Tuesday, August 25, 2026
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भारत में पहली बार दिखेगी दुनिया के सबसे एडवांस फाइटर जेट की ताकत, पाक सीमा के पास जुटेंगे 8 देश

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े मल्टीनेशनल युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0′ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक राजस्थान के जोधपुर एयरबेस (Jodhpur Airbase) पर आयोजित किया जाएगा. इस अभ्यास का मुख्य आकर्षण अमेरिका का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 (F-35) होगा, जो पहली बार भारत में किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन सकता है. इस अभ्यास में अमेरिका,  फ्रांस और समेत कुल आठ देश अपने एयरक्राफ्ट के साथ हिस्सा ले सकते हैं. जबकि 30 से ज्यादा देश ऑब्जर्वर रहेंगे. इससे ठीक पहले 9 से 22 सितंबर तक भारत-जापान के बीच ‘वीर गार्जियन 26’ का आयोजन होगा, जिसमें जापानी F-2 विमान पहली बार भारतीय आसमान में गर्जना करेंगे.

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30 से ज्यादा देश होंगे ऑब्जर्वर

रक्षा अधिकारी के मुताबिक, अभी तक तरंग शक्ति 2026 के लिए अमेरिका के शेड्यूल में एफ-35 लड़ाकू विमान मौजूद हैं. अभ्यास में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, यूएई, ग्रीस, श्रीलंका और बांग्लादेश के विमान हिस्सा लेंगे. इसके अलावा 30 से ज्यादा देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे. यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर होगा.

2024 में हुई थी ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत

इससे पहले भारतीय वायुसेना ने साल 2024 में अपने सबसे बड़े मल्टीनेशनल वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत की थी. तरंग शक्ति का पहला संस्करण को 2 चरणों आयोजित किया गया था. फर्स्ट फेज तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में और दूसरा फेज राजस्थान के जोधपुर एयरबेस में आयोजित हुआ था. सुलूर एयरबेस पर आयोजित पहले चरण में फ्रांस के राफेल, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान शामिल हुए थे. वहीं, भारतीय वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म- राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, MiG-29 और प्रचंड- ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया था.  दूसरा चरण जोधपुर में आयोजित किया गया था. इस चरण में ऑस्ट्रेलिया का EA-18G ग्रोलर, ग्रीस का F-16, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का F-16 और अमेरिका के A-10 और F-16 सहित कुल 27 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे. इसके अलावा दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और 3 स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा बने थे.

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9-22 सितंबर तक भारत-जापान के बीच ‘वीर गार्जियन’

इसके अलावा तरंग शक्ति 2026 के आयोजन से ठीक पहले जोधपुर में भारत और जापान की वायुसेना के बीच द्विपक्षीय वायु सैन्य अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ का आयोजन किया जा रहा है. यह अभ्यास 9 सितंबर से 22 सितंबर तक जारी रहेगा. डिफेंस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI (Su-30MKI) और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के F-2 फाइटर प्लेन इसमें हिस्सा लेने जा रहे हैं. जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के फाइटर जेट पहली बार भारत आएंगे और इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे.

भारत-जापान के रक्षा मंत्री की हुई थी बैठक

बता दें कि हाल ही में 20 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच नई दिल्ली में हाई लेवल बाइलेटरल मीटिंग हुई थी. बैठक के बाद संयुक्त बयान में दोनों देशों ने नियमित सैन्य सहयोग का स्वागत करते हुए थलसेना के ‘धर्म गार्जियन’ और नौसेना के ‘जेमेक्स’ (JIMEX) के साथ-साथ ‘वीर गार्जियन 26′ की तैयारियों पर विशेष संतोष जाहिर किया.  भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास का पहला एडिशन साल 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित किया गया था. उस दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से Su-30MKI, C-17 ग्लोबमास्टर और IL-78 मिड-एयर रीफ्यूलर विमानों ने भाग लिया था, जबकि जापान की तरफ से चार F-2 और चार F-15 लड़ाकू विमान ने हिस्सा लिया था.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बालको की बढ़ती भूमिका

