Wednesday, May 6, 2026
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Post Office Rules: पोस्ट ऑफिस खाताधारकों के लिए जरूरी खबर, अब ऐसे होगा पैसा जमा और निकासी

Post Office Rules: अगर आपका भी डाकघर (पोस्ट ऑफिस) में खाता है या फिर पोस्ट ऑफिस की स्कीम में इन्वेस्टमेंट करते हैं तो इसके कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। यह बदलाव आयकर नियम, 2026 के तहत किया गया है। अब किसी भी वित्तीय लेन-देन के लिए पैन कार्ड जरूरी कर दिया है। इसका मतलब है कि अब बिना पैन कार्ड के डिपॉजिट और विड्रॉल नहीं किया जा सकता। इसके अलावा एक फॉर्म को लेकर भी बदलाव किया गया है।

Aadhaar Card Update: क्या सच में अब अलग दिखेगा आपका आधार कार्ड? न्यू लुक पर सरकार ने साफ की स्थिति

क्या है बड़ा अपडेट?

नए आयकर नियम, 2026 के तहत पोस्ट ऑफिस और आईपीपीबी में पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। फिर चाहते खाता खोलना हो, पैसा जमा करना हो, पैसा निकालना हो या फिर एफडी और निवेश करना हो। इन सभी कामों के लिए पैन कार्ड जरूरी हो गया है। दरअसल, सरकार का उद्देश्य है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, बढ़े लेन-देन पर नजर बनी रहेगी और टैक्स की चोरी रोकना है। अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो आपको अब फॉर्म 97 भरना होगा। साथ में पहचान और ट्रांजैक्शन डिटेल देनी होगी।

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और क्या बदलाव किया गया?

इसके साथ ही एक और बड़ा बदलाव किया गया है। वह ये है कि फॉर्म 15जी और 15एच अब मिलाकर फॉर्म 121 कर दिया गया है। टैक्सपेयर्स के लिए नया नियम लागू हुआ। इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अगर आपका खाता पोस्ट ऑफिस में है तो ये जानकारी होनी बेहद जरूरी है।

Aadhaar Card Update: क्या सच में अब अलग दिखेगा आपका आधार कार्ड? न्यू लुक पर सरकार ने साफ की स्थिति

Aadhaar Card Update: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर आधार कार्ड को लेकर कई तरह की खबरें वायरल हो रही हैं. इनमें दावा किया जा रहा था कि अब नया आधार कार्ड अलग रूप में आएगा, जिसमें केवल फोटो और QR कोड ही होगा. आधार पर अन्य कोई जानकारी नहीं होगी. इन खबरों से लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई थी. अब, सरकार ने इन दावों पर स्पष्ट जवाब देकर स्थिति साफ कर दी है.

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क्या बदल जाएगा आपका आधार कार्ड?

बता दें कि Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने इन सभी खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. मंत्रालय ने कहा कि आधार कार्ड के नए लुक को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे सही नहीं हैं और लोगों को भ्रमित करने के लिए फैलाए जा रहे हैं. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें.

क्या था वायरल दावा?

सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि नए आधार कार्ड में सिर्फ फोटो और QR कोड होगा. दावा यह भी किया गया कि ऐसा बदलाव डेटा सुरक्षा और पहचान चोरी रोकने के लिए किया जा रहा है. लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया है.

फिलहाल आधार कार्ड में कई जरूरी जानकारियां होती हैं, जैसे-

  • फोटो
  • नाम
  • पता
  • जन्मतिथि
  • 12 अंकों का आधार नंबर और
  • QR कोड

यह सभी जानकारी पहचान की पुष्टि करने के लिए जरूरी होती है.

UIDAI ने क्या दी सलाह?

Unique Identification Authority of India ने लोगों से कहा है कि वे किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें. सही जानकारी के लिए केवल UIDAI के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या प्रेस रिलीज देखें.

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क्यों फैलती हैं ऐसी अफवाहें?

आधार कार्ड देश का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला दस्तावेज बन चुका है. ऐसे में इससे जुड़ी गलत खबरें तेजी से फैलती हैं. कई बार लोग बिना जांचे-परखे जानकारी शेयर कर देते हैं, जिससे भ्रम बढ़ता है. आधार कार्ड के लुक में किसी भी बदलाव की खबर फिलहाल गलत है. ऐसे मामलों में घबराने या तुरंत विश्वास करने की बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है.

