Saturday, May 16, 2026
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LPG Supply Update: एलपीजी पर बड़ी राहत… होर्मुज से सुरक्षित निकलकर भारत की ओर बढ़े दो जहाज, इनमें कितनी गैस है? जानिए

LPG Supply Update: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इसके चलते देश में पेट्रोल-डीजल व सीएनजी के बढ़े हुए दाम के बीच एक राहत भरी खबर सामने आ रही है. पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को सुरक्षित तरीके से पार कर दो जहाज भारत आ रहे हैं. इन दो बड़े जहाजों में कुल 66392 मीट्रिक टन रसोई गैस (LPG) ठसाठस भरी हुई है.

लायंस क्लब चांपा के लायन राजेश अग्रवाल बने रीजन चेयरमैन, सामाजिक सेवा में निभा रहे अहम भूमिका

कतर से गैस लेकर आ रहा सिमी

सरकारी अधिकारियों की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक,  मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला LPG कैरियर ‘सिमी’ (Symi) बुधवार को होर्मुज से होकर गुजरा. इस जहाज में 21 क्रू मेंबर्स हैं, जिनमें आठ यूक्रेनी और 13 फिलिपीनी शामिल हैं. लगभग 20,000 टन लिक्विड प्रोपेन और ब्यूटेन से लदे इस टैंकर के शनिवार को गुजरात में कांडला के दीनदयाल बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है. यह जहाज कतर के रास लफान टर्मिनल से गैस लेकर निकला है.

LPG लेकर NV सनशाइन भी अपने रास्ते

कुकिंग गैस ले जा रहा एक और वियतनाम के झंडे वाला NV सनशाइन गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रा और अब रास अल कुह TSS से बाहर निकल गया है. यह जहाज न्यू मंगलुरु पोर्ट के रास्ते है और इसके 18 मई को पहुंचने की उम्मीद है.

होर्मुज होकर अब तक 13 जहाज पहुंचे भारत

होर्मुज को क्रॉस करने वाले जहाज की पहचान ‘सिमी’ (Symi) के रूप में हुई है. यह मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एक जहाज है, जो LPG ले जा रहा है. यह होर्मुज से होकर गुजरने वाला 11वां LPG टैंकर है और बाकी बचा एक जहाज कच्चा तेल (Crude Oil) का टैंकर था.  Marinetraffic के अनुसार, लगभग 46000 टन कुकिंग गैस से लदे इस जहाज का गंतव्य न्यू मंगलुरु बंदरगाह है.

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अधिकारियों ने बताया कि जहाजों का सुरक्षित गुजरना DG Shipping (देश का समुद्री नियामक), विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच आपसी तालमेल से संभव हो पाया है. इसके साथ ही, LPG ले जाने वाले 12 जहाज भारत पहुंच चुके हैं और एक कच्चे तेल का टैंकर था. फिलहाल, भारत के झंडे वाले 13 जहाज फ़ारसी खाड़ी (Persian Gulf) में मौजूद हैं और संघर्ष-ग्रस्त होर्मुज को पार करने का इंतजार कर रहे हैं.

लायंस क्लब चांपा के लायन राजेश अग्रवाल बने रीजन चेयरमैन, सामाजिक सेवा में निभा रहे अहम भूमिका

चांपा : सामाजिक, रचनात्मक एवं जनसेवा के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय रहने वाले लायन राजेश अग्रवाल को लायंस क्लब इंटरनेशनल के सत्र 2026-27 के लिए रीजन चेयरमैन मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट 3233 C सीएमजेएफ लायन रिपुदमन सिंह पुसरी द्वारा की गई है। लायन राजेश अग्रवाल के इस महत्वपूर्ण पद पर चयन होने से चांपा शहर सहित लायंस क्लब चांपा में खुशी का माहौल है।

लायंस क्लब के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन डॉक्टर व्ही. के. अग्रवाल ने कहा कि राजेश अग्रवाल को रीजन चेयरमैन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना पूरे चांपा क्लब एवं शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने वर्षों से लायंस क्लब एवं सामाजिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं।

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लायंस क्लब चांपा में कई महत्वपूर्ण पदों पर दे चुके हैं सेवाएं

