Friday, October 16, 2026
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BALCO सहित वेदांता समूह के एक लाख कर्मचारियों को मिलेगा 10 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन, चेयरमैन ग्रांट की घोषणा

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कोरबा : विजयादशमी और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात की घोषणा की है। इस पहल के तहत कोरबा स्थित भारत एल्यूमीनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) सहित समूह की विभिन्न इकाइयों में कार्यरत लगभग एक लाख कर्मचारियों को उनकी वार्षिक सैलरी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि ‘चेयरमैन ग्रांट’ के रूप में दिए जाने की घोषणा की गई है। इस फैसले से कर्मचारियों और उनके परिवारों को त्योहारों के दौरान आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों के नाम जारी एक विशेष संदेश में अनिल अग्रवाल ने अपने शुरुआती जीवन के संघर्षों और उनसे जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने पटना में बिताए दिनों का उल्लेख करते हुए बताया कि महंगाई बढ़ने पर वह अपनी मां के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देख सकते थे। जीवन के उन अनुभवों ने उन्हें आम परिवारों की आर्थिक चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया। इसी संवेदनशीलता और मौजूदा समय में बढ़ती जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वेदांता समूह के कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की पहल की है।

इस घोषणा को कर्मचारियों के प्रति समूह के सहयोग और उनकी खुशहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। त्योहारों के समय मिलने वाली यह अतिरिक्त राशि कर्मचारियों को घरेलू जरूरतों, खरीदारी और अन्य खर्चों की योजना बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इस राशि के भुगतान की निर्धारित तारीख और पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर की जानी चाहिए।

चेयरमैन ने कर्मचारियों को आर्थिक सहायता देने के साथ ही समूह की व्यावसायिक प्राथमिकताओं पर भी जोर दिया। उन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच उत्पादन बढ़ाने, परिचालन लागत कम करने और कार्यक्षमता में सुधार लाने का आह्वान किया। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डिजिटल तकनीकों को दैनिक कार्यप्रणाली में अपनाकर व्यावसायिक उत्कृष्टता हासिल करने की आवश्यकता बताई।

अनिल अग्रवाल ने औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका संदेश कर्मचारियों को बेहतर प्रदर्शन करने और समूह की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित करने वाला है।

कोरबा की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले BALCO के कर्मचारियों के बीच इस घोषणा को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। त्योहारों से पहले अतिरिक्त आर्थिक सहायता की यह पहल कर्मचारियों के मनोबल को मजबूत करने और कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाने में सहायक हो सकती है।

PM Kisan 24th Installment: अक्टूबर में कब आएगी पीएम किसान की 24वीं किस्त? ₹2,000 पाने के लिए पूरी करें ये जरूरी काम

PM Kisan 24th Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का देशभर के करोड़ों किसानों को इंतजार है। योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। प्रत्येक किस्त में किसानों के बैंक खाते में 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं।

पिछली यानी 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी होने के बाद अब अगली किस्त को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अक्टूबर में 24वीं किस्त जारी होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। ऐसे में किसानों को किस्त से जुड़ी जानकारी के लिए पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

Pradhan Mantri Divyangjan Pension Yojana: दिव्यांग पेंशन के नियमों में बड़ा बदलाव, 40% दिव्यांगता पर भी मिलेगी पेंशन; राशि में बढ़ोतरी

पीएम किसान की 24वीं किस्त कब आएगी?

पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। रबी फसलों की बुआई के समय बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदने के लिए यह राशि किसानों के काम आती है।

हालांकि, 24वीं किस्त अक्टूबर में ही जारी होगी, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संभावित तारीख को अंतिम न मानें और सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

ऐसे चेक करें पीएम किसान की किस्त का स्टेटस

किसानों को अगली किस्त का इंतजार करने के साथ अपने आवेदन और भुगतान की स्थिति भी जांच लेनी चाहिए। इसके लिए नीचे दिए गए तरीके अपनाएं।

  1. सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।
  2. वेबसाइट पर Know Your Status विकल्प चुनें।
  3. मांगी गई जानकारी दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करने के लिए संबंधित विकल्प का इस्तेमाल करें।
  4. स्क्रीन पर दिखाई देने वाले विवरण के जरिए आवेदन, पात्रता और भुगतान की स्थिति जांचें।
  5. यदि स्टेटस में कोई समस्या दिखाई देती है, तो संबंधित कृषि विभाग के अधिकारी या आधिकारिक हेल्पडेस्क से संपर्क करें।

