Tuesday, August 11, 2026
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बालको के ‘मल्हार 4.0’ में दिखी सृजनात्मकता, विरासत और बालकोनगर की खूबसूरती…

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कोरबा : भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) द्वारा आयोजित दो दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘मल्हार 4.0’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। बालको टाउनशिप में आयोजित इस प्रदर्शनी में बालको परिवार की रचनात्मकता, बालकोनगर की खूबसूरती, प्रकृति के विविध रूपों और कंपनी की विरासत को तस्वीरों के माध्यम से जीवंत किया गया। प्रदर्शनी को कर्मचारियों, उनके परिवारजनों और स्कूली विद्यार्थियों सहित 2,000 से अधिक दर्शकों ने देखा।

‘मल्हार 4.0’ में ‘मेघ मल्हार’, ‘बरखा’ और ‘धरा’ तीन विषयों पर आधारित 280 से अधिक उत्कृष्ट छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। इन तस्वीरों के माध्यम से प्रतिभागियों ने बादलों, बारिश, प्रकृति, धरती, जीवन और आसपास की दुनिया को अपने-अपने दृष्टिकोण से कैमरे में कैद किया। प्रत्येक तस्वीर ने एक अलग कहानी, भावना और दृष्टिकोण को सामने रखा।
समापन समारोह में बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक श्री राजेश सिंह ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रदर्शनी में तीनों प्रतियोगी श्रेणियों में विशेषज्ञ निर्णायक मंडल द्वारा विजेताओं का चयन किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष ‘दर्शकों की पसंद’ श्रेणी भी शामिल की गई, जिसमें प्रदर्शनी देखने आए प्रत्येक व्यक्ति को क्यूआर कोड के माध्यम से अपने पसंदीदा छायाचित्र के लिए मतदान करने का अवसर मिला।

सीईओ राजेश सिंह ने कहा, “मल्हार में प्रदर्शित छायाचित्र बालको परिवार की रचनात्मकता और विविध दृष्टिकोणों का प्रतिबिंब हैं। हमारे कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना भी हमारी प्राथमिकता है। मल्हार ने उन्हें अपनी कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त करने का मंच दिया है। हमारा प्रयास है कि इसे और व्यापक बनाते हुए अधिक प्रतिभाओं और हितधारकों को जोड़ा जाए, ताकि इन रचनात्मक दृष्टिकोणों को बड़े मंच पर साझा किया जा सके।” बालको की कर्मचारी एवं प्रतिभागी मिथिला प्रधान ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से मल्हार में अपनी तस्वीरें साझा कर रही हैं। इस वर्ष उनके मित्रों ने भी इसमें भाग लिया, जिससे उनका अनुभव और भी विशेष हो गया। उन्होंने कहा कि अपनी तस्वीरों के साथ मित्रों की तस्वीरों को भी सुंदर तरीके से प्रदर्शित होते देखना उनके लिए बेहद आनंददायक अनुभव रहा।

प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण बालको की विरासत को दर्शाने वाला फोटो संग्रह रहा। इसमें वर्ष 1965 से बालको की विकास यात्रा को तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। साथ ही, फोटोग्राफी के बदलते दौर को दर्शाने के लिए कैमरों का विशेष संग्रह भी प्रदर्शित किया गया। पुराने क्लासिक कैमरों से लेकर आधुनिक डिजिटल कैमरों तक की इस यात्रा ने दर्शकों को तकनीक में आए बदलाव और फोटोग्राफी के विकास को करीब से समझने का अवसर दिया।

‘मल्हार 4.0’ ने केवल एक फोटोग्राफी प्रदर्शनी के रूप में ही नहीं, बल्कि बालको परिवार की रचनात्मकता, संवेदनशीलता और विविध दृष्टिकोणों को साझा करने वाले मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई।

Train-Flight Advisory: सफर पर निकलने से पहले ध्यान दें! इस तारीख तक स्टेशन और एयरपोर्ट जल्दी पहुंचने की सलाह, जानें वजह

