Thursday, April 23, 2026
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Pahalgam Attack Anniversary: पहलगाम नरसंहार होने से बचा सकते थे ये 2 लोग, 3000 रुपये के लालच में कर दी गद्दारी

Pahalgam Attack Anniversary: 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले में 26 नागरिकों को उनके परिवारों के सामने ही बेरहमी से भून दिया गया था। अब इस मामले की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद पहलू सामने आया है। जांच से पता चला है कि अगर जेल में बंद दो स्थानीय कश्मीरी निवासियों ने समय रहते पुलिस को सूचना दी होती, तो इस भीषण नरसंहार को आसानी से रोका जा सकता था।

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चंद रुपयों के लिए आतंकियों को दी पनाह

इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो स्थानीय लोगों की पहचान परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि इन दोनों ने महज 3000 रुपये के लालच में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी और उनकी मदद की थी। 21 अप्रैल की रात यानी हमले से ठीक एक रात पहले तीनों आतंकी इन दोनों के घर आए थे। उन्होंने वहां करीब 5 घंटे बिताए और खाना भी खाया।

बातचीत के दौरान आतंकी पाकिस्तानी लहजे वाली उर्दू-पंजाबी मिश्रित भाषा बोल रहे थे। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे और वे ‘अली भाई’ नाम के शख्स का जिक्र कर रहे थे। अली भाई असल में लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का शीर्ष कमांडर और मुख्य आरोपी साजिद जट्ट है, जो पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:30 बजे आतंकी वहां से निकले। जाते समय उन्होंने अपने साथ कुछ खाना पैक किया और खाना पकाने का बर्तन, कंबल व तिरपाल भी साथ ले गए। इन सब संदिग्ध हरकतों के बावजूद परवेज और बशीर ने चुप्पी साधे रखी।

हमले वाले दिन आतंकियों को देखा, फिर भी रहे खामोश

हमले वाले दिन (22 अप्रैल, 2025) दोपहर करीब 12:30 बजे- यानी कत्लेआम शुरू होने से कुछ घंटे पहले परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन में एक बाड़ के पीछे छिपते हुए देखा था। इन आतंकियों की पहचान बाद में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई।

यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला होने वाला है। वे चाहते तो तुरंत पुलिस या स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन को इसकी सूचना दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे अपने घोड़ों (टट्टुओं) के साथ वहां से दूर चले गए और अपने पर्यटक ग्राहकों के लौटने का इंतजार करने लगे। दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे के बीच, उन्होंने पर्यटकों को घोड़ों पर बिठाकर वापस पहलगाम सुरक्षित पहुंचा दिया।

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हमले के बाद फरार और एनआईए की कार्रवाई

जब इन दोनों को बैसरन में हुए दिल दहला देने वाले कत्लेआम की खबर मिली, तो वे समझ गए कि यह काम उन्हीं आतंकियों ने किया है जिन्हें उन्होंने पनाह दी थी। खुद को बचाने के लिए वे तुरंत अपनी ‘ढोक’ (पहाड़ों पर बनी अस्थायी झोपड़ी) छोड़कर वहां से भाग गए और छिप गए। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आखिरकार उन्हें ढूंढ निकाला और 22 जून, 2025 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन और चार्जशीट

दिसंबर 2025 में एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर की। इस चार्जशीट में परवेज अहमद और बशीर अहमद के साथ-साथ मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट, तीनों पाकिस्तानी हमलावरों (जो अब मारे जा चुके हैं) और लश्कर/TRF को एक आतंकी संगठन के तौर पर नामजद किया गया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का सीधा हाथ होने की पुष्टि फेसबुक द्वारा दी गई जानकारी से भी हुई है। भारत में एक भ्रामक पोस्ट फैलाई गई थी जिसमें दावा किया गया था कि ‘जिब्रान हमारा आदमी था’। फेसबुक की जांच में यह पोस्ट पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर के फोन नंबरों से जुड़ी पाई गई, जो इस हमले में पाकिस्तानी साजिश का एक और पुख्ता सबूत है।

