Thursday, June 25, 2026
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Citizenship Proof: आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट भी नहीं हैं नागरिकता का सबूत! जानें आखिर क्या है वैध प्रमाण

Citizenship Proof: पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह नागरिकता साबित करने का पुख्ता दस्तावेज़ नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर यह स्पष्टीकरण देकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर भारत में नागरिकता का अंतिम और अकाट्य प्रमाण क्या है।

संजय जयप्रकाश भोपालपुरिया बने अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के जिला अध्यक्ष

पासपोर्ट केवल एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी करती है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी के पास पासपोर्ट होने मात्र से उसकी नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती।

यह स्थिति अपने आप में एक विरोधाभास पैदा करती है, क्योंकि कोई भी गैर-नागरिक भारतीय पासपोर्ट हासिल नहीं कर सकता। इसके अलावा, पासपोर्ट आपके पास होने का मतलब यह नहीं है कि आप उसके मालिक हैं। पासपोर्ट के पिछले हिस्से पर स्पष्ट लिखा होता है कि यह “भारत सरकार की संपत्ति” है और सरकार के आदेश देने पर इसे कभी भी सरेंडर करना पड़ सकता है।

आधार और वोटर आईडी भी नागरिकता के सबूत नहीं

नागरिकता के प्रमाण को लेकर यह भ्रम नया नहीं है। इससे पहले देश की अन्य प्रमुख पहचानों को लेकर भी अदालतें और सरकार स्थिति साफ कर चुकी हैं। इस साल की शुरुआत में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है। यह सिर्फ़ पहचान का एक दस्तावेज़ है। वोटर आईडी को भी नागरिकता का अंतिम दस्तावेज़ नहीं माना जाता। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिक की पहचान सुनिश्चित करना और उसे चुनावों में मतदान का अधिकार देना है।

कानून के अनुसार कौन है भारत का नागरिक?

  1. 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच देश में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति जन्म से भारतीय है।
  2. 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता तभी मिलेगी, जब उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।
  3. 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता मिलने की शर्त और कठिन है। इसके लिए या तो माता-पिता दोनों भारतीय होने चाहिए, या फिर कोई एक भारतीय हो और दूसरा अवैध अप्रवासी न हो।

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सरकार ने जारी किए आंकड़े

बुधवार को विदेश मंत्रालय ने भारत के पासपोर्ट सर्विस नेटवर्क के विस्तार और कई अहम उपलब्धियों का ज़िक्र किया, जिसमें चिप-इनेबल्ड ई-पासपोर्ट की सफल शुरुआत भी शामिल है। MEA के एक अधिकारी ने बताया, “साल 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं दी गईं, जिनमें से अकेले पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ थी।”

इसके अलावा, MEA ने बताया कि पासपोर्ट बनने में लगने वाले औसत समय में भी सुधार हुआ है; पुलिस वेरिफिकेशन में लगने वाले समय को छोड़कर, पासपोर्ट अब छह कामकाजी दिनों के भीतर मिल जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि अब नागरिकों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर औसतन 45 मिनट से भी कम समय बिताना पड़ता है। MEA अधिकारी के मुताबिक, प्रोसेसिंग में कम समय लगने की वजह पासपोर्ट सर्विस सेंटरों की संख्या में छह गुना बढ़ोतरी है। एक दशक पहले देश में सिर्फ़ 77 पासपोर्ट केंद्र थे, जबकि अभी इनकी संख्या 545 है।

संजय जयप्रकाश भोपालपुरिया बने अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के जिला अध्यक्ष

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अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन द्वारा समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि श्री संजय जयप्रकाश भोपालपुरिया को जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर समाजजनों में हर्ष का माहौल है।

उनकी नियुक्ति पर समाज के वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री भोपालपुरिया के नेतृत्व में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी तथा समाजहित के कार्यों को और अधिक गति प्राप्त होगी।

