Thursday, May 28, 2026
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IPS RVRamya Bharathi : कौन हैं आईपीएस रम्या भारती, जो 10 साल की बच्ची के रेप के केस पर बात करते समय हंसीं

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में एक 10 साल की बच्ची की यौन उत्पीड़न के बाद हत्या कर दी गई। बेरहमी से की गई मासूम की हत्या की वारदात के बाद से जनता जमकर भड़की हुई है। इसी बीच मामले की जांच में जुटीं पुलिस अधिकारी IPS आरवी राम्या भारती विवादों में आ गईं हैं। दरअसल, उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जहां वह इस केस पर बात करने बुलाई गई प्रेस ब्रीफिंग के समय ठहाके मारकर हंसती हुईं नजर आ रहीं हैं।

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क्या है विवाद

मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्याकांड को लेकर प्रेस ब्रीफिंग बुलाई गई थी। अब खबरें हैं कि पत्रकारों से बातचीत से पहले वहां मौजूद IPS भारती समेत अन्य पुलिस अधिकारी हंस रहे हैं। सोशल मीडिया वायरल हुए वीडियो में कोयंबटूर जोन की आईजी रम्या भारती के अलावा डीआईजी पी समिनातन और एसपी पवन कुमार रेड्डी भी नजर आ रहे हैं। अब इनकी हंसी को लेकर सोशल मीडिया पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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कौन हैं IPS रम्या भारती

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2008 से IPS की पारी की शुरुआत करने वालीं रम्या भारती केंद्रीय नियुक्तियों समेत कई अहम पदों पर रहीं। इनमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय में आने वाले BCAS यानी ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी शामिल है। वह यहां उप महानिदेशक पद पर थीं। खबर है कि वह एविएशन सिक्योरिटी से जुड़े कई मंचों पर भारत की अगुवाई कर चुकी हैं। साथ ही वह कोलकाता की उपायुक्त, चेन्नई में जॉइंट कमिश्नर, कोयंबटू, मदुरै और तिरुवन्नामलाई जैसे जिलों में एसपी भी रह चुकी हैं।

परिवार को सौंपा शव

यह मामला 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण, कथित यौन उत्पीड़न और हत्या से संबंधित है। बच्ची का शव 22 मई को सुलूर के कन्नामपलयम झील के किनारे मिला था, जिस पर चोटों के स्पष्ट निशान थे। 23 मई को जिला पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। मुख्य संदिग्धों में से एक की पहचान 33 वर्षीय के कार्थी के रूप में हुई, जो परिवार का पड़ोसी था। दूसरे संदिग्ध की पहचान आर मोहन के रूप में हुई।

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Forest Fire Video: उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश में भयंकर गर्मी के बीच जंगलों की आग ने विकराल रूप ले लिया है. पर्यटकों के लिए मशहूर शहर सोलन के क्यारीघाट गांव के कंडाघाट के जंगल में भयानक आग से पेड़ धू-धूकर जल रहे हैं. आग के साथ धुएं का गुबार सैकड़ों फीट ऊंचे तक दिखाई दे रहा है. आसपास के इलाके को खाली कर प्रशासन और वन विभाग आग बुझाने में जुटा है. हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का अलर्ट है, अगर बरसात होती है तो जंगलों की आग बुझने में मदद मिल सकती है.

हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड में भी भीषण आग लगी है. खबरों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कंडाघाट से आग क्यारीघाट के पहाड़ी इलाके में फैल गई है.आग की लपटों के कारण काले धुएं के बड़े-बड़े गुबार दिखाई दे रहे हैं. फायर ब्रिगेड, वन विभाग और स्थानीय लोग तेजी से फैलती आग को बुझाने में जुटे हैं.  इससे पहले मई में हिमाचल प्रदेश सचिवालय के पास छोटा शिमला में दुकान से फैली आग से काफी नुकसान हुआ था. हालांकि अग्निशमन विभाग ने आग को और फैलने से पहले ही तेजी से काबू में कर लिया था.मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने अग्निश्मन विभाग को बचाव कार्य में तेजी लाने को कहा है.