Anniversary of Pahalgam Attack: सेना ने जारी की ऑपरेशन की तस्वीरें, बताया कैसे 100 दिनों में खत्म किए पहलगाम हमले के गुनहगार

Anniversary of Pahalgam Attack: एक दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल पूरे हो रहे हैं. इस हमले में आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने आए सैलानियों पर अंधाधूंध गोलीबारी की थी. आतंकियों की इस गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हुई थी. इस हमले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आतंकियों ने लोगों ने नाम और धर्म की पूछ कर उनके घर की महिलाओं और बच्चों के सामने गोली मारी थी. पहलगाम की यह आतंकी घटना भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी. इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कटूता के नए दौर में गए.

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पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपेशन सिंदूर में तबाह किए 9 आतंकी ठिकाने

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए. इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए. लेकिन सेना को असली कामयाबी 28 जुलाई 2025 को तब मिली, जब सेना ने ऑपेरशन महादेव के तहत पहलगाम में मौत का खूनी खेल खेलने वाले तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारा.

सेना ने बताया कि दाछीगाम के घने जंगलों में पहलगाम के आतंकी इस तरह छिप कर रह रहे थे.

ऑपेरशन महादेव से जुड़ी अहम जानकारियां सेना ने की साझा

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से दो दिन पहले सेना ने ऑपरेशन महादेव से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की है. सेना ने बताया कि पहलगाम में हुए हमले के कुछ ही घंटों में सेना मौके पर पहुंच गई. घटना की जांच तुरंत शुरू की गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने तीन आतंकियों की पहचान बताई. खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की पहचान हुई. ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे.

सुलेमान शाह, हमजा और जिब्रान नामक आतंकी हुए थे ढेर

पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई. इसके बाद बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया गया. सुरक्षा बलों की घेराबंदी से आतंकियों के भागने के रास्ते बंद किए गए. पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया गया. आतंकी दक्षिण कश्मीर के ऊंचे इलाकों में छिपते रहे.

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हप्तानार, बुगमार, त्राल होते हुए दाछीगाम के जंगलों में छिपे थे आतंकी

आतंकी हप्तानार, बुगमार और त्राल से होते हुए आगे बढ़े. आखिर में दाछीगाम के घने जंगलों में पहुंच गए. यह इलाका बहुत कठिन और ऊंचाई वाला है. घने जंगलों में ऑपरेशन करना मुश्किल था. फिर भी सेना ने दबाव बनाए रखा. मई के अंत तक स्थिति साफ हो गई. आतंकी पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे थे. ज्यादा देर होने पर ये आतंकी अमरनाथ यात्रा के लिए खतरा बन सकते थे.

पहलगाम हमले के गुनाहगार तक कैसे पहुंची सेना.

बरसी से पहले जम्मू कश्मीर में बढ़ाई गई सुरक्षा

ऑपरेशन महादेव सेना की दृढ़ता का उदाहरण है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा. इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ. देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता फिर साबित हुई. इस बीच पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. सीमाई इलाकों के साथ-साथ सेना और पुलिस के जवान विशेष चौकसी बरत रहे हैं.

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दुर्ग : भिलाई के छावनी थाना क्षेत्र के कैंप-2 में एक पत्नी ने अपने पति की हत्या कर दी। यह घटना दुर्गा पारा, वार्ड 35 की है, जहां बीती रात पत्नी ने गुस्से में आकर अपने पति पर सिलबट्टे से हमला कर दिया। इस हमले में 40 साल के डोमन साहू की मौके पर ही मौत हो गई। डोमन साहू और उसकी पत्नी हीरामणी साहू (करीब 35 साल) के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों के दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी।

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पड़ोसियों का कहना है कि घर में अक्सर झगड़ा होता था और इसका असर बच्चों पर भी पड़ रहा था। कई बार आसपास के लोग भी इस विवाद से परेशान हो चुके थे। पति-पत्नी के बीच आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता था। मोहल्ले को लोग भी इस बात से परेशान थे। जानकारी के मुताबिक पत्नी हीरामणी साहू ने 19 अप्रैल को अपने पति के खिलाफ जामुल थाना में शिकायत की थी। जिसके बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 170 के तहत उसे गिरफ्तार कर एसडीएम कोर्ट भेजा था।