Train-Flight Advisory: 15 अगस्‍त को मनाए जाने वाले स्‍वतंत्रता दिवस को लेकर देशभर के प्रमुख एयरपोर्ट्स और रेलवे स्‍टेशनों पर सुरक्षा व्‍यवस्‍था कड़ी कर दी गई है. आजाद की वर्षगांठ के जश्न और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए देश के सभी प्रमुख एयरपोर्ट, मेट्रो स्‍टेशनों और रेलवे स्‍टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. ऐसे में रेलवे की ओर से और अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से एडवायजरी जारी की गई है. इन दिशानिर्देशों में साफ कहा गया है कि जिन लोगों को ट्रेन, मेट्रो या फ्लाइट से सफर करना हो, वो अन्‍य दिनों की अपेक्षा थोड़ा ज्‍यादा पहले स्‍टेशन और एयरपोर्ट पहुंचे. एडवायजरी में कहा गया है कि 15 अगस्त को देखते हुए मेट्रो स्टेशन, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है और इसलिए सिक्‍योरिटी चेकिंग यानी सुरक्षा जांच में समय लग सकता है.

Assam Flood: असम में बाढ़ का कहर… मृतकों की संख्या 100 पहुंची, कई जिलों में हालात अब भी गंभीर

13 से 16 अगस्‍त तक रेलवे स्‍टेशनों पर कड़ी चेकिंग

रेलवे स्टेशनों  पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उत्तर रेलवे ने एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा है कि 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी. 13 से 16 अगस्त तक रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा जांच पहले से ज्यादा सख्त रहेगी, इसलिए यात्री अतिरिक्त समय लेकर स्टेशन पहुंचे.  कहा गया है कि सुरक्षा जांच में ज्यादा समय लग सकता है, इसलिए ट्रेन पकड़ने के लिए समय से पहले पहुंचें. यात्रियों से सुरक्षा कर्मियों के साथ सहयोग करने की अपील की गई है. सुरक्षा जांच के दौरान धैर्य रखने और निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है.

LPG Gas e-KYC Alert: 16 अगस्त से पहले करा लें ई-केवाईसी, वरना सिलेंडर बुकिंग में आ सकती है परेशानी

20 अगस्‍त तक समय से काफी पहले पहुंचे एयरपोर्ट

दूसरी ओर एयर इंडिया ने भी एडवायजरी जारी कर अपील की है. अगर आप 10 अगस्त से 20 अगस्त 2026 के बीच हवाई यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो ये अपडेट आपके लिए बेहद जरूरी है. सुरक्षा एजेंसियों और विमानन अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी निर्धारित उड़ान से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचें. एनहांस्ड सिक्योरिटी मेजर्स यानी बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के चलते टर्मिनल में प्रवेश से लेकर बोर्डिंग गेट तक पहुंचने की प्रक्रिया में सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक समय लग सकता है. गहन चेकिंग और अन्य एयरपोर्ट औपचारिकताओं (Formalities) के कारण यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की जल्दबाजी या परेशानी से बचा जा सके. एयरपोर्ट प्राधिकरण और एयरलाइंस ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और अपनी यात्रा को सुगम व सुरक्षित बनाने के लिए तय समय से पहले पहुंचकर सभी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करें.

Assam Flood: असम में बाढ़ का कहर… मृतकों की संख्या 100 पहुंची, कई जिलों में हालात अब भी गंभीर

Assam Flood: असम में जारी बाढ़ की स्थिति के बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 पहुंच गई है। राज्य के कई जिलों में लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़े हिस्से अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (डीआरआईएमएस) असम के रविवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, भीषण बाढ़ ने राज्य के कई इलाकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बाढ़ में अब तक 60 पुरुषों, 23 महिलाओं और 18 बच्चों (12 लड़के और 6 लड़कियां) की जान जा चुकी है।

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शिवसागर में क्यों घटाया गया मृतकों आंकड़ा?
अधिकारियों ने बताया कि शिवसागर जिले में मृतकों की संख्या से जुड़ा आंकड़ा संशोधित किया गया है। एक व्यक्ति की मौत गलती से एक ही नाम से दो बार दर्ज हो गई थी। इसी वजह से जिले में मृतकों की संख्या 50 से घटाकर 49 कर दी गई। अधिकारियों ने कहा, जानकारी के लिए बताया जाता है कि शिवसागर जिले में एक मौत गलती से एक ही नाम के तहत दो बार दर्ज हो गई थी। इसलिए अब तक शिवसागर में कुल मृतकों की संख्या 50 के बजाय 49 होगी।

कौन सा जिला कितना प्रभावित हुआ?

  • सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कछार जिला शामिल है, जहां 22 लोगों की मौत हुई है।
  • शिवसागर में 49 लोगों की जान गई है। इसके अलावा करीमगंज में नौ, गोलाघाट में आठ लोगों की मौत हुई है।
  • धेमाजी, नगांव, उदालगुड़ी, सोनितपुर और कार्बी आंगलोंग जिलों में भी लोगों की मौत की खबर है।
  • जोरहाट जिले के 304 गांवों में बाढ़ से करीब 1.66 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक यहां नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
  • बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा बड़ी संख्या में पशुधन की भी हानि हुई है।

असम के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य लगातार जारी हैं। जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की टीमें जलस्तर पर नजर रख रही हैं और बाढ़ प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचा रही हैं। राज्य में गंभीर बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार और असम सरकार लगातार राहत, पुनर्वास और मेडिकल सहायता उपलब्ध करा रही हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि प्रभावित लोगों तक जरूरी सेवाएं और मदद पहुंचती रहे, ताकि जिले धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट सकें।

बालको विस्तार से कोरबा बनेगा एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम उद्योगों का प्रमुख केंद्र

छत्तीसगढ़ के सीएम ने की मदद की घोषणा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को असम के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए राज्य सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। यह राशि असम में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चल रहे राहत और पुनर्वास कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने असम के समकक्ष हिमंत बिस्व सरमा से फोन पर बात कर राज्य में बाढ़ की स्थिति की जानकारी भी ली।

LPG Gas e-KYC Alert: 16 अगस्त से पहले करा लें ई-केवाईसी, वरना सिलेंडर बुकिंग में आ सकती है परेशानी

LPG Gas e-KYC Alert: क्या आपने LPG गैस कनेक्शन की e-KYC पूरी कर ली है? अगर नहीं, तो इसे जल्द निपटा लें. e-KYC नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को आने वाले समय में गैस सिलेंडर बुकिंग और अन्य सेवाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार LPG उपभोक्ताओं को कई बार e-KYC कराने के लिए अतिरिक्त समय दे चुकी है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में ग्राहक यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं. ऐसे में समय रहते e-KYC नहीं कराने पर ऑनलाइन बुकिंग समेत कई सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि e-KYC नहीं कराने पर आपको किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है…

बालको विस्तार से कोरबा बनेगा एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम उद्योगों का प्रमुख केंद्र

घर बैठे कैसे करें LPG सिलेंडर की e-KYC?

16 अगस्त से पहले आप घर बैठे भी e-KYC करा सकते हैं. यह प्रोसेस काफी आसान है…

  • इसके लिए आपके पास जिस भी कंपनी का सिलेंडर, जैसे- इंडियन ऑयल,भारत गैस, एचपी है, उसका आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें.
  • अब डाउनलोड किए ऐप पर जाकर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन करें.
  • इसके बाद e-KYC या Aadhaar Verification का ऑप्शन चुनें
  • फिर फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करके फॉर्म को सबमिट करें.

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LPG सिलेंडर की e-KYC न कराने से क्या हो सकती है परेशानी?

अगर आप e-KYC नहीं करवाते हैं, तो इससे आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-

  • समय पर  e-KYC पूरी न होने पर रिफिल सिलेंडर बुक करने में परेशानी हो सकती है.
  • इसके साथ ही अगर आपको सिलेंडर की डिलीवरी में भी काफी परेशानी हो सकती है.
  • e-KYC न होने की स्थिति में गैस सब्सिडी को रोक दिया जा सकता है.
  • इसके साथ ही कनेक्शन ब्लॉक होने की संभावना है.

बालको विस्तार से कोरबा बनेगा एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम उद्योगों का प्रमुख केंद्र

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कोरबा : बालको में चल रहे विस्तार और आधुनिकीकरण के कार्यों से कोरबा के एल्युमिनियम उद्योग को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। नए स्मेल्टर प्लांट का करीब 75 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद बालको की एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। इससे वेदांता समूह की कुल एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता करीब 28.5 लाख टन प्रतिवर्ष पहुंच जाएगी और समूह दुनिया के प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादकों में शामिल होगा।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश कुमार सिंह के अनुसार, निजीकरण के समय बालको की उत्पादन क्षमता करीब एक लाख टन प्रतिवर्ष थी। लगातार निवेश, आधुनिक तकनीक और नई परियोजनाओं के चलते इसे बढ़ाकर करीब पांच लाख टन किया गया। अब नए स्मेल्टर के निर्माण के बाद क्षमता दोगुनी होकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह विस्तार केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कोरबा को देश के प्रमुख एल्युमिनियम केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एल्युमिनियम पार्क विकसित करने की तैयारी