इस अवसर पर श्री भोपालपुरिया ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व एवं समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सभी को साथ लेकर संगठन को मजबूत बनाने तथा सामाजिक, शैक्षणिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे।

समाज के गणमान्य नागरिकों ने उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन जिले में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

श्री संजय जयप्रकाश भोपालपुरिया जी को जिला अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं सफल कार्यकाल के लिए अनंत शुभकामनाएं।

1 July Rule Change: 1 जुलाई से बदल जाएंगे कई बड़े नियम! रेलवे, आधार समेत इन बदलावों का आप पर पड़ेगा सीधा असर

1 July Rule Change: कुछ ही दिनों में जून का महीना खत्म होने जा रहा है और जुलाई की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह इस बार भी कुछ बदलाव होने जा रहे हैं. इन बदलावों का प्रभाव देश के सभी नागरिकों पर पड़ सकता है. साथ ही कुछ बदलावों से आम आदमी के जेब पर भी बोझ बढ़ सकता है. इसी कड़ी में आज हम आपको ऐसे जरूरी बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 1 जुलाई से लागू होंगे. आइए जानते हैं…

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1. आधार कार्ड

UIDAI के अनुसार, फिलहाल आधार में ईमेल आईडी अपडेट करने के लिए 75 रुपये (GST सहित) शुल्क लिया जाता है. लेकिन 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से ईमेल अपडेट कराने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, यानी इस दौरान यह सेवा पूरी तरह फ्री रहेगी. ऐसे में अगर आपका ईमेल अभी तक आधार से लिंक नहीं है या पुराना ईमेल बदलना है, तो आप 1 जुलाई से शुरू होने वाली इस मुफ्त सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. इससे आपका आधार रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित और अपडेटेड रहेगा.

2. रेलवे के नियम

सरकार ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 137 और 138 में बदलाव किए हैं. इसके तहत अब न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है. ये नए नियम 1 जुलाई से लागू किए जा सकते हैं. नए बदलाव के तहत अब रेलवे ने फैसला किया है कि खतरनाक वस्तुएं ले जाने पर कम से कम 10,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में जेल की सजा भी हो सकती है. साथ ही बिना वैध टिकट या पास के यात्रा करने वालों को अब 500 रुपये का जुर्माना देना होगा. इसके अलावा बिना लाइसेंस सामान बेचने, फेरी लगाने या रेलवे परिसर में भीख मांगने पर 2,000 रुपये तक की पेनल्टी लगेगी.

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3. LPG के नियम

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण पिछले महीनों में LPG के दामों में काफी बदलाव देखा गया है. जून के महीने में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1 जून से 53.50 रुपये तक महंगा हो गया था. ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि 1 जुलाई से LPG सिलेंडर के दाम बदल सकते हैं, जिसका असर आम आदमी के जेब पर पड़ेगा.

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Lucknow Fire News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके की लगी आग में 15 बच्चों की जान चली गई. अग्निकांड में राख इमारत में जब अग्निशमन कर्मी घुसे तो पाया कि वहां किस कदर मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. आवासीय इमारत को व्यावसायिक कामों में इस्तेमाल कर यहां गेमिंग जोन, पेट शॉप और दूसरी दुकानें चलाई जा रही थीं. इस बिल्डिंग को 2016 में अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो माह में ये ऑर्डर वापस से लिया गया.

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बॉयोमेट्रिक इंप्रेशन वाला गेट

पीड़ित परिवारों का कहना था कि गेमिंग जोन में एनीमेशन सेंटर का पूरा ढांचा ऑटोमैटिक था. बायोमेट्रिक थंब इंप्रेशन से दरवाजा खुलता बंद होता था. आग लगते ही ये लॉक सिस्टम फेल हो गया . वहीं से बाहर निकलने का रास्ता था, जहां से कुछ ही मिनटों में निकला जा सकता था.परिजनों का यह भी कहना है कि फायर ब्रिगेड की टीम आग लगने के करीब 40 मिनट बाद वहां पहुंची.