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कोरबा : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की कहानी में कुछ संस्थानों का योगदान केवल उनके उत्पादन आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। उनका वास्तविक प्रभाव रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, युवाओं के लिए अवसर और समाज में आए सकारात्मक बदलावों से समझा जाता है। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ऐसी ही औद्योगिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वर्ष 1965 में स्थापित बालको आज छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान का प्रमुख स्तंभ है। वर्ष 2001 में वेदांता समूह के प्रबंधन में आने के बाद कंपनी ने उत्पादन क्षमता, ऊर्जा, तकनीक और अधोसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया। वर्तमान में बालको की एल्यूमिनियम स्मेल्टर क्षमता 5.95 लाख टन प्रतिवर्ष है और विस्तार परियोजना के बाद यह बढ़कर 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। यह विस्तार केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, रोजगार, व्यापार और स्थानीय विकास के अगले चरण की नींव है।

उद्योग से बढ़ती स्थानीय अर्थव्यवस्था की ताकत
बालको का प्रभाव उसके संयंत्र परिसर तक सीमित नहीं है। कंपनी के विकास के साथ कोरबा और बालकोनगर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। प्रत्यक्ष रोजगार के साथ व्यवसायिक साझेदारों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सेवाओं तथा छोटे-बड़े स्थानीय व्यवसायों के लिए अवसर बढ़े हैं। पिछले एक दशक में बालको ने छत्तीसगढ़ राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व में लगभग 29,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
देश की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में भी बालको की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी अपने उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत एल्यूमिनियम घरेलू बाजार में उपलब्ध कराती है। एल्यूमिनियम आधुनिक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धातुओं में शामिल है और परिवहन, निर्माण, ऊर्जा, रक्षा तथा अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। बालको ने देश की वैज्ञानिक और रणनीतिक परियोजनाओं के लिए एल्यूमिनियम की आपूर्ति में भी योगदान दिया है।

1 मिलियन टन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बालको अपनी विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है और 1 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 525 किलो एम्पीयर पॉटलाइन से फर्स्ट मेटल उत्पादन शुरू होना क्षमता विस्तार यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि नई तकनीक, बेहतर दक्षता और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप संचालन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह विस्तार केवल बालको की उत्पादन क्षमता में वृद्धि नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी जुड़ी हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होने, स्थानीय व्यवसायों को गति मिलने तथा व्यवसायिक साझेदारों, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्यमों के लिए नए अवसर बनने की संभावना है। इस तरह बालको का आर्थिक प्रभाव संयंत्र से निकलकर कोरबा और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचता है।

तकनीक और नवाचार से स्मार्ट उद्योग की ओर
औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के बदलते दौर में तकनीक और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। बालको अपने संचालन को अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल बनाने के लिए डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा आधारित समाधानों को अपना रहा है।

उत्पादन प्रक्रियाओं में डिजिटल निगरानी और स्मार्ट समाधान परिचालन दक्षता, गुणवत्ता तथा सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। तकनीक आधारित यह परिवर्तन कंपनी को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करने के साथ उत्पादन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार की संस्कृति को मजबूत कर रहा है।

सतत विकास के साथ औद्योगिक प्रगति
एल्यूमिनियम उत्पादन के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करना बालको की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, पौधारोपण, इलेक्ट्रिक वाहनों और कम कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादों के माध्यम से अधिक टिकाऊ औद्योगिक विकास की दिशा में काम कर रही है।
रिस्टोरा लो-कार्बन एल्यूमिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कम कार्बन उत्सर्जन वाले एल्यूमिनियम की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में योगदान देता है। औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का यह प्रयास भविष्य के अधिक टिकाऊ उद्योग की दिशा को दर्शाता है।

सुरक्षा के साथ विकास की संस्कृति
औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बालको कर्मचारियों और व्यवसायिक साझेदारों के लिए नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रथम, ‘असुरक्षित कार्य को ना कहना’ मॉक ड्रिल, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। कंपनी की ‘सुरक्षा संकल्प’ पहल सुरक्षित कार्य संस्कृति को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। सुरक्षा को संचालन का अभिन्न हिस्सा बनाकर बालको सुरक्षित कार्यस्थल, जागरूक कार्यबल और जिम्मेदार औद्योगिक संचालन की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है।

