कोरबा : हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।
बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।
पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”
बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”
समय और कैलेंडर
एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”
कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”
कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता की अहम जानकारी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय की Annual Report 2025-26 में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक हमलों के साथ-साथ उसकी एयर डिफेंस प्रणाली और सैन्य ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि भारत ने पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए अपनी मजबूत एयर डिफेंस क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल किया।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के अंदर करीब 314 किलोमीटर दूर उड़ रहे एक Special Mission Aircraft को निशाना बनाया। रिपोर्ट इसे भारत की ओर से सतह से हवा में किया गया अब तक का सबसे लंबी दूरी का हमला बताती है।
रिपोर्ट के अनुसार, S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी विमान से उत्पन्न खतरे को ट्रैक किया। इसके बाद लंबी दूरी की Surface-to-Air Missile को लक्ष्य की ओर गाइड किया गया और मिसाइल ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।
यह जानकारी भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक हवाई खतरों को पहचानने, उन्हें ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोकने की क्षमता को दर्शाती है। AWACS जैसे विमान भी युद्ध के दौरान हवाई गतिविधियों की निगरानी और कमांड एवं कंट्रोल में अहम भूमिका निभाते हैं।
नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 6-7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoJK में चिन्हित नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन ठिकानों को लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) से जोड़ा गया था।
रिपोर्ट में जिन ठिकानों का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं:
सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद – LeT
शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद – LeT
कोटली कैंप – JeM
रहील शाहिद कैंप, कोटली – HM
अहले हदीस कैंप, भीम्बर – LeT
मेमूना जोया कैंप, सियालकोट – HM
सरजल-तोहरा कलां डॉट, गुजरांवाला – JeM
LeT मुख्यालय, मुरीदके
JeM मुख्यालय, बहावलपुर
पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के छह रडार और दो Surface-to-Air Guided Weapon (SAGW) लोकेशन को भी निशाना बनाया। इन अभियानों में एयर-लॉन्च्ड हथियारों के साथ Unmanned Loitering Munitions के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।
इससे साफ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित नहीं रही। पाकिस्तान की हवाई निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था को भी ऑपरेशन के दायरे में शामिल किया गया।
पाकिस्तानी एयरबेस और सैन्य ढांचे पर भी कार्रवाई
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में Nur Khan और Rahimyar Khan Air Bases का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा Chaklala, Sukkur, Murid, Sargodha, Jacobabad और Bholari से जुड़े सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र भी रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन सैन्य ठिकानों से जुड़े हैंगर, फाइटर एयरक्राफ्ट, AEW&C और UCAV जैसे संसाधनों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
रक्षा मंत्रालय की Annual Report 2025-26 में सामने आई जानकारी से ऑपरेशन सिंदूर की व्यापक तस्वीर स्पष्ट होती है। भारतीय कार्रवाई में एक ओर पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहीं दूसरी ओर उसकी एयर डिफेंस प्रणाली और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव बनाया गया।
S-400 द्वारा करीब 314 किलोमीटर दूर हवाई लक्ष्य को निशाना बनाए जाने का उल्लेख भारतीय एयर डिफेंस की लंबी दूरी की क्षमता को रेखांकित करता है। इससे ऑपरेशन के दौरान भारत की आक्रामक कार्रवाई के साथ-साथ उसकी रक्षात्मक और निगरानी क्षमता की भी झलक मिलती है।