बालको संयंत्र के आसपास एल्युमिनियम पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसके लिए संयंत्र से करीब दो से तीन किलोमीटर के दायरे में जमीन की तलाश की जा रही है। यहां लघु एवं मध्यम उद्योगों को सीधे हॉट मेटल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे एल्युमिनियम आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों को कच्चा माल आसानी से मिलेगा और परिवहन लागत कम होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा निवेश के अवसर बढ़ेंगे।

कंपनी का उद्देश्य एल्युमिनियम उत्पादों की स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन बढ़ाना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में भी निवेश जारी रखने की बात कही गई है, ताकि औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।

2028 तक बर्रा कोल ब्लॉक विकसित करने का लक्ष्य

एल्युमिनियम उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ऊर्जा और कोयले की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इसे देखते हुए रायगढ़ जिले के बर्रा कोल ब्लॉक को वर्ष 2028 तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने के बाद बाहरी स्रोतों से कोयला खरीद पर कंपनी की निर्भरता कम होगी।वर्तमान में बालको अपने कैप्टिव पावर प्लांट की जरूरत पूरी करने के बाद करीब 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खुले बाजार में बेच रहा है। कंपनी के अनुसार भविष्य में उत्पादन विस्तार के साथ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है।

कोरबा में कैंसर उपचार सुविधा विकसित करने पर विचार

बालको के सीईओ राजेश कुमार सिंह ने कोरबा में कैंसर उपचार की सुविधा विकसित करने की संभावना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वेदांता समूह के रायपुर स्थित कैंसर अस्पताल की तर्ज पर बालको क्षेत्र में भी विशेष कैंसर उपचार सुविधा विकसित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। योजना साकार होने पर कोरबा और आसपास के जिलों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी।

फोरलेन सड़क के लिए 30 करोड़ रुपये

बालको क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए परसाभाठा से रूमगड़ा तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए जिला प्रशासन को 30 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं। बारिश के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। सड़क बनने से भारी वाहनों का दबाव कम होगा और बालको क्षेत्र में लंबे समय से बनी जाम की समस्या से भी राहत मिलने की संभावना है।

बालको प्रबंधन का कहना है कि कंपनी के विस्तार के साथ स्थानीय क्षेत्र के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उत्पादन क्षमता बढ़ने, नए उद्योगों के आने, सड़क एवं बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और सामाजिक क्षेत्र में निवेश से कोरबा में औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

बारिश के पानी से घर, फसल या सामान हुआ खराब? जानें कब मिलेगा मुआवजा और कितनी मिलेगी राहत

बारिश या जलभराव से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजा मिल सकता है. लेकिन यह देखना जरूरी है कि नुकसान किस तरह से हुआ है. क्या नुकसान प्राकृतिक आपदा की वजह से हुआ है या फिर प्रशासन या नगर निगम की लापरवाही से हुआ है. इसमें आपके इंश्योरेंस पर भी बात निर्भर करता है. अगर आपने नुकसान होने वाली चीज का इंश्योरेंस किया है तो आपकी सारी भरपाई बीमा कंपनी करेगी. वैसे अलग-अलग तरह के नुकसान और उनके मुआवजे होते हैं.

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गाड़ियों को होने वाले नुकसान

अगर बारिश का पानी या जलभराव से आपकी गाड़ी डूब गई है और इंजन खराब हो गया है तो आपको इंश्योरेंस क्लेम मिल सकता है. हालांकि इसके लिए आपके गाड़ी का कॉप्रिहेंसिव इंश्योरेंस होना जरूरी है. गाड़ी के इलेक्ट्रिकल पार्ट्स के नुकसान का भी क्लेम मिलता है. वहीं आपने इंजन प्रोटेक्शन कवर लिया है तो आपको क्लेम मिलता है, जबकि साधारण इंश्योरेंस में यह क्लेम खारीज हो सकता है.