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छावनी पुलिस ने आरोपी पति को एसडीएम कोर्ट में पेश किया। हालांकि वहां से उसे जमानत मिल गई। बताया जा रहा है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी शाम को घर पहुंचा और पुलिस में शिकायत करने की बात को लेकर विवाद करने लगा। दोनों पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में पत्नी ने अपने पति के सिर पर सिलबट्टे से वार कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना जब पुलिस को लगी तो पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सुपेला अस्पताल भिजवा दिया। पड़ोसियों का कहना है कि मृतक आए दिन शराब पीकर घर में विवाद करता था और कई बार बच्चों के साथ भी मारपीट करता था। इसी वजह से पत्नी पहले भी परेशान रहती थी और कई बार शिकायत कर चुकी थी।

Iran Attack On Indian Ships: होर्मुज में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग, सभी क्रू मेंबर सुरक्षित, भारत ने ईरानी के राजदूत को किया तलब

Iran Attack On Indian Ships: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 2 जहाजों पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की फायरिंग के बाद भारत ने कड़ा कदम उठाया है। शनिवार को भारत ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली को विदेश मंत्रालय में तलब किया। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह कदम भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता के चलते उठाया गया है। ईरानी राजदूत मंत्रालय आए और मुलाकात के बाद दूतावास लौट गए। इस दौरान भारत ने इस घटना पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है।

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विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा?

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि नई दिल्ली में मौजूद ईरान के राजदूत को आज शाम विदेश सचिव से मुलाकात के लिए बुलाया गया था। इस बैठक के दौरान विदेश सचिव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आज हुई फायरिंग की घटना पर गहरी चिंता जताई, जिसमें 2 भारतीय ध्वज वाले जहाज शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत के लिए व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही यह भी याद दिलाया कि पहले ईरान ने भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद की थी। विदेश सचिव ने इस गंभीर घटना पर चिंता दोहराते हुए ईरानी राजदूत से कहा कि वे भारत की बात अपने देश की सरकार तक पहुंचाएं और जल्द से जल्द भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन की प्रक्रिया फिर से शुरू कराएं। ईरान के राजदूत ने भरोसा दिलाया कि वे भारत की चिंताओं को अपने देश के अधिकारियों तक जरूर पहुंचाएंगे।

होर्मुज से गुजर रहे थे कई कमर्शियल जहाज

भारत के ध्वज वाले जहाजों पर हमले की घटना उस समय हुई जब कई वाणिज्यिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ईरान ने पहले इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में कहा कि अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन के कारण इसे फिर से बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गनबोट्स ने एक टैंकर पर फायरिंग की, जबकि एक कंटेनर जहाज को भी प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचा, जिससे कुछ कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए।

फायरिंग के बाद वापस लौट गए दोनों जहाज

गोलीबारी के बीच दो भारतीय ध्वज वाले जहाज, जिनमें इराकी तेल ले जा रहा एक सुपरटैंकर भी शामिल था, फायरिंग के बाद रास्ता बदलकर वापस लौटने को मजबूर हो गए। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब उसके सशस्त्र बलों के ‘सख्त नियंत्रण’ में है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा, तब तक इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित रहेगी।

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तनाव की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान ने पहले 10 दिन के संघर्ष विराम के बाद इस मार्ग को कुछ समय के लिए खोला था, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉक जारी रखने की घोषणा के बाद स्थिति फिर बिगड़ गई।

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IAF aircraft incident: महाराष्ट्र के पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार देर रात एक बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन इसके असर से पूरे एयरपोर्ट की व्यवस्था हिल गई। भारतीय वायुसेना के एक विमान की हार्ड लैंडिंग के कारण रनवे को तुरंत बंद करना पड़ा, जिससे रातभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार रात करीब 10:25 बजे भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए आ रहा था। इसी दौरान विमान में तकनीकी खराबी आ गई। बताया गया कि, विमान का लैंडिंग गियर अचानक काम करना बंद कर गया, जिसके कारण विमान सामान्य तरीके से उतर नहीं सका और रनवे पर जोर से टकरा गया। इस स्थिति को हार्ड लैंडिंग कहा जाता है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से रनवे को बंद कर दिया गया, ताकि किसी अन्य विमान को खतरा न हो और स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

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क्या होती है हार्ड लैंडिंग?