विकसित भारत की औद्योगिक यात्रा में योगदान
भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में मजबूत घरेलू धातु क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। बुनियादी ढांचे से लेकर रक्षा, ऊर्जा, परिवहन और अंतरिक्ष तक, देश की विकास यात्रा गुणवत्तापूर्ण धातुओं की उपलब्धता से जुड़ी है। ऐसे में बालको का बढ़ता उत्पादन, तकनीकी क्षमता और नवाचार देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ से विकसित भारत की दिशा में बालको की यात्रा अब एक औद्योगिक संयंत्र की विकास कहानी से आगे बढ़कर रोजगार, तकनीक, नवाचार, आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण की कहानी बन चुकी है। 1 मिलियन टन की ओर बढ़ता बालको उत्पादन क्षमता के विस्तार के साथ देश की बढ़ती एल्यूमिनियम जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
आने वाले वर्षों में क्षमता विस्तार, तकनीकी नवाचार और सतत विकास के माध्यम से बालको भारतीय एल्यूमिनियम उद्योग को नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ की धरती पर शुरू हुई यह औद्योगिक यात्रा अब राष्ट्र निर्माण के बड़े लक्ष्य से जुड़ चुकी है। बालको का अगला अध्याय केवल अधिक एल्यूमिनियम उत्पादन का नहीं, बल्कि अधिक अवसर, अधिक नवाचार और अधिक विकास गढ़ने का है।

Hospital Fire: अस्पताल के NICU में दर्दनाक हादसा, वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने से 3 नवजातों की मौत

Hospital Fire: महाराष्ट्र के अमरावती में सोमवार सुबह एक दर्दनाक अस्पताल हादसा सामने आया. जिला महिला अस्पताल की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी NICU में तड़के अचानक आग लग गई. इस हादसे में तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई. आग लगने के समय यूनिट में करीब 39 नवजात भर्ती बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, आग सुबह करीब 3:30 बजे अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित NICU में लगी. शुरुआती जानकारी में आग की वजह वेंटिलेटर में हुए संभावित विस्फोट को बताया जा रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है. आग कैसे लगी और इसके पीछे तकनीकी खराबी थी या कोई अन्य वजह, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

रक्षाबंधन से पहले बड़ा झटका! राखी और गिफ्ट भेजने पर अब देना होगा ज्यादा डाक शुल्क

आग लगते ही मची अफरा-तफरी

NICU में आग और धुआं दिखाई देने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारियों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. सबसे बड़ी चुनौती गंभीर हालत में भर्ती नवजातों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना था. अस्पताल कर्मचारियों ने प्रभावित यूनिट से बच्चों को निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की कोशिश की. धुएं और आग के बीच कई नवजातों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया. हालांकि, तीन बच्चों को गंभीर रूप से झुलसने के कारण बचाया नहीं जा सका. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में छह अन्य नवजातों को आगे के इलाज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया. इन बच्चों की स्थिति को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई थी. अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा टीम ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कदम उठाए.

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वेंटिलेटर से आग लगने की आशंका

अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में वेंटिलेटर से जुड़ी किसी घटना को आग की संभावित वजह माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि उपकरण में विस्फोट के बाद आग भड़क सकती है. हालांकि, यह अभी केवल प्रारंभिक जानकारी है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी. आग की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए अस्पताल के उपकरणों और विद्युत व्यवस्था की जांच की जाएगी. फायर सेफ्टी सिस्टम और NICU में मौजूद आपातकालीन इंतजाम भी जांच के दायरे में रहेंगे.

रक्षाबंधन से पहले बड़ा झटका! राखी और गिफ्ट भेजने पर अब देना होगा ज्यादा डाक शुल्क

रक्षाबंधन के मौके पर भारतीय डाक विभाग ने भाई और बहनों को बड़ा झटका दिया है. भाई-बहन जो अपने प्रदेश से बाहर रह रहे हैं, उन्हें गिफ्ट और राखी भेजने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. भाई अपनी बहन के लिए तोहफा और बहन अपने भाई के लिए राखी भेजने के लिए पार्सल या स्पीड पोस्ट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब इसके लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, क्योंकि भारतीय डाक ने पार्सल और स्टीड पोस्ट की दरें बढ़ा दी है.

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पार्सल भेजने में कितना लगेगा शुल्क

पार्सल भेजने की दर के लिए वजन, आकार और दूरी और सेवा के प्रकार पर निर्भर करता है. वहीं अब 500 ग्राम वजन वाले पार्सल भेजने का शुल्क 30 से 40 रुपये बढ़ा दिया गया है. पहले 500 ग्राम पार्सल के लिए महज 42 रुपये शुल्क लिया जाता था. लेकिन अब 77 से 84 रुपये तक शुल्क देना होगा. राज्य के अंदर 77 रुपये और दूसरे राज्य में 84 रुपये का शुल्क देना होगा. वहीं शुल्क के अलावा GST अलग से देना होगा.