मकान और दुकान को नुकसान

अगर सरकार आपके क्षेत्र को अतिवृष्टि या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा घोषित करती है तो राज्य सरकार आपदा राहत कोष से मकान और दुकान के छतिग्रस्त होने पर सरकारी मुआवजा तय मानकों के आधार पर दिया जाता है. वहीं अगर आपने होम इंश्योरेंस लिया है या दुकान का इंश्योरेंस लिया है तो बारिश या बाढ़ के पानी से दीवारों, फर्नीचर या इलेक्ट्रॉनिक्स को हुए नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है.

फसलों को नुकसान का मुआवजा

फसल नुकसान के लिए भी अगर सरकार आपके क्षेत्र को अतिवृष्टि या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा घोषित करती है तो राज्य सरकार सरकारी मुआवजा तय मानकों के आधार पर देती है. वहीं फसल नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की है. इससे किसानों के लिए अतिवृष्टि, बाढ़ या जलभराव से फसल नुकसान पर उचित मुआवजा दिया जाता है. आपको फसल नष्ट होने के 72 घंटे के अंदर कृषि विभाग और बीमा कंपनी को सूचना देनी होती है.

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नगर निगम या अथॉरिटी की लापरवाही

अगर आपका नुकसान नगर निगम या संबंधित अथॉरिटी की लापरवाही से हुई है तो आप सेवा की कमी यानी Deficiency of Service का हवाला देकर कंज्यूमर कोर्ट या हाई कोर्ट में केस दर्ज करा सकते हैं. कई मामले में भारतीय कोर्ट ने नगर निगम की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया है.

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी की खास देशवासियों से अपील, ‘लोकल कपड़े पहनें और GRWM ट्रेंड को करें फॉलो’ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर स्थानीय कपड़ों को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने जनता से अपील करते हुए देश की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय बुनाई को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने नागरिकों से स्थानीय कपड़ों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए हैशटैग के साथ अपने ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) वीडियो शेयर करने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को क्रिएटिव ऑनलाइन पार्टिसिपेशन को बढ़ावा देने के लिए एक्स प्लेटफॉर्म का उपयोग किया। इसमें भारत की हथकरघा विविधता को लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्होंने लिखा, “7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। आइए भारत की हथकरघा विविधता को लोकप्रिय बनाएं। अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के वीडियो, जिनमें GRWM वीडियो भी शामिल हैं, सोशल मीडिया पर साझा करें। #NationalHandloomDay का उपयोग करना न भूलें।”

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12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा मंत्रालय

कपड़ा मंत्रालय 7 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा, जिसमें भारत की हथकरघा विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा और देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकर समुदाय के योगदान को मान्यता दी जाएगी। कपड़ा मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, सचिव नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगी।

हथकरघा पुरस्कार विजेता होंगे शामिल

इस कार्यक्रम में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता अपने परिवार के सदस्यों के साथ, देश भर के हथकरघा बुनकर, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य, हथकरघा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कारों का वितरण होगा। कुल 22 पुरस्कार वितरित होंगे, जिनमें तीन संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। हथकरघा बुनकरों को उनकी शिल्प कौशल, नवाचार और भारत की हथकरघा परंपराओं के संरक्षण में योगदान के लिए प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर भारत की विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का जश्न मनाने वाले चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे।

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समारोह में दिखेंगे हथकरघे के कपड़े

इस समारोह के दौरान “अर्थ. रूट. थ्रेड- सेंट्रल इंडिया के आल डाई किए हुए हथकरघा वस्त्र” और हथकरघा पुरस्कार पुस्तक 2025 का अनावरण किया जाएगा। समारोह के दौरान पुरस्कार विजेता हथकरघा उत्पादों की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। आगंतुक पारंपरिक कानी बुनाई और दीवार पर टांगने वाले आभूषणों की बुनाई भी देख सकेंगे। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के आसपास आयोजित होने वाले अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में प्रदर्शनियां, सम्मेलन आदि शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, भारत का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का साधन है, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों की हैंडलूम की साड़ियां फेमस हैं। यह क्षेत्र भारत की समृद्ध वस्त्र परंपराओं का संरक्षक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन पद्धतियों में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है। इस आंदोलन ने स्वदेशी उद्योगों और भारत के हथकरघा क्षेत्र को नई गति प्रदान की थी।