₹2,000 की किस्त पाने के लिए इन कामों को न करें नजरअंदाज

पीएम किसान की किस्त अटकने की एक वजह जरूरी दस्तावेजों या बैंक संबंधी जानकारी में गड़बड़ी भी हो सकती है। इसलिए किसानों को समय रहते निम्नलिखित बातों की जांच कर लेनी चाहिए।

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  • ई-केवाईसी पूरी करें: पीएम किसान योजना के लिए निर्धारित ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।
  • बैंक खाते की जानकारी जांचें: खाता सक्रिय होना चाहिए और भुगतान के लिए जरूरी बैंक विवरण सही होने चाहिए।
  • आधार और बैंक संबंधी विवरण जांचें: आधार से जुड़ी जानकारी तथा बैंक खाते की सीडिंग संबंधी आवश्यकताएं पूरी होने की पुष्टि करें।
  • भूमि रिकॉर्ड की जांच करें: कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेजों में कोई गलती या अधूरी जानकारी नहीं होनी चाहिए।
  • लाभार्थी स्टेटस देखें: पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से पता करें कि आवेदन और भुगतान की स्थिति सही है या नहीं।

ध्यान रखें कि केवल इन प्रक्रियाओं को पूरा कर लेने से किस्त जारी होने की गारंटी नहीं होती। भुगतान योजना के नियमों, पात्रता और सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

पीएम किसान के नाम पर होने वाली ठगी से रहें सावधान

पीएम किसान की अगली किस्त और ई-केवाईसी के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी न दें।

यदि कोई व्यक्ति किस्त जारी कराने या खाते में 2,000 रुपये ट्रांसफर करने के बदले पैसे मांगता है, तो उस पर भरोसा न करें। किसी भी समस्या के समाधान के लिए आधिकारिक पीएम किसान पोर्टल, बैंक या संबंधित कृषि विभाग से ही संपर्क करें।

महत्वपूर्ण बात: 24वीं किस्त की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। किसानों को अक्टूबर में भुगतान की संभावना से जुड़ी खबरों के बजाय आधिकारिक सूचना के आधार पर ही योजना की अगली किस्त के बारे में निर्णय लेना चाहिए।

Pradhan Mantri Divyangjan Pension Yojana: दिव्यांग पेंशन के नियमों में बड़ा बदलाव, 40% दिव्यांगता पर भी मिलेगी पेंशन; राशि में बढ़ोतरी

Pradhan Mantri Divyangjan Pension Yojana: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक इस योजना को जारी रखने के ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। सरकार के इस फैसले से देशभर के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस निर्णय के तहत दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम, पात्रता मानदंड और सहायता राशि में बदलाव किए गए हैं। वहीं, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

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दिव्यांग पेंशन योजना का बदला नाम

केंद्र सरकार ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही दिव्यांगता के निर्धारित प्रतिशत और न्यूनतम आयु से जुड़ी शर्तों में भी बदलाव किया गया है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य अधिक दिव्यांगजनों को पेंशन योजना के दायरे में लाना और उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी मिलेगी पेंशन

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप पात्रता मानदंड में राहत दी गई है। पहले योजना के तहत 80 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त थी, जिसे घटाकर 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता कर दिया गया है। इसके बाद 40 प्रतिशत या उससे अधिक निर्धारित दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्ति भी योजना का लाभ ले सकेंगे।

इसके अलावा, पेंशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा शून्य वर्ष निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। यानी पात्रता की अन्य शर्तें पूरी होने पर जन्म से दिव्यांग बच्चे भी पेंशन के दायरे में आ सकेंगे।

कितनी बढ़ाई गई पेंशन राशि?

नई दरों के अनुसार, दिव्यांगजन पेंशन की मासिक सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है।

  • 0 से 79 वर्ष की आयु: 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये प्रतिमाह।
  • 80 वर्ष और उससे अधिक आयु: 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रतिमाह।

इन बदलावों से पात्र लाभार्थियों को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी।

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तीन महीने में जारी होंगी नई गाइडलाइन्स

सरकार के अनुसार, दिव्यांग पेंशन के नए पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दरों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश अगले तीन महीनों के भीतर जारी किए जाएंगे। इसके बाद नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।

वहीं, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना की शेष शर्तों तथा सहायता राशि में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये योजनाएं मौजूदा व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत, जेल भेजे गए

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को बुधवार सुबह मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इससे पहले मंगलवार को पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया था। आरोप है कि तीनों ने पुलिस बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।

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बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप