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स्पीड पोस्ट पर बढ़ा शुल्क

डाक विभाग ने स्पीड पोस्ट (Speed Post) की दरें भी महंगा हो गया है. पहले 20 ग्राम वजन वाले Speed Post के लिए 42 रुपये लिया जाता था. लेकिन अब इसमें 14 रुपये सीधे बोढ़ोतरी की गई है. अब 20 ग्राम के Speed Post के लिए 56 रुपये खर्च करने होंगे. जबकि वजन और दूरी बढ़ने पर शुल्क बढ़ता जाएगा.

डाक विभाग ने पार्सल और स्पीड पोस्ट की दरों में बढ़ोतरी को लेकर कहा है कि दरों में कई सालों से संशोधन नहीं किया गया था. नई व्यवस्था के तहत अब पार्सल का शुल्क केवल वजन नहीं बल्कि दूरी और क्षेत्र के आधार पर भी तय किया जाएगा. यानी अब एक समान वजन के अलग-अलग पार्सल अगर अलग-अलग जगहों पर भेजे जाएंगे तो शुल्क भी अलग-अलग होगा.

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तमिलनाडु के त्रिची से सिंगापुर जा रही इंडिगो की फ्लाइट में उड़ान भरने के कुछ देर बाद तकनीकी खराबी आ गई। विमान में 127 यात्री सवार थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान करीब ढाई घंटे तक हवा में चक्कर लगाने के बाद रात करीब 9 बजे त्रिची इंटरनेशनल एयरपोर्ट लौट आया। यात्रियों को सिंगापुर पहुंचाने के लिए अब दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था की गई है। बता दें कि IndiGo की यह फ्लाइट त्रिची एयरपोर्ट से शाम 6:40 बजे सिंगापुर के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान विमान में तकनीकी खराबी का पता चला।

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पायलट और अधिकारियों के बीच बना रहा संपर्क

विमान में तकनीकी खराबी के बाद पायलट और एयरपोर्ट अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना रहा और उसे सुरक्षित तरीके से वापस लाने की तैयारी शुरू की गई। इसके लिए प्लेन का फ्यूल कम किया गया, ताकि लैंडिंग के समय विमान का वजन सुरक्षित सीमा में हो। करीब 2.5 घंटे तक विमान के हवा में रहने के बाद रात करीब 9 बजे इसे त्रिची इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया। एयरपोर्ट निदेशक गोपालकृष्णन ने बताया कि विमान में सवार सभी 127 यात्रियों को सिंगापुर ले जाने के लिए वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था कर दी गई है।

पहले फ्यूल कम किया गया, फिर कराई गई लैंडिंग

तकनीकी खराबी की जानकारी मिलने के बाद विमान को तुरंत वापस नहीं उतारा गया। एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए विमान ने करीब ढाई घंटे तक चक्कर लगाया। इस दौरान विमान का ईंधन कम किया गया, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से एयरपोर्ट पर उतारा जा सके। इसके बाद विमान को त्रिची एयरपोर्ट वापस लाया गया। फिलहाल यह साफ नहीं किया गया है कि विमान में किस तरह की तकनीकी खराबी आई थी। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की गई है।

दिल्ली से मंगलुरु जा रही फ्लाइट में भी आई थी खराबी

बता दें कि इससे पहले गुरुवार को भी दिल्ली से मंगलुरु जा रही IndiGo की एक और फ्लाइट में तकनीकी खराबी के कारण करीब 3 घंटे की देरी हुई। फ्लाइट 6E-6456 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शाम 5:30 बजे उड़ान भरनी थी। लेकिन विमान के टैक्सी करते समय पायलट को Airbus A320 में तकनीकी खराबी का पता चला। पायलट ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को वापस बे पर ले जाने का फैसला किया। एक यात्री के मुताबिक, फ्लाइट पहले ही करीब 20 मिनट लेट थी। शाम 5:50 बजे के बाद विमान को टैक्सी कराया गया, लेकिन करीब 8-10 मिनट तक धीरे-धीरे आगे बढ़ने के बाद विमान रुक गया और वापस बे पर आ गया।

बालको की उत्तरोत्तर प्रगति में महिला इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

नए विमान ने यात्रियों संग रात में भरी उड़ान

यात्री ने बताया कि करीब 5 मिनट बाद पायलट ने अनाउंसमेंट कर यात्रियों को बताया कि तकनीकी समस्या के कारण विमान को वापस बे पर लाया जा रहा है। यात्री के मुताबिक, विमान के वापस बे पर आने के बाद उसका दरवाजा खोला गया। कुछ इंजीनियर विमान के अंदर पहुंचे और करीब 5-10 मिनट तक जांच की। इसके बाद क्रू ने यात्रियों को विमान से उतरने के लिए कहा। यात्रियों को बताया गया कि उनके लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की जा रही है। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के मुताबिक, नया विमान मिलने के बाद फ्लाइट ने रात 8:28 बजे मंगलुरु के लिए उड़ान भरी। बता दें कि इससे पहले जून में अगरतला जा रही इंडिगो की फ्लाइट पर बिजली गिरने की खबर आई थी।