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उत्तराखंड के जंगलों की आग

उत्तराखंड के जंगलों में भी भीषण आग फैली है. बीजेपी सरकार ने जंगल की आग को बुझाने में मदद करने वालों को 1 लाख रुपये तक का इनाम देने की भी घोषणा की है. वनाग्नि रोकने के लिए वन विभाग ने 11 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को तैनात कर रखा है. चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और नैनीताल में आग की करीब छोटी बड़ी 4 सौ घटनाएं सामने आ चुकी हैं. करीब 330 हेक्टेयर जंगल इसमें खाक हो चुके हैं.

बांझ के जंगलों तक फैली आग

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की घटनाओं से हिमालय के ग्लेशियरों तक खतरा है. उत्तराखंड में जंगलों की आग 6 हजार फीट तक पहुंच चुकी है. बांझ के जंगल भी इसकी चपेट में आ गए हैं.ये जंगल मिट्टी का कटाव रोकते हैं. इन जंगलों में नमी के साथ हमेशा भूमिगत जल और झरनों को रिचार्ज करते हैं. बर्फबारी और बारिश से बांझ की जड़ें पहाड़ों और मिट्टी को दरकने से रोकती हैं, लेकिन बांझ के जंगल भी खतरे में हैं. 

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रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली

रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़  और चमोली में सबसे भयंकर आग लगी है. गढ़वाल रीजन में जंगल की आग सबसे विकराल है. इस सीजन में 25 मई तक 382 जगह आग लगने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं. सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर बर्बाद हो चुके हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है.

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Ebola Virus Alert: इबोला वायरस का संक्रमण अफ्रीकी देशों में बढ़ता जा रहा है. संक्रमण के सबसे ज्‍यादा मामले कांगो में सामने आ रहे हैं. इबोला वायरस के अब तक कांगो में 101 पॉज‍िट‍िव केस, 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में भारत सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है. इबोला वायरल संक्रमण को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. इनमें युगांडा और कांगो से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्‍क्रीनिंग से लेकर सेल्फ डिक्लेरेशन तक शामिल है. हालांकि, बता दें कि भारत में अभी तक इबोला वायरस संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

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इन यात्रियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन जरूरी

अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस के प्रकोप के मद्देनजर, विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं. विमान कंपनियों को युगांडा और कांगो के साथ (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म भरवाना और क्‍लेक्‍ट करना होगा.

इन एयरलाइंस की फ्लाइट्स जाती हैं कांगो और युगांडा

एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो डीजीसीए द्वारा कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की लिस्‍ट में हैं. वहीं, युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं.

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सेल्‍फ डिक्‍लेशन फॉर्म में क्‍या?

  • एयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह डिक्‍लेरेशन करना भी जरूरी किया गया है कि इबोला रोग के मौजूदा खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और इमिग्रेशन/हेल्‍थ यूनिट को सूचित करना चाहिए.
  • डीजीसीए द्वारा 22 मई को जारी एडवाइजरी के अनुसार, उड़ान के दौरान की जाने वाली डिक्‍लेरेशन में एयरलाइनों को यह भी उल्लेख करना होगा कि सभी यात्रियों (यात्रियों और चालक दल), चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो, वे इबोला वायरस से संक्रमित नहीं हैं.  इसे लेकर एक सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म भरकर उसे इमिग्रेशन काउंटर पर जमा करना होगा.
  • विमान में संदिग्ध मामलों के लिए डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए.
  • एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास ट्रिपल लेयर वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो.

भारत में इबोला वायरस का कितना खतरा?