जानकारी के अनुसार, तीनों नेताओं को बुधवार सुबह करीब 8 बजे दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। बताया जा रहा है कि इससे पहले उन्हें 50 हजार रुपये का बॉन्ड भरने और एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होने की शर्त पर रिहा किया गया था।

इस बार पुलिस ने उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बिना अनुमति प्रवेश और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप

पेशी से पहले CJP की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ बिना अनुमति प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

रत्ना सिंह के अनुसार, तीनों को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि नेताओं को सुबह करीब 3 बजे एक निजी वैन से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया।

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SIR को लेकर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। CJP और अन्य समूह मतदाता सूची की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसी बीच, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों के रूप में घोषित किया था। आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन की अनुमति वाले स्थलों की सूची से हटा दिया गया।

फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

बालको के पोषण माह अभियान से बाल पोषण के प्रति बढ़ी सामुदायिक जागरूकता

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बालकोनगर : वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने पोषण माह 2026 का समापन कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान बच्चों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ खानपान की आदतों को प्रोत्साहित करने और बाल विकास में समुदाय की भागीदारी मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित की गईं। बालको की ‘आरोग्य’ परियोजना और ‘नंद घर’ पहल के तहत आयोजित इस अभियान के माध्यम से 28 नंद घरों में 1,500 से अधिक बच्चों, माताओं और उनकी देखभाल करने वालों तक पहुंच बनाई गई। यह पहल भारत सरकार के पोषण अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप बच्चों के बेहतर पोषण को बढ़ावा देने पर केंद्रित रही।

अभियान के दौरान परिवार वालों को बच्चों के शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और बेहतर स्वास्थ्य में पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। माताओं और देखभाल करने वालों ने जागरूकता सत्रों, बच्चों के वजन और विकास की जांच तथा संतुलित आहार और खानपान से जुड़ी चर्चाओं में भाग लिया। स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन बनाने का प्रदर्शन भी किया गया, ताकि परिवार इन तरीकों को अपने दैनिक जीवन में अपना सकें।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने कहा, “हमारी स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाएं सभी आयु वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। इनमें बच्चों का पोषण हमारी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। पोषण माह जैसी पहल के माध्यम से हम समुदाय के साथ मिलकर पोषण और बचाव आधारित स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इस माह 1,500 से अधिक अभिभावकों और स्वास्थ्य से जुड़े लोगों तक पहुंचना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम समुदाय के लोगों के विश्वास और भागीदारी के लिए आभारी हैं। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए हम मिलकर प्रयास जारी रखेंगे।”

अभियान के दौरान ताजा और गर्म पका हुआ भोजन तैयार करने के प्रदर्शन तथा पोषण बाड़ी को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इनमें मोटे अनाज, दाल और मौसमी सब्जियों के पोषण संबंधी लाभ की जानकारी दी गई। घर में उगाई गई स्थानीय उपज का उपयोग कर बच्चों और परिवार के पोषण को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा सामुदायिक बैठक के माध्यम से अभिभावक, स्वयं सहायता समूह, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को पोषण संबंधी अभियान से जोड़ा गया। इन प्रयासों का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना था।

सतनाम नगर की चंद्रकांता महिलाने ने कार्यक्रम के अनुभव साझा करते हुए कहा, “इस सत्र से हमें घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से बच्चों के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार करने की उपयोगी जानकारी मिली। हमने जाना कि बच्चों का वजन बढ़ाने, पाचन बेहतर रखने और उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए किस तरह के भोजन जरूरी हैं। यहां दी गई जानकारी सरल और व्यावहारिक थी, जिसे हम अपने घरों में अपना सकते हैं और अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकते हैं।”

महीने भर चले इस अभियान का समापन क्लस्टर स्तर पर आयोजित पोषण माह समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम में पोषण विषय पर आधारित प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित की गईं। इस पहल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और स्वस्थ व सशक्त समुदाय के निर्माण के प्रति बालको की प्रतिबद्धता को दोहराया।

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले के ट्रायल पर रोक

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले में निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, राहुल गांधी की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

आज भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘मंगरोल’, स्वदेशी युद्धपोत की खासियतें जानकर हो जाएंगे हैरान

यह मामला वर्ष 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था। इन टिप्पणियों को आधार बनाकर उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से मांगा जवाब

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने की। राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।

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निचली अदालत में ट्रायल पर फिलहाल रोक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मानहानि मामले में निचली अदालत में चल रही ट्रायल प्रक्रिया पर फिलहाल रोक रहेगी। अब मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी।