‘देश के जवान भाई, मुझे माफ कर दो’… ‘We are Gen Z’ कहने वाली पर्यटक ने सेना से मांगी माफी

नई दिल्ली: लद्दाख में एक चेकपोस्ट पर सुरक्षा कर्मियों से बहस करने वाली पर्यटक ने अब भारतीय सेना के जवानों से माफी मांगी है। कुछ दिन पहले उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में वह ट्रैफिक रोके जाने को लेकर सुरक्षा कर्मियों से बहस करती और खुद को ‘Gen Z’ बताते हुए कहती नजर आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने अपने व्यवहार पर अफसोस जताया और सीधे सेना के जवानों से माफी मांगी। उसने कहा, ‘कृपया मेरे देश के जवान भाई, मुझे माफ कर दो।’ महिला ने कहा कि चेकपोस्ट पर जो कुछ हुआ, वह उसकी गलती थी और उसे इसका पछतावा है।

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‘आपकी वजह से हम सुरक्षित सोते हैं’

माफी मांगते हुए पर्यटक ने भारतीय सेना के जवानों की भूमिका की भी तारीफ की। उसने कहा कि सेना के जवान देश की सीमाओं पर तैनात रहते हैं, ताकि देश के लोग सुरक्षित रहें और चैन से सो सकें। महिला ने भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर सेना से भी माफी मांगी। उसने जवानों से कहा कि वे उसे ‘अपनी छोटी बहन समझकर माफ कर दें।’ उसका कहना है कि उसे अपनी गलती का एहसास काफी जल्दी हो गया था।

आखिर क्या था ये पूरा विवाद?

यह मामला लद्दाख के मिनिमर्ग चेकपोस्ट का है। वायरल हुए वीडियो में पर्यटक कई घंटे तक ट्रैफिक रोके जाने को लेकर नाराज दिखाई दे रही थी। वह पूछ रही थी कि पर्यटकों को इतनी देर तक क्यों रोका जा रहा है। वीडियो में महिला ने कहा था, ‘हम Gen Z हैं और इस तरह की बकवास बर्दाश्त नहीं करने वाले।’ इसके बाद उसने प्रतिबंधों और ट्रैफिक रोके जाने पर सवाल उठाए और दूसरे पर्यटकों से वहां से जाने की अपील भी की। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब उसने कथित तौर पर कहा,

‘हमारे टैक्स से सबको सैलरी जाती है, ये हमसे ऊपर हो गए अब? जाएंगे तो सारे जाएंगे, वरना कोई नहीं जाएगा।’

इन टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने उसके जवानों से बात करने के तरीके पर सवाल उठाए।

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उमर अब्दुल्ला ने जताई थी नाराजगी

इस विवाद पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उमर अब्दुल्ला ने ‘Gen Z’ शब्द के बार-बार इस्तेमाल पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि यह रवैया अब पुराने ‘जानते नहीं हो मेरे बाप कौन हैं’ वाले अंदाज जैसा होता जा रहा है। हालांकि अब पर्यटक ने साफ तौर पर कहा है कि उसे अपने व्यवहार पर पछतावा है और उसने जवानों से उसे छोटी बहन समझकर माफ करने की अपील की है।

चांद पर SpaceX रॉकेट की जोरदार टक्कर, NASA की HD तस्वीरों में दिखा 60 फीट का विशाल गड्ढा

चांद पर 5 अगस्त को SpaceX के भारी भरकम रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की अब नई तस्वीरें सामने आई हैं. तस्वीरें भी एकदम HD क्वालिटी कीं. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने इस गड्ढे को अलग-अलग एंगल से अपने कैमरे में कैद किया है. इन तस्वीरों में रॉकेट के टक्कर से चांद की सतह पर पड़े निशान और उसके आसपास फैली हल्की-गहरी धारियां साफ दिखाई दे रही हैं.  ये तस्वीरें लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को ली थीं. इनमें 5 अगस्त को SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्से के चांद की सतह से टकराने के बाद बना गड्ढा साफ दिखाई दे रहा है.