उस वक्त तक लखनऊ की इमारत में लगी आग की लपटों में पूरी तरह घिर चुकी थी. कुछ बच्चे बिल्डिंग के किनारे पाइपलाइन और लटके तारों के सहारे नीचे कूद चुके थे.एक युवक ने आग में घिरी बिल्डिंग की खिड़की तोड़कर नीचे छलांग लगा दी, लेकिन वो सीधे नीचे नुकीली रेलिंग पर गिरा. रेलिंग सीधे पेट में घुसी और ज्यादा खून बहने से उसकी जान चली गई.

अवैध इमारत से निकलने का एक ही रास्ता

लखनऊ के अलीगंज इलाके की इमारत से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता था. उसके तीनों ओर दूसरी इमारतें बनी हुई थीं. आग बिल्डिंग के आगे के हिस्से में लगी थी. ऐसे में दहशतजदा बच्चे पीछे की ओर चले गए. लेकिन धीरे-धीरे आग और धुआं पीछे के हिस्से तक पहुंच गया. ज्यादातर बच्चों की दम घुटने से मौत हुई.

बॉथरूम में जाकर छिप गए बच्चे

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग कुछ मिनटों में हवा के साथ ऊंची लपटों में बदल गई. भयानक आग से लोग ऊपर नहीं जा पाए. फंसे बच्चों तक मदद पहुंचाने का कोई रास्ता नहीं था. कुछ लोगों ने पत्थर फेंककर खिड़की तोड़ने का असफल प्रयास किया. इमारत में फंसे कई बच्चे बाथरूम में जाकर छिप गए, ताकि गर्मी और आग की लपटों से बचा जा सके, लेकिन यह कदम आत्मघाती साबित हुआ. वो नल खोलकर पानी गिराते रहे, ताकि आग अंदर तक न आए, लेकिन धुआं भरने से उनका दम घुट गया और वो मारे गए.

न स्मोक डिटेक्टर न आग बुझाने वाले सिलेंडर

अग्निशमन विभाग की प्रारंभिक पड़ताल में पाया गया कि इमारत में न ही स्मोक डिटेक्टर यानी धुएं का पता लगाने वाले उपकरण थे और नही फायर एक्सटिंग्यूशर यानी आग बुझाने वाले इंतजाम. ऐसे में आग को बुझाने के लिए शुरुआती मिनटों में कुछ नहीं किया जा सका.

NEET UG 2026 Re-Exam Today: कड़ी सुरक्षा के बीच आज दोबारा होगी परीक्षा, जानें एग्जाम सेंटर के जरूरी दिशानिर्देश

दीवारें तोड़कर अंदर घुसे दमकल कर्मी

दमकल कर्मियों ने आसपास की इमारतों की ओर से हथौड़े से दीवार तोड़ी और फिर अंदर घुसे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. बच्चों के मां-बाप चीख-पुकार लगा रहे थे और बच्चों को बचाने के लिए गुहार लगा रहे थे, लेकिन रोते-बिलखते परिजन अपनों को मौत के आगोश में जाता देखने के सिवा कुछ न कर सके.

सिलेंडर कब पहुंचेगा? LPG सिलेंडर की लाइव लोकेशन अब मोबाइल पर, बुकिंग के बाद ऐसे ट्रैक करें डिलीवरी स्टेटस

एलपीजी सिलेंडर बुक करने के बाद अक्सर लोगों को यह चिंता रहती है कि डिलीवरी कब होगी. इस वजह से कई लोग जरूरत से पहले ही सिलेंडर बुक कर देते हैं, ताकि गैस खत्म होने से पहले ही नया सिलेंडर घर पहुंच जाए. अगर समय पर सही जानकारी मिल जाए, तो यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है. दरअसल, LPG सिलेंडर बुक करने के बाद अब आप घर बैठे मोबाइल से अपने गैस की लाइव लोकेशन, डिलीवरी स्टेटस और संभावित समय आसानी से ट्रैक कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कैसे घर बैठे सिलेंडर डिलीवरी की लाइव ट्रैकिंग करें.