लायन राजेश अग्रवाल ने लायंस क्लब चांपा में वर्ष 2017-18 में कोषाध्यक्ष, 2018-19 में सचिव तथा 2019-20 से 2022-23 तक लगातार चार वर्षों तक अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। उनके कार्यकाल में क्लब द्वारा डॉक्टर्स डे, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर, पाठ्य सामग्री वितरण, फल वितरण, स्कूलों में पंखा वितरण, प्रसाद वितरण, अन्नदान एवं नेत्र जांच शिविर जैसे अनेक जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सेवा सप्ताह में आयोजित होते रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रम

सेवा सप्ताह के दौरान 2 से 8 अक्टूबर तक स्वच्छता अभियान, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण एवं निःसंतान दम्पत्ति जांच शिविर जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे। इसके साथ ही तिलक सेवा संस्थान के बच्चों को कपड़ा, दर्री एवं टाट पट्टी वितरण भी किया गया।

कोविड-19 महामारी के दौरान लायन राजेश अग्रवाल ने नागरिकों, सुरक्षा में तैनात सिपाहियों, अस्पतालों एवं ड्यूटी में कार्यरत अधिकारियों और स्टॉफ को भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं में भी निभा रहे सक्रिय भूमिका

सत्र 2023-24 में उन्होंने रीजन जीएमटी कोऑर्डिनेटर के रूप में सेवाएं दीं तथा लायंस क्लब शिक्षण समिति के सचिव पद पर रहते हुए लायंस इंग्लिश हायर सेकेंड्री स्कूल के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाई। वर्ष 2024-25 में जोन चेयरपर्सन एवं 2025-26 में पुनः क्लब सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

लायंस क्लब की स्थायी सेवा गतिविधि के रूप में पिछले 45 वर्षों से लायंस इंग्लिश हायर सेकेंड्री स्कूल का सफल संचालन किया जा रहा है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों के बहुमुखी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

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सामाजिक गतिविधियों में भी लगातार सक्रिय

लायन राजेश अग्रवाल लायंस क्लब के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में भी लगातार सक्रिय हैं। वे अग्रवाल सेवा समिति में लगातार दस वर्षों तक कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा श्याम बाबा मंदिर एवं दादी मंदिर में भी अपनी सेवाएं देते रहते हैं।

उनके रीजन चेयरमैन बनने पर लायंस क्लब चांपा के सदस्यों एवं शहरवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं एवं बधाई दी है।

Mamata Banerjee in Calcutta High Court: वकील बनना पड़ा महंगा? ममता बनर्जी पर कागजात न दिखाने के मामले में बड़ा विवाद, बार काउंसिल ने शुरू की जांच

Mamata Banerjee in Calcutta High Court: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कानूनी प्रैक्टिस के दर्जे की जांच शुरू कर दी है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो कल ही कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के लिबास में पेश हुईं। उनके कानूनी पोशाक पहनने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक प्रैक्टिसिंग वकील के तौर पर उनके मौजूदा दर्जे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कल पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके बाद की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन कार्यकाल सहित कई अहम राजनीतिक पदों पर काम किया है। उन्होंने आखिरी बार 1980 के दशक के आखिर में कानून की प्रैक्टिस करने के लिए रजिस्टर्ड हुई थीं। उनकी कलकत्ता हाईकोर्ट की मौजूदगी ने उन लोगों के लिए कानूनी प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा छेड़ दी है, जो एक ही समय पर कोई राजनीतिक पद संभालते हुए कानूनी प्रैक्टिस में भी शामिल रहते हैं।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी प्रैक्टिसिंग वकील मौजूदा नियमों का पालन करें। उसने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के दर्जे के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। इस तरह की जांचें कानूनी पेशे के भीतर ईमानदारी और पेशेवर मानकों को बनाए रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। अगर ममता सभी मानकों को पूरा नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ ऐक्शन भी लिया जा सकता है।

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बार काउंसिल ने क्या-क्या पूछा?

बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से यह स्पष्ट करने को भी कहा है कि क्या 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने वाली ममता बनर्जी ने सार्वजनिक पद पर रहने के दौरान कभी भी काउंसिल को कानूनी प्रैक्टिस के स्वैच्छिक निलंबन या रुकने की सूचना दी थी। यदि ऐसा कोई पत्राचार हुआ था, तो परिषद ने संबंधित आदेशों की प्रतियां मांगी हैं। इसके अलावा, काउंसिल ने इस बारे में भी विवरण मांगा है कि क्या पद छोड़ने के बाद प्रैक्टिस फिर से शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया गया था और क्या वर्तमान में उनके पास वैध ‘प्रैक्टिस प्रमाणपत्र’ है। परिषद ने राज्य इकाई से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान या उसके बाद अदालत में पेश होने के अधिकार के संबंध में कोई अन्य आदेश या रिकॉर्ड मौजूद है। बीसीआई ने निर्देश दिया है कि स्टेट रोल, नामांकन रजिस्टर, निलंबन या बहाली के रिकॉर्ड और फाइल नोटिंग सहित सभी प्रासंगिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अगले दो दिनों के भीतर भेजी जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी दस्तावेजों की मूल प्रतियों का उचित जांच के बाद सत्यापन किया जाना चाहिए।

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LPG Gas Update: हर आपदा अपने साथ एक अवसर लेकर भी आती है. ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया संकट ने भी भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा के लिए जो चुनौतियां खड़ी की हैं उससे निपटने के लिए अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं. इसी के तहत अब गैस की कमी को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने कोयला से गैस बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है.

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भारत खुद बनाएगा गैस, आयात में आएगी कमी

प्रोजेक्ट के तहत अगले 4-5 सालों में कोयला से गैस बनाकर गैस के आयात को कम करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत के पास फ़िलहाल 400 अरब टन से ज़्यादा कोयले का भंडार मौजूद है, जिसमें सालाना ख़पत क़रीब एक अरब टन का होती है. इस हिसाब से देश के पास कम से कम 400 सालों का कोयला भंडार मौजूद है. इसी तरह लिग्नाइट का भी 47 अरब टन का भंडार मौजूद है. सरकार ने अब इसी कोयले को गैस में परिवर्तित करने का फैसला किया है, ताकि गैस की आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भरता कम की जा सके. पहले चरण में सरकार ने हर साल क़रीब 7.5 करोड़ टन कोयले को गैस में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा है.

25 संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी

सरकार ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में 25 संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी दी है. योजना के तहत कोयला से गैस बनाने का संयंत्र लगाने वाली कंपनी या संस्था को आर्थिक सहायता देने का फ़ैसला किया गया है. इसके तहत संयंत्र लगाने का कुल 20 फ़ीसदी खर्च सरकार सहायता के रूप में देगी. लक्ष्य रखा गया है कि अगले 4 -5 सालों में कोयले से गैस का उत्पादन शुरू कर दिया जाए. पूरी योजना के लिए सरकार ने 37500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है. फ़ैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना में 3 लाख करोड़ रूपये के निवेश की संभावना है.

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गैस के लिए दूसरे देशों पर कम होगी निर्भरता

अश्वनी वैष्णव के मुताबिक़ इस प्रोजेक्ट से क़रीब 50000 लोगों को रोज़गार मिलेगा. फिलहाल भारत को अपनी एलएनजी आवश्यकता का करीब 50 फ़ीसदी , यूरिया का 20 फ़ीसदी , अमोनिया का करीब 100 फ़ीसदी जबकि मेथनॉल का करीब 90 फीसदी आयात करना पड़ता है. देश में फर्टिलाइजर के उत्पादन के लिए इन सभी चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है. कोयला से गैस बनाने के प्रोजेक्ट से इन सभी चीज़ों के आयात को कम करने में मदद मिलेगी और गैस के लिए आयात पर निर्भरता काफ़ी हद तक कम हो जाएगी.

