Saturday, June 20, 2026
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Air India Plane Crash: AI-171 विमान हादसे में नया मोड़, पायलट संगठन ने बिजली की खराबी को बताया क्रैश की वजह

Air India Plane Crash: फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने 12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद एयर इंडिया बोइंग फ्लाइट एआई-171 के दुखद क्रैश से जुड़ी आधिकारिक बात को चुनौती दी है।   उनका दावा है कि नए सिम्युलेटर डेटा से पता चलता है कि क्रैश की वजह पायलट की अनदेखी नहीं बल्कि सिस्टम में बिजली की बड़ी खराबी थी।

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एफआईपी का दावा- जानबूझकर छिपाई गई जानकारी
एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने दावा किया कि जांचकर्ताओं ने जरूरी तकनीकी सबूतों को नजरअंदाज किया और पहले से तय नतीजे को सही साबित करने के लिए भारत के प्रमुख विमानन विषेशज्ञों को जानबूझकर अलग रखा। इस हादसे की आधिकारिक अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्लाइट-क्रू ने एक सोची-समझी आत्महत्या की योजना के तहत जानबूझकर इंजन की फ्यूल सप्लाई बंद कर दी थी।

एफआईपी को  सिम्युलेटर टेस्ट में मिले अलग नतीजे
सरकारी जांचकर्ताओं के मुताबिक, मैन्युअल रूप से बंद करने की वजह से विमान का ‘रैम एयर टर्बाइन’ ठीक चार सेकेंड बाद नीचे गिर गया। ‘रैम एयर टर्बाइन’ एक बैकअप पावर सिस्टम है, जो पूरी तरह से बिजली जाने पर अपने आप चालू हो जाता है। हालांकि, रंधावा ने कहा कि एफआईपी ने हाल ही में उस फ्लाइट के वजन, बैलेंस और मौसम की स्थितियों को हूबहू दोहराते हुए विस्तृत सिम्युलेटर टेस्ट किए। उन्होंने कहा कि नतीजों ने आधिकारिक टाइमलाइन को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। उन्होंने कहा, हमारे सिम्युलेटर टेस्ट साबित करते हैं कि मैन्युअल रूप से फ्यूल बंद करने पर बैकअप टर्बाइन को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकेंड लगते हैं। मैन्युअल शटडाउन की स्थिति में चार सेकेंड की आधिकारिक टाइमलाइन भौतिक और तकनीकी रूप से असंभव है।”

विमान में आई थी बिजली की बड़ी खराबी?
एफआईपी का तर्क है कि बैकअप टर्बाइन इतनी तेजी से इसलिए चालू हुआ क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही बिजली की एक बड़ी खराबी ने विमान को बेकार कर दिया था। फेडरेशन का दावा है कि इसी सिस्टम की खराबी ने इंजन स्विच को ट्रिप किया और आखिरकार विमान क्रैश हो गया। एफआईपी ने यह भी कहा कि फ्लाइट 171 में बचे एकमात्र व्यक्ति ने बताया था कि विमान के नीचे गिरने (टर्मिनल डिसेंट) से ठीक पहले केबिन की लाइटें टिमटिमा रही थीं और धीमी हो रही थीं, यह जानकारी अचानक और बड़े पैमाने पर बिजली जाने की एफआईपी की थ्योरी से पूरी तरह मेल खाती है।

‘पायलट के आत्महत्या’ वाली थ्योरी पर उठाए सवाल
पायलटों के फेडरेशन ने कहा कि क्रैश हुए विमान का, उस घातक उड़ान से पहले बिजली की अनसुलझी समस्याओं का रिकॉर्ड रहा था। एफआईपी ने आरोप लगाया कि सरकारी जांचकर्ताओं ने भारत के शीर्ष बोइंग 787 एक्सपर्ट माने जाने वाले कैप्टन आरएस संधू को वास्तविक जांच परीक्षणों से जानबूझकर दूर रखा। कैप्टन सीएस रंधावा ने आरोप लगाया, “वे हमारे सबसे अनुभवी पायलट की राय को नजरअंदाज कर रहे हैं क्योंकि उनकी जानकारी से उनकी ‘पायलट के आत्महत्या’ वाली थ्योरी पूरी तरह गलत साबित हो जाएगी। किसी बड़ी मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर खराबी का सामना करने के बजाय, उन मृत पायलटों पर दोष मढ़ना आसान है जो अपना बचाव नहीं कर सकते।”

