Saturday, May 2, 2026
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LPG Price Hike: कमर्शियल LPG के बाद 5 किलो ‘छोटू’ सिलिंडर भी महंगा, कीमत में 261 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी

LPG Price Hike: कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में शुक्रवार से भारी बढ़ोतरी की गई है। इससे फूड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के व्यवसायों के लिए लागत बढ़ जाएगी, जबकि घरेलू LPG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, 5 किलोग्राम वाले FTL (फ्री ट्रेड LPG) सिलिंडर की कीमत में भी तत्काल प्रभाव से 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जानकारी के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, इससे आज से दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है। वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसका उपयोग देश भर में लगभग 33 करोड़ घरों द्वारा किया जाता है।

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

कमर्शियल और थोक LPG के लिए बदलाव होंगे लागू

यह बदलाव सिर्फ कमर्शियल और थोक LPG के लिए लागू होगा। जिनका भारत में कुल LPG खपत में बहुत कम हिस्सा है। घरेलू LPG, जो सब्सिडी वाला है और खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, उसे इस बदलाव से बाहर रखा गया है। बता दें कि, 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में हुई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। जो अपने दैनिक कार्यों के लिए कमर्शियल LPG पर निर्भर रहते हैं। उद्योग से जुड़े लोग अक्सर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं, जिसका असर आने वाले हफ्तों में भोजन और डाइनिंग की कीमतों में देखने को मिल सकता है।

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घरेलू LPG के दामों में कोई बदलाव नहीं

इसके विपरीत, सरकार ने घरेलू LPG के लिए एक संतुलित रवैया अपनाया है, ताकि यह परिवारों के लिए किफायती बनी रहे। 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की कीमत पिछले कई महीनों से बढ़ाए नहीं गए है, जिससे महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वहीं, 5 किलोग्राम वाला फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे प्रतिष्ठान और सीमित व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। उसमें सब्सिडी नहीं दिया जाता है। इसकी कीमत बाजार दरों के करीब होती है, जिससे यह वैश्विक उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

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बालको : छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।

यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।

पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका

इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।

‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।

यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग ₹6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने ₹12,000 से ₹15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।

कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन

हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।

कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।

कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग ₹2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।

ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।

आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती

आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।

सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।

इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।

निर्भरता से विविधता तक

यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।

वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।

यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

Nepali Airlines Controversy: नेपाली एयरलाइन की बड़ी गलती! जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया, विवाद बढ़ने पर मांगी माफी

Nepali Airlines Controversy: नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी ‘नेपाल एयरलाइंस’ एक भारी चूक के कारण विवादों में घिर गई। एयरलाइंस ने अपने एक हालिया पोस्ट और नक्शे में भारत के अभिन्न अंग, पूरे जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया था। इस विवादित नक्शे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भारतीयों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद एयरलाइंस को विवादित पोस्ट हटाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी है।

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क्या है पूरा मामला?

नेपाली एयरलाइंस ने अपने किसी प्रमोशनल कैंपेन, रूट मैप या सामान्य जानकारी को शेयर करने के लिए सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक (नक्शा) पोस्ट किया था। इस ग्राफिक में भारतीय सीमाओं को गलत तरीके से दिखाया गया था। सबसे आपत्तिजनक बात यह थी कि इसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्रों को भारत के बजाय पाकिस्तान के भू-भाग के रूप में दिखाया गया था। भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर हमेशा से एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। किसी भी विदेशी संस्था या कंपनी द्वारा इस तरह का गलत नक्शा प्रकाशित करना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा प्रहार माना जाता है।

सोशल मीडिया पर फूटा भारतीयों का गुस्सा

जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, भारतीय इंटरनेट यूजर्स की नजर इस पर पड़ गई। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने एयरलाइंस की इस ‘हिमाकत’ की कड़ी निंदा की और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने एयरलाइंस के बहिष्कार की भी अपील की। नाराज यूजर्स ने इस पोस्ट में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास को टैग करना शुरू कर दिया, ताकि इस मामले में आधिकारिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा सके।

