Tuesday, September 22, 2026
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Train Late Refund: ट्रेन लेट हुई तो रेलवे पर लगा 35,000 का जुर्माना! जानिए यात्रियों के अधिकार और रिफंड पाने का तरीका

Train Late Refund: ट्रेन में लंबी देरी के कारण मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी झेलने वाले एक रेल यात्री के पक्ष में झारखंड के उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सितंबर 2024 में एक यात्री ने टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की दो टिकट बुक की थीं। हालांकि, ट्रेन निर्धारित समय से 8 घंटे 48 मिनट की देरी से संबलपुर पहुंची।

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ट्रेन की लंबी देरी से हुए नुकसान के बाद यात्री ने रेलवे को कानूनी नोटिस भेजा और इसके बाद उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। रेलवे ने मामले को रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) के अधिकार क्षेत्र में आने की दलील दी, लेकिन उपभोक्ता आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और सदस्यों ने मामले में रेलवे की सेवा में कमी मानी। आयोग ने रेलवे को 45 दिनों के भीतर ₹30,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमा खर्च, यानी कुल ₹35,000 जमा करने का आदेश दिया।

ट्रेन लेट होने पर यात्रियों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?

रेलवे के रिफंड नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में ट्रेन के निर्धारित समय से अधिक देरी होने पर यात्री टिकट रद्द कराकर रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। यदि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से 3 घंटे या उससे अधिक देरी से चल रही है और यात्री यात्रा नहीं करना चाहता, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत बिना कैंसिलेशन शुल्क के पूरा किराया वापस पाने का प्रावधान है।

अगर पहली ट्रेन की देरी के कारण यात्री की कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है, तो कुछ शर्तों के तहत कनेक्टिंग यात्रा का किराया भी वापस मिल सकता है। इसके लिए बुकिंग के समय IRCTC पर कनेक्टिंग जर्नी से संबंधित विकल्प और लागू नियमों का पालन जरूरी है।

वहीं, राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में लंबी देरी की स्थिति में यात्रियों को खान-पान और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रावधान हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनों में देरी की स्थिति में यात्रा बीमा से जुड़े मुआवजे के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

रिफंड के लिए TDR करना जरूरी

ट्रेन लेट होने की स्थिति में रिफंड अपने आप खाते में ट्रांसफर नहीं होता। पात्र यात्री को निर्धारित नियमों और समय-सीमा के भीतर TDR (Ticket Deposit Receipt) फाइल करना होता है।

ऑनलाइन ई-टिकट के लिए ऐसे फाइल करें TDR

  • सबसे पहले IRCTC की वेबसाइट या आधिकारिक ऐप पर लॉगिन करें।
  • My Bookings में जाकर संबंधित टिकट चुनें।
  • File TDR विकल्प पर क्लिक करें।
  • कारणों की सूची में ट्रेन के 3 घंटे से अधिक देरी से चलने और यात्रा नहीं करने से संबंधित विकल्प चुनें।
  • इसके बाद TDR सबमिट करें।
  • ध्यान रखें कि इस स्थिति में TDR फाइल करने की समय-सीमा का पालन करना जरूरी है।

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काउंटर टिकट पर कैसे मिलेगा रिफंड?

अगर आपने रेलवे स्टेशन के काउंटर से पेपर टिकट खरीदा है और ट्रेन निर्धारित प्रस्थान समय से 3 घंटे या उससे अधिक देरी से चल रही है, तो यात्रा नहीं करने की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार टिकट काउंटर पर टिकट सरेंडर कर रिफंड का दावा किया जा सकता है।

ज्यादा नुकसान होने पर उपभोक्ता आयोग का रुख

अगर ट्रेन की लंबी देरी के कारण यात्री को वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ है, जैसे फ्लाइट छूटना, महत्वपूर्ण कार्यक्रम या इंटरव्यू मिस होना अथवा अन्य दस्तावेजी नुकसान, तो उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत उपभोक्ता आयोग का रुख किया जा सकता है। हालांकि, मुआवजे का दावा मामले के तथ्यों और नुकसान के प्रमाण पर निर्भर करता है।