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बोइंग और सरकारी एविएशन अथॉरिटी को सौंपा सिम्युलेटर डेटा
एफआईपी ने पुष्टि की है कि उसने अपना सिम्युलेटर डेटा और नतीजे बोइंग और सरकारी एविएशन अथॉरिटी, दोनों को आधिकारिक तौर पर सौंप दिए हैं। फेडरेशन मांग कर रहा है कि जब तक टरबाइन डिप्लॉयमेंट से जुड़ी गणितीय और तकनीकी गड़बड़ियों की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। एफआईपी ने डाटा की पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक जांच टीम में कैप्टन संधू को तुरंत वापस शामिल करने की भी मांग की है।

अब LPG पर खर्च होगा कम! 1 जुलाई से घर बैठे लगाएं बायोगैस प्लांट, जानिए पोर्टल पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM) पोर्टल फिर से खोलने का फैसला किया है. इसके जरिए अब बायोगैस यानी गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया जा सकता है. इससे लोगों को सस्ती और साफ ऊर्जा मिलेगी. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) द्वारा संचालित BAM Portal नए आवेदनों के लिए 1 जुलाई से 30 जुलाई तक खुलेगा. इसके जरिए बायोगैस (CBG) उत्पादक आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आम जनता को घर बैठे साफ और सस्ती एनर्जी मिल सके.

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बायोगैस प्लांट और BAM पोर्टल क्या है?

घरेलू कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके बायोगैस बनाने से एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होती है और परिवार को मुफ्त या सस्ती गैस मिलती है. छोटे पोर्टेबल प्लांट या मिनी बायोगैस के माध्यम से आसानी से घर बैठे इसका उपयोग किया जा सकता है. वहीं, BAM (Biomass Aggregation Machinery) पोर्टल पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक सरकारी मंच है. इसके जरिए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने वाले प्लांट संचालक मशीनें खरीदने के लिए वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी हेतु आवेदन कर सकते हैं.

कौन कर सकता है रजिस्ट्रेशन

यह खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो बायोगैस बनाना चाहते हैं या इस काम से जुड़े हैं. आधिकारिक गाइडलाइन्स के अनुसार, BAM पोर्टल पर मुख्य रूप से बायोगैस या CBG प्लांट स्थापित करने वाले उद्यमी और उत्पादक आवेदन कर सकते हैं.

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रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

  • सबसे पहले GOBARdhan Portal पर जाएं और अपने प्लांट को रजिस्टर करें.
  • इसके बाद BAM Portal पर विजिट करें.
  • होमपेज पर ‘Register’ लिंक पर क्लिक करें.
  • अपना मोबाइल नंबर, नाम और ईमेल आईडी दर्ज करके पोर्टल पर यूजर आईडी बनाएं.
  • लॉग-इन करने के बाद, फॉर्म में मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी भरें.
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें और फॉर्म को सबमिट करें.

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रसोई में चाकू सबसे जरूरी और ज्यादा इस्तेमाल होने वाले औजारों में से एक है, चाहे फल काटने हों, सब्जियां चॉप करनी हों या किसी भी खाने की तैयारी करनी हो, इसका इस्तेमाल हर दिन होता है, लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जिस चाकू से आप खाने की चीजें काट रहे हैं, वह साफ और सुरक्षित है या नहीं?

हाल ही में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने होटल, ढाबों और फूड बिज़नेस से जुड़े लोगों के लिए नए नियम लागू किए हैं. इन नियमों के तहत अब सभी को साफ-सुथरे और फूड-ग्रेड चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा.

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इसके अलावा, कटाई, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और भंडारण में उपयोग होने वाले सभी उपकरण फूड-ग्रेड, गैर-विषैले (नॉन-टॉक्सिक) और जंग-रोधी होने चाहिए. ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि गंदे या जंग लगे चाकू से तैयार किया गया खाना खराब हो सकता है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

FSSAI ने क्यों जारी किए नए निर्देश?