आज भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘मंगरोल’, स्वदेशी युद्धपोत की खासियतें जानकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली : भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए स्वदेशी युद्धपोत ‘मंगरोल’ को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा रहा है। पनडुब्बियों का पता लगाने और पानी के भीतर से आने वाले खतरों से निपटने के लिए तैयार यह युद्धपोत खास तौर पर तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में अभियानों के लिए बनाया गया है। इसकी तैनाती से बंदरगाहों, नौसैनिक ठिकानों और तटीय जलक्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

‘मंगरोल’ का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में किया गया है। यह इस श्रेणी का तीसरा पनडुब्बी रोधी युद्धपोत बताया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी निर्माण है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

यह युद्धपोत केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत देश में विकसित रक्षा तकनीक और निर्माण क्षमता को दर्शाता है। आधुनिक हथियारों, सेंसर और निगरानी प्रणालियों से लैस यह पोत भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

INS मंगरोल की प्रमुख खासियतें

  • लंबाई: 78 मीटर
  • अधिकतम गति: 25 नॉट
  • ऑपरेशनल रेंज: लगभग 1,800 नॉटिकल माइल
  • इंजन: तीन डीजल इंजन
  • प्रोपल्शन सिस्टम: वाटर जेट प्रणाली
  • सोनार: ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार
  • हथियार: हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर
  • सुरक्षा प्रणाली: ‘मारीच’ उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम

पनडुब्बियों का पता लगाने में मिलेगी मदद

युद्धपोत पर लगाया गया ‘अभय’ सोनार पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों का पता लगाने में मदद करेगा। हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर के जरिए यह पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम होगा।

इसके अलावा, ‘मारीच’ उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम दुश्मन के टॉरपीडो से बचाव में सहायता करेगा। इन प्रणालियों के जरिए युद्धपोत समुद्र के भीतर निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभा सकता है।

उथले समुद्री क्षेत्रों में तेजी से करेगा संचालन

‘मंगरोल’ तीन डीजल इंजनों से संचालित होता है। इसमें दी गई वाटर जेट प्रणोदन प्रणाली उथले पानी में संचालन और सीमित समुद्री क्षेत्रों में दिशा बदलने में मदद करती है।

इसकी बनावट और तकनीकी क्षमताएं इसे तटीय जलक्षेत्रों में गश्त, पानी के भीतर निगरानी और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों के लिए उपयोगी बनाती हैं। यह युद्धपोत समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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गुजरात के तटीय कस्बे के नाम पर रखा गया नाम

इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय कस्बे और बंदरगाह मंगरोल के नाम पर रखा गया है। इसका नामकरण पूर्व नौसैनिक पोत ‘आईएनएस मंगरोल’ की विरासत को भी आगे बढ़ाता है।

तटीय क्षेत्रों में बड़े युद्धपोतों का संचालन कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में ‘मंगरोल’ बंदरगाहों, नौसैनिक ठिकानों और तटीय इलाकों की सुरक्षा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। यह समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ समन्वय करके पनडुब्बियों से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने में भी मदद करेगा।

स्वदेशी तकनीक, आधुनिक सेंसर और पनडुब्बी रोधी हथियारों से लैस ‘मंगरोल’ भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Manipur Violence: मणिपुर में 12 घंटे तक हिंसा, संघर्ष में 9 लोगों की मौत; उपद्रवियों ने घर-दुकानों में लगाई आग

Manipur Violence: मणिपुर के कामजोंग, कांगपोकपी और उखरुल जिलों में नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बढ़ने से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। बीते 24 घंटों के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई। कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कई घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने चस्साद पुलिस स्टेशन के 400 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। वहीं, कुकी संगठनों ने कांगपोकपी जिले में बंद का आह्वान किया है।

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महिला की मौत के बाद भड़की हिंसा

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, हिंसा की शुरुआत नागा-बहुल कामजोंग जिले के कुकी-बहुल चस्साद गांव में एक 42 वर्षीय महिला की मौत के बाद हुई। शुक्रवार रात सशस्त्र समूहों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी के दौरान महिला को गोली लग गई थी।

पुलिस के अनुसार, सुरक्षाकर्मी पुलिस स्टेशन के पास बनाए गए कथित अवैध बंकरों को हटाने की कार्रवाई कर रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने भी फायरिंग की, जिसकी चपेट में आने से महिला घायल हो गई। बाद में उसकी मौत हो गई।