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नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर स्थित बगलीहार बांध के सभी गेट अभी भी पूरी तरह से बंद हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘सिंधु जल संधि’ को निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को लागू हुए अब एक साल बीत चुका है। सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित की गई यह अहम जल-बंटवारा संधि अभी भी ठंडे बस्ते में है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ही दोनों देशों के बीच सिंधु, चिनाब, झेलम आदि नदियों के पानी का बंटवारा होता है। बांध के गेटों का लगातार बंद रहना इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि संधि के निलंबन का इस क्षेत्र के जल प्रबंधन और पनबिजली संचालन पर कितना गहरा और निरंतर प्रभाव पड़ा है। चिनाब नदी पर बनी यह महत्वपूर्ण ‘बगलीहार पनबिजली परियोजना’ आतंकी हमले के बाद लिए गए इस कड़े फैसले के बाद से ही लगातार कड़ी निगरानी में रखी गई है।

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बगलिहार डैम के गेट क्यों बंद रखे गए हैं?

समझौता निलंबित करने के बाद, भारत ने पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी के बहाव को रोकने और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए चिनाब नदी पर बने बगलिहार डैम के सभी मुख्य गेट बंद कर दिए थे। खबर के मुताबिक, इस बात को एक साल बीत चुका है, लेकिन भारत का रुख अब भी सख्त है। सिंधु जल समझौता अभी भी निलंबित है और बगलिहार डैम के गेट आधिकारिक तौर पर बंद ही रखे गए हैं।

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बारिश के कारण गेट खोले थे

भले ही डैम के गेट पिछले एक साल से बंद हैं, लेकिन हाल ही में रामबन और आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश हुई है। इस मूसलाधार बारिश के कारण चिनाब नदी का जलस्तर अचानक खतरे के निशान की तरफ बढ़ने लगा। डैम की सुरक्षा को बनाए रखने और अतिरिक्त पानी के दबाव को कम करने के लिए, प्रबंधन को डैम के गेट कुछ समय के लिए खोले थे। फिर बंद कर दिए गए।

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Delhi Vivek Vihar Fire: दिल्ली-NCR की हाईराइज बिल्डिंगों में आग लगने की घटनाएं थमती नजर नहीं आ रही है. हाल ही में गाजियबाद के गौर ग्रीन अपार्टमेंट में भीषण आग लगी थी, जिसमें करोड़ों के फ्लैट जल गए. अब दिल्ली के विवेक विहार इलाके में फ्लैट में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है. विवेक विहार इलाके में फ्लैट में भीषण आग में 9 लोगों की मौत हो गई है. मृतकों के शव इस कदर जल गए हैं कि लोग शव देख महिला-पुरुष भी नहीं पहचान पा रहे हैं.

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विवेक विहार बी ब्लॉक के टॉप फ्लोर पर लगी आग

यह भीषण दुर्घटना दिल्ली के शाहदरा जिले के विवेक विहार के बी ब्लॉक में चार मंजिला इमारत में टॉप फ्लोर पर रात तकरीबन 3:00 बजे के आसपास आग लग गई. बताया जा रहा है कि अंदर 9 लोगों की मौत हो चुकी है. स्थानीय निगम पार्षद पंकज लूथरा ने ऊपर से आकर बताया कि  बॉडी इतनी जल चुकी है कि उसमें पहचान नहीं हो पा रही कि औरत कौन है और मर्द कौन है.

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कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

बताया गया कि दिल्ली के विवेक विहार इलाके में आज तड़के 3 बजे 47 पर एक बिल्डिंग में आज लगने की सूचना फायर विभाग को मिली थी. आग B-13 2nd फ्लोर एक बिल्डिंग लगी थी. जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची. इस आग में झुलस कर चार लोगों की मौत हो गई. जबकि इस बिल्डिंग से 12 से 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है.  विवेक विहार इलाके में लगी आग कितनी भीषण थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आग को बुझाने के लिए दमकल की 14 गाड़ियों को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी.