राहत की बात ये है कि भारत में अब तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है. सरकार ने बताया कि देश में अब तक इबोला वायरस के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी शुरू कर दी है. नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी एंट्री प्‍वाइंट पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया. उन्होंने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) को निर्देश दिया कि इबोला का पता लगाने, जांच करने और निगरानी रखने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं लगातार प्रभावी रहें.

अमेरिका से चीन होते हुए लश्कर तक पहुँचे GoPro कैमरे, पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा – NIA रिपोर्ट से सनसनी

Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिका में निर्मित GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक रूप से चीन के एक अधिकृत वितरक को भेजा गया था, वह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के पास कैसे पहुंच गया, इसकी जांच एजेंसी तेजी से कर रही है।

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NIA के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल एक कैमरे की सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-विरोधी ताकतों को सीमाओं के पार हाई-टेक उपकरण मुहैया कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को उजागर कर सकता है। दरअसल, पिछले साल जुलाई में दाचीगाम जंगलों में मुठभेड़ के दौरान मारे गए लश्कर आतंकियों के पास से बरामद उच्च गुणवत्ता वाले GoPro कैमरे ने इस पूरे प्रकरण को नई दिशा दी है। आतंकी संगठन अब हमलों को रिकॉर्ड कर दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए इन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

GoPro कंपनी का बयान

NIA ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. से संपर्क किया। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में साफ बताया कि उक्त कैमरा चीन में स्थित अपने अधिकृत वाणिज्यिक वितरक को भेजा गया था। अब जांच एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि चीन से प्राप्त यह उपकरण लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक कैसे पहुंचा। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कैमरे पाकिस्तानी सेना द्वारा खरीदे गए होने और बाद में आतंकी संगठनों को सौंपे जाने की प्रबल आशंका है। बता दें कि भारत और चीन के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT) न होने के कारण यह मामला राजनयिक स्तर पर उठाया जा रहा है।

आरोपपत्र के बाद भी जांच जारी

NIA ने पहलगाम आतंकी हमले का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें हमले के तात्कालिक परिचालन संबंधी तथ्य स्थापित किए गए हैं। हालांकि, उपकरण की खरीद और आपूर्ति शृंखला की जांच अभी भी चल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन से आयातित एक सामान्य व्यावसायिक उत्पाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन तक कैसे पहुंचा?

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पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर मृतक पर्यटक थे। इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्रों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

चांपा में “कुबेर का खजाना” कार्यक्रम का भव्य आयोजन, राज दीदी ने दिए सफलता और समृद्धि के मंत्र

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डिडवानिया फाउंडेशन, चांपा द्वारा होटल ड्रीम पॉइंट में प्रसिद्ध आध्यात्मिक प्रेरक वक्ता श्रीमती राजेश्वरी मोदी (राज दीदी), मुंबई के सानिध्य में “कुबेर का खजाना” प्रेरणादायी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में चांपा, जांजगीर, रायगढ़, सक्ती, अकलतरा, बाराद्वार, बिलासपुर, रायपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं परिवारजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं स्वागत नृत्य के साथ किया गया।

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में राज दीदी ने नारायण शास्त्र के अनुसार वाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति की वाणी ही उसके जीवन में सुख एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि दूसरों की बुराई करने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिसका प्रभाव स्वयं के जीवन पर भी पड़ता है। वहीं आदरपूर्वक एवं सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करने से जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है।

राज दीदी ने उपस्थित जनों को सकारात्मक सोच, पारिवारिक सामंजस्य, आत्मविश्वास एवं जीवन में अच्छे संस्कारों के महत्व के बारे में भी प्रेरित किया। उनके प्रेरणादायी विचारों से पूरा सभागार सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में “वरदान रेकी” प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों को रेकी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ एवं जीवन उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन डिडवानिया फाउंडेशन द्वारा श्री बजरंगलाल डिडवानिया जी के विशेष मार्गदर्शन एवं श्रीमती विद्या डिडवानिया जी की प्रेरणा से संपन्न हुआ।