मजदूर शोषण के खिलाफ सख्ती से आवाज उठाएगी भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल: सी. एल.शर्मा 

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) ने देशभर में मजदूरों के शोषण के खिलाफ सशक्त अभियान चलाने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सी एल शर्मा के नेतृत्व में यूनियन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी श्रमिक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सी एल शर्मा ने नियुक्ति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि BJMTUC एक राष्ट्रीय स्तर का श्रमिक संगठन है, जो संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य मजदूरों और युवाओं को एकजुट कर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान को गति देना है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सी एल शर्मा ने बताया कि कार्यस्थल पर मजदूरों का शोषण कई रूपों में सामने आता है, जैसे वेतन भुगतान में देरी, निर्धारित लाभों को रोकना, मुआवजा देने से इंकार करना या उपस्थिति के आधार पर अनुचित दबाव बनाना। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का उत्पीड़न शोषण का गंभीर रूप है और यूनियन इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।

इसके लिए जिला स्तर तक कार्यकारिणी का गठन किया जा चुका है, ताकि स्थानीय स्तर पर शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। “जहां भी मजदूरों के शोषण की सूचना मिलेगी, वहां यूनियन के कार्यकर्ता तत्काल पहुंचकर मजदूर हित में आवाज बुलंद करेंगे,” उन्होंने कहा।

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सी एल शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या उद्योग द्वारा मजदूरों का शोषण कर अनुचित लाभ उठाने की कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा। संगठन का मानना है कि आर्थिक, सामाजिक या राजनीतिक किसी भी स्तर पर होने वाला शोषण अस्वीकार्य है और इसके खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।

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LPG Subsidy New Rule: देशभर में कई एलपीजी गैस उपभोक्ताओं को इन दिनों एक नया SMS मिल रहा है. इस मैसेज में कहा जा रहा है कि अगर किसी उपभोक्ता या उसके परिवार के सदस्य की सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसकी गैस सब्सिडी बंद की जा सकती है. यह मैसेज सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) भेज रही हैं.

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क्या लिखा है मैसेज में?

मैसेज में कहा गया है कि इनकम टैक्स रिकॉर्ड के अनुसार उपभोक्ता या उसके परिवार की आय तय सीमा से ज्यादा है. अगर उपभोक्ता इस जानकारी से सहमत नहीं है, तो उसे 7 दिनों के अंदर शिकायत करनी होगी. अगर समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो गैस सब्सिडी बंद हो सकती है.

सरकार क्यों कर रही है जांच?

सरकार का कहना है कि गैस सब्सिडी सिर्फ जरूरतमंद लोगों को मिलनी चाहिए. इसी वजह से अब तेल कंपनियां गैस उपभोक्ताओं का डेटा इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड से मिला रही हैं. इससे पता लगाया जा रहा है कि कौन लोग सब्सिडी के लिए योग्य हैं और कौन नहीं.

हालांकि, यह नियम नया नहीं है. सरकार ने साल 2015 में ही कहा था कि जिन लोगों की सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें एलपीजी सब्सिडी नहीं मिलेगी. पहले लोगों से खुद सब्सिडी छोड़ने की अपील की जाती थी, लेकिन अब जांच का तरीका ज्यादा सख्त कर दिया गया है.

अगर SMS आया है तो क्या करें?

अगर किसी उपभोक्ता को ऐसा मैसेज मिला है और उसे लगता है कि जानकारी गलत है, तो वह तुरंत शिकायत कर सकता है. इसके लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर 1800-2333-555 जारी किया है. इसके अलावा संबंधित तेल कंपनी की वेबसाइट पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है.

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सब्सिडी बंद होने के बाद क्या होगा?

अगर किसी की सब्सिडी बंद होती है, तब भी उसे गैस सिलेंडर मिलता रहेगा. लेकिन सिलेंडर बाजार कीमत पर खरीदना होगा और बैंक खाते में सब्सिडी की रकम नहीं आएगी.

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 देशभर में एक जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) की जगह ले लेगा। सरकार ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण के अनुरूप आधुनिक ग्रामीण विकास की रूपरेखा बताया है।

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125 दिन होगी रोजगार गारंटी

सरकार के अनुसार इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वर्ष की जाएगी। हालांकि, विपक्षी दलों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को समाप्त करने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह अधिकारों पर आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना थी और नए अधिनियम में डिजिटल प्रक्रिया, चेहरे का सत्यापन और प्रशासनिक बदलाव श्रमिकों के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

नए कानून से क्या बदलेगा?

