितरक छुट्टियों और रविवार के दिन भी कार्य कर रहे हैं।