Saturday, September 19, 2026
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FASTag यूजर्स के लिए बड़ी सुविधा! अब बैंक बदलने पर नहीं लेना होगा नया FASTag, OneTag से होगा काम

FASTag OneTag: वाहन में FASTag का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। अब FASTag का बैंक बदलने के लिए नया FASTag लेने या गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगा पुराना FASTag हटाने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag सुविधा शुरू की है। इसे NHAI के Rajmargyatra App के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

Birth-Death Registration Rule: 1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम, अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए काटना होगा कोर्ट का चक्कर

बैंक बदलने पर नहीं बदलेगा FASTag

अब तक अगर कोई FASTag यूजर अपना बैंक बदलना चाहता था, तो उसे नए बैंक से नया FASTag लेना पड़ता था। इसके बाद पुराने टैग को हटाकर नया FASTag वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाना होता था।

OneTag सुविधा के तहत अब FASTag को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट किया जा सकेगा। यानी वाहन पर लगा FASTag वही रहेगा, लेकिन उससे जुड़ा बैंक और वॉलेट बदल जाएगा। इससे नया FASTag लेने और उसे दोबारा चिपकाने की परेशानी खत्म हो जाएगी।

कैसे करें FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट?

FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट करने के लिए सबसे पहले Rajmargyatra App में लॉग इन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ऐप पर यह जानकारी मिलेगी कि संबंधित FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए पात्र है या नहीं।

अगर FASTag पोर्ट के लिए योग्य है, तो मौजूदा FASTag बैंक से 6 डिजिट का MVC (वेरिफिकेशन कोड) लेना होगा। इसके बाद Rajmargyatra App पर नए बैंक का चयन करना होगा।

नए बैंक की KYC और वॉलेट सेटअप प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुराना FASTag नए बैंक से लिंक हो जाएगा। इस तरह वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा वही FASTag आगे भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पुराने FASTag के बैलेंस का क्या होगा?

FASTag पोर्ट होने के बाद पुराना बैंक मौजूदा वॉलेट को बंद करेगा। वॉलेट में बची राशि को नियमों के अनुसार वापस किया जाएगा। हालांकि, रिफंड के दौरान लागू नियमों के मुताबिक कुछ राशि की कटौती हो सकती है।

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6 महीने तक दोबारा पोर्ट नहीं कर सकेंगे FASTag

OneTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा का इस्तेमाल बार-बार तुरंत नहीं किया जा सकेगा। एक बार FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट कराने के बाद दोबारा बैंक बदलने के लिए 6 महीने तक इंतजार करना होगा

यानी FASTag को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट करने के बाद अगली पोर्टेबिलिटी के लिए 6 महीने की अवधि पूरी होने का इंतजार करना होगा।

Birth-Death Registration Rule: 1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम, अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए काटना होगा कोर्ट का चक्कर

Birth-Death Registration Rule: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। बच्चे के जन्म के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी होता है, जिसका इस्तेमाल स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी कामों में किया जाता है। वहीं, मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग बैंक खातों, संपत्ति और अन्य कानूनी एवं वित्तीय मामलों में किया जाता है।

अब जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 संसद से पारित हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले हैं। इसके बाद जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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1 साल से ज्यादा देरी पर क्या होगा?

नए नियम के तहत अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी 1 साल के बाद लेकिन 2 साल से पहले दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। इसके साथ निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया और फीस भी लागू होगी।

2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट जाना होगा

अगर जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में 2 साल से ज्यादा की देरी हो जाती है, तो मामला और अधिक औपचारिक हो जाएगा। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रेशन प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही किया जा सकेगा।

यानी जन्म या मृत्यु की जानकारी समय पर दर्ज नहीं कराने पर देरी बढ़ने के साथ प्रक्रिया भी अधिक जटिल हो जाएगी। दो साल से ज्यादा की देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत पड़ेगी।

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क्यों बदले जा रहे हैं नियम?