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नई दिल्ली: भारत में अब भी मृत्यु दर उतनी ही बनी हुई है, जितनी एक साल पहले थे. भारत में अब भी मृत्यु दर प्रति हजार आबादी पर 6.4 बनी हुई है. यानी, हर एक हजार लोगों में से 6.4 की मौत हो जा रही है. ये आंकड़े 2024 के हैं. 2023 में भी मृत्यु दर 6.4 ही थी. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में मृत्यु दर अभी भी प्री-कोविड स्तर के ऊपर बनी हुई है. कोविड से पहले 2019 और 2020 में मृत्यु दर 6.0 थी. ये सारी जानकारी केंद्र सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की 2024 की रिपोर्ट में सामने आए हैं, जिसे हाल ही में जारी किया गया है. इस रिपोर्ट में जन्म और मृत्यु दर को लेकर आंकड़े सामने आते हैं. ये रिपोर्ट बताती है कि 2024 में भारत में पुरुषों की मृत्यु दर 7.1 और महिलाओं की 5.6 है. इससे ये भी पता चलता है कि शहरों की तुलना में गांवों में मृत्यु दर अब भी ज्यादा हैं. गांवों में प्रति हजार आबादी पर मृत्यु दर 6.8 और गांवों में 5.6 है.

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और कितने बच्चे पैदा हो रहे हैं?

2024 की SRS रिपोर्ट से पता चलता है कि जन्म दर में थोड़ी सी कमी आई है. भारत में क्रूड बर्थ रेट यानी प्रति हजार आबादी पर जन्म की संख्या 2024 में 2023 की तुलना में थोड़ी कम है. 2023 में बर्थ रेड 18.4 थी जो 2024 में थोड़ी कम होकर 18.3 हो गई. शहरी इलाकों में यह 14.9 से घटकर 14.7 और ग्रामीण इलाकों में 20.3 से घटकर 20.2 हो गई. जन्म के समय सेक्स रेशियो यानी लिंग अनुपात में भी मामूली सुधार हुआ है. लिंग अनुपात का मतलब है कि हर एक हजार लड़कों पर कितनी लड़कियों का जन्म हो रहा है. 2022-24 के बीच लिंग अनुपात हर एक हजार लड़कों पर 918 हो गया. 2020-22 के बीच ये 914 था. इसका मतलब हुआ कि 2022-24 के बीच अगर एक हजार लड़कों का जन्म हुआ तो 918 लड़कियों भी पैदा हुईं. ग्रामीण इलाकों में लिंग अनुपात हर हजार लड़कों पर 914 और शहरों में 928 रहा.

हालांकि, क्रूड बर्थ रेट में थोड़ी गिरावट आई है. क्रूड बर्थ रेट से पता चलता है कि हर 1000 लोगों पर कितनों का जन्म हो रहा है? 2024 में हर एक हजार लोगों पर क्रूड बर्थ रेट 18.3 थी. इसका मतलब हुआ कि हर 1000 लोगों पर 18.3 बच्चों का जन्म हो रहा है. गांवों में ये 20.2 और शहरों में 14.7 है. सबसे ज्यादा क्रूड बर्थ रेट बिहार में है. बिहार में हर 1000 लोगों पर बर्थ रेट 26.8 है. यानी, बिहार में 1000 लोगों पर 26 या 27 बच्चों का जन्म हो रहा है. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है, जहां ये 23.5 है. जबकि, राजस्थान में ये 22.8 और मध्य प्रदेश में 22.5 है.

2019 में भारत में क्रूड बर्थ रेट 19.7 थी. ये दिखाता है कि अब पैदा होने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है. इसकी एक वजह यह है कि अब टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में गिरावट आ रही है. TFR से पता चलता है कि एक महिला अपनी जिंदगी में औसतन कितने बच्चों को जन्म दे रही है. 2012-14 में फर्टिलिटी रेट 2.3 था, जबकि 2022-24 में ये घटकर 1.9 पर आ गया. मतलब 10 साल पहले तक एक महिला 2 से 3 बच्चों को जन्म दे रही थी. लेकिन अब ज्यादातर महिलाएं 1 या 2 ही बच्चा कर रही हैं.