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नई दिल्ली : पूरी तरह से स्वदेशी और अत्याधुनिक तकनीक से लैस है युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा हुआ। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने इस युद्धपोत को तैयार किया है। नीलगिरि-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का यह छठा युद्धपोत है। खास बात यह है कि इसका निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है। यह युद्धपोत आधुनिक तकनीकों से लैस है। इसे दुश्मन की नजरों से बचने यानी स्टेल्थ क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। समुद्र में यह लंबे समय तक टिक सकता है और कई तरह के मिशन संभालने में सक्षम है।

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आठ ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात

जानकारी के मुताबिक, इस युद्धपोत को खास तौर पर खतरनाक बनाती हैं इसकी हथियार प्रणालियां। इसमें दूर तक मार करने वाली आठ ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं। इसके अलावा सतह से सतह पर मार करने वाली बराक मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है। पनडुब्बियों से निपटने के लिए इसमें टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं, जो इसे उन्नत युद्ध क्षमता से लैस बनाते हैं।

क्या है स्टेल्थ तकनीक

‘स्टेल्थ’ तकनीक का मतलब है छिपने की कला। इससे बने युद्धपोतों को दुश्मन के रडार आसानी से पकड़ नहीं पाते। महेंद्रगिरि भी इसी तकनीक से बना है। ‘फ्रिगेट’ मझोले आकार के युद्धपोत होते हैं, जो तेज रफ्तार और ताकतवर हथियारों से लैस होते हैं।

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क्या होगा फायदा

महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से समुद्री सुरक्षा काफी मजबूत होगी। यह युद्धपोत समुद्र में दूर तक नजर रखने और दुश्मनों को रोकने में मदद करेगा। इसके अत्याधुनिक हथियार व सेंसर नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे। हिंद महासागर में भारत की स्थिति और भी मजबूत होगी।

LPG Price Hike: कमर्शियल LPG के बाद 5 किलो ‘छोटू’ सिलिंडर भी महंगा, कीमत में 261 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी

LPG Price Hike: कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में शुक्रवार से भारी बढ़ोतरी की गई है। इससे फूड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के व्यवसायों के लिए लागत बढ़ जाएगी, जबकि घरेलू LPG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, 5 किलोग्राम वाले FTL (फ्री ट्रेड LPG) सिलिंडर की कीमत में भी तत्काल प्रभाव से 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जानकारी के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, इससे आज से दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है। वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसका उपयोग देश भर में लगभग 33 करोड़ घरों द्वारा किया जाता है।

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

कमर्शियल और थोक LPG के लिए बदलाव होंगे लागू

यह बदलाव सिर्फ कमर्शियल और थोक LPG के लिए लागू होगा। जिनका भारत में कुल LPG खपत में बहुत कम हिस्सा है। घरेलू LPG, जो सब्सिडी वाला है और खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, उसे इस बदलाव से बाहर रखा गया है। बता दें कि, 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में हुई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। जो अपने दैनिक कार्यों के लिए कमर्शियल LPG पर निर्भर रहते हैं। उद्योग से जुड़े लोग अक्सर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं, जिसका असर आने वाले हफ्तों में भोजन और डाइनिंग की कीमतों में देखने को मिल सकता है।

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घरेलू LPG के दामों में कोई बदलाव नहीं

इसके विपरीत, सरकार ने घरेलू LPG के लिए एक संतुलित रवैया अपनाया है, ताकि यह परिवारों के लिए किफायती बनी रहे। 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की कीमत पिछले कई महीनों से बढ़ाए नहीं गए है, जिससे महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वहीं, 5 किलोग्राम वाला फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे प्रतिष्ठान और सीमित व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। उसमें सब्सिडी नहीं दिया जाता है। इसकी कीमत बाजार दरों के करीब होती है, जिससे यह वैश्विक उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

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बालको : छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।

यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।

पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका

इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।

‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।

यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग ₹6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने ₹12,000 से ₹15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।

कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन

हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।

कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।

कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग ₹2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।

ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।

आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती

आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।

सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।

इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।

निर्भरता से विविधता तक

यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।

वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।

यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

Nepali Airlines Controversy: नेपाली एयरलाइन की बड़ी गलती! जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया, विवाद बढ़ने पर मांगी माफी

Nepali Airlines Controversy: नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी ‘नेपाल एयरलाइंस’ एक भारी चूक के कारण विवादों में घिर गई। एयरलाइंस ने अपने एक हालिया पोस्ट और नक्शे में भारत के अभिन्न अंग, पूरे जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया था। इस विवादित नक्शे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भारतीयों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद एयरलाइंस को विवादित पोस्ट हटाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी है।

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क्या है पूरा मामला?