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चुपचाप पोस्ट डिलीट

जब एयरलाइंस के मैनेजमेंट ने देखा कि उनकी एक गलती के कारण भारत में भारी बवाल मच गया है और उनकी ब्रांड इमेज को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, तो उन्होंने डैमेज कंट्रोल का सहारा लिया। एयरलाइंस ने विवाद को बढ़ता देख उस विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से चुपचाप डिलीट कर दिया। इसके बाद, नेपाल एयरलाइंस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल (@NepalAirlinesRA) से एक पोस्ट जारी कर इस पूरी घटना पर खेद व्यक्त किया। अपने स्पष्टीकरण में एयरलाइंस ने कहा: हाल ही में हमारे सोशल मीडिया चैनलों पर शेयर किए गए नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए हम तहे दिल से माफी मांगते हैं। इस मैप में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर नक्शानवीसी से जुड़ी कई बड़ी गलतियां थीं, जो नेपाल या नेपाल एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शातीं। हमने तुरंत उस पोस्ट को हटा दिया है और यह पक्का करने के लिए एक अंदरूनी समीक्षा कर रहे हैं कि हमारा कंटेंट सटीकता के उच्चतम मानकों पर खरा उतरे। हम इस क्षेत्र में अपने पड़ोसियों और दोस्तों के साथ अपने मजबूत रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं और उस पोस्ट से किसी को भी हुई ठेस के लिए हमें गहरा खेद है।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत का रुख स्पष्ट है- पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, था और हमेशा रहेगा। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, भारत की बाहरी सीमाओं का गलत चित्रण करना एक दंडनीय अपराध है। अतीत में भी जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), ट्विटर, या अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत का गलत नक्शा दिखाया है, तो भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें इसे सुधारने पर मजबूर किया है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, मीडिया या संगठन जब गलत मैप इस्तेमाल करते हैं तो भारत में तीखी प्रतिक्रिया होती है। पहले भी कई मामलों में इसी तरह का विवाद हुआ। जैसे इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने 2025 के एक मैप में J&K को पाकिस्तान में दिखाया था और बाद में माफी मांगी गई। नेपाल एयरलाइंस की बात करें तो यह नेपाल की फ्लैग कैरियर है, जो मुख्य रूप से काठमांडू से विभिन्न भारतीय शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि), एशिया और मध्य पूर्व में उड़ानें भरती है। ऐसी कंपनियां आमतौर पर मानक अंतरराष्ट्रीय मैप्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन कई बार सस्ते स्टॉक इमेज या गलत डेटा सेट से गलतियां हो जाती हैं। कंपनी ने अब तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है- सिर्फ पोस्ट डिलीट कर दी गई।

Pan Masala Draft Rule: पान मसाला खाने वालों के लिए नई खबर, केंद्र सरकार लेने जा रही अहम फैसला…

Pan Masala Draft Rule: देश में पान मसाला की पैकेजिंग अब प्लास्टिक से हटकर इको-फ्रेंडली सामग्री में की जाएगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने साफ किया है कि कागज, पेपरबोर्ड, सेलूलोज और अन्य प्राकृतिक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सके। पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचते हुए ऐसे विकल्प अपनाए जाएंगे जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों।

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अब Aadhaar से नहीं साबित होगी आपकी उम्र, DOB प्रूफ के लिए दिखाने होंगे ये डॉक्यूमेंट

इसका मकसद फूड सेक्टर में टिकाऊ और सुरक्षित पैकेजिंग को बढ़ावा देना है। छोटे प्लास्टिक सैशे के इस्तेमाल से भी दूरी बनाई जाएगी। यह कदम प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना है।

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हालांकि, कंपनियों को टिन और कांच जैसे विकल्पों के इस्तेमाल की छूट रहेगी, ताकि वे अपनी जरूरत के मुताबिकपैकेजिंग चुन सकें। एफएसएसएआई ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, ताकि बदलाव को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अब Aadhaar से नहीं साबित होगी आपकी उम्र, DOB प्रूफ के लिए दिखाने होंगे ये डॉक्यूमेंट

Aadhaar Not Valid as Date of Birth Proof: अगर आप अब तक यह सोचते थे कि आपका UIDAI द्वारा जारी Aadhaar कार्ड हर जगह काम आ जाता है, तो यह खबर पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल UIDAI ने एक बड़ा बयान जारी किया है जिसमें बताया गया है कि Aadhaar कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth) के पक्के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। UIDAI ने साफ किया है कि Aadhaar सिर्फ आपकी पहचान और एड्रेस का प्रमाण है, न कि आपकी उम्र या जन्मतिथि का आधिकारिक दस्तावेज।

बताते चलें की देश में लंबे समय से लोग Aadhaar को हर तरह के काम के लिए इस्तेमाल करते आ रहे हैं चाहे वह बैंकिंग हो, स्कूल एडमिशन हो या सरकारी योजनाएं। इस अपडेट के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर Aadhaar में DOB होने के बावजूद यह वैध क्यों नहीं है? और अगर Aadhaar नहीं चलेगा, तो फिर कौन-कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी होंगे?