NEET UG 2026 Re-Exam Today: कड़ी सुरक्षा के बीच आज दोबारा होगी परीक्षा, जानें एग्जाम सेंटर के जरूरी दिशानिर्देश

घर बैठे गैस सिलेंडर का स्टेटस कैसे चेक करें?

LPG सिलेंडर बुक करने के बाद इसकी डिलीवरी ट्रैक करना बहुत आसान है. आप मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए ‘Track Cylinder’ विकल्प का इस्तेमाल करके अपने गैस सिलेंडर की लाइव लोकेशन और संभावित डिलीवरी का समय घर बैठे चेक कर सकते हैं. Indane, Bharat Gas और HP के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या IVRS नंबर का उपयोग करके भी स्टेटस चेक कर सकते हैं.

मोबाइल ऐप्स से कैसे ट्रैक करें?

आप अपने गैस प्रोवाइडर का आधिकारिक ऐप जैसे- Indane के लिए IndianOil ONE, HP के लिए HPGas, या Bharatgas के लिए Bharatgas App डाउनलोड करके लॉग इन करें. My Booking या Track Order सेक्शन में आपको सिलेंडर का डिस्पैच स्टेटस और डिलीवरी की लाइव जानकारी मिल जाएगी.

वेबसाइट से कैसे ट्रैक करें?

अपने गैस डिस्ट्रीब्यूटर की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन करें. यहां अपना कंज्यूमर नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करके Booking History या Track Cylinder विकल्प पर जाएं.

Air India Plane Crash: AI-171 विमान हादसे में नया मोड़, पायलट संगठन ने बिजली की खराबी को बताया क्रैश की वजह

SMS और WhatsApp से ट्रैकिंग कैसे करें?

  • आपके पास इंटरनेट या ऐप की सुविधा नहीं है, तो आप इन तरीकों से अपडेट प्राप्त कर सकते हैं.
  • इंडेन (Indane)- अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से REFILL लिखकर 7718955555 पर SMS भेजें.
  • भारत गैस (Bharat Gas)- LPG लिखकर 7715012345 पर SMS भेजें. आप 1800 22 4344 पर कॉल भी कर सकते हैं.
  • एचपी गैस (HP Gas)- HPGAS लिखकर 7903105555 पर SMS भेजें.

NEET UG 2026 Re-Exam Today: कड़ी सुरक्षा के बीच आज दोबारा होगी परीक्षा, जानें एग्जाम सेंटर के जरूरी दिशानिर्देश

NEET UG 2026 Re-Exam Today: आज देशभर में NEET UG 2026 की दोबारा से परीक्षा आयोजित की जा रही है। सुबह से परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की भीड़ लगी हुई है। भारत और विदेश से कुल 22,80,054 उम्मीदवारों ने आज दोपहर को होने वाली NEET-UG की पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। परीक्षार्थियों को खास सलाह दी गई है।

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जानिए परीक्षा केंद्रों में क्या-क्या ले जाने की है अनुमति

परीक्षा केंद्र पर गेट बंद होने के समय से पहले पहुंच जाएं, क्योंकि उसके बाद किसी भी परिस्थिति में परीक्षा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्हें अपने साथ एडमिट कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और फोटो पहचान पत्र (आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लाने चाहिए।

परीक्षा का बढ़ाया गया समय

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा का समय भी 180 मिनट (3 घंटे) से बढ़ाकर 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) कर दिया है। इसके साथ ही प्रश्न पुस्तिका में रफ वर्क के लिए जगह भी बढ़ा दी गई है। अब उम्मीदवारों को पहले दिए जाने वाले दो पृष्ठों के बजाय चार पृष्ठ मिलेंगे। सुविधा बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से बाएं हाथ से लिखने वाले उम्मीदवारों के लिए, लेआउट में बदलाव किया गया है। रफ वर्क के दो पेज पुस्तिका के शुरू में निर्देश पेज के ठीक बाद दिए जाएंगे, जबकि शेष दो पेज अंत में उपलब्ध होंगे।