नेपाली एयरलाइंस ने अपने किसी प्रमोशनल कैंपेन, रूट मैप या सामान्य जानकारी को शेयर करने के लिए सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक (नक्शा) पोस्ट किया था। इस ग्राफिक में भारतीय सीमाओं को गलत तरीके से दिखाया गया था। सबसे आपत्तिजनक बात यह थी कि इसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्रों को भारत के बजाय पाकिस्तान के भू-भाग के रूप में दिखाया गया था। भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर हमेशा से एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। किसी भी विदेशी संस्था या कंपनी द्वारा इस तरह का गलत नक्शा प्रकाशित करना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा प्रहार माना जाता है।

सोशल मीडिया पर फूटा भारतीयों का गुस्सा

जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, भारतीय इंटरनेट यूजर्स की नजर इस पर पड़ गई। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने एयरलाइंस की इस ‘हिमाकत’ की कड़ी निंदा की और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने एयरलाइंस के बहिष्कार की भी अपील की। नाराज यूजर्स ने इस पोस्ट में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास को टैग करना शुरू कर दिया, ताकि इस मामले में आधिकारिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा सके।

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अब Aadhaar से नहीं साबित होगी आपकी उम्र, DOB प्रूफ के लिए दिखाने होंगे ये डॉक्यूमेंट

चुपचाप पोस्ट डिलीट

जब एयरलाइंस के मैनेजमेंट ने देखा कि उनकी एक गलती के कारण भारत में भारी बवाल मच गया है और उनकी ब्रांड इमेज को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, तो उन्होंने डैमेज कंट्रोल का सहारा लिया। एयरलाइंस ने विवाद को बढ़ता देख उस विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से चुपचाप डिलीट कर दिया। इसके बाद, नेपाल एयरलाइंस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल (@NepalAirlinesRA) से एक पोस्ट जारी कर इस पूरी घटना पर खेद व्यक्त किया। अपने स्पष्टीकरण में एयरलाइंस ने कहा: हाल ही में हमारे सोशल मीडिया चैनलों पर शेयर किए गए नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए हम तहे दिल से माफी मांगते हैं। इस मैप में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर नक्शानवीसी से जुड़ी कई बड़ी गलतियां थीं, जो नेपाल या नेपाल एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शातीं। हमने तुरंत उस पोस्ट को हटा दिया है और यह पक्का करने के लिए एक अंदरूनी समीक्षा कर रहे हैं कि हमारा कंटेंट सटीकता के उच्चतम मानकों पर खरा उतरे। हम इस क्षेत्र में अपने पड़ोसियों और दोस्तों के साथ अपने मजबूत रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं और उस पोस्ट से किसी को भी हुई ठेस के लिए हमें गहरा खेद है।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत का रुख स्पष्ट है- पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, था और हमेशा रहेगा। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, भारत की बाहरी सीमाओं का गलत चित्रण करना एक दंडनीय अपराध है। अतीत में भी जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), ट्विटर, या अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत का गलत नक्शा दिखाया है, तो भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें इसे सुधारने पर मजबूर किया है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, मीडिया या संगठन जब गलत मैप इस्तेमाल करते हैं तो भारत में तीखी प्रतिक्रिया होती है। पहले भी कई मामलों में इसी तरह का विवाद हुआ। जैसे इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने 2025 के एक मैप में J&K को पाकिस्तान में दिखाया था और बाद में माफी मांगी गई। नेपाल एयरलाइंस की बात करें तो यह नेपाल की फ्लैग कैरियर है, जो मुख्य रूप से काठमांडू से विभिन्न भारतीय शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि), एशिया और मध्य पूर्व में उड़ानें भरती है। ऐसी कंपनियां आमतौर पर मानक अंतरराष्ट्रीय मैप्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन कई बार सस्ते स्टॉक इमेज या गलत डेटा सेट से गलतियां हो जाती हैं। कंपनी ने अब तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है- सिर्फ पोस्ट डिलीट कर दी गई।

