Forest Fire Video: उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश में भयंकर गर्मी के बीच जंगलों की आग ने विकराल रूप ले लिया है. पर्यटकों के लिए मशहूर शहर सोलन के क्यारीघाट गांव के कंडाघाट के जंगल में भयानक आग से पेड़ धू-धूकर जल रहे हैं. आग के साथ धुएं का गुबार सैकड़ों फीट ऊंचे तक दिखाई दे रहा है. आसपास के इलाके को खाली कर प्रशासन और वन विभाग आग बुझाने में जुटा है. हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का अलर्ट है, अगर बरसात होती है तो जंगलों की आग बुझने में मदद मिल सकती है.
हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड में भी भीषण आग लगी है. खबरों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कंडाघाट से आग क्यारीघाट के पहाड़ी इलाके में फैल गई है.आग की लपटों के कारण काले धुएं के बड़े-बड़े गुबार दिखाई दे रहे हैं. फायर ब्रिगेड, वन विभाग और स्थानीय लोग तेजी से फैलती आग को बुझाने में जुटे हैं. इससे पहले मई में हिमाचल प्रदेश सचिवालय के पास छोटा शिमला में दुकान से फैली आग से काफी नुकसान हुआ था. हालांकि अग्निशमन विभाग ने आग को और फैलने से पहले ही तेजी से काबू में कर लिया था.मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने अग्निश्मन विभाग को बचाव कार्य में तेजी लाने को कहा है.
#WATCH | Solan, Himachal Pradesh | A massive forest fire stretches across the Kyarighat village area of Kandaghat. Residents and administrative officials are actively working to douse the fire. pic.twitter.com/ZDx9lCFjBu
— ANI (@ANI) May 26, 2026
उत्तराखंड के जंगलों की आग
उत्तराखंड के जंगलों में भी भीषण आग फैली है. बीजेपी सरकार ने जंगल की आग को बुझाने में मदद करने वालों को 1 लाख रुपये तक का इनाम देने की भी घोषणा की है. वनाग्नि रोकने के लिए वन विभाग ने 11 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को तैनात कर रखा है. चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और नैनीताल में आग की करीब छोटी बड़ी 4 सौ घटनाएं सामने आ चुकी हैं. करीब 330 हेक्टेयर जंगल इसमें खाक हो चुके हैं.
बांझ के जंगलों तक फैली आग
उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की घटनाओं से हिमालय के ग्लेशियरों तक खतरा है. उत्तराखंड में जंगलों की आग 6 हजार फीट तक पहुंच चुकी है. बांझ के जंगल भी इसकी चपेट में आ गए हैं.ये जंगल मिट्टी का कटाव रोकते हैं. इन जंगलों में नमी के साथ हमेशा भूमिगत जल और झरनों को रिचार्ज करते हैं. बर्फबारी और बारिश से बांझ की जड़ें पहाड़ों और मिट्टी को दरकने से रोकती हैं, लेकिन बांझ के जंगल भी खतरे में हैं.
रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली
रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली में सबसे भयंकर आग लगी है. गढ़वाल रीजन में जंगल की आग सबसे विकराल है. इस सीजन में 25 मई तक 382 जगह आग लगने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं. सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर बर्बाद हो चुके हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है.