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लेकिन एक चिंता वाली बात ये है कि अब भी भारत में हर साल पैदा होने वाले 1000 बच्चों में से 25 की मौत 1 साल के भीतर ही हो जाती है. इसे इन्फैंट मोर्टेलिटी रेट या शिशु मृत्यु दर कहते हैं. 2024 में भारत में शिशु मृत्यु दर हर एक हजार जन्म पर 25.4 है. गांवों में ये 28.5 और शहरों में 17.4 है. सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर छत्तीसगढ़ में है, जहां पैदा होने वाले हर 1000 बच्चों में से 36 की मौत सालभर में ही हो जाती है. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां 35 बच्चों की मौत 1 साल में हो जाती है.  हालांकि, अच्छी बात है कि शिशु मृत्यु दर में 10 साल में जबरदस्त सुधार भी हुआ है. 2012-14 की तुलना में 2022-24 में शिशु मृत्यु दर में 37.4% की कमी आई है.

NIA On Pahalgham Attack: पेड़ के नीचे खाना, बैसरन पार्क की रेकी और धर्म पूछकर हत्या- पहलगाम हमले की NIA चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे

NIA On Pahalgham Attack: पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, हमला करने वाले आतंकवादी उसी दिन बैसरन मैदान के पास एक साथ बैठे थे और लंच करने के बाद उन्होंने 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें 25 भारतीय नागरिक थे। चार्जशीट में यह भी कहा गया कि हमले के बाद आतंकवादियों ने जश्न मनाते हुए फायरिंग की थी।

NIA की चार्जशीट के मुताबिक, इस हमले की साजिश द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ लंगड़ा ने रची थी। उसने हमलावरों को बैसरन मैदान के लोकेशन कॉर्डिनेट्स भेजे थे। जांच एजेंसी ने बताया कि आतंकियों से बरामद दो मोबाइल फोन से मिले डेटा में साजिद जट्ट के साथ चैट और कुछ स्क्रीनशॉट मिले हैं। ये दोनों फोन पाकिस्तान में बेचे गए थे, जिसकी पुष्टि मोबाइल निर्माता शाओमी की भारतीय यूनिट से प्राप्त जानकारी से हुई।

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7 आरोपियों के नाम शामिल

चार्जशीट में 7 आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें पाकिस्तान के कसूर निवासी साजिद जट्ट, तीन हमलावर (फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी) शामिल हैं। ये तीनों 28 जुलाई 2025 को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इसके अलावा स्थानीय निवासी बशीर अहमद जोठटद और परवेज अहमद को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर हत्या, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

NIA का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य, एन्क्रिप्टेड संपर्क और हथियारों की आपूर्ति यह साबित करती है कि यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमला था। चार्जशीट के अनुसार, 21 अप्रैल को तीनों आतंकी बैसरन मैदान से करीब एक किलोमीटर दूर परवेज अहमद की झोपड़ी पर पहुंचे थे। उन्होंने अल्लाह के नाम पर भोजन और सुरक्षित ठिकाने की मांग की। वहां उन्होंने अपने हथियार छिपाने को कहा और खाना खाते समय अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की तैनाती और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई। अगले दिन यानी 22 अप्रैल को तीनों आतंकी बैसरन पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने पहले एक पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाया। इसके बाद उन्होंने अपने बैग से कंबल निकाले और खुद को ढक लिया। दो आतंकी पार्क के एंट्री गेट की ओर बढ़े, जबकि फैसल जट्ट जिपलाइन की तरफ गया।