परीक्षा केंद्रों पर 6,700 पर्यवेक्षक तैनात

एनटीए ने परीक्षा केंद्रों पर लगभग 6,700 पर्यवेक्षकों को तैनात किया है, जिन्हें केंद्रीय स्तर पर लाइव सीसीटीवी फुटेज की निगरानी के लिए 100 से अधिक वर्चुअल पर्यवेक्षकों का सहयोग प्राप्त है। सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण AI-आधारित उपकरणों से किया जा रहा है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा में हिस्सा ले रहे छात्रों को बधाई दी है। साथ ही बताया कि एग्जाम सेंटर में क्या-क्या लेकर जाना है। एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ सभी NEET (UG) 2026 उम्मीदवारों को शुभकामनाएं! यह वही दिन है जिसके लिए आपने तैयारी की है। शांत रहें, खुद पर भरोसा रखें और अपना सर्वश्रेष्ठ दें। आपने इस पल को हासिल किया है।

जरूरी समय: 

एंट्री टाइमिंग: सुबह 11:00 बजे,

आखिरी एंट्री: दोपहर 1:30 बजे (इसके बाद एंट्री नहीं होगी)।

साथ ले जाएं: एडमिट कार्ड और वैलिड फोटो ID, पासपोर्ट साइज की 2 फोटो। मना की गई चीजें न ले जाएँ।

हाइड्रेटेड रहें (पानी पीते रहें)। ट्रैफ़िक का ध्यान रखें और जल्दी पहुंचें। आप यह कर सकते हैं। हम आपके साथ हैं!

प्रत्येक परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी और जैमर लगाए गए

एनटीए ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि 95,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों में से प्रत्येक में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 51,311 जैमर तैनात किए गए हैं (17,054 ईसीआईएल द्वारा और 34,257 बीईएल द्वारा)। प्रत्येक परीक्षा कक्ष में दो निरीक्षक होंगे। प्रत्येक केंद्र पर 10 से अधिक अतिरिक्त परीक्षा अधिकारी तैनात किए गए हैं।

दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक है परीक्षा

3 मई को होने वाली परीक्षा रद्द होने के कारण 2026 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा दोबारा आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक भारत के 551 शहरों में स्थित 5,440 केंद्रों और विदेशों में स्थित 14 केंद्रों पर होगी। प्रश्न पत्र अंग्रेजी और 12 भारतीय भाषाओं में होंगे।

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परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल तैनात

गुजरात में अधिकारियों ने रविवार को होने वाली नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल तैनात किया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए निगरानी उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में सुरक्षा इंतजामों के तहत ड्रोन और त्वरित प्रतिक्रिया दल को तैनात किया जाएगा।

Air India Plane Crash: AI-171 विमान हादसे में नया मोड़, पायलट संगठन ने बिजली की खराबी को बताया क्रैश की वजह

Air India Plane Crash: फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने 12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद एयर इंडिया बोइंग फ्लाइट एआई-171 के दुखद क्रैश से जुड़ी आधिकारिक बात को चुनौती दी है।   उनका दावा है कि नए सिम्युलेटर डेटा से पता चलता है कि क्रैश की वजह पायलट की अनदेखी नहीं बल्कि सिस्टम में बिजली की बड़ी खराबी थी।

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एफआईपी का दावा- जानबूझकर छिपाई गई जानकारी
एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने दावा किया कि जांचकर्ताओं ने जरूरी तकनीकी सबूतों को नजरअंदाज किया और पहले से तय नतीजे को सही साबित करने के लिए भारत के प्रमुख विमानन विषेशज्ञों को जानबूझकर अलग रखा। इस हादसे की आधिकारिक अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्लाइट-क्रू ने एक सोची-समझी आत्महत्या की योजना के तहत जानबूझकर इंजन की फ्यूल सप्लाई बंद कर दी थी।