ऐसे मामलों में ट्रेन की देरी का आधिकारिक रिकॉर्ड, टिकट, यात्रा से जुड़े दस्तावेज और आर्थिक नुकसान के प्रमाण सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

शिकायत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ई-दाखिल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत भी दाखिल की जा सकती है।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि ट्रेन में अत्यधिक देरी होने पर यात्रियों के पास केवल टिकट रिफंड का ही विकल्प नहीं होता। यदि देरी के कारण वास्तविक और प्रमाणित नुकसान हुआ है, तो परिस्थितियों के अनुसार उपभोक्ता कानून के तहत भी राहत मांगने का रास्ता उपलब्ध हो सकता है।

Bank Holidays This Week: इस हफ्ते 5 दिन बंद रहेगा बैंकों का काम, घर से निकलने से पहले देख लें छुट्टियों की पूरी लिस्ट

Bank Holidays This Week: बैंक ग्राहकों के लिए इस हफ्ते जरूरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय त्योहारों और विशेष अवसरों के चलते कई दिनों तक बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा महीने का चौथा शनिवार और रविवार होने के कारण भी बैंक बंद रहेंगे।

हालांकि, बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक UPI, ATM, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए अपने जरूरी काम निपटा सकेंगे। ऐसे में अगर आपको बैंक शाखा जाकर ड्राफ्ट बनवाना है, दस्तावेज जमा करने हैं या खाता खुलवाना है, तो पहले अपने शहर की बैंक हॉलिडे लिस्ट जरूर चेक कर लें।

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किस दिन और कहां बंद रहेंगे बैंक?

22 सितंबर: करमा पूजा के अवसर पर झारखंड के रांची में बैंक शाखाओं का अवकाश रहेगा।

23 सितंबर: महाराजा हरि सिंह जयंती के मौके पर जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे।

25 सितंबर: इन्द्रजात्रा पर्व के कारण सिक्किम के गंगटोक क्षेत्र में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

26 सितंबर: महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर में सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहेंगे।

27 सितंबर: रविवार के साप्ताहिक अवकाश के चलते पूरे देश में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

क्या पूरे देश में 5 दिन बैंक बंद रहेंगे?

यह समझना जरूरी है कि इन सभी छुट्टियों का असर पूरे देश के बैंकों पर एक जैसा नहीं होगा। 26 सितंबर के चौथे शनिवार और 27 सितंबर के रविवार को छोड़कर बाकी छुट्टियां संबंधित राज्य या शहर के हिसाब से लागू होंगी।

RBI की बैंक हॉलिडे लिस्ट क्षेत्रीय त्योहारों और स्थानीय अवसरों के आधार पर अलग-अलग राज्यों और शहरों के लिए निर्धारित होती है। इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर की छुट्टी जरूर जांच लें।

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बैंक बंद रहने पर भी मिलेंगी ये सेवाएं

बैंक शाखाएं बंद होने के बावजूद कई डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक घर बैठे अपने जरूरी वित्तीय काम कर सकते हैं।

  • UPI और मोबाइल बैंकिंग: पैसे ट्रांसफर करने और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा जारी रहेगी।
  • ATM: कैश निकालने और मिनी स्टेटमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
  • RTGS और NEFT: RBI के अनुसार ये इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर सेवाएं 24x7x365 उपलब्ध रहती हैं।
  • इंटरनेट बैंकिंग: बैलेंस चेक, बिल भुगतान और कई अन्य बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल ऑनलाइन किया जा सकता है।

इसलिए अगर आपका काम बैंक की शाखा में जाकर ही पूरा होना है, तो छुट्टी वाले दिन जाने से पहले अपने शहर की बैंक हॉलिडे लिस्ट जरूर चेक कर लें।

Air India AI-171 Crash: अहमदाबाद हादसे वाले Boeing 787 की तकनीकी हिस्ट्री खंगालने की मांग, पायलट संगठन ने भेजा पत्र

Air India AI-171 Crash: अहमदाबाद विमान हादसे की जांच को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को विस्तृत पत्र भेजा है। संगठन ने हादसे की जांच का दायरा बढ़ाने और Boeing 787 विमान से जुड़े इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के सभी तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच करने की मांग की है।