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धार्मिक पहचान की जानकारी

आतंकियों ने सुनियोजित तरीके से लोगों की धार्मिक पहचान की जांच की और जो लोग कलमा नहीं पढ़ सके या जिन्होंने खुद को गैर-मुस्लिम बताया, उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई। चार्जशीट में कहा गया कि हमलावर बार-बार ‘मोदी को बता दो’ कह रहे थे, जिससे यह साफ होता है कि हमला भारत सरकार को संदेश देने के मकसद से किया गया था।

जांच एजेंसी ने बताया कि हमले के दौरान आतंकियों ने मैदान को किल जोन में बदल दिया ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को निशाना बनाया जा सके। भागते समय भी उन्होंने पेड़ों के पीछे छिपे तीन नागरिकों को गोली मार दी और निकलते वक्त जश्न में फायरिंग की। NIA ने गुप्त गवाह के बयान का भी हवाला दिया है, जिसने हमले से एक दिन पहले तीन संदिग्धों को परवेज अहमद की झोपड़ी के पास देखा था।

चंद्रयान-3 का दुनियाभर में डंका! अमेरिका में ISRO को मिला अंतरिक्ष का सबसे बड़ा सम्मान

नई दिल्ली : भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार सफल लैंडिंग कर इतिहास रचने वाले इस मिशन को अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) ने ‘2026 गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड’ से नवाजा है। 21 मई को वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक खास समारोह में इस मिशन को अंतरिक्ष विज्ञान के इस सबसे बड़े सम्मान से सम्मानित किया गया।

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ISRO की ओर से राजदूत विनय क्वात्रा ने लिया अवार्ड

AIAA ASCEND 2026 सम्मेलन के दौरान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तरफ से अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने यह अवार्ड स्वीकार किया। इस गौरवशाली अवसर पर राजदूत क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्पेस विजन 2047’ की रूपरेखा पेश की। उन्होंने डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन (गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण), मानव अंतरिक्ष मिशन और भारत के तेजी से उभरते कमर्शियल स्पेस सेक्टर की जानकारी दुनिया के सामने रखी। इसके साथ ही, उन्होंने अंतरिक्ष खोज के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की सरकारों, उद्योगों और रिसर्च संस्थानों के बीच साझेदारी को और गहरा करने का आह्वान किया।

क्यों खास है चंद्रयान-3 की यह उपलब्धि?

23 अगस्त 2023 अंतरिक्ष जगत के लिए एक मील का पत्थर है। इसी दिन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग की थी और ऐसा करने वाला यह दुनिया का पहला स्पेसक्राफ्ट बन गया था। चांद का यह हिस्सा वैज्ञानिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां इससे पहले कभी सतह पर जाकर खोज नहीं की गई थी। इस मिशन ने न सिर्फ भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा भेजा, बल्कि चांद की मिट्टी में कई अहम रसायनों की मौजूदगी की भी पुष्टि की। इन स्थानीय संसाधनों से भविष्य में चांद की सतह पर मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स चलाने की संभावनाएं भी खुल गई हैं।

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क्या है ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड’?

गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड AIAA द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के लिए दिया जाने वाला सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार किसी खास व्यक्ति या टीम को दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत श्रीमती गोडार्ड ने अपने पति रॉबर्ट एच. गोडार्ड की याद में की थी। रॉबर्ट गोडार्ड एक विजनरी, बेहतरीन इंजीनियर और लिक्विड रॉकेट इंजन के प्रणेता थे, जिनके शुरुआती प्रयोगों ने अंतरिक्ष विज्ञान की नींव रखी थी। साल 1975 में इंस्टीट्यूट ने इस पुरस्कार के चयन के दायरे को बढ़ाते हुए इसे इसका मौजूदा नाम और स्वरूप दिया था।