सरकार के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसलिए जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन समय पर कराना जरूरी होगा, ताकि बाद में अतिरिक्त सत्यापन या न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सके।

बालको में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई भगवान विश्वकर्मा जयंती

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कोरबा : वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बालको संयंत्र की विभिन्न इकाइयों और कार्यालयों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान कंपनी की निरंतर प्रगति, कर्मचारियों की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और औद्योगिक विकास की कामना की गई।

विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सुबह से ही बालको संयंत्र परिसर में उत्सव का माहौल रहा। संयंत्र की विभिन्न इकाइयों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर आकर्षक सजावट की गई थी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेका कामगारों ने पूजा-अर्चना में सहभागिता की। विधि-विधान से पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित कर्मचारियों एवं अन्य लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

भगवान विश्वकर्मा को सृजन, शिल्पकला, निर्माण और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। औद्योगिक संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। बालको में भी यह पर्व लंबे समय से औद्योगिक परंपरा और कार्यसंस्कृति का हिस्सा रहा है। इस अवसर पर कर्मचारियों ने सुरक्षित कार्यप्रणाली, नवाचार, जिम्मेदारी और टीम भावना के साथ कंपनी की प्रगति में योगदान देने का संकल्प दोहराया।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना सृजन के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बालको में प्रत्येक कर्मचारी का योगदान कंपनी की सामूहिक प्रगति का आधार है। सुरक्षित कार्यसंस्कृति, नवाचार और टीम भावना के साथ बालको औद्योगिक विकास के नए आयाम स्थापित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विश्वकर्मा जयंती का आयोजन बालको में औद्योगिक परंपरा और आधुनिक कार्यसंस्कृति के संगम के रूप में सामने आया। पूजा-अर्चना के दौरान कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने कर्मचारियों के बीच एकजुटता और सामूहिक भावना को मजबूत करने के साथ सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

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राशन कार्ड: नया राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन जरूर किया गया है, लेकिन दस्तावेजों और सत्यापन को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब केवल आधार कार्ड या किसी एक एड्रेस प्रूफ के आधार पर राशन कार्ड नहीं बनाया जाएगा। आवेदन के साथ कई जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे और इसके बाद आवेदक का सत्यापन भी किया जाएगा।

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राशन कार्ड के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी?

नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करते समय ये दस्तावेज तैयार रखना जरूरी होगा:

  • आधार कार्ड
  • आवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • घर की फोटो
  • बैंक अकाउंट की जानकारी

इसके अलावा आवेदन के दौरान आवेदक या परिवार के मुखिया की फोटो और मोबाइल नंबर भी देना होगा। मोबाइल नंबर पर OTP के जरिए सत्यापन किया जा सकता है। परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी और उनके आधार नंबर भी आवेदन में दर्ज करने होंगे।

ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?

नया राशन कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन e-District पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जन सेवा केंद्र के माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी तैयार रखना बेहतर होगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए सबसे पहले संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करना होगा। इसके बाद नए राशन कार्ड के आवेदन का विकल्प चुनकर परिवार के मुखिया की जानकारी, पता, बैंक खाते और आय से जुड़ी जानकारी भरनी होगी।

इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के नाम और आधार नंबर दर्ज करने होंगे। आवेदन के साथ आवेदक की फोटो, घर की फोटो और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा। आवेदन की रसीद को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।

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आवेदन के बाद होगा सत्यापन

ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवेदन को BDO या क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति निरीक्षक के स्तर पर सत्यापित किया जा सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया जाएगा।

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदक का डिजिटल राशन कार्ड जारी किया जा सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में करीब 30 दिन तक का समय लग सकता है।

बालको मेडिकल सेंटर ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को बनाया अधिक सुलभ…

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रायपुर : कैंसर का पता चलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन मध्य भारत के कई मरीजों के लिए असली चुनौती उपचार केंद्र तक पहुँचना भी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को कई सौ किलोमीटर दूर बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी और बार-बार परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप के लिए यात्रा, ये सब परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) की स्थापना हुई। आज आठ वर्षों बाद बीएमसी मध्य भारत में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अब तक यहाँ 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।

कोंडागांव के 28 वर्षीय एक मरीज की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के लिए उन्हें अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और उनका पूरा उपचार एक ही केंद्र में हुआ।

इसी तरह, 48 वर्षीय एक मरीज को पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद जब वे फॉलो-अप के लिए लौटे, तो वे स्वस्थ थे और सामान्य जीवन में वापस आ चुके थे।