FSSAI को पता चला कि कुछ होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाने के स्थानों पर जंग लगे, टूटे-फूटे या खराब चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे गंदे और खराब उपकरणों से खाने में गंदगी, हानिकारक केमिकल और कीटाणु मिल सकते हैं, जिससे लोगों की सेहत खराब हो सकती है. इसी वजह से FSSAI ने साफ तौर पर कहा है कि खाना बनाने के दौरान केवल फूड-ग्रेड और अच्छी हालत में मौजूद चाकू और अन्य कटिंग औजारों का ही इस्तेमाल किया जाए, ताकि खाना सुरक्षित और हेल्दी बना रहे.

जंग लगा चाकू सेहत को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

खाने में जंग मिल सकता है

जब आप जंग लगे चाकू से फल या सब्जियां काटते हैं, तो उसके छोटे-छोटे जंग के कण खाने में मिल जाते हैं. बार-बार ऐसा खाना खाना शरीर के लिए अच्छा नहीं होता.

बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता है

जंग लगी सतह पर गंदगी और कीटाणु आसानी से जम जाते हैं. अगर चाकू ठीक से साफ न किया जाए, तो ये कीटाणु सीधे खाने में चले जाते हैं.

पेट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं

ऐसे चाकू से कटा हुआ खाना खाने से पेट दर्द, गैस, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

संक्रमण का खतरा रहता है

जंग लगे या टूटे चाकू में दरारें होती हैं, जिनमें गंदगी छिप जाती है, इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

खाने का स्वाद और क्वालिटी खराब होती है

जंग लगे चाकू से कटे फल और सब्जियों का स्वाद बदल सकता है और खाने की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. कई बार खाने में अजीब सा स्वाद आने लगता है.

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नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

FSSAI ने साफ कहा है कि अगर निरीक्षण के दौरान किसी खाद्य प्रतिष्ठान में खराब या जंग लगे कटिंग उपकरण पाए जाते हैं, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

घर में चाकू इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

  • चाकू पर जंग दिखाई दे तो उसे बदल दें
  •  इस्तेमाल के बाद तुरंत धोकर सुखाएं
  • गीले चाकू को लंबे समय तक न छोड़ें
  • स्टेनलेस स्टील या अच्छी गुणवत्ता वाले चाकू खरीदें
  • समय-समय पर चाकू की धार और स्थिति की जांच करते रहें

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नई दिल्ली : आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. कपड़े हों, मोबाइल हो या घर का कोई सामान, ज्यादातर लोग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी करना पसंद करते हैं. लेकिन कई बार ऑर्डर किया गया सामान खराब, टूटा-फूटा या गलत निकल आता है. ऐसे में लोग कंपनी के कस्टमर केयर पर संपर्क करते हैं. लेकिन जरा सोचिए अगर कस्टमर केयर से भी मदद न मिले तो? अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है या आप भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचना चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आपके काम का साबित हो सकता है.

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क्या करें?

इसे लेकर हाल ही में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में विभाग ने बताया, इस तरह की स्थिति के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन मौजूद है, जहां आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और मदद पा सकते हैं.

किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?

अगर आपको ऑनलाइन खरीदा गया सामान डैमेज मिला है, गलत प्रोडक्ट डिलीवर हुआ है, रिफंड नहीं मिल रहा है, एक्सचेंज में दिक्कत आ रही है या कस्टमर केयर आपकी शिकायत का जवाब नहीं दे रहा है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 से संपर्क कर सकते हैं. इस नंबर पर कॉल करके आप अपनी समस्या बता सकते हैं और आगे के प्रोसेस के बारे में जानकारी ले सकते हैं. हेल्पलाइन आपकी शिकायत को संबंधित कंपनी तक पहुंचाने और समाधान में मदद करती है.

WhatsApp और NCH App से भी दर्ज कर सकते हैं शिकायत

आप WhatsApp या NCH App के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके लिए दिए गए QR कोड को स्कैन कर संबंधित प्लेटफॉर्म पर पहुंचा जा सकता है और जरूरी जानकारी भरकर शिकायत भेजी जा सकती है.

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शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान

शिकायत दर्ज करते समय ऑर्डर नंबर, खरीदारी की रसीद, भुगतान का प्रमाण और खराब प्रोडक्ट की तस्वीरें अपने पास रखें. इससे आपकी शिकायत का निपटारा करने में आसानी होती है और प्रोसेस तेज हो सकता है.