रायपुर : मध्य भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) द्वारा चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 18 से 20 सितंबर 2026 तक मेफेयर लेक रिजॉर्ट्स, नया रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के साथ चूजिंग वाइजली इंडिया की सातवीं बैठक भी आयोजित होगी, जो ईकैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम ‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ है। इसमें मुख्य रूप से स्तन कैंसर, स्त्री रोग संबंधी कैंसर और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर पर चर्चा होगी। उपचार के सही विकल्प चुनने और मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मरीज-केंद्रित उपचार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न सत्रों में अनावश्यक उपचार से बचने, उपचार से जुड़े निर्णयों में मरीज की भागीदारी सुनिश्चित करने और दुनिया भर में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को भारत में रोजमर्रा के कैंसर उपचार में प्रभावी रूप से अपनाने पर चर्चा होगी।
वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना का अर्थ मरीजों को उनके घर के करीब बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना भी है। जब देश और दुनिया के विशेषज्ञ क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञों के साथ एक मंच पर आते हैं, तो ज्ञान और अनुभव साझा करने के साथ बेहतर चिकित्सा पद्धतियों से सीखने और स्थानीय स्तर पर उपचार की क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलता है। नया रायपुर में कैंसर विशेषज्ञों का एक साथ आना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है और ऐसे मंचों के महत्व को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “कैंसर उपचार की क्षमता को मजबूत करने के साथ अगली पीढ़ी के विशेषज्ञों को तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष हम देशभर के 50 युवा डॉक्टरों को यात्रा सहायता देते हैं, ताकि वे कॉन्क्लेव में शामिल होकर इस क्षेत्र के श्रेष्ठ विशेषज्ञों से सीख सकें और अपने ज्ञान व कौशल को मजबूत कर सकें।”
समय और कैलेंडर
कॉन्क्लेव में यूके, अमेरिका, यूएई, नेपाल, श्रीलंका, इजराइल, बेल्जियम, कनाडा और स्विट्जरलैंड से 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनके साथ देशभर से 200 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। विशेषज्ञ कैंसर उपचार, चिकित्सा अनुसंधान, सटीक कैंसर उपचार, रेडिएशन, सर्जरी और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
तीन दिनों के दौरान 20 से अधिक परिचर्चाएं, बहु-विषयक सत्र, वाद-विवाद और वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें स्तन कैंसर की लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी शामिल होगा। साथ ही विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी, चिकित्सा अनुसंधान और क्लिनिकल ट्रायल की रूपरेखा, आनुवंशिक जांच और सटीक कैंसर उपचार, कैंसर की पैथोलॉजी, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तथा नई पीढ़ी की न्यूक्लियर मेडिसिन और थेरानोस्टिक्स जैसे विषय शामिल होंगे।
कॉन्क्लेव में वीमेन फॉर ऑन्कोलॉजी की नेटवर्किंग और मार्गदर्शन बैठक भी आयोजित होगी। इसमें कैंसर उपचार के क्षेत्र में कार्यरत महिला विशेषज्ञों को एक-दूसरे से जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने, सहयोग बढ़ाने और नेतृत्व व मार्गदर्शन के अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।
शैक्षणिक कार्यक्रम के साथ बीएमसी की ओर से ‘कैनवास फॉर ए लाइफ’ नाम से कला और विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी बीएमसी चैरिटेबल फंड के समर्थन में होगी। यह फंड जरूरतमंद मरीजों को उपचार, जांच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं में भी सहयोग करता है।
पिछले वर्ष आयोजित कॉन्क्लेव में देशभर से 1,000 से अधिक चिकित्सकों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया था। इस वर्ष का आयोजन इससे भी व्यापक होने की उम्मीद है। कॉन्क्लेव के माध्यम से देश-दुनिया के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर भारत में अधिक प्रभावी, समान और मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार की दिशा में विचार साझा करेंगे। कॉन्क्लेव के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। इच्छुक प्रतिभागी बालको मेडिकल सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीएएलसीओएमईडीआईसीएएलसीईएनटीआरई डॉट कॉम के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले प्रतिनिधि और फैकल्टी सदस्य छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, रायपुर से सीएमई क्रेडिट पॉइंट्स प्राप्त करने के पात्र होंगे।
Vehicle Light Rules: रात के समय सड़कों पर तेज हाई बीम हेडलाइट्स से होने वाली चकाचौंध वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बनती है। इससे सामने से आ रहे वाहन चालक की आंखों की रोशनी कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या को कम करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नए सेफ्टी नॉर्म्स अगले साल अप्रैल से लागू किए जा सकते हैं। लंबे समय से जागरूकता अभियानों के बावजूद हाई बीम के गलत इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाने के बाद सरकार अब नियमों के जरिए इसे नियंत्रित करने की तैयारी में है।