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आखिर क्यों Aadhaar को DOB प्रूफ नहीं माना जाता

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि Aadhaar में दर्ज जन्मतिथि हमेशा पूरी तरह से वेरीफाई नहीं होती। UIDAI के मुताबिक, कई बार लोग बिना पक्के डॉक्यूमेंट के भी अपनी डेट ऑफ बर्थ डिक्लेअर कर देते हैं या अनुमान के आधार पर दर्ज करवा देते हैं। यानी Aadhaar में जो जन्मतिथि लिखी है, वह जरूरी नहीं कि सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से पूरी तरह सही हो। इसी वजह से इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

सिर्फ UIDAI ही नहीं, बल्कि कोर्ट और कई सरकारी विभाग भी पहले ही साफ कर चुके हैं कि Aadhaar उम्र या जन्मतिथि का पक्का सबूत नहीं है। कई मामलों में अदालतों ने भी कहा है कि Aadhaar की जगह स्कूल सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र ज्यादा भरोसेमंद होते हैं।

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डेट ऑफ बर्थ प्रूफ के तौर पर इन डॉक्यूमेंट्स की होगी जरूरत

अगर आपको अपनी DOB साबित करनी है, तो आपको नीचे दिए गए वैध डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करना होगा:

– Birth Certificate (जन्म प्रमाण पत्र)

– 10वीं की मार्कशीट (SSLC)

– पासपोर्ट

– सरकारी अधिकारी द्वारा जारी DOB सर्टिफिकेट

UIDAI के नियमों के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर Aadhaar में DOB “वेरीफाई” मानी जाती है। असल में नियम नया नहीं है, लेकिन अब इसे लेकर स्पष्टता दी गई है। पहले लोग Aadhaar को हर काम में इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब आपको थोड़ा सावधान रहना होगा। अगर आपके पास सही DOB प्रूफ नहीं है, तो आगे चलकर कई जरूरी काम अटक सकते हैं।

अब नहीं बिकेंगी ऑनलाइन अवैध दवाएं! NCB का बड़ा एक्शन प्लान तैयार

नई दिल्ली : भारत में कुछ दवाओं को बिना डाक्टर की पर्ची या प्रेसक्रिप्शन के खरीदा बेचा नहीं जा सकता है, लेकिन अवैध तरीके से इन दवाओं की आनलाइन खरीद बिक्री बड़ी समस्या है। दवाओं की ऑनलाइन तस्करी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रविवार को समन्वित आपरेशन- ‘वाइप’ – शुरू किया और आनलाइन तस्करी के 122 मामलों की पहचान की। एनसीबी ने एक बयान में कहा कि उसने वेब बेस्ड इलिसिट एक्टिविटीज ¨प्रवेशन एंड इंफोर्समेंट (वाइप) के तहत कुछ आनलाइन प्लेटफार्मों को नोटिस जारी किए हैं, जिसमें उन्हें ‘तत्काल’ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सब्सटेंसेस एक्ट) के तहत विनियमित उत्पादों की सूची साझा की गई है ताकि ऐसी सूचियों की पहचान और उन्हें हटाने में मदद मिल सके।

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एनसीबी ने अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री रोकी

इस संबंध में इंडिया मार्ट, ट्रेडइंडिया और डायल4ट्रेड जैसे आनलाइन प्लेटफार्म ने कुछ उपाय किए हैं, जिनमें संदिग्ध विक्रेताओं को निलंबित करना शामिल है।एनसीबी ने 62 प्रतिबंधित पदार्थों से जुड़े 122 मामलों की पहचान की है, जिनमें क्लोनाजेपम, डायजेपम और फेंटानिल जैसी ‘आमतौर पर दुरुपयोग की जाने वाली’ दवाएं शामिल हैं। इनमें से 58 पदार्थ एनडीपीएस अधिनियम के दायरे में आते हैं, जबकि चार को ‘नियंत्रित’ पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। एनसीबी की तकनीकी टीमें खतरों की पहचान करने और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए उन्नत उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी का उपयोग करके निगरानी कर रही है।