FIP का कहना है कि हादसे के कारणों तक पहुंचने के लिए जांच को केवल दुर्घटना वाले दिन की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विमान की पुरानी तकनीकी स्थिति और उसके मेंटेनेंस इतिहास की भी विस्तृत समीक्षा जरूरी है।

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मेंटेनेंस रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग की हो जांच

पायलट संगठन ने विमान के पुराने मेंटेनेंस रिकॉर्ड, तकनीकी लॉगबुक, पहले सामने आई तकनीकी खराबियों, किए गए मरम्मत कार्यों और बदले गए पुर्जों की जानकारी की बारीकी से जांच करने का अनुरोध किया है।

FIP के मुताबिक, इन रिकॉर्ड्स की समीक्षा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि विमान में पहले से कोई ऐसी तकनीकी समस्या मौजूद थी या नहीं, जो बार-बार सामने आ रही थी और दुर्घटना से पहले भी सक्रिय रही हो।

Boeing 787 के इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर विशेष ध्यान

FIP ने Boeing 787 के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की विस्तृत जांच की मांग की है। इसमें इलेक्ट्रिकल पावर जनरेशन सिस्टम, मुख्य और स्टैंडबाय पावर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, एवियोनिक्स, फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर, डेटा कम्युनिकेशन नेटवर्क, बैटरी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम और पावर कंट्रोल यूनिट की समीक्षा शामिल है।

संगठन ने पावर सप्लाई में रुकावट, वोल्टेज में असामान्य बदलाव, डेटा ट्रांसफर संबंधी गड़बड़ी, सॉफ्टवेयर रीसेट, प्रोसेसर रीबूट, कम्युनिकेशन लॉस और गलत फॉल्ट मैसेज से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच करने को कहा है।

फ्लाइट डेटा और मेंटेनेंस रिकॉर्ड का हो मिलान

FIP ने ACARS, एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से प्राप्त जानकारी को विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड के साथ मिलाकर देखने का सुझाव दिया है।

संगठन के अनुसार, इस तरह की संयुक्त जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि हादसे से पहले विमान में किसी तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मौजूद थे या किसी विशेष फॉल्ट का पैटर्न लगातार सामने आ रहा था।

Boeing 787 सिम्युलेटर टेस्ट की भी जांच की मांग

FIP ने अपने पत्र में Boeing 787 से जुड़े सिम्युलेटर टेस्ट के आंकड़ों की भी समीक्षा करने का अनुरोध किया है। संगठन ने विशेष रूप से फ्यूल सप्लाई में रुकावट, हाइड्रोलिक सिस्टम की उपलब्धता और इलेक्ट्रिकल पावर की स्थिति से जुड़े निष्कर्षों की तुलना प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से करने की मांग की है।

FIP का कहना है कि अगर सिम्युलेटर टेस्ट और जांच के शुरुआती निष्कर्षों में कोई अंतर सामने आता है तो उसके कारणों की भी पड़ताल की जानी चाहिए।

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तकनीकी खामी मिलने पर अंतरिम सुरक्षा सिफारिशों की मांग

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान अगर कोई ऐसी तकनीकी या परिचालन संबंधी खामी सामने आती है, जो उड़ान सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, तो अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना अंतरिम सुरक्षा सिफारिशें जारी की जानी चाहिए।

संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी एक निष्कर्ष का समर्थन करना नहीं है। FIP ने तकनीकी, परिचालन, मानवीय, मेंटेनेंस और नियामकीय पहलुओं को शामिल करते हुए निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की जरूरत पर जोर दिया है।

इसके साथ ही FIP ने AAIB से अपने पत्र को आधिकारिक जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने और जांच के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण सुरक्षा सुझावों की जानकारी साझा करने का अनुरोध किया है।

FASTag यूजर्स के लिए बड़ी सुविधा! अब बैंक बदलने पर नहीं लेना होगा नया FASTag, OneTag से होगा काम