प्रस्तावित नियमों के तहत नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलाइट ऑन (AHO) सिस्टम एक्टिव होने पर हेडलाइट केवल लो बीम मोड में ही रहेगी। मौजूदा व्यवस्था में वाहन की सेटिंग के आधार पर AHO सिस्टम लो बीम या हाई बीम, दोनों में से किसी पर भी सक्रिय हो सकता है।
यह बदलाव केवल नए बनने वाले दोपहिया वाहनों पर लागू होगा। पहले से सड़कों पर चल रहे वाहनों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
हेडलाइट की अधिकतम रोशनी की सीमा घटाने का प्रस्ताव
सामने से आने वाले वाहन चालकों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी कम करने के लिए हेडलाइट की अधिकतम लाइट इंटेंसिटी कम करने का प्रस्ताव है।
ड्राफ्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम स्वीकार्य तीव्रता को 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने की बात कही गई है। वहीं, कार और अन्य चार पहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला की जा सकती है।
सफेद रोशनी की चकाचौंध भी होगी नियंत्रित
अत्यधिक सफेद और ज्यादा कलर टेम्परेचर वाली हेडलाइट्स व फॉग लैंप्स से रात में अधिक चकाचौंध होने की समस्या सामने आती है। इससे सामने वाले चालक की विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट में वाहन की रोशनी का अधिकतम कलर टेम्परेचर 6,500K निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मेन बीम हेडलाइट्स की माउंटिंग हाइट को पासिंग बीम हेडलाइट्स के समान स्तर पर रखने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
शहरों में हाई बीम पर बजेगा वार्निंग अलार्म
शहरी इलाकों और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर अनावश्यक हाई बीम के इस्तेमाल को रोकने के लिए नई कारों और दोपहिया वाहनों में स्पीड-सेंसिटिव ऑडियो वार्निंग सिस्टम लगाया जा सकता है।
अगर वाहन चालक कम गति पर मैनुअली हाई बीम ऑन करता है, तो वाहन में बीप या साउंड वार्निंग बज सकती है। इसका उद्देश्य चालक को हाई बीम बंद कर लो बीम इस्तेमाल करने के लिए अलर्ट करना होगा।
यह सिस्टम स्पीड के हिसाब से काम करेगा। यदि वाहन 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से हाईवे पर चल रहा होगा, तो वार्निंग नहीं बजेगी। हाईवे पर कम रोशनी वाले इलाकों में लंबी दूरी तक देखने के लिए हाई बीम की जरूरत को देखते हुए यह प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
रात, कोहरे और खराब मौसम में भारी वाहनों की पहचान आसान बनाने के लिए भी नए प्रावधान प्रस्तावित हैं। ड्राफ्ट के अनुसार बसों, ट्रकों और अन्य कमर्शियल भारी वाहनों पर प्रमाणित रिफ्लेक्टिव टेप लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।
रिफ्लेक्टिव टेप की वजह से पीछे या सामने से आने वाले वाहन चालक दूर से ही भारी वाहनों की मौजूदगी पहचान सकेंगे। इससे कम दृश्यता वाले हालात में टक्कर और सड़क हादसों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य रात में हाई बीम से होने वाली चकाचौंध को कम करना, वाहनों की दृश्यता बेहतर करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है। नए नियम लागू होने के बाद खासकर नए वाहनों की हेडलाइट व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
ATM New Rule: बैंक के लंबे प्रोसेस और पोस्ट द्वारा घर पर डेबिट कार्ड आने का इंतजार लोगों के लिए परेशानी का सबब है. लेकिन अब एक ऐसी सुविधा शुरू हो रही है, जिससे आप नए पर्सनल RuPay कार्ड ATM से ही जारी कर सकेंगे. यह पहल उन तीन फाइनेंशियल इन्क्लूज़न उपायों का हिस्सा है, जिन्हें मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में डिपार्टमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल सर्विसेज़ (DFS) ने पेश किया था. यह नया ओपन-सोर्स Android-बेस्ड ATM सॉल्यूशन इस तरह से बनाया गया है कि ग्राहक सीधे मशीन से पर्सनलाइज़्ड RuPay डेबिट, क्रेडिट और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) ले सकें.
नया सिस्टम ओपन सोर्स बेस्ड ATM सॉल्यूशन कस्टमर्स को मशीन से ही पर्सनल रूप से तैयार किए गए RuPay डेबिट, क्रेडिट और NCMC कार्ड प्राप्त करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. यानी आप ATM का इस्तेमाल करते हुए RuPay डेबिट कार्ड, क्रेडिट और NCMC कार्ड हासिल कर सकते हैं. इससे डेबिट और क्रेडिट कार्ड के लिए लंबा इंतजार अब खत्म हो जाएगा. यानी ATM से केवल कैश ही नहीं बल्कि ATM कार्ड भी निकाल सकते हैं और उससे कैश निकालने के लिए इस्तेमाल भी कर सकते हैं.