एफआईपी को  सिम्युलेटर टेस्ट में मिले अलग नतीजे
सरकारी जांचकर्ताओं के मुताबिक, मैन्युअल रूप से बंद करने की वजह से विमान का ‘रैम एयर टर्बाइन’ ठीक चार सेकेंड बाद नीचे गिर गया। ‘रैम एयर टर्बाइन’ एक बैकअप पावर सिस्टम है, जो पूरी तरह से बिजली जाने पर अपने आप चालू हो जाता है। हालांकि, रंधावा ने कहा कि एफआईपी ने हाल ही में उस फ्लाइट के वजन, बैलेंस और मौसम की स्थितियों को हूबहू दोहराते हुए विस्तृत सिम्युलेटर टेस्ट किए। उन्होंने कहा कि नतीजों ने आधिकारिक टाइमलाइन को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। उन्होंने कहा, हमारे सिम्युलेटर टेस्ट साबित करते हैं कि मैन्युअल रूप से फ्यूल बंद करने पर बैकअप टर्बाइन को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकेंड लगते हैं। मैन्युअल शटडाउन की स्थिति में चार सेकेंड की आधिकारिक टाइमलाइन भौतिक और तकनीकी रूप से असंभव है।”

विमान में आई थी बिजली की बड़ी खराबी?
एफआईपी का तर्क है कि बैकअप टर्बाइन इतनी तेजी से इसलिए चालू हुआ क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही बिजली की एक बड़ी खराबी ने विमान को बेकार कर दिया था। फेडरेशन का दावा है कि इसी सिस्टम की खराबी ने इंजन स्विच को ट्रिप किया और आखिरकार विमान क्रैश हो गया। एफआईपी ने यह भी कहा कि फ्लाइट 171 में बचे एकमात्र व्यक्ति ने बताया था कि विमान के नीचे गिरने (टर्मिनल डिसेंट) से ठीक पहले केबिन की लाइटें टिमटिमा रही थीं और धीमी हो रही थीं, यह जानकारी अचानक और बड़े पैमाने पर बिजली जाने की एफआईपी की थ्योरी से पूरी तरह मेल खाती है।

‘पायलट के आत्महत्या’ वाली थ्योरी पर उठाए सवाल
पायलटों के फेडरेशन ने कहा कि क्रैश हुए विमान का, उस घातक उड़ान से पहले बिजली की अनसुलझी समस्याओं का रिकॉर्ड रहा था। एफआईपी ने आरोप लगाया कि सरकारी जांचकर्ताओं ने भारत के शीर्ष बोइंग 787 एक्सपर्ट माने जाने वाले कैप्टन आरएस संधू को वास्तविक जांच परीक्षणों से जानबूझकर दूर रखा। कैप्टन सीएस रंधावा ने आरोप लगाया, “वे हमारे सबसे अनुभवी पायलट की राय को नजरअंदाज कर रहे हैं क्योंकि उनकी जानकारी से उनकी ‘पायलट के आत्महत्या’ वाली थ्योरी पूरी तरह गलत साबित हो जाएगी। किसी बड़ी मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर खराबी का सामना करने के बजाय, उन मृत पायलटों पर दोष मढ़ना आसान है जो अपना बचाव नहीं कर सकते।”

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बोइंग और सरकारी एविएशन अथॉरिटी को सौंपा सिम्युलेटर डेटा
एफआईपी ने पुष्टि की है कि उसने अपना सिम्युलेटर डेटा और नतीजे बोइंग और सरकारी एविएशन अथॉरिटी, दोनों को आधिकारिक तौर पर सौंप दिए हैं। फेडरेशन मांग कर रहा है कि जब तक टरबाइन डिप्लॉयमेंट से जुड़ी गणितीय और तकनीकी गड़बड़ियों की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। एफआईपी ने डाटा की पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक जांच टीम में कैप्टन संधू को तुरंत वापस शामिल करने की भी मांग की है।

अब LPG पर खर्च होगा कम! 1 जुलाई से घर बैठे लगाएं बायोगैस प्लांट, जानिए पोर्टल पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM) पोर्टल फिर से खोलने का फैसला किया है. इसके जरिए अब बायोगैस यानी गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया जा सकता है. इससे लोगों को सस्ती और साफ ऊर्जा मिलेगी. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) द्वारा संचालित BAM Portal नए आवेदनों के लिए 1 जुलाई से 30 जुलाई तक खुलेगा. इसके जरिए बायोगैस (CBG) उत्पादक आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आम जनता को घर बैठे साफ और सस्ती एनर्जी मिल सके.