बालको की उत्तरोत्तर प्रगति में महिला इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

60 फीट चौड़ा गड्ढा

NASA के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह गड्ढा करीब 60 फीट यानी 18 मीटर चौड़ा है. इसकी गहराई 10 फीट से भी कम है. वैज्ञानिकों ने यह अनुमान गड्ढे की परछाई की लंबाई के आधार पर लगाया. बता दें कि फाल्कन 9 रॉकेट को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. यह फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ब्लू घोस्ट-1 लूनर लैंडर को लेकर गया था. यह एक प्राइवेट मिशन था, जिसने चांद पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी.

नासा को इतना वक्त क्यों लगा?

नासा का LRO साल 2009 से काम कर रहा है. यह हर दो घंटे में चांद के एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक चक्कर लगाता है, जबकि चांद उसके नीचे घूमता रहता है. नासा ने बताया कि इस तस्वीर को लेना आसान नहीं था. चांद की किसी खास जगह की तस्वीर लेने के लिए अंतरिक्ष यान को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक वह जगह उसके कैमरे की नजर में नहीं आ जाती. इस मामले में इसमें छह दिन लगे. इसके अलावा अंतरिक्ष यान को बिल्कुल सही एंगल पर झुकाना पड़ा, ताकि जब वह चांद की सतह से करीब 60 मील ऊपर से गुजरे, तब उसका कैमरा ठीक गड्ढे की ओर हो. नासा ने बताया कि सही समय भी एक बड़ी चुनौती थी. अगर कैमरा सिर्फ 10 सेकंड पहले या बाद में तस्वीर लेता, तो तस्वीर में गड्ढे की जगह करीब 10 मील दूर दिखाई देती.

न कनेक्शन की झंझट, न बुकिंग का इंतजार! लॉन्च हुआ 10 किलो का नया गैस सिलिंडर, जानें कीमत और रिफिल चार्ज

अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों में गड्ढे के आसपास की अलग-अलग चीजें साफ दिखाई दीं. इनमें गड्ढे के चारों ओर फैली हल्की और गहरी धारियां भी शामिल हैं. नासा ने बताया कि गहरी धारियां सतह की धूल और चट्टानों से बनी हैं. ये चीजें लंबे समय से सौर हवा, आकाशगंगा से आने वाली अंतरिक्ष किरणों और बहुत छोटे उल्कापिंडों के टकराव से बदलती रही हैं. टक्कर के दौरान ये चीजें सतह से करीब 1.5 फीट नीचे से बाहर निकलकर चारों ओर फैल गईं.

बालको की उत्तरोत्तर प्रगति में महिला इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

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कोरबा : कभी मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में इंजीनियरिंग और तकनीकी भूमिकाओं को मुख्य रूप से पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता था, लेकिन बदलते समय के साथ महिला इंजीनियरों ने इन धारणाओं को पीछे छोड़ते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई है। बालको में महिला इंजीनियर आज उत्पादन, खनन, प्रचालन और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। अपने तकनीकी कौशल, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प से वे कंपनी की उत्तरोत्तर प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

कार्यस्थल पर मशीनों और आधुनिक तकनीक के बीच जिम्मेदारी निभाने से लेकर टीमों का नेतृत्व करने तक, महिला इंजीनियरों ने साबित किया है कि क्षमता और सफलता की कोई लैंगिक सीमा नहीं होती। चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए वे न केवल अपने करियर में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में आने वाली नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता की कहानियां बदलती मेटल इंडस्ट्री की उस तस्वीर को सामने लाती हैं, जहां प्रतिभा, कौशल और नेतृत्व ही पहचान का आधार हैं।

आईपीएस एकेडमी, इंदौर से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाली अंशिका सिंह को शुरुआत से ही अपने विषय और तकनीकी क्षेत्र में विशेष रुचि थी। बालको से जुड़ने के बाद यह रुचि गर्व में बदल गया। एल्यूमिनियम इंडस्ट्री के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र कास्ट हाउस में काम करते हुए अंशिका ने नवाचार, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

अंशिका बताती हैं, “शुरुआत में मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती शॉप फ्लोर पर खुद को साबित करना और अपने काम से सहकर्मियों का भरोसा जीतना था। बालको में मुझे नए विचारों पर काम करने का मौका मिला और वरिष्ठ अधिकारियों ने मुझ पर भरोसा जताया। इसी भरोसे ने मुझे लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। प्रबंधन के सहयोग से मैंने ‘सम्मान एवं पुरस्कार’ पहल की शुरुआत की। इससे टीम का उत्साह बढ़ा और सभी ने मिलकर बेहतर परिणाम हासिल किए।”