सांस्कृतिक विरासत को सम्मान

यह दिवस देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकरों के अटूट योगदान को मान्यता देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में चेन्नई में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की थी। इसके बाद से यह दिवस भारत के हथकरघा बुनकरों की कलात्मकता, कौशल और समर्पण का जश्न मनाने के साथ-साथ हथकरघा क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का एक अवसर रहा है। भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा के उत्सव से कहीं अधिक, यह दिन उन कुशल कारीगरों को सम्मानित करता है जिन्होंने पीढ़ियों से देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा है।

गुजरात की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान

गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, “गुजरात भारत में हथकरघा शिल्प कौशल के प्रमुख केंद्रों में से एक है, जहां बुनाई राज्य की संस्कृति, शिल्प कौशल और आजीविका में गहराई से निहित है।” पटोला और कच्छ बुनाई सहित गुजरात के पारंपरिक हथकरघा बुनाई को अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व में पहचान मिली है, और अंतरराष्ट्रीय डिजाइनरों और प्रसिद्ध हस्तियों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। सरकारी सहयोग, आधुनिक डिजाइन और प्रभावी विपणन के बल पर, यह क्षेत्र आज 12,000 से अधिक बुनकरों और कारीगरों को रोजगार प्रदान करता है और 51.07 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुका है, जिससे गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक क्षमता दोनों मजबूत हो रही हैं।

स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर तक No-Tobacco Zone! शराब-गुटका समेत नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक

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नई दिल्ली : केंद्र ने शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को नशामुक्त क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव रखा है। यानी आधा किलोमीटर के दायरे में तंबाकू, शराब, गुटका या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा केंद्र से वित्तीय मदद पाने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण कार्यक्रमों के तहत सहमति से नशा परीक्षण शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रस्ताव नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर विजन डाक्यूमेंट्स (2026-2029) के तहत रखे गए हैं।

रेलवे की नई उपलब्धि! पहली वंदे भारत फ्रेट EMU ने पास की इमरजेंसी ब्रेकिंग परीक्षा

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद को बताया कि यह तीन वर्षीय रोडमैप प्रिवेंटिव एजुकेशन (किसी समस्या, बीमारी, बुरे व्यवहार या खतरे के उत्पन्न होने से पहले ही लोगों को जानकारी और प्रशिक्षण देकर उससे बचाना), जागरूकता अभियानों, काउंसिलिंग और सामुदायिक भागीदारी पर भी ध्यान केंद्रित करता है ताकि सुरक्षित और नशामुक्त शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा दिया जा सके।

उन्होंने कहा- “छात्र कल्याण कार्यक्रम के तहत छात्रों के लिए सहमति से स्क्रीनिंग टेस्ट का प्रस्ताव भी विजन डाक्यूमेंट्स में किया गया है।” राज्य मंत्री ने इस पहल के दायरे को उजागर करते हुए कहा कि यह छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक सुगठित, समयबद्ध रोडमैप का हिस्सा है। यह पीएम के नशामुक्त अभियान की कड़ी है। केंद्र का यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने युवाओं को भारत की “अमृत पीढ़ी” बताया था और कहा कि आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन की दिशा तय करेंगे और साथ ही 2047 तक देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएंगे। इसलिए यह जरूरी है कि वे नशे और अन्य व्यसनों से दूर रहें।

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प्रेट्र के अनुसार, गृह राज्य मंत्री राय ने एक अन्य लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में समुद्री मार्गों से 390.803 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनमें 305.894 किलोग्राम एम्फेटामाइन, 53.62 किलोग्राम गांजा, 29.954 किलोग्राम हशीश तेल और 1.335 किलोग्राम चरस शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), अन्य प्रवर्तन एजेंसियां और राज्य पुलिस नशीली दवा और मादक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

रेलवे की नई उपलब्धि! पहली वंदे भारत फ्रेट EMU ने पास की इमरजेंसी ब्रेकिंग परीक्षा

Vande Bharat: देश की पहली वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) के तकनीकी परीक्षणों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के लबान-गुड़ला रेलखंड पर रेक का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (ईबीडी) परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। परीक्षण के दौरान सूखी और गीली दोनों प्रकार की पटरियों पर रेक की ब्रेकिंग क्षमता का आकलन किया गया।

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चार फेरों में हुआ परीक्षण, तीनों ब्रेकिंग सिस्टम की हुई जांच