भारत की रक्षा शक्ति को बड़ा बूस्ट, DRDO ने लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का किया सफल परीक्षण

भुवनेश्वर: डिफेंस के क्षेत्र में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने 15 जून को ओडिशा तट से दूर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया. LRLACM स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल है, जिसके सभी उप-प्रणालियां DRDO की लैब्स में विकसित की गई हैं. बेंगलुरु की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट इसकी नोडल लैब है. इस प्रक्षेपण के दौरान DRDO के वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय नौसेना और वायु सेना के प्रतिनिधि उपस्थित थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO टीम और उद्योग भागीदारों को बधाई दी. DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों की निगरानी की. उन्होंने सफल परीक्षण में शामिल सभी टीम सदस्यों को बधाई दी.

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इससे पहले 13 जून को DRDO ने दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों के खिलाफ देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया. लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी पर एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का प्रदर्शन करने के लिए 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए गए. मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया. इंटरसेप्टर्स ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेद दिया.

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इन सिस्टम्स को मिसाइल से जुड़े नए खतरों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है. इन परीक्षणों ने देश को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने की क्षमता वाली बीएमडी प्रणाली मौजूद है. नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (एनएसएम-एमआर) का पहला फ्लाइट टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया. इन फ्लाइट टेस्ट को DRDO और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन अहम तकनीकों का सफल प्रदर्शन करने पर DRDO को बधाई दी.

श्रद्धालुओं से भरी पिकअप वैन कुएं में गिरी, दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत

महाराष्ट्र से एक दिल को दहला देने वाली खबर सामने आई है. महाराष्ट्र के पंढरपुर में सिद्धनाथ मंदिर से लौट रहे श्रद्धालु दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए. म्हासवड–पंढरपुर रोड पर तंडलवाड़ी गांव के पास एक पिकअप वाहन अचानक कुएं में गिर गया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. बताया जा रहा है कि पिकअप वाहन में करीब 15 लोग सवार थे. इरफान नाम के युवक ने जान जोखिम में डालकर कुएं में छलांग लगाई और तीन लोगों को जिंदा बाहर निकाल लिया.

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महाराष्ट्र के पंढरपुर में एक दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जब एक पिकअप वैन कुएं में गिर गई. बताया जा रहा है कि सभी लोग मंदिर दर्शन कर अपने गांव लौट रहे थे. सभी मृतक पंढरपुर के रांजनी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं. ये सभी लोग तीर्थयात्रा पर जा रहे थे. यह हादसा शनिवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ, जब रंजनी गांव के लोग सिद्धनाथ मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पिकअप करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी. इसी दौरान ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और वाहन सीधे कुएं में जा गिरा.

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दुर्घटना सोलापुर के मालिशिरस गांव के पास हुई है. हादसे के पास इलाके में मातम पसरा है. महाराष्ट्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पंढरपुर के दर्शन करने के लिए एक पिकअप से पहुंचे थे. हादसे का शिकार हुए वाहन में खचाखच श्रद्धालुओं से भरा था. इस हादसे में एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत और घायल होने की खबर ने सबको झकझोर दिया है. मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. सूचना मिलने के तुरंत बाद मौके के लिए स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की गाड़ियां निकली. इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से कुएं में गिरी पिकअप वैन और उसमें फंसे लोगों को बाहर निकलने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया.

Patna Violence: ट्रेन लेट होने पर छात्रों का फूटा गुस्सा, स्टेशन पर जमकर तोड़फोड़, कई पुलिसकर्मी घायल

Patna Violence: बिहार की राजधानी पटना से छात्रों के भारी बवाल की खबर सामने आई है. पाटलिपुत्र स्टेशन पर ट्रेन लेट होने से गुस्साएं हजारों छात्रों ने जबरदस्त हंगामा किया, नारेबाजी की. इस दौरान पथराव और तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई. जिसमें कई पुलिसकर्मी के भी घायल होने की सूचना है. फिलहाल पुलिस और रेलवे पुलिस फोर्स की स्थिति को कंट्रोल कर विधि-व्यवस्था सामान्य बनाने की कोशिश में जुटी है. मिली जानकारी के अनुसार आज बिहार में मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा होनी है. दो पालियों में आयोजित होने वाली इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की भारी भीड़ सुबह से ही रेलवे स्टेशनों पर जुटी थी. पाटलिपुत्र स्टेशन पर भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे थे. लेकिन अभ्यर्थी जिस ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, वो लगातार लेट होती जा रही थी. जिससे छात्रों का गुस्सा भड़क उठा. आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि लगभग 2-3 घंटे हंगामा हुआ. पहली पाली के कुछ छात्र शायद समय पर सेंटर नहीं पहुंच पा रहे थे, इसलिए हंगामा किया. उन्होंने यह भी बताया कि पथराव में कुछ जवान घायल हुए हैं. आंसू गैस के गोल और फायरिंग भी दागे गए.