आज अंशिका के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि शॉप फ्लोर पर उनकी पहचान एक महिला के रूप में नहीं, बल्कि उनकी काबिलियत से होती है। शुरुआती दिनों से लेकर आज तक उन्होंने कार्यस्थल के माहौल और लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव महसूस किया है। उनके लिए यह गर्व की बात है कि उनकी यात्रा भविष्य में शॉप फ्लोर पर कदम रखने वाली महिला इंजीनियरों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने में मदद करेगी।

बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। कॉलेज के बाद सीधे प्लांट में काम शुरू करने को लेकर उनके मन में शुरुआती झिझक थी, लेकिन सहकर्मियों के सहयोग और वरिष्ठ अधिकारियों के भरोसे ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया। अपने काम के प्रति जुनून और सीखने की ललक के साथ उन्होंने बीते चार वर्षों में अपनी पहचान बनाई है।

अरुणा बताती हैं, “जब वरिष्ठ अधिकारी आपके काम के आधार पर भरोसा जताते हैं, तो जिम्मेदारी अपने आप बढ़ जाती है। मैंने हर जिम्मेदारी को मेहनत और लगन से पूरा किया, जिससे मुझे लगातार सीखने के अवसर मिले और मेरा आत्मविश्वास मजबूत हुआ। मेरा मानना है कि कार्यस्थल पर सफलता पद या वरिष्ठता से नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता से निभाने से मिलती है।”

इसी जिम्मेदारी के तहत उनकी टीम को बालको में बिजली के बैकअप सिस्टम को और बेहतर बनाने की चुनौती मिली। टीम ने पूरे सिस्टम को स्काडा के माध्यम से केंद्रीकृत किया, जिससे विभिन्न प्रकार के डेटा की निगरानी और विश्लेषण के जरिए संभावित समस्याओं का पहले ही पता लगाना संभव हुआ। इससे समय रहते आवश्यक कदम उठाने और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने में मदद मिली। इस महत्वपूर्ण कार्य में योगदान के लिए अरुणा को प्लांट के सर्वोच्च सम्मान ‘सीईओ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

बालको की महिला इंजीनियरों की ये यात्राएं केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानियां नहीं हैं, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में आ रहे सकारात्मक बदलाव की भी तस्वीर हैं। तकनीकी दक्षता, नेतृत्व और आत्मविश्वास के साथ वे उन कार्यक्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अवसर और अनुकूल कार्य-वातावरण मिलने पर महिलाएं एल्यूमिनियम उत्पादन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बालको की प्रगति में उनका योगदान आने वाली पीढ़ी की महिला इंजीनियरों को नए सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देता है।

Kolkata Hotel Fire: कोलकाता के होटल में भीषण आग, 9 लोगों की मौत; मृतकों में एक मासूम भी शामिल; 60 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

Kolkata Hotel Fire: कोलकाता से एक बेहद ही दर्दनाक खबर सामने आई है। कोलकाता में मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर बने एक होटल में भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर 9 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक होटल में आग आज देर रात दो बजे के बाद लगी। इस होटल के ज्यादातर लोग बांग्लादेश के सीमावर्ता इलाके के रहने वाले थे और बांग्लादेश से इलाज के लिए कोलकाता आए थे। रात के तीन बजे के बाद घटनास्थल से 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कम से कम दो घंटे के कौशिश के बाद आग पर काबू पा लिया गया है।

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नौ लोगों की मौत, आग पर पाया गया काबू

कहा जा रहा है कि कोलकाता की मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर स्थित एक G+4 इमारत में भीषण आग लगने से छह पुरुषों, दो महिलाओं और एक बच्चे समेत नौ लोगों की मौत हो गई। फायर ब्रिगेड के सूत्रों ने बताया कि इस घटना में छह अन्य लोग घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। इसके अलावा इमारत से करीब 60 लोगों को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूत्रों ने बताया कि आग बुझा दी गई है। होटल के खिलाफ आरोप है कि होटल पर आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

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आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं 
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, होटल में लगी आग की वजह एयर-कंडीशनर में विस्फोट हो सकती है, हालांकि आग लगने की सही वजह की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। लोगों ने बताया कि धुएं की वजह से कई लोग बेहोश हो गए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है। यह आग जहां लगी है, वो कोलकाता के न्यू मार्केट के पास का इलाका है, जिसे  शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में से एक कहा जाता है। अभी तक की जानकारी में होटल में एसी ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है।