ये अनुभव बताते हैं कि कैंसर उपचार में विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका मरीज तक पहुँचना और उपचार का पूरा होना। बीएमसी का प्रयास इसी दिशा में है, उपचार के विभिन्न चरणों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध कराना। यहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती हैं। मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से विशेषज्ञ मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार करते हैं।

बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जाँच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहाँ 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसका ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य भारत के बड़े कार्यक्रमों में शामिल है।

उपचार के साथ मरीजों और उनके परिजनों की अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है। सुख सराय में उपचार के दौरान रियायती आवास की सुविधा मिलती है। दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता उपलब्ध है, जबकि कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है। पात्र मरीजों को उपचार और जाँच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं।

प्रारंभिक पहचान के महत्व पर वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप कहते हैं, “कैंसर के उपचार में इसकी शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका सीधा असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और जागरूकता के माध्यम से कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर व ओरल (मुख) के कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

आज बीएमसी तक छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज पहुँच रहे हैं। इससे नया रायपुर की भूमिका क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। बालको मेडिकल सेंटर में सभी सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, मुख्य मंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अलावा सभी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ उपचार, ट्रांसप्लांट, बहु-विषयक चिकित्सा, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और शुरुआती जाँच, इन सभी को एक साथ लाकर बीएमसी कैंसर उपचार की राह में आने वाली कई दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य यही है कि मरीज की उपचार यात्रा में दूरी उसकी उम्मीद और उपचार के बीच बाधा न बने।

UPI से पेमेंट करने वालों के लिए जरूरी खबर! 3000 के भुगतान पर 12 रुपये शुल्क, किस पेमेंट पर कितना चार्ज, यहां समझें पूरा गणित

UPI Payment Charges: UPI से लेनदेन करने वाले लोगों के मन में NPCI के Merchant Discount Rate (MDR) फ्रेमवर्क को लेकर कई सवाल हैं। खासकर ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को लेकर लोग जानना चाहते हैं कि इसका भुगतान किसे करना होगा और ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

दरअसल, नए MDR फ्रेमवर्क के तहत आम ग्राहकों को UPI से पेमेंट करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन भी पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वहीं छोटे व्यापारियों को भी इस चार्ज के दायरे से बाहर रखा गया है।

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किस ट्रांजैक्शन पर कितना MDR चार्ज?

MDR का भुगतान कुछ निर्धारित मर्चेंट्स को करना होगा। ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR चार्ज नहीं लगेगा। वहीं ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.40 फीसदी की दर से मर्चेंट पर शुल्क लागू होगा। हालांकि, इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।

उदाहरण के तौर पर:

  • ₹2,000 तक: कोई MDR चार्ज नहीं
  • ₹3,000: 0.40% के हिसाब से ₹12
  • ₹4,000: 0.40% के हिसाब से ₹16
  • ₹5,000: 0.40% के हिसाब से ₹20
  • ₹50,000: 0.40% के हिसाब से ₹200
  • ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300

यानी अगर कोई ग्राहक ₹1 लाख का UPI भुगतान करता है, तो निर्धारित अधिकतम सीमा के कारण मर्चेंट को ₹300 से ज्यादा MDR नहीं देना होगा।

क्या ग्राहकों को UPI पेमेंट पर कोई चार्ज देना होगा?

नहीं। सामान्य उपभोक्ताओं से UPI के जरिए भुगतान करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्राहक पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के UPI का इस्तेमाल कर सकेंगे।

क्या दोस्तों और परिवार को पैसे भेजने पर लगेगा शुल्क?