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स्पेशल ट्रेन में तोड़फोड़, पुलिस को करनी पड़ी हवाई फायरिंग

दरअसल पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर मद्य निषेध विभाग की परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों ने ट्रेन की अपर्याप्त व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिससे वहां झड़प हो गई. यह विरोध प्रदर्शन तब और बढ़ गया जब उम्मीदवारों ने परीक्षा स्पेशल ट्रेन में तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा और चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग करनी पड़ी.

रविवार तड़के पाटलिपुत्र स्टेशन पर जुटी छात्रों की भारी भीड़.

असामाजिक तत्वों ने चेन पुलिंग की, स्पेशल ट्रेन के बाद भी हंगामाः डीएम 

पटना डीएम डॉ. त्यागराजन ने हंगामे के बारे में बताया, “आधी रात के आस-पास हमें खबर मिली कि कुछ लोग हंगामा कर रहे हैं. हमने उनसे बार-बार गुज़ारिश की कि वे हंगामा न करें और परीक्षा देने वाले छात्रों का सहयोग करें. लेकिन, कुछ असामाजिक तत्वों ने बार-बार इमरजेंसी चेन खींची और कई तरह की मांगें रखीं, जैसे कि स्पेशल ट्रेनों की मांग, जबकि पहले से ही दो स्पेशल ट्रेनें मौजूद थीं… उन्होंने उन छात्रों को भी रोका जो जाना चाहते थे. इन वजहों से हमें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है और ट्रेनें रवाना हो चुकी हैं; परीक्षा देने वालों के लिए तय ट्रेनें पहले ही निकल चुकी हैं। ट्रेनों का संचालन भी सामान्य रूप से चल रहा है.”

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IG समेत कई अधिकारियों के चोटिल होने की सूचना

IG समेत कई अधिकारियों को मामूली चोटें आईं. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और ट्रेन में तोड़-फोड़ की खबरें आईं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और लाठीचार्ज किया. हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

DRDO की बड़ी कामयाबी: 24 घंटे में 3 मिसाइलों का सफल परीक्षण, बढ़ी भारत की सैन्य ताकत

नई दिल्ली : भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव करने की अचूक क्षमता है। भारत ने 10 और 11 जून को लगातार तीन मिसाइलों के सफल उड़ान परीक्षण किए, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के साथ-साथ एंटी-शिप मिसाइल टेक्नोलॉजी भी शामिल है।

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24 घंटे के भीतर 3 बड़े परीक्षण

DRDO के अनुसार, इन परीक्षणों ने लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत के बहुस्तरीय यानी मल्टी-लेयर्ड डिफेंस आर्किटेक्चर की ताकत को साबित किया है। परीक्षण के दौरान मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अपने तय किए गए लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। यह सफलता भविष्य के उन्नत मिसाइल खतरों से निपटने के लिए देश की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाती है।

2000 से 5000 किमी की रेंज, अचूक सुरक्षा चक्र

शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक, DRDO ने दो ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है, जो 2,000 किमी से 5,000 किमी के बीच मार करने वाली दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs) को निष्क्रिय करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ये इंटरसेप्टर ‘एक्सो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के बाहर) और ‘एंडो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के भीतर) दोनों ही तरह के हैं। केंद्र सरकार ने फिलहाल इन इंटरसेप्टर्स के नाम उजागर नहीं किए हैं। परीक्षण पूरे होने के बाद अब इन्हें जल्द ही सेना द्वारा ‘यूजर ट्रायल्स’ के लिए भेजा जाएगा।

पाकिस्तान की नई मिसाइलों का मुंहतोड़ जवाब

सूत्रों ने बताया कि DRDO ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस को इतनी उच्च प्राथमिकता इसलिए दी है, क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान मल्टीपल वॉरहेड वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इसमें फतेह-I (Fateh-I), फतेह-II (Fateh-II) और चीन मूल की P282 मिसाइलें शामिल हैं। भारत की यह नई तैयारी पाकिस्तान के इन्हीं मंसूबों का करारा जवाब है।