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बायोगैस प्लांट और BAM पोर्टल क्या है?

घरेलू कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके बायोगैस बनाने से एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होती है और परिवार को मुफ्त या सस्ती गैस मिलती है. छोटे पोर्टेबल प्लांट या मिनी बायोगैस के माध्यम से आसानी से घर बैठे इसका उपयोग किया जा सकता है. वहीं, BAM (Biomass Aggregation Machinery) पोर्टल पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक सरकारी मंच है. इसके जरिए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने वाले प्लांट संचालक मशीनें खरीदने के लिए वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी हेतु आवेदन कर सकते हैं.

कौन कर सकता है रजिस्ट्रेशन

यह खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो बायोगैस बनाना चाहते हैं या इस काम से जुड़े हैं. आधिकारिक गाइडलाइन्स के अनुसार, BAM पोर्टल पर मुख्य रूप से बायोगैस या CBG प्लांट स्थापित करने वाले उद्यमी और उत्पादक आवेदन कर सकते हैं.

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रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

  • सबसे पहले GOBARdhan Portal पर जाएं और अपने प्लांट को रजिस्टर करें.
  • इसके बाद BAM Portal पर विजिट करें.
  • होमपेज पर ‘Register’ लिंक पर क्लिक करें.
  • अपना मोबाइल नंबर, नाम और ईमेल आईडी दर्ज करके पोर्टल पर यूजर आईडी बनाएं.
  • लॉग-इन करने के बाद, फॉर्म में मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी भरें.
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें और फॉर्म को सबमिट करें.

FSSAI की सख्त चेतावनी: जंग लगे चाकू से खाद्य पदार्थ काटना पड़ सकता है भारी, रेस्टोरेंट्स को दिए निर्देश

रसोई में चाकू सबसे जरूरी और ज्यादा इस्तेमाल होने वाले औजारों में से एक है, चाहे फल काटने हों, सब्जियां चॉप करनी हों या किसी भी खाने की तैयारी करनी हो, इसका इस्तेमाल हर दिन होता है, लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जिस चाकू से आप खाने की चीजें काट रहे हैं, वह साफ और सुरक्षित है या नहीं?

हाल ही में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने होटल, ढाबों और फूड बिज़नेस से जुड़े लोगों के लिए नए नियम लागू किए हैं. इन नियमों के तहत अब सभी को साफ-सुथरे और फूड-ग्रेड चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा.

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इसके अलावा, कटाई, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और भंडारण में उपयोग होने वाले सभी उपकरण फूड-ग्रेड, गैर-विषैले (नॉन-टॉक्सिक) और जंग-रोधी होने चाहिए. ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि गंदे या जंग लगे चाकू से तैयार किया गया खाना खराब हो सकता है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

FSSAI ने क्यों जारी किए नए निर्देश?

FSSAI को पता चला कि कुछ होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाने के स्थानों पर जंग लगे, टूटे-फूटे या खराब चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे गंदे और खराब उपकरणों से खाने में गंदगी, हानिकारक केमिकल और कीटाणु मिल सकते हैं, जिससे लोगों की सेहत खराब हो सकती है. इसी वजह से FSSAI ने साफ तौर पर कहा है कि खाना बनाने के दौरान केवल फूड-ग्रेड और अच्छी हालत में मौजूद चाकू और अन्य कटिंग औजारों का ही इस्तेमाल किया जाए, ताकि खाना सुरक्षित और हेल्दी बना रहे.