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प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर कार्रवाई

एनसीबी ‘आपरेशन वाइप’ चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (आइएनसीबी) के खुफिया प्लेटफार्म एसएनओओपी (स्कैनिंग नोवेल ओपिओइड्स ऑन ऑनलाइन प्लेटफा‌र्म्स) के नाम से जाना जाता है की मदद ले रही है। यह पहल ‘आपरेशन मेड-मैक्स’ की सफलता पर आधारित है, जिसे एनसीबी ने अमेरिकी डीईए, आस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (एएफपी) और कुछ अन्य विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर जुलाई 2025 में अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी गिरोह को खत्म करने के लिए चलाया था।

Fire In Train: चलती ट्रेन के स्लीपर कोच में भीषण आग, जान बचाने के लिए यात्रियों ने लगाई छलांग

Fire In Train : तेलंगाना के यदाद्री भुवनगिरी जिले में चारमीनार एक्स्प्रेस में अचानक आग लग गई। ट्रेन के एक कोच से अचानक तेज लपटें उठने लगीं। जानकारी के मुताबिक उस समय ट्रेन अलेर रेलवे स्टेशन के पास थी। सूत्रों का कहना है कि घटना के वक्त ट्रेन की रफ्तार ज्यादा नहीं थी। यह धीमी गति से आगे बढ़ रही थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग एस-5 कोच में लगी थी। इसेक बाद अफरा-तफरी मच गई और लोग बाहर निकलने लगे। किसी यात्री के हताहत होने की सूचना फिलहाल नहीं है। सोशल मीडिया पर ट्रेन में आग लगने के वीडियो वायरल हो रहे हैं।

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इसमें देखा जा सकता है कि कोच से पहले धुआं उठता है और फिर आग की लपटें खिड़कियों से निकलने लगती है। थोड़ी ही देर में ट्रेन का कोच भट्ठी बन जाता है। चेन की खींचने की वजह से ट्रेन रुक गई। हालांकि कई यात्री ट्रेन रुकने से पहले ही बाहर कूद गए। ट्रेन की रफ्तार ज्यादा ना होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया। आग लगने की वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है। जानकारी के मुताबिक रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और जांच कर रहे हैं। इसके अलावा दमकल की गाड़ियों के प्रयास से आग को बुझा दिया गया है। जानकारों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से ट्रेन में आग लग सकती है।

नगर के छात्र जगत में खुशी की लहर, लायंस शिक्षण समिति ने किया हर्ष व्यक्त

कोच में आग लगने के बाद धुआं उठा तो यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों ने चेन खींच दी। वहीं ट्रेन रुकने से पहले ही कई यात्री खिड़कियों से कूदने लगे। बता दें कि कई बार ट्रेन की तेज गति इस तरह के हादसों को अधिक संगीन बना देती हैं। हालांकि ट्रेन रेलवे स्टेशन के ही पास थी और इसकी गति ज्यादा नहीं थी। इसलिए यह जल्दी रुक भी गई और आग बाकी के कोचों तक नहीं फैली।

LPG Delivery New Rule : LPG डिलीवरी का नया नियम लागू, सिलेंडर लेते समय अब ये नंबर बताना होगा अनिवार्य, वरना नहीं मिलेगी गैस

LPG Delivery New Rule : LPG गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और अब एक नया सिस्टम तेजी से लागू हो रहा है, जिसे DAC नंबर कहा जा रहा है। अगर आप भी घर पर गैस सिलेंडर मंगवाते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, गैस कंपनियों ने डिलीवरी को ज्यादा सुरक्षित और ब्लैक मार्केटिंग को कम करने के लिए DAC यानी Delivery Authentication Code सिस्टम शुरू किया है। हालांकि, कई लोगों को अभी भी DAC नंबर के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, जिसके कारण डिलीवरी के समय दिक्कतें आती हैं।

अब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त मानक

OTP जैसा होता है DAC नंबर

DAC नंबर OTP की तरह ही होता है, जो गैस बुकिंग के बाद आपके मोबाइल पर भेजा जाता है और डिलीवरी के समय इसे दिखाना जरूरी होता है। इस नए नियम का मकसद फर्जी डिलीवरी, गलत बिलिंग और गैस चोरी जैसी समस्याओं को रोकना है। अब बिना इस कोड के डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाएगी, जिससे ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