नौसेना की ताकत में भारी इजाफा

इन सफलताओं के साथ ही DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस टेस्ट ने मध्यम दूरी पर इस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता को साबित कर दिया है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों के समुद्री हमले के विकल्प और ज्यादा मजबूत हो गए हैं।

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रक्षा मंत्री ने दी बधाई

ये सभी परीक्षण DRDO और भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किए गए। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इन मिशनों की बारीकी से निगरानी की। उन्होंने 24 घंटे के भीतर इतने जटिल परीक्षणों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए DRDO के वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के शानदार तालमेल की तारीफ की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर DRDO को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हवाई और समुद्री खतरों का मुकाबला करने में देश की रक्षा तैयारियों को बेहद मजबूत करेगी।

Ahmedabad Air India Plane Crash: आखिरी कॉल, आखिरी मैसेज और अधूरे सपने… अहमदाबाद प्लेन क्रैश की पहली बरसी पर नम हुईं आंखें

Ahmedabad Air India Plane Crash: अहमदाबाद में पिछले साल 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे को आज एक साल बीत चुका है और इसमें जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवारों का दर्द आज भी उनके आंसुओं में छलक जाता है। एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI 171 हादसे में अपनों को खोने वाले कुछ लोग आज भी उड़ान भरने से डरते हैं, जबकि कई लोग इस गहरे सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रहे हैं।

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बेटे को खोने के बाद किसी प्लेन में नहीं रखा कदम

कई परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों के लिए इस त्रासदी का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। दीव निवासी रफीक अरब ने 12 जून 2025 को लंदन जाने वाले प्लेन के उड़ान भरते ही हुई दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में अपने 25 साल के बेटे फैजान को खो दिया था। तब से उन्होंने आज तक किसी प्लेन में कदम नहीं रखा है और वह हवाई यात्रा के गहरे डर के साए में जी रहे हैं। फैजान ब्रिटेन में इस्लामिक अध्ययन की पढ़ाई कर रहा था और दीव में अपने परिवार से मिलने के बाद वापस जा रहा था। उसका अपने पिता को आखिरी फोन मैसेज था- ”पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं और मैं जा रहा हूं।”

‘हवाई जहाज की आवाज भी झकझोर देती है’

त्रासदी को याद करते हुए रफीक ने कहा, ”कौन सोच सकता था कि यह उसका आखिरी मैसेज होगा? हमने उस दिन के बाद से कभी विमान यात्रा नहीं की। यहां तक कि सिर के ऊपर से गुजरने वाले विमान की आवाज भी हमें झकझोर देती है और याद दिलाती है कि कैसे 260 जिंदगियां पल भर में खत्म हो गईं।” फैजान की मां और दो छोटे भाई अब भी उसकी कमी महसूस करते हैं।

माता-पिता को खोने वाली मुक्ति अभी भी उबर नहीं पाई

इस त्रासदी ने सूरत निवासी मुक्ति वांसडिया के माता-पिता दिव्या (60) और अर्जुनसिंह (65) को छीन लिया। मुक्ति ने कहा, ”मेरे माता-पिता ही मेरी रोशनी थे।” मुक्ति के माता-पिता अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जा रहे थे और जीवन में पहली बार हवाई जहाज में बैठे थे। वे अपनी बड़ी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। मुक्ति ने याद करते हुए बताया, ”मिडिल क्लास लोगों के लिए विदेश यात्रा करना एक बड़ी बात होती है। वे बच्चों की तरह एक्साइटेड थे। मैंने उनसे कहा था कि अगर विमान में झटके महसूस हों तो डरना मत सब ठीक हो जाएगा।”

जब मुक्ति ने मां के पैर छुए, लेकिन पिता के पैर छूना भूल गई

पहले उन्होंने एक दूसरी कनेक्टिंग उड़ान बुक की थी, लेकिन बाद में अहमदाबाद से जाने वाली इस फ्लाइट को चुना, ताकि वे गुजराती भाषी सह-यात्रियों के साथ यात्रा करने में अधिक कंफर्ट महसूस कर सकें। जाने से ठीक पहले के आखिरी पल मुक्ति की यादों में कैद हैं। मुक्ति बताती है, एयरपोर्ट पर मैंने अपनी मां के पैर छुए लेकिन पिता के पैर छूना भूल गई। मैं वापस दौड़ी, उनके पैर छुए और उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। मैं उस अहसास को कभी नहीं भूल सकती। ऐसा लग रहा था मानो वह मुझे किसी युद्ध के लिए तैयार कर रहे हों।