नहीं। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। दोस्तों, परिवार के सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसी तरह अपने ही दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर करने पर भी कोई चार्ज नहीं देना होगा।

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छोटे व्यापारियों को भी MDR से छूट

P2PM फ्रेमवर्क के तहत आने वाले छोटे मर्चेंट्स को MDR से छूट मिलती रहेगी। इसमें ऐसे वेंडर भी शामिल हैं, जिन्हें UPI QR कोड के जरिए एक महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त होता है। ऐसे छोटे कारोबारियों पर यह MDR चार्ज लागू नहीं होगा।

इस तरह MDR का प्रावधान मुख्य रूप से निर्धारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन से संबंधित है। आम UPI यूजर्स के लिए पैसे भेजना और प्राप्त करना पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेगा।

KORBA : एल्यूमिनियम निर्माण के अगले अध्याय को आकार देते बालको के इंजीनियर…

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कोरबा : हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।

बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।

पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”

बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”

समय और कैलेंडर

एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”

कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”

कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।

पाकिस्तान पर भारी पड़ा भारत का S-400! 314 KM दूर तक किया वार, Op. Sindoor की कार्रवाई पर रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता की अहम जानकारी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय की Annual Report 2025-26 में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक हमलों के साथ-साथ उसकी एयर डिफेंस प्रणाली और सैन्य ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि भारत ने पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए अपनी मजबूत एयर डिफेंस क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल किया।

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S-400 ने 314 KM दूर हवाई लक्ष्य को बनाया निशाना

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के अंदर करीब 314 किलोमीटर दूर उड़ रहे एक Special Mission Aircraft को निशाना बनाया। रिपोर्ट इसे भारत की ओर से सतह से हवा में किया गया अब तक का सबसे लंबी दूरी का हमला बताती है।

रिपोर्ट के अनुसार, S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी विमान से उत्पन्न खतरे को ट्रैक किया। इसके बाद लंबी दूरी की Surface-to-Air Missile को लक्ष्य की ओर गाइड किया गया और मिसाइल ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

यह जानकारी भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक हवाई खतरों को पहचानने, उन्हें ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोकने की क्षमता को दर्शाती है। AWACS जैसे विमान भी युद्ध के दौरान हवाई गतिविधियों की निगरानी और कमांड एवं कंट्रोल में अहम भूमिका निभाते हैं।

नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 6-7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoJK में चिन्हित नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन ठिकानों को लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) से जोड़ा गया था।

रिपोर्ट में जिन ठिकानों का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं:

  • सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद – LeT
  • शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद – LeT
  • कोटली कैंप – JeM
  • रहील शाहिद कैंप, कोटली – HM
  • अहले हदीस कैंप, भीम्बर – LeT
  • मेमूना जोया कैंप, सियालकोट – HM
  • सरजल-तोहरा कलां डॉट, गुजरांवाला – JeM
  • LeT मुख्यालय, मुरीदके
  • JeM मुख्यालय, बहावलपुर

पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के छह रडार और दो Surface-to-Air Guided Weapon (SAGW) लोकेशन को भी निशाना बनाया। इन अभियानों में एयर-लॉन्च्ड हथियारों के साथ Unmanned Loitering Munitions के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।

इससे साफ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित नहीं रही। पाकिस्तान की हवाई निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था को भी ऑपरेशन के दायरे में शामिल किया गया।

पाकिस्तानी एयरबेस और सैन्य ढांचे पर भी कार्रवाई

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में Nur Khan और Rahimyar Khan Air Bases का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा Chaklala, Sukkur, Murid, Sargodha, Jacobabad और Bholari से जुड़े सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र भी रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सैन्य ठिकानों से जुड़े हैंगर, फाइटर एयरक्राफ्ट, AEW&C और UCAV जैसे संसाधनों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

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ऑपरेशन सिंदूर में सामने आई भारत की सैन्य क्षमता

रक्षा मंत्रालय की Annual Report 2025-26 में सामने आई जानकारी से ऑपरेशन सिंदूर की व्यापक तस्वीर स्पष्ट होती है। भारतीय कार्रवाई में एक ओर पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहीं दूसरी ओर उसकी एयर डिफेंस प्रणाली और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव बनाया गया।

S-400 द्वारा करीब 314 किलोमीटर दूर हवाई लक्ष्य को निशाना बनाए जाने का उल्लेख भारतीय एयर डिफेंस की लंबी दूरी की क्षमता को रेखांकित करता है। इससे ऑपरेशन के दौरान भारत की आक्रामक कार्रवाई के साथ-साथ उसकी रक्षात्मक और निगरानी क्षमता की भी झलक मिलती है।

बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ…

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रायपुर : मध्य भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) द्वारा चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 18 से 20 सितंबर 2026 तक मेफेयर लेक रिजॉर्ट्स, नया रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के साथ चूजिंग वाइजली इंडिया की सातवीं बैठक भी आयोजित होगी, जो ईकैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम ‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ है। इसमें मुख्य रूप से स्तन कैंसर, स्त्री रोग संबंधी कैंसर और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर पर चर्चा होगी। उपचार के सही विकल्प चुनने और मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मरीज-केंद्रित उपचार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न सत्रों में अनावश्यक उपचार से बचने, उपचार से जुड़े निर्णयों में मरीज की भागीदारी सुनिश्चित करने और दुनिया भर में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को भारत में रोजमर्रा के कैंसर उपचार में प्रभावी रूप से अपनाने पर चर्चा होगी।

वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना का अर्थ मरीजों को उनके घर के करीब बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना भी है। जब देश और दुनिया के विशेषज्ञ क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञों के साथ एक मंच पर आते हैं, तो ज्ञान और अनुभव साझा करने के साथ बेहतर चिकित्सा पद्धतियों से सीखने और स्थानीय स्तर पर उपचार की क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलता है। नया रायपुर में कैंसर विशेषज्ञों का एक साथ आना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है और ऐसे मंचों के महत्व को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “कैंसर उपचार की क्षमता को मजबूत करने के साथ अगली पीढ़ी के विशेषज्ञों को तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष हम देशभर के 50 युवा डॉक्टरों को यात्रा सहायता देते हैं, ताकि वे कॉन्क्लेव में शामिल होकर इस क्षेत्र के श्रेष्ठ विशेषज्ञों से सीख सकें और अपने ज्ञान व कौशल को मजबूत कर सकें।”

समय और कैलेंडर

कॉन्क्लेव में यूके, अमेरिका, यूएई, नेपाल, श्रीलंका, इजराइल, बेल्जियम, कनाडा और स्विट्जरलैंड से 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनके साथ देशभर से 200 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। विशेषज्ञ कैंसर उपचार, चिकित्सा अनुसंधान, सटीक कैंसर उपचार, रेडिएशन, सर्जरी और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

तीन दिनों के दौरान 20 से अधिक परिचर्चाएं, बहु-विषयक सत्र, वाद-विवाद और वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें स्तन कैंसर की लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी शामिल होगा। साथ ही विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी, चिकित्सा अनुसंधान और क्लिनिकल ट्रायल की रूपरेखा, आनुवंशिक जांच और सटीक कैंसर उपचार, कैंसर की पैथोलॉजी, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तथा नई पीढ़ी की न्यूक्लियर मेडिसिन और थेरानोस्टिक्स जैसे विषय शामिल होंगे।

कॉन्क्लेव में वीमेन फॉर ऑन्कोलॉजी की नेटवर्किंग और मार्गदर्शन बैठक भी आयोजित होगी। इसमें कैंसर उपचार के क्षेत्र में कार्यरत महिला विशेषज्ञों को एक-दूसरे से जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने, सहयोग बढ़ाने और नेतृत्व व मार्गदर्शन के अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।

शैक्षणिक कार्यक्रम के साथ बीएमसी की ओर से ‘कैनवास फॉर ए लाइफ’ नाम से कला और विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी बीएमसी चैरिटेबल फंड के समर्थन में होगी। यह फंड जरूरतमंद मरीजों को उपचार, जांच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं में भी सहयोग करता है।

पिछले वर्ष आयोजित कॉन्क्लेव में देशभर से 1,000 से अधिक चिकित्सकों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया था। इस वर्ष का आयोजन इससे भी व्यापक होने की उम्मीद है। कॉन्क्लेव के माध्यम से देश-दुनिया के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर भारत में अधिक प्रभावी, समान और मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार की दिशा में विचार साझा करेंगे। कॉन्क्लेव के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। इच्छुक प्रतिभागी बालको मेडिकल सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीएएलसीओएमईडीआईसीएएलसीईएनटीआरई डॉट कॉम के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले प्रतिनिधि और फैकल्टी सदस्य छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, रायपुर से सीएमई क्रेडिट पॉइंट्स प्राप्त करने के पात्र होंगे।