Supreme Court: मृत्युदंड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फांसी के मौजूदा तरीके को बदलने की याचिका खारिज

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में फांसी के जरिए मृत्युदंड दिए जाने की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मृत्युदंड को लागू करने के लिए फांसी से कम पीड़ादायक वैकल्पिक तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. याचिका में मांग की गई थी कि मृत्युदंड लागू करने के लिए फांसी के बजाय ऐसा कोई वैकल्पिक तरीका अपनाया जाए, जिससे दोषी को कम पीड़ा हो और उसकी गरिमा भी सुरक्षित रहे. पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और फांसी के जरिए मृत्युदंड दिए जाने की मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बरकरार रखा.  सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण रास्ता खुला रखा कि यदि भविष्य में ठोस और प्रभावी चिकित्सकीय या वैज्ञानिक प्रमाण सामने आते हैं कि फांसी से अनावश्यक पीड़ा होती है या यह व्यक्ति की गरिमा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करती है, तो इस मुद्दे की दोबारा संवैधानिक समीक्षा की जा सकती है.

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अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार चाहे तो विशेषज्ञों की समिति गठित कर मृत्युदंड लागू करने के वैकल्पिक तरीकों की व्यापक समीक्षा करा सकती है. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ समिति यह आकलन कर सकती है कि क्या कोई वैकल्पिक तरीका पीड़ा को कम करने और व्यक्ति की गरिमा बनाए रखने के संवैधानिक उद्देश्य को बेहतर ढंग से पूरा कर सकता है.  याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पहले के तीन फैसलों को बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग भी की थी. हालांकि, पीठ ने कहा कि ऐसे फैसलों को बड़ी पीठ के पास भेजकर उनके बीच सामंजस्य स्थापित करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट नहीं है कि पुराने तीन फैसलों को बड़ी पीठ के पास भेजने के लिए मामला बनता है. पीठ ने पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354 और वर्तमान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 393 के संदर्भ में भी याचिका पर विचार किया.

22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. यह याचिका वकील ऋषि मल्होत्रा ने दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने फांसी को मौत की सजा देने का एक क्रूर और अमानवीय तरीका बताया है. याचिकाकर्ता ने फांसी के बजाय जहर का इंजेक्शन देने का सुझाव दिया. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर विचार के लिए सरकार ने एक कमेटी गठित की है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार को तीन हफ्ते में अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है.

याचिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को बदलने की अपील की गई

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को बदलने की अपील की गई है. 15 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई थी कि केंद्र सरकार इसे बदलने के लिए तैयार नहीं है. सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी सामने आया था कि दोषी को फांसी या जहर के इंजेक्शन में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जा सकता है, लेकिन केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा था कि ऐसा करना “व्यावहारिक रूप से संभव नहीं” है. इस पर अदालत ने नाराज़गी जताई थी और कहा कि केंद्र समय के साथ विकसित होने को तैयार नहीं दिख रहा. केंद्र की ओर से वरिष्ठ वकील सोनिया माथुर ने दलील दी थी कि यह मामला नीतिगत निर्णय से जुड़ा है. बुधवार की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “समस्या यह है कि सरकार बदलने को तैयार नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत पुरानी प्रक्रिया है और समय के साथ चीज़ें बदल गई हैं.

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याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में फांसी की जगह जहर का इंजेक्शन, शूटिंग, इलेक्ट्रोक्यूशन या गैस चैंबर जैसे विकल्प सुझाए गए हैं, जिनसे सजायाफ्ता की मौत कुछ ही मिनटों में हो सकती है. वकील ऋषि मल्होत्रा की इस जनहित याचिका में फांसी को अत्यधिक पीड़ादायक, अमानवीय और क्रूर बताया गया है. याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 354(5) के तहत फांसी देकर मृत्युदंड देने को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है, साथ ही सम्मानजनक मृत्यु के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना जाए. याचिका में यह भी कहा गया है कि फांसी में मृत्यु घोषित करने में लगभग 40 मिनट लगते हैं, जबकि शूटिंग या जहर के इंजेक्शन से यह प्रक्रिया करीब 5 मिनट में पूरी हो जाती है. मल्होत्रा ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है जिसमें कहा गया है कि जहां मृत्युदंड दिया जाता है, वहां इसे कम से कम पीड़ा देने वाले तरीके से लागू किया जाना चाहिए.