FASTag OneTag: वाहन में FASTag का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। अब FASTag का बैंक बदलने के लिए नया FASTag लेने या गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगा पुराना FASTag हटाने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag सुविधा शुरू की है। इसे NHAI के Rajmargyatra App के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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बैंक बदलने पर नहीं बदलेगा FASTag

अब तक अगर कोई FASTag यूजर अपना बैंक बदलना चाहता था, तो उसे नए बैंक से नया FASTag लेना पड़ता था। इसके बाद पुराने टैग को हटाकर नया FASTag वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाना होता था।

OneTag सुविधा के तहत अब FASTag को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट किया जा सकेगा। यानी वाहन पर लगा FASTag वही रहेगा, लेकिन उससे जुड़ा बैंक और वॉलेट बदल जाएगा। इससे नया FASTag लेने और उसे दोबारा चिपकाने की परेशानी खत्म हो जाएगी।

कैसे करें FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट?

FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट करने के लिए सबसे पहले Rajmargyatra App में लॉग इन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ऐप पर यह जानकारी मिलेगी कि संबंधित FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए पात्र है या नहीं।

अगर FASTag पोर्ट के लिए योग्य है, तो मौजूदा FASTag बैंक से 6 डिजिट का MVC (वेरिफिकेशन कोड) लेना होगा। इसके बाद Rajmargyatra App पर नए बैंक का चयन करना होगा।

नए बैंक की KYC और वॉलेट सेटअप प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुराना FASTag नए बैंक से लिंक हो जाएगा। इस तरह वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा वही FASTag आगे भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पुराने FASTag के बैलेंस का क्या होगा?

FASTag पोर्ट होने के बाद पुराना बैंक मौजूदा वॉलेट को बंद करेगा। वॉलेट में बची राशि को नियमों के अनुसार वापस किया जाएगा। हालांकि, रिफंड के दौरान लागू नियमों के मुताबिक कुछ राशि की कटौती हो सकती है।

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6 महीने तक दोबारा पोर्ट नहीं कर सकेंगे FASTag

OneTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा का इस्तेमाल बार-बार तुरंत नहीं किया जा सकेगा। एक बार FASTag को दूसरे बैंक में पोर्ट कराने के बाद दोबारा बैंक बदलने के लिए 6 महीने तक इंतजार करना होगा

यानी FASTag को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट करने के बाद अगली पोर्टेबिलिटी के लिए 6 महीने की अवधि पूरी होने का इंतजार करना होगा।

Birth-Death Registration Rule: 1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम, अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए काटना होगा कोर्ट का चक्कर

Birth-Death Registration Rule: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। बच्चे के जन्म के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी होता है, जिसका इस्तेमाल स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी कामों में किया जाता है। वहीं, मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग बैंक खातों, संपत्ति और अन्य कानूनी एवं वित्तीय मामलों में किया जाता है।

अब जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 संसद से पारित हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले हैं। इसके बाद जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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1 साल से ज्यादा देरी पर क्या होगा?

नए नियम के तहत अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी 1 साल के बाद लेकिन 2 साल से पहले दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। इसके साथ निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया और फीस भी लागू होगी।

2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट जाना होगा

अगर जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में 2 साल से ज्यादा की देरी हो जाती है, तो मामला और अधिक औपचारिक हो जाएगा। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रेशन प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही किया जा सकेगा।

यानी जन्म या मृत्यु की जानकारी समय पर दर्ज नहीं कराने पर देरी बढ़ने के साथ प्रक्रिया भी अधिक जटिल हो जाएगी। दो साल से ज्यादा की देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत पड़ेगी।

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क्यों बदले जा रहे हैं नियम?