क्या है DAC नंबर

DAC नंबर का मतलब होता है Delivery Authentication Code। यह एक यूनिक कोड होता है, जो हर बार गैस सिलेंडर बुक करने के बाद ग्राहक को भेजा जाता है। जब आपका सिलेंडर डिलीवरी के लिए आता है, तो डिलीवरी बॉय आपसे यही कोड मांगता है। सही कोड देने के बाद ही सिलेंडर आपको दिया जाता है।

कैसे मिलता है DAC नंबर

जब आप LPG सिलेंडर बुक करते हैं, तो गैस कंपनी की तरफ से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ऐप या WhatsApp पर एक DAC कोड भेजा जाता है। यह कोड उसी डिवाइस पर भी भेजा जाता है जिससे आपने बुकिंग की होती है, ताकि किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए।

ऐसे काम करता है यह नया रूल

जब डिलीवरी बॉय आपके घर आता है, तो वह आपसे DAC नंबर पूछता है। आपको अपने मोबाइल में आए इस कोड को उसे बताना होता है। अगर कोड सही होता है, तभी डिलीवरी पूरी मानी जाती है। अगर आप कोड नहीं देते हैं, तो सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी जा सकती है।

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DAC नंबर नहीं मिला तो क्या करें

कई बार नेटवर्क या टेक्निकल समस्या की वजह से DAC नंबर समय पर नहीं मिलता। ऐसे में आप घबराएं नहीं। आप डिलीवरी बॉय से कोड दोबारा भेजने के लिए कह सकते हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी या ऐप के जरिए भी इसे फिर से प्राप्त किया जा सकता है।

अब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त मानक

नई दिल्ली : अब गली‑मोहल्लों में छोटे स्तर पर क्लीनिक चलाना पहले जैसा आसान नहीं होगा. केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) ने क्लीनिक संचालन से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए न्यूनतम जगह, स्टाफ और उपकरणों के मानक तय कर दिए हैं. इसके लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं, जिनके लागू होने के बाद देशभर में क्लीनिकों को तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा. नए नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लीनिक में डॉक्टर का कंसल्टेशन रूम अब 70 वर्ग फुट से कम नहीं हो सकता. इसके अलावा मरीजों के लिए कम से कम 35 वर्ग फुट का वेटिंग एरिया होना जरूरी होगा. क्लीनिक में ब्लड प्रेशर मशीन, थर्मामीटर, वजन मापने की मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और जरूरी इमरजेंसी उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है. हर क्लीनिक में कम से कम एक पंजीकृत डॉक्टर और एक प्रशिक्षित स्टाफ सदस्य की मौजूदगी भी जरूरी होगी.

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इन राज्यों में पहले लागू होंगे नियम

संशोधित नियमों के मसौदे के अनुसार, जिन राज्यों में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पहले से लागू है, वहां इन नए मानकों के अनुसार जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे. फिलहाल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित देश के 19 राज्यों में यह एक्ट लागू है. ऐसे में इन राज्यों के क्लीनिकों पर सबसे पहले नए नियमों का असर देखने को मिल सकता है.

शवगृह और अन्य सेवाओं के लिए भी तय मानक

DGHS ने केवल क्लीनिक ही नहीं, बल्कि औषधालय, निगरानी एवं अल्पकालिक प्रवास सुविधा, नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं और सैंपल कलेक्शन सेंटर के लिए भी न्यूनतम मानक तय किए हैं. इसके अलावा शवगृह के लिए भी पहली बार विस्तृत दिशा‑निर्देश बनाए गए हैं. नए नियमों के तहत शवगृह में हर शव को एक यूनिक कोड देना अनिवार्य होगा और तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना होगा.

मरीजों का रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य

संशोधित नियमों के अनुसार अब हर क्लीनिक को मरीजों को रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा और इलाज, जांच व दी गई दवाओं का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना पड़ेगा. बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के कोई भी क्लीनिक दवाएं नहीं बेच सकेगा. दवा वितरण का पूरा लेखा‑जोखा रखना अनिवार्य होगा. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्लीनिक के बाहर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाना होगा, जिसमें डॉक्टर की डिग्री, पंजीकरण और फीस का विवरण डिस्प्ले करना जरूरी होगा.