नए कानून के तहत ऐसे हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। पहले यह सीमा 100 दिन की थी। केंद्र सरकार ने कहा कि यह योजना चार व्यापक कार्य श्रेणियों पर केंद्रित होगी, जिनमें जल संरक्षण परियोजनाएं; बुनियादी ग्रामीण ढांचा परियोजनाएं; आजीविका से संबंधित परियोजनाएं; और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने की परियोजनाएं शामिल हैं।

मनरेगा के तहत कार्यों को व्यापक श्रेणियों में बांटा गया था, जैसे जल संरक्षण, सूखा-रोधी उपाय, सिंचाई, पारंपरिक जल निकायों का पुनर्निर्माण, भूमि विकास और बाढ़ नियंत्रण। इस कानून में ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ शामिल की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायतें अपने इलाके के विकास के लिए एक संयुक्त योजना तैयार करेंगी, और इस योजना को ग्राम सभा की मंजूरी लेनी होगी।

सरकार के अनुसार, इस कानून के तहत सभी काम इन्हीं ग्राम विकास योजनाओं के आधार पर ही किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य लोगों की जरूरतों के हिसाब से हों और हर क्षेत्र का संपूर्ण व संतुलित विकास किया जा सके।

नए कानून का कार्यान्वयन कैसे होगा?

केंद्र ने कहा है कि मनरेगा की जगह नए कानून का कार्यान्वयन ‘सुचारु और निर्बाध’ होगा। मनरेगा को औपचारिक रूप से एक जुलाई 2026 से समाप्त किया जाएगा, उसी तारीख को वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू होगा। मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे और उन्हें नए कानून के तहत उन्हें ढाला जाएगा। सरकार ने कहा है कि अधूरे सार्वजनिक कार्य और परियोजनाएं पूरी करने को प्राथमिकता दी जाएगी। जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं किए जाते तब तक उन श्रमिकों के लिए जॉब कार्ड अस्थायी रूप से मान्य रहेंगे, जिनकी ‘ई-केवाईसी’ पूरी हो चुकी है।

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क्या चीजें नहीं बदलेंगी?

रोजगार की मांग करने के 15 दिन के अंदर रोजगार देना अनिवार्य रहेगा, ऐसा न करने पर श्रमिक राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे। मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी रहेगा और यह साप्ताहिक या ‘मस्टर रोल’ बंद होने के बाद 15 दिन के अंदर करना होगा। ‘मस्टर रोल’ एक आधिकारिक रजिस्टर या हाजिरी रिकॉर्ड होता है जिसमें किसी काम पर लगे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। इस कानून में यह प्रावधान भी बनाए रखा गया है कि यदि मजदूरी का भुगतान देर से होता है, तो श्रमिकों को उसका मुआवजा (क्षतिपूर्ति) दिया जाएगा।

नए प्रशासनिक प्रावधान क्या हैं?

कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अब चेहरे की पहचान पर आधारित प्रणाली उपयोग की जाएगी। हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि जहां खराब इंटरनेट सुविधा, तकनीकी समस्या या अन्य वास्तविक कठिनाइयां होंगी, वहां छूट दी जाएगी। एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कृषि सीजन के चरम पर होने (जैसे बुवाई और कटाई के समय) के दौरान दूसरे काम करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह अवधि राज्य सरकारें तय करेंगी, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो।

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LPG Cylinder: देशभर में LPG गैस सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. अब HP Gas, Indane और Bharat Gas जैसी कंपनियां सिलेंडर देने से पहले ग्राहकों से DAC यानी Delivery Authentication Code मांग रही हैं. यह नया सिस्टम ग्राहकों की सुरक्षा और सही डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है. हालांकि, इसी के साथ साइबर ठगी के मामले भी बढ़ने लगे हैं. इसलिए गैस कंपनियों ने ग्राहकों के लिए जरूरी अलर्ट जारी किया है.

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क्या है नया DAC सिस्टम?

DAC एक तरह का सिक्योरिटी कोड या OTP होता है, जो सिलेंडर बुकिंग के बाद ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है. जब डिलीवरी बॉय गैस सिलेंडर लेकर आपके घर पहुंचता है, तभी यह कोड उससे शेयर करना होता है. कोड मैच होने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाती है. इस सिस्टम का मकसद गैस सिलेंडर की गलत डिलीवरी रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है. इससे सिलेंडर सही ग्राहक तक पहुंचता है और रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है.