सार्वजनिक बैंक कर रहे हैं वैल्यूएशन
फिलहाल इस मामले में सार्वजनिक बैंक वैल्यूएशन प्रॉसेस कर रहे हैं. इनमें 9 बैंक, NPCI और ATM निर्माताओं के साथ मिलकर समाधान का आकलन कर रहे हैं. इन 9 बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनिय बैंक ऑफ इंडिया, स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक और एयरटेल पेमेंट्स बैंक शामिल हैं. बड़े सार्वजनिक बैंकों और निजी भुगतान केंद्रिय संस्थानों की भागीदारी से यह परीक्षण करने में मदद मिल सकती है कि यह समाधान अलग-अलग बैंकिंग मॉडलों और कस्टमर कैटगरी में कैसे काम करता है.
ATM मशीन से अन्य कई सर्विस को विकसित करने की कवायद की जा रही है. इसमें चेक जमा करने, अकाउंट खोलने और लोन अप्लाई जैसे सर्विस के लिए भी ATM को विकसित किया जा रहा है. इससे बैकों को इन मशीनों को बड़े स्तर पर डिजिटल बैंकिंग संपर्क के तौर पर उपयोग करने की सुविधा मिल सकती है.
No Toll Barrier Rules 2027: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया है कि केंद्र सरकार देश भर के सभी टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक टोल प्लाजा पर लगने वाली गाड़ियों की लाइन और वेटिंग टाइम को पूरी तरह खत्म करना है, जिससे वाहनों को टोल चुकाने के लिए रुकना न पड़े. इस मौके पर नितिन गडकरी ने फास्टैग को एक सक्सेस स्टोरी बताते हुए कहा कि शुरुआत में उपयोगकर्ताओं को कुछ समस्याएं जरूर हुईं, लेकिन जनता के फीडबैक के आधार पर इसे लगातार बेहतर बनाया गया है.
हाइब्रिड टेक्नोलॉजी: नया बैरियर-फ्री सिस्टम FASTag और ऑटोमेटिक नंबर-प्लेट रिकग्निशन कैमरों के साथ मिलकर काम करेगा.
सड़कों पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां: हाई-स्पीड कैमरों की मदद से वाहन के गुजरते ही नंबर प्लेट और फास्टैग से अपने-आप टोल की कटौती हो जाएगी.
समय सीमा: अगले साल फरवरी-मार्च तक इस तकनीक को प्रमुख टोल प्लाजा पर लागू करने की योजना है, जिससे टोल बूथों के बैरियर हटा दिए जाएंगे.
ओवरलोडिंग वाहनों के लिए लागू होगी वे-इन-मोशन तकनीक
सड़कों की समय से पहले खराबी और दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनने वाली कमर्शियल ट्रकों की ओवरलोडिंग को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है. इसके तहत सरकार एक ऐसी तकनीक तैयार कर रही है, जिससे सड़क पर चलते ही ट्रक के वास्तविक वजन का तुरंत पता चल जाएगा. इस रियल-टाइम ऑटोमैटिक वेट-चेकिंग सिस्टम को चालान और अनुपालन तंत्र से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे वजन में धांधली और टोल चोरी पर पूरी तरह रोक लगेगी.
टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने के दौरान इंजन चालू रहने से होने वाले ईंधन के नुकसान पर चिंता जताते हुए गडकरी ने कहा कि टोल प्लाजा पर गाड़ियों का वेटिंग टाइम 10 सेकंड से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यही इस सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है. ऐसे में टोल पार करने में लगने वाले समय को शून्य के करीब लाने से भारी मात्रा में ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स दक्षता में भी सुधार आएगा. मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में 55 नए फ्लाईओवर्स दिए गए हैं, जिसने ट्रैफिक को संभालने में अहम भूमिका निभाई है.
राजमार्ग निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए धन की उपलब्धता पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश और विदेशी निवेशकों के भरोसे की ओर इशारा किया. गडकरी ने कहा कि एनएचएआई के इन्विट बॉन्ड्स को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं और तनाव के माहौल के बावजूद NHAI के बॉन्ड जारी होने के महज 7 घंटे के भीतर पूरी तरह ओवर सब्सक्राइब हो गए. इससे साफ है कि देश में हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की कोई कमी नहीं है.