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि यह परीक्षण चार फेरों में किया गया। रेक में उपलब्ध तीनों इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम- लोको ब्रेक, ट्रेन ब्रेक और पुश बटन ब्रेक का अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण किया गया। प्रत्येक परीक्षण में ब्रेक लगाए जाने के बिंदु से लेकर ट्रेन के पूरी तरह रुकने तक की दूरी का सटीक मापन किया गया, जिससे ब्रेकिंग प्रणाली की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया जा सके।

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आरडीएसओ और आईसीएफ के विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुआ परीक्षण

उन्होंने बताया कि यह परीक्षण अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के तत्वावधान में किया जा रहा है। परीक्षण के दौरान आरडीएसओ के निदेशक (टेस्टिंग) अनन्जय मिश्रा, आईसीएफ चेन्नई के सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर सुधांशु कुमार, मुख्य लोको निरीक्षक रामनिवास मीना, यातायात निरीक्षक महेंद्र सिंह मीणा सहित आरडीएसओ और आईसीएफ के तकनीकी विशेषज्ञ एवं लोको क्रू मौजूद रहे।

बता दें कि कोटा मंडल में 29 जुलाई 2026 से देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू के विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं। इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण की सफलता को रेक के परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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Census 2027: जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या की गि‍नती को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने यह नोटिफिकेशन लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले उन इलाकों के ल‍िए जारी क‍िया है, जहां सामान्य मौसम में काम करने में द‍िक्‍कत होती है. पहली बार जनगणना के ‘जनसंख्या गणना’ चरण के दौरान जाति संबंधी जानकारी भी ली जाएगी. हालांक‍ि, इसके ल‍िए किसी भी प्रकार का जाति प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज दिखाने की कोई जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा माता-पिता की जन्म-तारीख और जन्म-स्थान का भी रिकॉर्ड ल‍िया जा सकता है.

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लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले इलाकों में जनगणना का दूसरा चरण 1 से 30 सितंबर के बीच होगा. केंद्र सरकार ने  सोमवार को नोटिफिकेशन जारी क‍िया. इसमें भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि इन इलाकों में इस साल 1 से 30 सितंबर के बीच जनगणना का काम किया जाएगा और इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक जानकारी को दोबारा जांचने (रिविजनल राउंड) का काम होगा. नोट‍िफ‍िकेशन के मुताब‍िक, घर-घर जाकर जनसंख्या की गिनती शुरू होने से पहले 17 से 31 अगस्त तक खुद जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प होगा.

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नोटिफिकेशन के मुताब‍िक, इन इलाकों के लिए जनगणना की रेफरेंस तारीख 1 अक्टूबर, 2026 को रात 12 बजे होगी. इसी तारीख के आधार पर यहां की जनसंख्या का आधिकारिक डेटा दर्ज होगा. वहीं, देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गिनती का दूसरा चरण अगले साल शुरू होने की संभावना है.

दो चरणों में की जा रही जनगणना 

आजादी के बाद से यह आठवीं जनगणना दो चरणों में की जा रही है. पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ (HLO) कहलाता है और दूसरा चरण ‘जनसंख्या जनगणना’ है. पहली बार जनगणना के जनसंख्या गणना चरण के दौरान जाति संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी. इस जनगणना में जाति की गिनती को शामिल करने का फैसला पिछले साल 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने लिया था.

पहले चरण में 33 सवाल 

पहला चरण घरों की सूची बनाना और आवास जनगणना (HLO), 30 सितंबर तक चल रहा है. कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 16 अप्रैल से घरों की लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (आवास जनगणना) के लिए फील्ड विज‍िट शुरू हो गई. जनगणना करने वाले कर्मचारी देश भर में सभी इमारतों, घरों और परिवारों की लिस्ट बनाएंगे, ताकि जनसंख्या की गिनती के लिए आधार तैयार किया जा सके. घरों की लिस्टिंग के काम के दौरान, कर्मचारी हर घर और इमारत में जाकर 33 सवाल पूछते हैं. इन सवालों में घरों में बुनियादी सुविधाओं, परिवार के मुखिया की जानकारी (जैसे नाम और लिंग), घर के मालिकाना हक की स्थिति और दूसरी जानकारियां शामिल होती हैं.

बता दें क‍ि 2021 में होने वाली दस-सालाना जनगणना की प्रक्रिया को COVID-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना कराने के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यह लोगों की गिनती करने का सबसे बड़ा अभियान होगा.