HP Gas ने ग्राहकों को क्यों किया अलर्ट?

HP Gas ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स के जरिए ग्राहकों को सावधान रहने की सलाह दी है. कंपनी के मुताबिक, कई ठग नकली LPG डिलीवरी मैसेज भेजकर लोगों से OTP मांग रहे हैं. ऐसे में किसी भी मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूर करें. कंपनी ने बताया कि असली मैसेज हमेशा आधिकारिक sender ID ‘VM-HPGASc-S’ से आता है. इसमें 4 अंकों का DAC कोड होता है. यह कोड केवल डिलीवरी के समय इस्तेमाल किया जाता है.

कंपनी ने साफ कहा है कि कोई भी HP Gas कर्मचारी फोन कॉल, WhatsApp या किसी लिंक के जरिए OTP नहीं मांगता. अगर कोई मैसेज जल्दी कार्रवाई करने का दबाव बनाए या अलग फॉर्मेट में दिखे, तो उसे नजरअंदाज करें.

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इन बातों का रखें खास ध्यान

HP Gas ने LPG गैस सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर कुछ बातों पर खास ध्यान देने की सलाह दी है. जैसे-

  • सबसे पहले यह देखें कि आपके सिलेंडर बुक कराया था या नहीं. बिना बुकिंग के अगर कोई मैसेज आए तो सावधान हो जाएं.
  • मैसेज में बुकिंग नंबर, इनवॉइस नंबर और 6 अंकों का DAC होना चाहिए. यह कोड केवल तब शेयर करें जब डिलीवरी बॉय सिलेंडर लेकर आपके घर पहुंच जाए.
  • DAC या OTP किसी भी फोन कॉल पर शेयर न करें.
  • WhatsApp लिंक या संदिग्ध मैसेज से सावधान रहें.

इंडेन और भारत गैस ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

इंडेन और भारत गैस ने भी ग्राहकों को सतर्क रहने को कहा है. इंडेन के मैसेज आमतौर पर VK-INDANE या VM-INDANE जैसी आधिकारिक ID से आते हैं. मैसेज में बुकिंग नंबर और DAC कोड दिया जाता है. अगर मैसेज का फॉर्मेट अलग लगे या जल्दबाजी में जानकारी मांगी जाए तो तुरंत सावधान हो जाएं. ध्यान रखें आजकल ऑनलाइन फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपको नुकसान से बचा सकती है. गैस कंपनियां कभी भी फोन या लिंक के जरिए OTP नहीं मांगतीं. इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना DAC शेयर न करें. अगर कोई मैसेज संदिग्ध लगे तो तुरंत अपनी गैस एजेंसी या कंपनी के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.

Railway New Ticket Booking System: रेलवे का नया प्लान तैयार, PRS सिस्टम अपग्रेड होते ही मिनटों नहीं सेकेंडों में बुक होगी टिकट

Railway New Ticket Booking System: भारतीय रेल अत्याधुनिक तकनीक क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के ट्रैक पर तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी के तहत रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अगली पीढ़ी का बनाने जा रही है। इससे व्यस्त सीजन में रेलवे की वेबसाइट और ऐप धीमे नहीं होंगे। ऐसे में तत्काल टिकट सुपरफास्ट गति से बुक होंगे। नई तकनीक से यात्रियों को वेटिंग टिकट के कंफर्म होने के चांस के बारे में बुकिंग के समय पता चल जाएगा। यात्रियों को यह सुविधा आगामी अगस्त यानी त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले मिलने लगेगी।

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रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नया सिस्टम भारतीय रेल के इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल बदलाव है। रेलवे के मिशन अगस्त में चुटकियों में टिकटों की बुकिंग होगी और आम यात्रियों के बीच तत्काल टिकटों के खत्म होने का तनाव गायब होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्नत पीआरएस को अगस्त के पहले हफ्ते तक पूरा करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग व एआई तकनीक यात्रियों के टिकट बुकिंग अनुभव को वेबसाइट के हैंग और अन्य बाधा वाले दौर से बाहर निकालकर हाईस्पीड के युग में ले जाएगी। रेलवे का प्रति मिनट टिकट बुक करने की क्षमता अभी 25 हजार है। इसे बढ़ाकर पांच लाख प्रति मिनट से अधिक करने का लक्ष्य है। नई तकनीक से सर्वर क्रैश का डर भी खत्म हो जाएगा।