कोरबा : किसी गांव में जब किसान अपनी फसल के लिए बारिश का इंतजार करने के बजाय सिंचाई के भरोसे दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे, जब किसी महिला के हाथों का हुनर परिवार की आय का जरिया बन जाए, जब किसी युवा को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार का अवसर मिले और जब किसी बच्चे को गांव की आंगनबाड़ी में बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, तब विकास केवल एक आंकड़ा नहीं रहता, वह जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन जाता है।
भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास यात्रा समुदाय के साथ मिलकर दीर्घकालिक बदलाव की सोच पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको की पहल ने 123 गांवों में 1.80 लाख लोगों तक पहुंच बनाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के माध्यम से लोगों की क्षमताओं को मजबूत किया गया। किसान आधुनिक कृषि अपनाकर दूसरों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और उद्यमों का संचालन कर रही हैं तथा युवा कौशल के माध्यम से रोजगार और नेतृत्व के अवसर हासिल कर रहे हैं। यह साझी भागीदारी विकास को केवल परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थायी सामाजिक बदलाव की यात्रा बनाती है।
जीवन के हर पड़ाव से जुड़ा विकास
बालको की सामुदायिक विकास रणनीति ‘मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण’ पर आधारित है, जिसमें व्यक्ति और परिवार के जीवन के विभिन्न चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक निरंतर विकास पर ध्यान दिया गया है।
इसी सोच का उदाहरण नंद घर हैं, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और बच्चों के अनुकूल सीखने के स्थानों में विकसित किया गया है। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया तथा चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में बालको ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कोरबा और कवर्धा में 2 कोचिंग केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ। इन प्रयासों ने युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ अपने भविष्य को नई दिशा देने का अवसर दिया।
कृषि नवाचार और तकनीक से खेती में नया विश्वास
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार आज भी कृषि है। इसी सोच के साथ मोर जल मोर माटी कार्यक्रम के माध्यम से जल सुरक्षा, आधुनिक कृषि और आय के विविध स्रोतों को एक साथ जोड़ा गया है। वित्तवर्ष 2026 में यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया।
जल संरक्षण की विभिन्न व्यवस्थाओं, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों के चयन, मिट्टी की जांच तथा फसल में कीट एवं पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। इससे उत्पादन में लगभग 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित हुए। इस तरह खेती अधिक स्थायी आजीविका का आधार बनी।
वेदांता स्किल स्कूल: कौशल से रोजगार तक
ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाने में वेदांता स्किल स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तवर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा स्थित तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 82 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार या उद्यमिता से जुड़ाव हासिल किया। रोजगार उपलब्ध कराने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क 12 राज्यों तक विस्तारित हुआ।
प्रशिक्षण में 61 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ युवाओं को व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से परिचय, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी सत्र और कर्मचारियों का मार्गदर्शन भी मिला। यह पहल युवाओं में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता विकसित कर उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्नति परियोजना: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक
बालको के सामुदायिक विकास प्रयासों में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उन्नति परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है।
वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 561 समूह और 6,003 महिलाओं तक पहुंची। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक रूप से सक्रिय हैं। समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 0.92 करोड़ रुपये हुई, जबकि 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा गया, जिससे लगभग 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।
उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी के अंतर्गत कोसा रेशम जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। वहीं 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अवसर मिला और प्रति महिला लगभग 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर बना।
कोसा रेशम: विरासत से आजीविका तक
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोसाकारी पहल की शुरुआत की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ नाम से ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत ने बुनकरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में नई राह खोली।
स्वास्थ्य: बेहतर उपचार आपके द्वार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अत्याधुनिक कैंसर उपचार तक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की है। आरोग्य परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।
65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच में 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों ने 70 बस्तियों में पखवाड़ेवार सेवाएं दीं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ लिया।
नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,290 मरीजों ने सामुदायिक विकास सहायता के तहत उपचार सेवाओं का लाभ लिया। केंद्र में 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार हुए। साथ ही, मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली स्थापित की गई।
बेहतर जीवन के लिए सामुदायिक सुविधाएं
विकास का अर्थ बुनियादी सुविधाओं तक सम्मानजनक पहुंच भी है। वित्तवर्ष 2026 में बालको ने 4 सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और 2 सामुदायिक मंच बनाए, जिनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन सुविधाओं ने स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए साझा स्थान उपलब्ध कराए।
खेल और संस्कृति से नई उड़ान
युवाओं की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें अवसर देने के लिए लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ते हुए 29 स्कूलों में तीरंदाजी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई और 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।
आंकड़ों से आगे, बदलाव की कहानी
1.80 लाख लोगों तक पहुंच बालको की सामुदायिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आंकड़ा है, लेकिन इसकी असली पहचान उन बदलावों में है, जो लोगों के जीवन में दिखाई देते हैं। किसान का बढ़ा आत्मविश्वास, महिला की आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता, कौशल और रोजगार से जुड़ता युवा, बेहतर सीखने के अवसर पाता बच्चा और समय पर स्वास्थ्य सेवा से मजबूत होता परिवार, यही इस यात्रा की वास्तविक उपलब्धियां हैं।
बालको का प्रयास सामुदायिक विकास को परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय साझी विकास यात्रा बनाना है, जहां समुदाय अपनी क्षमताओं को मजबूत कर भविष्य की चुनौतियों का सामना स्वयं कर सके। स्थायी विकास तभी संभव है, जब सहयोग आत्मविश्वास में, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत में बदल जाए। यही बालको की भावना है, प्रेरित करना, सक्षम बनाना और समुदाय के साथ मिलकर बेहतर, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना।
नई दिल्ली: 18वें ब्रिक्स समिट की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली छावनी में तब्दील हो गई है। सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। लुटियंस दिल्ली और VVIP इलाकों को सुरक्षा के कई घेरों में रखा गया है। एयरपोर्ट से लेकर भारत मंडपम और विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटलों तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की नजर है।
सामने आई जानकारी के अनुसार, करीब 15 हजार पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां दिल्ली में हस्तियों की सुरक्षा में तैनात हैं। दिल्ली में सुरक्षा इतनी सख्त कर दी गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। अधिकारी के मुताबिक, VVIP इलाके में 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनमें फेस रिकग्निशन सिस्टम और गाड़ियों के नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस होटलों की सुरक्षा, कई लेयर में कर रही हैं। 30 हजार से अधिक सुरक्षाबल तैनात हैं और चप्पे-चप्पे की निगरानी रखी जा रही है।
VVIP इलाकों में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे
VVIP इलाकों में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनमें फेस रिकग्निशन और गाड़ियों के नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। सुरक्षा के लिए एक केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से अलग-अलग इलाकों में लगे कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। विदेशी मेहमान जिन होटलों में ठहरेंगे, वहां भी सुरक्षा की कई परतें बनाई गई हैं। VVIP इलाकों को अलग-अलग जोन में बांटा गया है और हर जोन की जिम्मेदारी एक DCP को दी गई है। एयरपोर्ट, होटल और कार्यक्रम स्थल के बीच मेहमानों की आवाजाही के दौरान भी सुरक्षा का खास ध्यान रखा जा रहा है। बता दें कि BRICS सम्मेलन में शामिल होने कई देशों के प्रमुख भारत आ रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लोगों के लिए सभी रास्ते लगातार बंद नहीं किए जाएंगे। VVIP मूवमेंट के दौरान और जरूरत के मुताबिक ही कुछ रास्तों को थोड़ी देर के लिए बंद किया जाएगा। आम लोगों से प्रभावित रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की गई है। BRICS समिट के दौरान मेट्रो सेवा पर सामान्य तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। यानी सड़क मार्ग पर कुछ समय के लिए बदलाव हो सकता है, लेकिन मेट्रो से सफर करने वालों को सामान्य तौर पर परेशानी नहीं होगी।
नई दिल्ली: 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से त्रस्त नेपाल को भारत से बड़ी मदद मिली है. हादसे के तुरंत बाद भारत ने नेपाल की मदद शुरू की. राहत सामग्री भेजने के साथ-साथ नेपाल में लापता लोगों की तलाश, शवों की डीएनए टेस्टिंग तक में भारतीय दल पूरी तत्परता से जुटे हैं. बुधवार को भारतीय वायुसेना का आठवां विमान 35 टन राहत और बचाव सामग्री लेकर नई दिल्ली से काठमांडू पहुंचा. जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है. काठमांडू में इस राहत सामग्री को नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा, “राहत और बचाव सामग्री के साथ 8वीं भारतीय उड़ान, जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है, काठमांडू पहुंची और नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई.”
मालूम हो कि नेपाल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं. भारत नेपाल को इस भीषण आपदा से उबरने में मदद में लगा है. इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत ने अब तक सात विमानों से 95 टन राहत सामग्री भेजी है.