Vehicle Light Rules: गाड़ियों की लाइट को लेकर आ रहे सख्त नियम! नए सरकारी ड्राफ्ट में क्या बदलेगा, जानें पूरी जानकारी

Vehicle Light Rules: रात के समय सड़कों पर तेज हाई बीम हेडलाइट्स से होने वाली चकाचौंध वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बनती है। इससे सामने से आ रहे वाहन चालक की आंखों की रोशनी कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या को कम करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नए सेफ्टी नॉर्म्स अगले साल अप्रैल से लागू किए जा सकते हैं। लंबे समय से जागरूकता अभियानों के बावजूद हाई बीम के गलत इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाने के बाद सरकार अब नियमों के जरिए इसे नियंत्रित करने की तैयारी में है।

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ऑटोमैटिक हेडलाइट अब सिर्फ लो बीम पर होगी

प्रस्तावित नियमों के तहत नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलाइट ऑन (AHO) सिस्टम एक्टिव होने पर हेडलाइट केवल लो बीम मोड में ही रहेगी। मौजूदा व्यवस्था में वाहन की सेटिंग के आधार पर AHO सिस्टम लो बीम या हाई बीम, दोनों में से किसी पर भी सक्रिय हो सकता है।

यह बदलाव केवल नए बनने वाले दोपहिया वाहनों पर लागू होगा। पहले से सड़कों पर चल रहे वाहनों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

हेडलाइट की अधिकतम रोशनी की सीमा घटाने का प्रस्ताव

सामने से आने वाले वाहन चालकों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी कम करने के लिए हेडलाइट की अधिकतम लाइट इंटेंसिटी कम करने का प्रस्ताव है।

ड्राफ्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम स्वीकार्य तीव्रता को 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने की बात कही गई है। वहीं, कार और अन्य चार पहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला की जा सकती है।

सफेद रोशनी की चकाचौंध भी होगी नियंत्रित

अत्यधिक सफेद और ज्यादा कलर टेम्परेचर वाली हेडलाइट्स व फॉग लैंप्स से रात में अधिक चकाचौंध होने की समस्या सामने आती है। इससे सामने वाले चालक की विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट में वाहन की रोशनी का अधिकतम कलर टेम्परेचर 6,500K निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मेन बीम हेडलाइट्स की माउंटिंग हाइट को पासिंग बीम हेडलाइट्स के समान स्तर पर रखने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

शहरों में हाई बीम पर बजेगा वार्निंग अलार्म

शहरी इलाकों और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर अनावश्यक हाई बीम के इस्तेमाल को रोकने के लिए नई कारों और दोपहिया वाहनों में स्पीड-सेंसिटिव ऑडियो वार्निंग सिस्टम लगाया जा सकता है।

अगर वाहन चालक कम गति पर मैनुअली हाई बीम ऑन करता है, तो वाहन में बीप या साउंड वार्निंग बज सकती है। इसका उद्देश्य चालक को हाई बीम बंद कर लो बीम इस्तेमाल करने के लिए अलर्ट करना होगा।

यह सिस्टम स्पीड के हिसाब से काम करेगा। यदि वाहन 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से हाईवे पर चल रहा होगा, तो वार्निंग नहीं बजेगी। हाईवे पर कम रोशनी वाले इलाकों में लंबी दूरी तक देखने के लिए हाई बीम की जरूरत को देखते हुए यह प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

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बस-ट्रकों पर रिफ्लेक्टिव टेप जरूरी करने की तैयारी

रात, कोहरे और खराब मौसम में भारी वाहनों की पहचान आसान बनाने के लिए भी नए प्रावधान प्रस्तावित हैं। ड्राफ्ट के अनुसार बसों, ट्रकों और अन्य कमर्शियल भारी वाहनों पर प्रमाणित रिफ्लेक्टिव टेप लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।

रिफ्लेक्टिव टेप की वजह से पीछे या सामने से आने वाले वाहन चालक दूर से ही भारी वाहनों की मौजूदगी पहचान सकेंगे। इससे कम दृश्यता वाले हालात में टक्कर और सड़क हादसों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य रात में हाई बीम से होने वाली चकाचौंध को कम करना, वाहनों की दृश्यता बेहतर करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है। नए नियम लागू होने के बाद खासकर नए वाहनों की हेडलाइट व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।