8 घंटे तक शॉर्ट स्टे की अनुमति

नए नियमों में क्लीनिकों को ऑब्जर्वेशन और शॉर्ट स्टे की सुविधा भी दी गई है. इसके तहत मरीज को अधिकतम 8 घंटे तक क्लीनिक में रखा जा सकेगा. इसके साथ ही जांच के लिए सैंपल लेने, उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने और ट्रांसपोर्ट से जुड़े मानक भी तय कर दिए गए हैं. इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य होगी.

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छोटे क्लीनिकों पर पड़ेगा असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि अगर इन मानकों का सख्ती से पालन कराया गया, तो 50 से 60 फीसदी छोटे क्लीनिकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. कई छोटे क्लीनिक या तो बंद होने के कगार पर आ सकते हैं या फिर उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करना पड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जहां छोटे क्लीनिक ही प्राथमिक इलाज का साधन हैं, वहां मरीजों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च उठाना छोटे डॉक्टरों के लिए आसान नहीं होगा, जिसका असर अंततः मरीजों की जेब पर भी पड़ सकता है.

नगर के छात्र जगत में खुशी की लहर, लायंस शिक्षण समिति ने किया हर्ष व्यक्त

चांपा : अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी संस्था लायंस इंटरनेशनल की स्थानीय इकाई लायंस क्लब चांपा द्वारा संचालित लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा संबद्धता प्रदान कर दी गयी है। इससे नगर के छात्रों में प्रसन्नता देखी जा रही हैं, वहीं लायंस क्लब शिक्षण समिति ने स्कूल को सी.बी.एस.ई. से संबद्धता प्राप्त होने पर हर्ष व्यक्त किया है।

उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी संस्था लायंस इंटरनेशनल की स्थानीय इकाई लायंस क्लब चांपा द्वारा वर्ष 1978 से लगातार नगर तथा जिले के सर्वप्रथम इंग्लिश मीडियम स्कूल के रूप में लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल का संचालन किया जा रहा है। स्कूल का संचालन प्रारंभ हुए आज 58 वर्ष पूर्ण होने पर एक नवीन उपलब्धि के रूप में नया आयाम जुड़ा है। स्कूल को आज 23 अप्रैल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता प्रदान कर दी गयी है। इस आशय की जानकारी गुरूवार को स्कूल प्रबंधन को सी. बी.एस.ई. के पोर्टल द्वारा प्रदान की गयी है। स्कूल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता क्रमांक-3330572 प्रदान किया गया है। इस बात की जानकारी स्कूल प्रबंधन को मिलते ही उनमें हर्ष की लहर दौड़ गयी। साथ ही स्कूल से जुड़े छात्रों सहित नगर के शिक्षा जगत में भी प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि स्कूल प्रबंधन विगत एक वर्ष से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत् था। स्कूल प्रबंधन समिति का लगातार एवं अनवरत प्रयास आखिरकार आज 23 अप्रैल को रंग लाया जब सी.बी.एस.ई. से लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल को संबद्धता प्रदान कर दी गयी। इस पर लायंस क्लब शिक्षण समिति के चेयरमेन लायन रामप्रपन्न देवांगन, लायन संतोष कुमार सोनी (अध्यक्ष लायंस क्लब चांपा), प्राचार्य श्रीमती अजिता वी. के., उपाध्यक्ष लायन डॉ. के. पी. राठौर, सचिव लायन सी. ए. सुरेश अग्रवाल सहित सदस्य लायन एस. एन. अग्रवाल, लायन राजेश अग्रवाल, लायन गिरधारी लाल अग्रवाल, लायन डॉ. योगेन्द्र शर्मा, लायन बजरंग अग्रवाल, लायन नंदकुमार देवांगन के अलावा लायंस क्लब के समस्त सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि स्कूल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंण्डल से संबद्धता प्राप्त होने पर यहाँ अध्ययनरत बच्चों को एक समान पाठ्यक्रम होने से अन्य राज्यों में भी शिक्षा ग्रहण के लिए जाने पर पढ़ाई करने में आसानी होगी। उन्हें उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होने पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में भी लाभ होगा। इसके अलावा छात्रों को केन्द्रीय पाठ्यक्रम होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद मिलेगी और निरंतर मूल्यांकन होने से उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। स्कूल को सी.बी.एस.ई. की संबद्धता प्राप्त होने पर लायंस क्लब के सदस्यों ने भी प्रसन्नता जाहिर की है।