अभी तक 130 टन राहत सामग्री भेज चुका भारत
पहले के 7 बेड़े में 95 टन और आंठवें बेड़े में 35 टन राहत सामग्री अभी तक भारत नेपाल को भेज चुका है. इसके साथ ही नेपाल के राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भी तैनात की गई हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हम इस आपदा में उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर, भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और आगे भी नेपाल के राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों में मदद करना जारी रखेगा. हमारी फोरेंसिक टीम और हमारी टनल रेस्क्यू टीम, दोनों टीमें जमीन पर काम कर रही हैं. वे बचाव और राहत कार्यों में मदद कर रही हैं.”
भारतीय फोरेसिंक टीम काठमांडू की दो लैब में कर रही डीएनए टेस्टिंग
उन्होंने बताया, “फोरेंसिक टीम अभी काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में काम कर रही है, जहां वे इन दो प्रयोगशालाओं में 1200 डीएनए नमूनों पर काम कर रहे हैं. हम नेपाल की जरूरत के हिसाब से उनकी मदद करना जारी रखेंगे. जैसा कि मैंने पिछली बार बताया था, इस आपदा में 275 भारतीय नागरिक लापता हैं. एमईए के अनुसार, नेपाल के चल रहे बचाव, राहत और फॉरेंसिक अभियानों का समर्थन करने के लिए भारत से 54 विशेषज्ञ कर्मियों की तैनाती के अलावा 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी गई है.
भारत ने नेपाल को मदद में क्या कुछ भेजा?
भारत द्वारा नेपाल को भेजे गए राहत बचाव सामग्री में अस्थायी आश्रयों, कंबलों, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाओं से युक्त मानक राहत सामग्री के अलावा, भारतीय पक्ष ने विशेष वस्तुएं और उपकरण भी प्रदान किए हैं. जिसमें टनल और मड रेस्क्यू उपकरण, जिसमें मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, श्वास उपकरण, इन्फ्लेटेबल वॉकवे आदि शामिल हैं. डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए DNA किट, अभिकर्मक और उपकरण; पोर्टेबल जेनसेट, लाइटिंग टावर और डीवाटरिंग पंप जैसी वस्तुएं शामिल है.
चिलिमे और लांगटांग में टनल में तलाशी अभियान चला रही भारतीय टीम
भारत की विशेष टनल बचाव टीम ने शुरू में नेपाल में दो स्थानों – चिलिमे और लांगटांग – पर नेपाली सेना के साथ समन्वय में अपना अभियान शुरू किया था. एमईए ने कहा, “चल रहे खोज प्रयास अब चिलिमे में केंद्रित हैं, जहां इलाके, कठिन पहुंच की स्थिति और सुरंग की ढलान ने चुनौतियां पेश की हैं. भारतीय टनल बचाव दल अपने काम में दृढ़ रहा है और मैनुअल प्रयासों और नवीन तकनीकों के उपयोग से अच्छी प्रगति सुनिश्चित की है.”
लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट को अनस्टेबल एप्रोच के कारण लैंडिंग को टालते हुए गो-अराउंड करना पड़ा. एयर इंडिया की यह फ्लाइट दिल्ली से आ रही लखनऊ आ रही थी और खास बात यह यही कि राहुल गांधी भी इसी फ्लाइट में सवार थे. पायलट की सूझबूझ से दूसरे प्रयास में विमान को अमौसी एयरपोर्ट (CCSI Airport) पर सुरक्षित उतार लिया गया. एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को एप्रोच अनस्टेबल होने के कारण पायलट ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लैंडिंग रोक दी और विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर नए एप्रोच के लिए भेजा.
लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को लैंडिंग से ठीक पहले गो-अराउंड करना पड़ा. खास बात यह रही कि इस फ्लाइट में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सवार थे. हालांकि, पायलट की सूझबूझ से दूसरे प्रयास में विमान की सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई. घटना के बाद यात्रियों और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली. जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया का यह विमान जब रनवे के करीब था, तभी अचानक झटका महसूस हुआ और पायलट ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को दोबारा ऊपर उठा लिया. अचानक हुई इस घटना से फ्लाइट में बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. गो-अराउंड विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया है.
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह घटना पायलट की ओर से अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रिया से जुड़ी थी. यह विमान (AI-1717) दिल्ली से दोपहर 2:20 बजे चला था और इसे शाम करीब 3:30 बजे लखनऊ पहुंचना था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसी विमान में सवार थे.