जब कोई विमान रनवे पर उतरते समय सामान्य गति और संतुलन बनाए रखने में असफल हो जाता है और तेज झटके के साथ जमीन को छूता है, तो उसे हार्ड लैंडिंग कहा जाता है। आमतौर पर विमान धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से उतरता है, लेकिन तकनीकी खराबी, मौसम की खराब स्थिति या पायलट के आकलन में मामूली गड़बड़ी के कारण यह स्थिति पैदा हो सकती है। हार्ड लैंडिंग के दौरान विमान को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है और यात्रियों व क्रू को चोट भी लग सकती है, हालांकि इस घटना में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

रनवे तुरंत बंद, उड़ानें ठप

घटना के बाद इंडियन एयर फोर्स ने पुष्टि की है कि, सुरक्षा के मद्देनजर रनवे को तुरंत बंद कर दिया गया है। वायुसेना ने बताया कि, विमान का चालक दल पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह की नागरिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, रनवे बंद होने के कारण एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें रोक दी गईं और संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। अधिकारियों ने तुरंत रनवे को साफ करने और स्थिति सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

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91 फ्लाइट्स रद्द, यात्रियों की बढ़ी मुश्किल

इस घटना के चलते एयरपोर्ट डायरेक्टर के अनुसार कुल 91 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इनमें सबसे ज्यादा असर इंडिगो की उड़ानों पर पड़ा, जिनकी 65 फ्लाइट्स रद्द हुईं। इसके अलावा एयर इंडिया की 6, स्पाइसजेट की 5, अकासा एयर की 5 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 10 उड़ानें भी कैंसिल करनी पड़ीं।

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Women Reservation Act 2023: सरकार ने गुरुवार से 2023 का नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम देशभर में लागू कर दिया।  सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इस पर संसद में बहस जारी है इस अधिनियम में बदलाव के लिए कल यानी गुरुवार को ही लोकसभा में बिल आया और देर रात करीब 1.20 बजे तक चर्चा चली।

आज भी इस पर दिनभर चर्चा होगी और शाम में करीब 4 बजे इस पर वोटिंग होगी। वहीं कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर आगे विचार करते हुए, निम्नलिखित विधेयक लोकसभा में पारित करने के लिए पेश किए जाएंगे।

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  • संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक
  •  2026 और परिसीमन विधेयक, 2026।

गुरुवार की देर रात तक बहस चली

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गुरुवार की देर रात तक संसद में बहस चली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में बहस जारी है और इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल बृहस्पतिवार से लागू कर दिया है।केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया है?

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क्या है महिला आरक्षण कानून

अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार  16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।

इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ है।

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नई दिल्ली: चेन्नई की जुप्पा जिओ नेविगेशन टेक्नोलॉजी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने सेना को पिछले तीन महीनों में 500 से ज्यादा अजीत सीरीज के ड्रोन दिए हैं. ये ड्रोन भारतीय सेना की फ्रंटलाइन यूनिट्स के लिए तैयार किए गए हैं. ये ड्रोन निगरानी और जानकारी जुटाने में मदद करते हैं. सेना इनसे दुश्मन की हरकतों पर नजर रखती है. दुश्मन के इलाके की तस्वीरें ली जाती हैं. साथ ही रियल टाइम जानकारी भी मिलती है. अजीत ड्रोन छोटे और हल्के होते हैं. सैनिक इन्हें आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं. कुछ ड्रोन इतने छोटे हैं कि बैकपैक में रखे जा सकते हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत साइबर सुरक्षा है. आज के समय में ड्रोन को हैक करने का खतरा रहता है. यह दुश्मन सिग्नल को जाम कर सकता है. वह सिस्टम को गुमराह भी कर सकता है. इन्हीं खतरों को ध्यान में रखकर ये ड्रोन बनाए गए हैं. इनमें इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पार्ट्स भारत में ही बने हैं. इससे सुरक्षा मजबूत होती है.बाहरी सिस्टम पर निर्भरता भी कम होती है.