बालको का ‘ब्लैक मेज़’, महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

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कोरबा : बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बालकोनगर में ‘ब्लैक मेज़’ का शुभारंभ किया। प्रोजेक्ट उन्नति की महिलाओं द्वारा संचालित यह फाइन डाइनिंग कैफे महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामुदायिक विकास का सशक्त प्रतीक है। ताज़ा पकवानों की मनमोहक खुशबू, सलीके से सजा आकर्षक वातावरण और मेहमानों का आत्मीय स्वागत करती महिलाओं का आत्मविश्वास इसकी सफलता और परिवर्तन की कहानी है।

बालको की प्रमुख महिला सशक्तिकरण पहल ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ की महिलाओं द्वारा संचालित ‘ब्लैक मेज़’ उस यात्रा का नया अध्याय है, जिसकी शुरुआत कभी ‘उन्नति चौपाल’ के रूप में हुई थी। चाट-पकौड़ी और स्थानीय व्यंजन परोसने वाला एक छोटा फास्ट-फूड केंद्र आज 50 से अधिक लोगों की बैठने की क्षमता वाले आधुनिक फाइन डाइनिंग कैफे में परिवर्तित हो चुका है। निजी आयोजनों और विशेष अवसरों के लिए तैयार इसका विशेष डाइनिंग स्पेस इसकी भव्यता को और बढ़ाता है।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको समुदाय, विशेषकर महिलाओं के लिए ऐसे अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उनकी आजीविका क्षमता और सम्मान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारे आसपास के क्षेत्रों की 6,000 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता और अपने परिवारों के दीर्घकालिक विकास की दिशा में आत्मविश्वास से कदम बढ़ा रही हैं। मुझे विश्वास है कि ‘ब्लैक मेज़’ की यह पहल और अधिक महिलाओं को आगे बढ़कर अपनी सफलता की नई कहानी लिखने के लिए प्रेरित करेगी।”

‘ब्लैक मेज़’ की सबसे बड़ी पहचान हर परोसे गए भोजन के पीछे छिपी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है। इसके केंद्र में हैं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की वे महिलाएं, जिन्होंने कभी स्वयं को केवल गृहिणी के रूप में देखा था। प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से उन्हें व्यंजन कला, आतिथ्य सेवा, ग्राहक प्रबंधन, उद्यमिता और खाद्य गुणवत्ता जैसे क्षेत्रों में सुनियोजित प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण ने न केवल उनके कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।

उन्नति समूह की सदस्य निर्मला देशमुख ने कहा कि मैंने लंबा सफर तय किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। 2022 में उन्नति से जुड़ने के बाद चार वर्षों में मैंने अपने भीतर और अपनी साथी बहनों में जो बदलाव देखा है, वह अविश्वसनीय है। हमारे पास हुनर था, लेकिन बालको के सहयोग ने हमें उसे बड़े मंच पर पहचान दिलाई।

समूह की एक अन्य सदस्य भारती ने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरी बेटी ने पूछा कि अब क्या घर पर मेरे हाथ का स्वाद मिलेगा या उसे ‘ब्लैक मेज़’ आना पड़ेगा। उस पल मुझे अपनी उपलब्धि का एहसास हुआ। प्रोजेक्ट उन्नति ने मुझे अपनी प्रतिभा को निखारने और पहचान बनाने का ऐसा मंच दिया है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

‘ब्लैक मेज़’ का डाइनिंग स्पेस भी अपने आप में खास अनुभव प्रदान करता है। यहां के मेन्यू छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों, उत्तर भारतीय स्वाद, चाइनीज़ पकवानों और लोकप्रिय फास्ट-फूड का अनूठा संगम स्थानीय संस्कृति और आधुनिकता को एक साथ प्रस्तुत करता है।

कोरबा से आए एक ग्राहक ने कहा कि ब्लैक मेज़ का वातावरण बेहद आकर्षक है। यहां भोजन और कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।

वर्षों से प्रोजेक्ट उन्नति ने 560 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता और सतत आजीविका के अवसर विकसित किए हैं। आज इन समूहों से जुड़ी 6,000 से अधिक महिलाएं, उन्नति महासंघ (यूएमएस) के माध्यम से संचालित विभिन्न सूक्ष्म और लघु उद्यमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