अलग-अलग इलाकों में गोलीबारी, कई लोगों की मौत

महिला की मौत के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। शनिवार को कामजोंग और उखरुल जिलों में हुई हिंसक घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई। चस्साद गांव में घरों और दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

उखरुल जिले में याओलेन के नजदीक 40 वर्षीय संदीप राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, शनिवार तड़के कामजोंग जिले के निंगचोउ गांव में दो नगा ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर सामने आई।

बालको का स्वास्थ्य संकल्प, सामुदायिक सेवाओं से उन्नत चिकित्सा तक विस्तार

प्रशासन अलर्ट, इलाके में तनाव

लगातार हो रही हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। चस्साद पुलिस स्टेशन के आसपास निषेधाज्ञा लागू की गई है, जबकि कांगपोकपी में बंद के आह्वान से सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

मणिपुर के प्रभावित जिलों में हालात पर नजर रखी जा रही है। हिंसा में मरने वालों की संख्या और संपत्ति को हुए नुकसान से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

सूरजपुर दोहरा हत्याकांड: फांसी की सजा पाए तीनों आरोपी रायपुर केंद्रीय जेल शिफ्ट

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड मामले में फांसी की सजा पाने वाले तीनों दोषियों को रायपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया है। जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों को अलग-अलग जेलों से शिफ्ट किया है। वहीं, उम्रकैद की सजा पाने वाले एक अन्य दोषी को अंबिकापुर जेल में शिफ्ट किया जा रहा है।

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8 अक्टूबर को अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा

जानकारी के अनुसार, अदालत द्वारा 8 अक्टूबर को सजा सुनाए जाने के बाद जेल प्रशासन ने दोषियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की। इससे पहले तीनों दोषी अलग-अलग जेलों में बंद थे।

अलग-अलग जेलों में बंद थे तीनों दोषी

इस मामले में कुलदीप साहू अंबिकापुर जेल, फूल सिंह उर्फ रिंकू सूरजपुर जिला जेल और चंद्रकांत चौधरी कोरिया जेल में निरुद्ध था। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को रायपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया है। वहीं, आजीवन कारावास की सजा पाने वाले आर्यन विश्वकर्मा को अंबिकापुर जेल में शिफ्ट किया जा रहा है।

प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हुई थी हत्या

यह मामला 13 अक्टूबर 2024 को हुए दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

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मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को आजीवन कारावास से दंडित किया। अब सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों को अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है।

नाना पाटेकर की कार्डियक अरेस्ट से मौत, फिर पुलिस ने क्यों दर्ज किया केस? जानें पूरा मामला

मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत यह कार्रवाई की है। हालांकि, मामला दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी मौत किसी संदिग्ध परिस्थिति में हुई है। यह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत मृत्यु की परिस्थितियों की जांच की जाती है।

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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 75 वर्षीय नाना पाटेकर को गोवा के डोना पाउला स्थित ओशन पार्क में उनके घर से बांबोलिम के मणिपाल अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में मृत अवस्था में लाया गया था। इस मामले की आगे की जांच PSI नितिन नाइक की देखरेख में की जा रही है।

मामला दर्ज करने की क्या है वजह?

जानकारी के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। जब किसी व्यक्ति को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया जाता है, तो अस्पताल प्रशासन नियमानुसार पुलिस को सूचना देता है। इसके बाद मृत्यु की परिस्थितियों का रिकॉर्ड तैयार करने और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में अप्राकृतिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज करना भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। केवल MLC या पुलिस में मामला दर्ज होने से यह साबित नहीं होता कि मौत के पीछे कोई अपराध या संदिग्ध गतिविधि थी।

कार्डियक अरेस्ट को बताया जा रहा संभावित कारण

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर की मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट होने की आशंका जताई गई है। बताया गया है कि वह पहले से हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और उनकी दवाइयां भी चल रही थीं। हालांकि, मृत्यु के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी। इसके लिए गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) में पोस्टमॉर्टम कराया गया है।

राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

नाना पाटेकर का गुरुवार को पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें मुखाग्नि दी। गोवा में निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव लाया गया, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

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फिल्म जगत में शोक की लहर

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत में शोक का माहौल है। कई कलाकारों, निर्देशकों और उनके साथ काम कर चुके लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी दमदार अदाकारी, बेबाक अंदाज और यादगार किरदारों को याद करते हुए फिल्म जगत की हस्तियों ने कहा कि उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

नोट: मृत्यु के कारण और पुलिस की जांच से संबंधित अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।