सरकार के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसलिए जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन समय पर कराना जरूरी होगा, ताकि बाद में अतिरिक्त सत्यापन या न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सके।

बालको में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई भगवान विश्वकर्मा जयंती

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कोरबा : वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बालको संयंत्र की विभिन्न इकाइयों और कार्यालयों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान कंपनी की निरंतर प्रगति, कर्मचारियों की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और औद्योगिक विकास की कामना की गई।

विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सुबह से ही बालको संयंत्र परिसर में उत्सव का माहौल रहा। संयंत्र की विभिन्न इकाइयों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर आकर्षक सजावट की गई थी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेका कामगारों ने पूजा-अर्चना में सहभागिता की। विधि-विधान से पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित कर्मचारियों एवं अन्य लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

भगवान विश्वकर्मा को सृजन, शिल्पकला, निर्माण और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। औद्योगिक संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। बालको में भी यह पर्व लंबे समय से औद्योगिक परंपरा और कार्यसंस्कृति का हिस्सा रहा है। इस अवसर पर कर्मचारियों ने सुरक्षित कार्यप्रणाली, नवाचार, जिम्मेदारी और टीम भावना के साथ कंपनी की प्रगति में योगदान देने का संकल्प दोहराया।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना सृजन के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बालको में प्रत्येक कर्मचारी का योगदान कंपनी की सामूहिक प्रगति का आधार है। सुरक्षित कार्यसंस्कृति, नवाचार और टीम भावना के साथ बालको औद्योगिक विकास के नए आयाम स्थापित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विश्वकर्मा जयंती का आयोजन बालको में औद्योगिक परंपरा और आधुनिक कार्यसंस्कृति के संगम के रूप में सामने आया। पूजा-अर्चना के दौरान कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने कर्मचारियों के बीच एकजुटता और सामूहिक भावना को मजबूत करने के साथ सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

राशन कार्ड बनवाना हुआ आसान, लेकिन बढ़ी जांच-पड़ताल! अब 6 दस्तावेज जरूरी, जानें ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया

राशन कार्ड: नया राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन जरूर किया गया है, लेकिन दस्तावेजों और सत्यापन को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब केवल आधार कार्ड या किसी एक एड्रेस प्रूफ के आधार पर राशन कार्ड नहीं बनाया जाएगा। आवेदन के साथ कई जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे और इसके बाद आवेदक का सत्यापन भी किया जाएगा।

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राशन कार्ड के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी?

नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करते समय ये दस्तावेज तैयार रखना जरूरी होगा:

  • आधार कार्ड
  • आवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • घर की फोटो
  • बैंक अकाउंट की जानकारी

इसके अलावा आवेदन के दौरान आवेदक या परिवार के मुखिया की फोटो और मोबाइल नंबर भी देना होगा। मोबाइल नंबर पर OTP के जरिए सत्यापन किया जा सकता है। परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी और उनके आधार नंबर भी आवेदन में दर्ज करने होंगे।

ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?

नया राशन कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन e-District पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जन सेवा केंद्र के माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी तैयार रखना बेहतर होगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए सबसे पहले संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करना होगा। इसके बाद नए राशन कार्ड के आवेदन का विकल्प चुनकर परिवार के मुखिया की जानकारी, पता, बैंक खाते और आय से जुड़ी जानकारी भरनी होगी।

इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के नाम और आधार नंबर दर्ज करने होंगे। आवेदन के साथ आवेदक की फोटो, घर की फोटो और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा। आवेदन की रसीद को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।

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आवेदन के बाद होगा सत्यापन

ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवेदन को BDO या क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति निरीक्षक के स्तर पर सत्यापित किया जा सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया जाएगा।

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदक का डिजिटल राशन कार्ड जारी किया जा सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में करीब 30 दिन तक का समय लग सकता है।

बालको मेडिकल सेंटर ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को बनाया अधिक सुलभ…

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रायपुर : कैंसर का पता चलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन मध्य भारत के कई मरीजों के लिए असली चुनौती उपचार केंद्र तक पहुँचना भी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को कई सौ किलोमीटर दूर बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी और बार-बार परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप के लिए यात्रा, ये सब परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) की स्थापना हुई। आज आठ वर्षों बाद बीएमसी मध्य भारत में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अब तक यहाँ 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।

कोंडागांव के 28 वर्षीय एक मरीज की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के लिए उन्हें अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और उनका पूरा उपचार एक ही केंद्र में हुआ।

इसी तरह, 48 वर्षीय एक मरीज को पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद जब वे फॉलो-अप के लिए लौटे, तो वे स्वस्थ थे और सामान्य जीवन में वापस आ चुके थे।