‘ब्लैक मेज़’ केवल एक कैफे नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा संचालित सतत उद्यमिता का प्रेरक मॉडल है, जो आजीविका सृजन के साथ आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयां देता है। बालको की यह पहल उस भविष्य की ओर संकेत करती है, जहां महिलाएं विकास की सहभागी ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रही हैं।

Pahalgam Attack: पहलगाम नरसंहार में बड़ा खुलासा – ‘लंगड़ा’ के इशारों पर चला था पूरा ऑपरेशन, NIA चार्जशीट में सनसनीखेज दावे

Pahalgam Attack: अप्रैल 2025 में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक अहम चार्जशीट दायर की है। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। देश की सबसे बड़ी आतंकवाद-रोधी संस्था की जांच में यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि इस खून-खराबे की पूरी साजिश पाकिस्तान से रची और नियंत्रित की गई थी।

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NIA की चार्जशीट में सामने आए अहम खुलासे

NIA के अनुसार, इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके मुखौटा (प्रॉक्सी) संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने अंजाम दिया था। इस पूरे ऑपरेशन को सीमा पार से संचालित किया जा रहा था।

  • मुख्य साजिशकर्ता: लश्कर का खूंखार आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ इस हमले का मास्टरमाइंड था। वह पाकिस्तान के लाहौर से बैठकर पहलगाम में मौजूद आतंकियों को सीधे निर्देश दे रहा था।
  • रेकी और प्लानिंग: 15 और 16 अप्रैल को सैफुल्लाह ने तीन आतंकियों फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी को बैसरन घाटी में भेजा। वहां उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की आवाजाही की रेकी की।
  • स्थानीय मददगार: इस हमले को अंजाम देने में परवेज और बशीर अहमद नाम के दो स्थानीय लोगों ने भी पाकिस्तानी आतंकियों की मदद की थी।

‘फॉल्स फ्लैग’ नैरेटिव का पर्दाफाश

जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए पाकिस्तानी आतंकवादियों ने “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” (यह दावा कि भारत ने खुद अपने लोगों पर हमला करवाया है) की एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी फैलाई थी। हमले के तुरंत बाद, TRF ने ‘कश्मीर फाइट’ नामक एक टेलीग्राम चैनल पर जिम्मेदारी ली। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू होने लगी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कड़ी निंदा की, तो TRF डर गया। उसने अपना बयान बदलते हुए दावा किया कि चैनल हैक हो गया था।

NIA की तकनीकी जांच में सामने आया सच

  • ‘कश्मीर फाइट’ चैनल: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित बट्टाग्राम इलाके से चलाया जा रहा था।
  • ‘TheResistanceFront_OfFcial’ चैनल: यह दूसरा टेलीग्राम चैनल रावलपिंडी से संचालित हो रहा था।

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ठोस डिजिटल सबूतों ने खोली पोल

NIA ने अपनी चार्जशीट में पुख्ता डिजिटल और तकनीकी सबूत पेश किए हैं, जो सीधे पाकिस्तान की ओर इशारा करते हैं:

  • पाकिस्तान से खरीदे गए फोन: ‘ऑपरेशन महादेव’ में मारे गए आतंकियों के पास से दो मोबाइल फोन मिले। एक फोन ऑनलाइन खरीदकर लाहौर के ‘कायद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट’ भेजा गया था, जबकि दूसरा कराची के ‘शाहरा’ इलाके से लिया गया था।
  • रियल-टाइम लोकेशन शेयरिंग: हमले वाले दिन सैफुल्लाह लाहौर से लगातार आतंकियों के संपर्क में था। वह उन्हें रियल-टाइम डेटा, भागने के रास्ते, छिपने की जगहें और कोऑर्डिनेट्स भेज रहा था।