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यह ड्रोन बिना जीपीएस के भी काम कर सकता है

इनमें नवगति नाम का ऑटो पायलट सिस्टम लगा है. यह सिस्टम बिना जीपीएस के भी काम कर सकता है. यानी जहां सिग्नल नहीं होते, वहां भी ड्रोन उड़ते रहते हैं. ये ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर वाले इलाकों के लिए खास हैं. ऐसे इलाकों में दुश्मन सिग्नल को रोकने की कोशिश करता है या गलत सिग्नल देकर सिस्टम को भ्रमित करता है. लेकिन ये ड्रोन ऐसी स्थिति में भी काम करते रहते हैं. ये अपनी दिशा नहीं खोते. ये अपना मिशन पूरा करते हैं. कुछ बड़े ड्रोन करीब एक घंटे तक उड़ सकते हैं. ये कई किलोमीटर तक की दूरी कवर करते हैं. इनमें दिन और रात दोनों के लिए कैमरे लगे हैं. इससे हर समय निगरानी संभव होती है. कंपनी ने ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर सेना के जवानों को ट्रेनिंग भी दी है. उन्हें ड्रोन उड़ाना सिखाया गया है. उन्हें ड्रोन की देखभाल करना भी सिखाया गया है.

जवानों को एक साथ कई ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई

साथ ही जवानों को एक साथ कई ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई है. इसे स्वॉर्म ऑपरेशन कहा जाता है. इसमें कई ड्रोन मिलकर एक साथ काम करते हैं. इससे ज्यादा इलाके की निगरानी हो सकती है. ये तकनीक सेना के लिए बहुत उपयोगी है. इससे ऑपरेशन ज्यादा असरदार बनते हैं. ये ड्रोन STQC से प्रमाणित हैं. इनका सख्त परीक्षण किया गया है. इन्होंने सुरक्षा और भरोसे के सभी मानक पूरे किए हैं. कंपनी के संस्थापक साई पट्टाबिरंम ने कहा कि ड्रोन अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब बहुत जरूरी हो गई है.

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ड्रोन पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किए गए

पहले भारत विदेशी ड्रोन पर ज्यादा निर्भर था. खासकर चीनी सिस्टम का इस्तेमाल होता था. अब भारत अपनी तकनीक पर ध्यान दे रहा है. अजीत सीरीज इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. ये पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किए गए हैं. जुप्पा सिर्फ ड्रोन ही नहीं बना रही है. कंपनी ने नेविगेशन और ऑटो पायलट सिस्टम भी विकसित किए हैं. डेटा प्रोसेसिंग पर भी काम किया जा रहा है. इन ड्रोन के शामिल होने से सेना को बड़ा फायदा मिलेगा. इससे निगरानी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी. खासकर सीमावर्ती इलाकों में इनका ज्यादा उपयोग होगा. अजीत ड्रोन भारत की रक्षा ताकत को नई मजबूती दे रहे हैं.  जुप्पा स्वदेशी तकनीक के जरिये देश की सुरक्षा में अहम योगदान दे रही हैं.

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक अथवा क्लीन फ्यूल (सीएनजी-एलएनजी) में बदलने (रिट्रोफिटमेंट) का अवसर प्रदान करने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि 10 और 15 साल पुराने वाहन जो तकनीकी रूप से फिट हैं, ऐसे वाहनों को पूरी तरह से स्क्रैप करने के बजाय इंजन में बदलाव कर उपयोग में लाना समझदारी होगी। इससे करोड़ों निजी और व्यावसायिक वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर स्क्रैपेज पॉलिसी में बदलाव लाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।

मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस, टेम्पो, ट्रेवलर) को इलेक्ट्रिक किट से लैस करने पर आने वाली लागत का 15 से 25 फीसदी हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में रिट्रोफिटमेंट एक महंगा और जटिल काम है। नई नीति के तहत मंत्रालय देशभर में अधिकृत रिट्रोफिटमेंट सेंटर का नेटवर्क तैयार करेगा, जहां से प्रमाणित किट लगवाने पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।