दलालों पर अंकुश लगेगा

अधिकारी ने बताया कि दलालों के बॉट सॉफ्टवेयर को ब्लॉक करने के लिए एडवांस्ड एआई का इस्तेमाल होगा, जिससे कि असली यात्रियों को ही टिकट मिले। ऐप पर लॉगिन से लेकर पेमेंट तक की प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि तत्काल बुकिंग चुटकियों में पूरी हो जाएगी।

तत्काल रिफंड भी

वर्तमान में यात्री के अकाउंट से रुपये कट जाते हैं, लेकिन टिकट बुक नहीं हो पाता। रेलवे का जीरो-फेल मिशन इसे ठीक करेगा। स्मार्ट पेमेंट गेटवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पेमेंट फेल होने की दर को न्यूनतम स्तर पर ले आएगा। अगर राशि का ट्रांजेक्शन पूरा नहीं होता, तो रिफंड के लिए कई दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

दो करोड़ यूजर्स को एक साथ संभालेंगे

रेलवे के वर्तमान सिस्टम पर जब एक साथ 10 लाख से अधिक यूजर्स लॉगिन करते हैं, तो सर्वर का रिस्पॉन्स टाइम 40-60 फीसदी तक गिर जाता है। क्लाउड-आधारित नया सिस्टम एक साथ दो करोड़ तक सक्रिय यूजर्स को संभालने में सक्षम होगा। तत्काल विंडो के शुरुआती दो मिनट में ट्रांजेक्शन लोड से 30 से 40 प्रतिशत तक पेमेंट फेलियर हो जाते हैं। नई तकनीक से इसकी सफलता दर 99.9 प्रतिशत तक पहुंचने का लक्ष्य है।

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सीट नहीं मिलने पर दूसरी ट्रेन का विकल्प

नए सिस्टम का सबसे शानदार फीचर इसका एआई आधारित आकलन मॉडल है। यात्री जैसे ही वेटिंग टिकट चुनेगा, सिस्टम बुकिंग पेज पर ही बता देगा कि इसके कंफर्म होने की कितनी संभावना है। यदि यात्री की पसंदीदा ट्रेन में जगह नहीं है, तो सिस्टम दूसरी ट्रेन का सुझाव भी देगा, जहां सीट खाली है या टिकट कंफर्म होने के चांस 100 फीसदी हैं।

Indian Army New CDS: नए CDS बने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, जानें सेना में उनका अब तक का सफर

Indian Army New CDS : देश को नया CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिल गया है। भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। एन एस राजा सुब्रमणि, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर, अगले आदेश तक भारत सरकार के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे।

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कौन हैं एन एस राजा सुब्रमणि?

लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि 1 सितंबर, 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार हैं। इससे पहले, वे 1 जुलाई, 2024 से 31 जुलाई, 2025 तक सेना स्टाफ के उप प्रमुख और मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। गौरतलब है कि देश के वर्तमान CDS जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई, 2026 को समाप्त हो जाएगा।

CDS का पद कितना अहम?

CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद काफी अहमियत रखता है। इस पद पर बैठा व्यक्ति, भारत की तीनों सेनाओं यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करता है। अभी तक ये जिम्मेदारी जनरल अनिल चौहान संभाल रहे थे लेकिन 30 मई, 2026 को उनके कार्यकाल के समाप्त होने के बाद इस जिम्मेदारी को लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे।

भारत में CDS के पद की घोषणा 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की थी। देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत थे जोकि साल 2021 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हो गए थे। इसके बाद देश के सीडीएस पद की कमान जनरल अनिल चौहान को मिली।

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भारत में Chief of Defence Staff (CDS) पद की जरूरत कारगिल युद्ध के बाद से ही महसूस की गई क्योंकि इस युद्ध में तीनों सशस्त्र बलों (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) के बीच समन्वय की कमी दिखाई दी थी। ऐसे में उच्च स्तरीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमी सामने आई थी। ऐसे में ये जरूरी था कि कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित कर सके। इसी जरूरत ने CDS के पद का निर्माण करवाया।