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एक फोन कॉल ने हमेशा के लिए बदल दी दुनिया

इसके कुछ ही घंटों बाद, जब भाई-बहन वडोदरा में लंच कर रहे थे, तब एक फोन कॉल ने उनकी दुनिया हमेशा के लिए बदल दी। अविवाहित मुक्ति अपने माता-पिता को खोने के बाद काफी संघर्ष कर रही हैं और अब सूरत में अकेली रहती हैं, जबकि उनके भाई-बहनों की शादी इस हादसे से पहले ही हो चुकी थी। इस प्लेन क्रैश ने मुक्ति को डिप्रेशन में धकेल दिया। उसने एक ट्रैवल एजेंसी की अपनी नौकरी छोड़ दी और महीनों काउंसलिंग में बिताए। आज, वह टाटा ग्रुप की एक सीएसआर पहल के साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं, लेकिन आज भी उसके अंदर गहरा डर बैठा हुआ है।

Train Seat Availability: TTE से पूछने की जरूरत नहीं, IRCTC के इस फीचर से मिनटों में जानें खाली सीटों का स्टेटस

Train Seat Availability: अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं तो ये खबर आपके लिए काफी ज्यादा जरूरी हो सकती है. कई लोग प्लानिंग के तहत ट्रेन टिकट रिजर्व करते हैं, तो कुछ को जल्दबाजी में सफर करना पड़ता है. ऐसे में ट्रेन का टिकट रिजर्व करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता और वेटिंग टिकट के साथ सफर करना पड़ता है. कई लोग खाली सीट पाने के लिए टीटीई के पीछे चक्कर लगाते हैं. इसके बाद भी कभी-कभी कुछ परिणाम नहीं मिल पाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं IRCTC में एक ऐसा फीचर मिलता है जिसकी मदद से आप चलती ट्रेन में खाली सीट का पता लगा सकते हैं और TTE से बोलकर सीट अलॉट कर सकते हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…

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IRCTC का चार्ट वैकेंसी फीचर

IRCTC के इस फीचर का नाम चार्ट वैकेंसी है. इस फीचर की मदद से आप ये पता लगा सकते हैं कि चलती ट्रेन में कितनी सीटें खाली हैं. दरअसल, इसमें ऑनलाइन और लाइव रिजर्वेशन चार्ट होता है, जो ट्रेन का फाइनल चार्ट बनाने के बाद लोग देख सकते हैं. इसमें ये जानकारी लाइव उपलब्ध होती है कि किस डिब्बे में कौन सी सीट और कौन सा बर्थ खाली है. ऐसे में अगर आपके पास वेटिंग टिकट है, तो आप इस फीचर की मदद से खाली सीट का पता लगा सकते हैं और फिर TTE से अलॉट करवा सकते हैं.

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क्या है खाली सीट पाने का पूरा प्रोसेस?

  • सबसे पहले IRCTC की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं या फिर Rail Connect ऐप को खोलें.
  • इसके बाद होम पेज पर  Charts / Vacancy पर क्लिक करें.
  • फिर आपकी स्क्रीन पर Reservation Chart पेज खुल जाएगा.
  • इस पेज पर ट्रेन नंबर, ट्रैवल डेट और बॉर्डिंग स्टेशन दर्ज करें और Get Train Chart पर क्लिक करें.
  • अब स्क्रीन पर क्लास-वाइज लेआउट में चार्ट खुल जाएगा.
  • अब अपना कोच टाइप चुनें और आपके सामने खाली सीटों की पूरी लिस्ट आ जाएगी.

अब इसके बाद अपने पसंद अनुसार खाली सीट का नंबर और कोच नोट कर लें और तुरंत टीटीई से संपर्क करें. इसके बाद टीटीई नियमों के अनुसार पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर सीट अलॉट करेगा. इस दौरान टीटीई वेटिंग टिकट के बदले में किराया लेकर रसीद दे देगा. इसके बाद आप सीट पर सफर कर सकते हैं.