Noida Protest: पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे, हिंसा हुई नहीं, भड़काई गई! रातोंरात बने व्हाट्सएप ग्रुप, बाहर से बुलाए गए लोग… 

नई नीति की घोषणा जल्द

विशेषज्ञों का दावा है कि स्क्रैप पॉलिसी की सुस्त रफ्तार को देखते हुए रिट्रोफिटमेंट को बढ़ावा देना ही सरकार के समक्ष एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा है। वहीं, ट्रांसपोर्ट यूनियनों की ओर से लगातार पुराने वाहनों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय लाइफ एक्सटेंशन (जीवन विस्तार) का मौका देने की मांग लगातार उठ रही है। निजी निवेशकों ने स्क्रैपेज सेंटर खोलने में रुचि नहीं दिखाई। यही कारण है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा इलेक्ट्रिक रिट्रोफिटमेंट किट्स के लिए मानक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार नई नीति की जल्द घोषणा कर सकती है।

मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद

सरकार के इस प्रस्ताव से मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टर्स को भारी राहत मिलेगी। स्क्रैपेज पॉलिसी के कारण छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर नया वाहन खरीदने का भारी आर्थिक बोझ है। रिट्रोफिटमेंट की लागत नए वाहन की तुलना में मात्र 30-40 फीसदी होती है। इससे एक तरफ प्रदूषण कम होगा और दूसरी तरफ देश में रिट्रोफिटमेंट इंडस्ट्री के रूप में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। हालांकि, सरकार की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा मानकों को लेकर है। पुराने चेचिस पर भारी बैटरी पैक का वजन और ब्रेकिंग सिस्टम का तालमेल कैसे बैठेगा।

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लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन

आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन (30 लाख ट्रैक्टर सहित) ऐसे हैं, जो स्क्रैपेज पॉलिसी के मानकों (15-20 साल पुराने) के दायरे में आते हैं।

Noida Protest: पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे, हिंसा हुई नहीं, भड़काई गई! रातोंरात बने व्हाट्सएप ग्रुप, बाहर से बुलाए गए लोग… 

Noida Protest: नोएडा में हिंसा हुई नहीं थी, करवाई गई थी…? उत्‍तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार को हजारों की संख्‍या में सड़कों पर उतार आए और उन्‍हीं फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने लगे, जिनमें वो काम करते हैं. ये वहीं, फैक्ट्रियां हैं, जिनसे उनका घर चलता है, उनकी रोजी-रोटी का इंतजाम होता है. कैसे मजदूरों का ज़मीर ऐसी जगह पर तोड़फोड़ करने के लिए कैसे मान गया. इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. जांच में सामने आया है कि हिंसक प्रदर्शन में शामिल कई लोग मजदूर थे ही नहीं. कई व्हाट्सएप ग्रुपों ने भी हिंसा की आग में घी डालने का काम किया.

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रातोंरात WhatsApp ग्रुपों में लोगों किया गया शामिल

पुलिस जांच में पता चला है कि नोएडा में प्रदर्शनकारियों को जुटाने और विरोध को हिंसक बनाने के लिए WhatsApp ग्रुपों का बड़ी संख्‍सा में इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया. यह प्रक्रिया बेहद तेजी से की गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को रातोंरात इन ग्रुपों में शामिल कर लिया गया. इन ग्रुपों के नाम भी अलग-अलग थे, जिससे उनकी पहचान करना शुरुआती दौर में मुश्किल हो गया.

भड़काऊ पोस्‍ट भेज मजदूरों को उकसाया

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक ग्रुप ‘मजदूर आंदोलन’ के नाम से संचालित किया जा रहा था, जिसमें विभिन्न मजदूर संगठनों और समूहों को जोड़ा गया था. इन समूहों में लगातार मैसेज भेजे जा रहे थे, जिनमें लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा था. जांच में यह भी सामने आया है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में कई भड़काऊ और उत्तेजक पोस्ट शेयर किये गए. इन मैसेज का मकसद भीड़ को उकसाना और विरोध को अधिक आक्रामक बनाना था. कुछ पोस्ट में गलत जानकारी और अफवाहें भी फैलाई गईं, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई.

सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया विरोध प्रदर्शन

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ये अहम सबूत मिले हैं. डिजिटल फॉरेंसिक जांच में इन ग्रुपों की गतिविधियों, संदेशों और एडमिन की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया प्रयास दिखाई देता है. वहीं, पुलिस अब इन ग्रुपों के एडमिन और ऑपरेटर्स की पहचान कर रही है. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय थे. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ मैसेजों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.

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7 थानों में FIR, 300 लोग गिरफ्तार

नोएडा सेक्टर-63 में मारुति सुजुकी के वर्कशॉप में उपद्रवियों ने वहां खड़ी कारों में आग लगा दी, दर्जन भर कारों के शीशे भी तोड़ दिए. सेक्टर-63 के पुलिस थाने पर भी पत्थरबाजी हुई, पुलिस ने भी पत्थर फेंकने वालों को खूब दौड़ाया. सेक्टर-15 के आसपास कमर्शियल सेक्टरों से आए लोगो ने एक्सप्रेस-वे जाम कर दिया. शहर के दूसरे कोने पर सेक्टर-62 में फैक्ट्री कर्मचारियों ने नेशनल हाइवे को भी पूरी तरह जाम करने की कोशिश की, जिससे कई घंटों तक जाम लगा रहा.  पुलिस ने बताया कि 300 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस के मुताबिक, 80 से अधिक जगह पर उपद्रव हुआ है. 42 हज़ार के करीब कर्मचारियों इस प्रदर्शन में शामिल थे. नोएडा के 7 थानों में FIR दर्ज कराई गई है. नोएडा से 300 लोगों को प्रीवेंटिव अरेस्ट कर न्यायिक हिरासत में भेज में दिया गया है. प्रदर्शन में शामिल और कानून को हाथ में लेने वाले लोगों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने के निर्देश प्रशासन ने दिये हैं.

अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की प्रांतीय अध्यक्ष उमा छापरिया का पहला प्रांतीय दौरा

​प्रांतीय अध्यक्ष के प्रथम आधिकारिक प्रांतीय दौरे के अंतर्गत कोरबा शाखा में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सेवा और आध्यात्मिकता का भी अनूठा संगम रहा।

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​इसी अवसर पर 2026-28 के लिए प्रीति मोदी जी को शाखा अध्यक्ष के शपथ एवम एक नई ‘सृजन शाखा’ की स्थापना की गई, जो नारी शक्ति के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। ​दौरे का शुभारंभ गौशाला में गौ-माता के दर्शन से हुआ।
​प्रेमा जी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने सभी का हृदय स्पर्श कर लिया, वहीं पंखुड़ी जी ने कुशल मंच संचालन से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
​यह संपूर्ण आयोजन राष्ट्रीय नेत्र दान एवं अंगदान प्रमुख सरोज जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रांतीय उपाध्यक्ष शशि जी, प्रांतीय सचिव सीमा गुप्ता, प्रांतीय कोषाध्यक्ष रेखा सिंघानिया, कोरबा अध्यक्ष अनिता जी, सत्र 2026-28 की अध्यक्ष प्रीति मोदी जी, कोरबा सृजन शाखा अध्यक्ष मुक्ता जी एवं सीमा गुप्ता जी सहित सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।

​प्रांतीय अध्यक्ष ने अपना उद्बोधन मे कहा धन दौलत विरासत से मिल सकती है लेकिन मान सम्मान हमे सस्कार से ही मिल सकता है बेटियों की बढ़ती उम्र को देखते हुवे बेटी बचाओ,बहु पढ़ाओ के नारे से किया,साथ ही समिति की सभी बहनों को कम खर्च में अधिक लाभ के कार्य करने का संदेश दिया।उसी के साथ कोरबा शाखा की ऊर्जा और सेवा भाव की उन्होंने प्रशंसा की,और सरोज जी के मार्गदर्शन और सभी बहनों के स्नेह का उन्होंने आभार व्यक्त किया।”