जंग लगा चाकू सेहत को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

खाने में जंग मिल सकता है

जब आप जंग लगे चाकू से फल या सब्जियां काटते हैं, तो उसके छोटे-छोटे जंग के कण खाने में मिल जाते हैं. बार-बार ऐसा खाना खाना शरीर के लिए अच्छा नहीं होता.

बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता है

जंग लगी सतह पर गंदगी और कीटाणु आसानी से जम जाते हैं. अगर चाकू ठीक से साफ न किया जाए, तो ये कीटाणु सीधे खाने में चले जाते हैं.

पेट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं

ऐसे चाकू से कटा हुआ खाना खाने से पेट दर्द, गैस, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

संक्रमण का खतरा रहता है

जंग लगे या टूटे चाकू में दरारें होती हैं, जिनमें गंदगी छिप जाती है, इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

खाने का स्वाद और क्वालिटी खराब होती है

जंग लगे चाकू से कटे फल और सब्जियों का स्वाद बदल सकता है और खाने की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. कई बार खाने में अजीब सा स्वाद आने लगता है.

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नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

FSSAI ने साफ कहा है कि अगर निरीक्षण के दौरान किसी खाद्य प्रतिष्ठान में खराब या जंग लगे कटिंग उपकरण पाए जाते हैं, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

घर में चाकू इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

  • चाकू पर जंग दिखाई दे तो उसे बदल दें
  •  इस्तेमाल के बाद तुरंत धोकर सुखाएं
  • गीले चाकू को लंबे समय तक न छोड़ें
  • स्टेनलेस स्टील या अच्छी गुणवत्ता वाले चाकू खरीदें
  • समय-समय पर चाकू की धार और स्थिति की जांच करते रहें

ऑनलाइन खराब प्रोडक्ट और कस्टमर केयर से नहीं मिल रही मदद? इस सरकारी हेल्पलाइन से पाएं समाधान

नई दिल्ली : आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. कपड़े हों, मोबाइल हो या घर का कोई सामान, ज्यादातर लोग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी करना पसंद करते हैं. लेकिन कई बार ऑर्डर किया गया सामान खराब, टूटा-फूटा या गलत निकल आता है. ऐसे में लोग कंपनी के कस्टमर केयर पर संपर्क करते हैं. लेकिन जरा सोचिए अगर कस्टमर केयर से भी मदद न मिले तो? अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है या आप भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचना चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आपके काम का साबित हो सकता है.

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क्या करें?

इसे लेकर हाल ही में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में विभाग ने बताया, इस तरह की स्थिति के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन मौजूद है, जहां आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और मदद पा सकते हैं.

किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?

अगर आपको ऑनलाइन खरीदा गया सामान डैमेज मिला है, गलत प्रोडक्ट डिलीवर हुआ है, रिफंड नहीं मिल रहा है, एक्सचेंज में दिक्कत आ रही है या कस्टमर केयर आपकी शिकायत का जवाब नहीं दे रहा है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 से संपर्क कर सकते हैं. इस नंबर पर कॉल करके आप अपनी समस्या बता सकते हैं और आगे के प्रोसेस के बारे में जानकारी ले सकते हैं. हेल्पलाइन आपकी शिकायत को संबंधित कंपनी तक पहुंचाने और समाधान में मदद करती है.

WhatsApp और NCH App से भी दर्ज कर सकते हैं शिकायत

आप WhatsApp या NCH App के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके लिए दिए गए QR कोड को स्कैन कर संबंधित प्लेटफॉर्म पर पहुंचा जा सकता है और जरूरी जानकारी भरकर शिकायत भेजी जा सकती है.

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शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान

शिकायत दर्ज करते समय ऑर्डर नंबर, खरीदारी की रसीद, भुगतान का प्रमाण और खराब प्रोडक्ट की तस्वीरें अपने पास रखें. इससे आपकी शिकायत का निपटारा करने में आसानी होती है और प्रोसेस तेज हो सकता है.