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Pan Masala Draft Rule: देश में पान मसाला की पैकेजिंग अब प्लास्टिक से हटकर इको-फ्रेंडली सामग्री में की जाएगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने साफ किया है कि कागज, पेपरबोर्ड, सेलूलोज और अन्य प्राकृतिक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सके। पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचते हुए ऐसे विकल्प अपनाए जाएंगे जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों।

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अब Aadhaar से नहीं साबित होगी आपकी उम्र, DOB प्रूफ के लिए दिखाने होंगे ये डॉक्यूमेंट

इसका मकसद फूड सेक्टर में टिकाऊ और सुरक्षित पैकेजिंग को बढ़ावा देना है। छोटे प्लास्टिक सैशे के इस्तेमाल से भी दूरी बनाई जाएगी। यह कदम प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना है।

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हालांकि, कंपनियों को टिन और कांच जैसे विकल्पों के इस्तेमाल की छूट रहेगी, ताकि वे अपनी जरूरत के मुताबिकपैकेजिंग चुन सकें। एफएसएसएआई ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, ताकि बदलाव को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अब Aadhaar से नहीं साबित होगी आपकी उम्र, DOB प्रूफ के लिए दिखाने होंगे ये डॉक्यूमेंट

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अगर आप अब तक यह सोचते थे कि आपका UIDAI द्वारा जारी Aadhaar कार्ड हर जगह काम आ जाता है, तो यह खबर पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल UIDAI ने एक बड़ा बयान जारी किया है जिसमें बताया गया है कि Aadhaar कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth) के पक्के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। UIDAI ने साफ किया है कि Aadhaar सिर्फ आपकी पहचान और एड्रेस का प्रमाण है, न कि आपकी उम्र या जन्मतिथि का आधिकारिक दस्तावेज।

बताते चलें की देश में लंबे समय से लोग Aadhaar को हर तरह के काम के लिए इस्तेमाल करते आ रहे हैं चाहे वह बैंकिंग हो, स्कूल एडमिशन हो या सरकारी योजनाएं। इस अपडेट के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर Aadhaar में DOB होने के बावजूद यह वैध क्यों नहीं है? और अगर Aadhaar नहीं चलेगा, तो फिर कौन-कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी होंगे?

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आखिर क्यों Aadhaar को DOB प्रूफ नहीं माना जाता

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि Aadhaar में दर्ज जन्मतिथि हमेशा पूरी तरह से वेरीफाई नहीं होती। UIDAI के मुताबिक, कई बार लोग बिना पक्के डॉक्यूमेंट के भी अपनी डेट ऑफ बर्थ डिक्लेअर कर देते हैं या अनुमान के आधार पर दर्ज करवा देते हैं। यानी Aadhaar में जो जन्मतिथि लिखी है, वह जरूरी नहीं कि सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से पूरी तरह सही हो। इसी वजह से इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

सिर्फ UIDAI ही नहीं, बल्कि कोर्ट और कई सरकारी विभाग भी पहले ही साफ कर चुके हैं कि Aadhaar उम्र या जन्मतिथि का पक्का सबूत नहीं है। कई मामलों में अदालतों ने भी कहा है कि Aadhaar की जगह स्कूल सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र ज्यादा भरोसेमंद होते हैं।

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डेट ऑफ बर्थ प्रूफ के तौर पर इन डॉक्यूमेंट्स की होगी जरूरत

अगर आपको अपनी DOB साबित करनी है, तो आपको नीचे दिए गए वैध डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करना होगा:

– Birth Certificate (जन्म प्रमाण पत्र)

– 10वीं की मार्कशीट (SSLC)

– पासपोर्ट

– सरकारी अधिकारी द्वारा जारी DOB सर्टिफिकेट

UIDAI के नियमों के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर Aadhaar में DOB “वेरीफाई” मानी जाती है। असल में नियम नया नहीं है, लेकिन अब इसे लेकर स्पष्टता दी गई है। पहले लोग Aadhaar को हर काम में इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब आपको थोड़ा सावधान रहना होगा। अगर आपके पास सही DOB प्रूफ नहीं है, तो आगे चलकर कई जरूरी काम अटक सकते हैं।