ये अनुभव बताते हैं कि कैंसर उपचार में विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका मरीज तक पहुँचना और उपचार का पूरा होना। बीएमसी का प्रयास इसी दिशा में है, उपचार के विभिन्न चरणों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध कराना। यहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती हैं। मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से विशेषज्ञ मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार करते हैं।

बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जाँच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहाँ 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसका ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य भारत के बड़े कार्यक्रमों में शामिल है।

उपचार के साथ मरीजों और उनके परिजनों की अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है। सुख सराय में उपचार के दौरान रियायती आवास की सुविधा मिलती है। दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता उपलब्ध है, जबकि कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है। पात्र मरीजों को उपचार और जाँच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं।

प्रारंभिक पहचान के महत्व पर वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप कहते हैं, “कैंसर के उपचार में इसकी शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका सीधा असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और जागरूकता के माध्यम से कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर व ओरल (मुख) के कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

आज बीएमसी तक छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज पहुँच रहे हैं। इससे नया रायपुर की भूमिका क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। बालको मेडिकल सेंटर में सभी सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, मुख्य मंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अलावा सभी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ उपचार, ट्रांसप्लांट, बहु-विषयक चिकित्सा, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और शुरुआती जाँच, इन सभी को एक साथ लाकर बीएमसी कैंसर उपचार की राह में आने वाली कई दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य यही है कि मरीज की उपचार यात्रा में दूरी उसकी उम्मीद और उपचार के बीच बाधा न बने।

UPI से पेमेंट करने वालों के लिए जरूरी खबर! 3000 के भुगतान पर 12 रुपये शुल्क, किस पेमेंट पर कितना चार्ज, यहां समझें पूरा गणित

UPI Payment Charges: UPI से लेनदेन करने वाले लोगों के मन में NPCI के Merchant Discount Rate (MDR) फ्रेमवर्क को लेकर कई सवाल हैं। खासकर ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को लेकर लोग जानना चाहते हैं कि इसका भुगतान किसे करना होगा और ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

दरअसल, नए MDR फ्रेमवर्क के तहत आम ग्राहकों को UPI से पेमेंट करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन भी पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वहीं छोटे व्यापारियों को भी इस चार्ज के दायरे से बाहर रखा गया है।

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किस ट्रांजैक्शन पर कितना MDR चार्ज?

MDR का भुगतान कुछ निर्धारित मर्चेंट्स को करना होगा। ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR चार्ज नहीं लगेगा। वहीं ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.40 फीसदी की दर से मर्चेंट पर शुल्क लागू होगा। हालांकि, इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।

उदाहरण के तौर पर:

  • ₹2,000 तक: कोई MDR चार्ज नहीं
  • ₹3,000: 0.40% के हिसाब से ₹12
  • ₹4,000: 0.40% के हिसाब से ₹16
  • ₹5,000: 0.40% के हिसाब से ₹20
  • ₹50,000: 0.40% के हिसाब से ₹200
  • ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300

यानी अगर कोई ग्राहक ₹1 लाख का UPI भुगतान करता है, तो निर्धारित अधिकतम सीमा के कारण मर्चेंट को ₹300 से ज्यादा MDR नहीं देना होगा।

क्या ग्राहकों को UPI पेमेंट पर कोई चार्ज देना होगा?

नहीं। सामान्य उपभोक्ताओं से UPI के जरिए भुगतान करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्राहक पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के UPI का इस्तेमाल कर सकेंगे।

क्या दोस्तों और परिवार को पैसे भेजने पर लगेगा शुल्क?

नहीं। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। दोस्तों, परिवार के सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसी तरह अपने ही दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर करने पर भी कोई चार्ज नहीं देना होगा।

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छोटे व्यापारियों को भी MDR से छूट

P2PM फ्रेमवर्क के तहत आने वाले छोटे मर्चेंट्स को MDR से छूट मिलती रहेगी। इसमें ऐसे वेंडर भी शामिल हैं, जिन्हें UPI QR कोड के जरिए एक महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त होता है। ऐसे छोटे कारोबारियों पर यह MDR चार्ज लागू नहीं होगा।

इस तरह MDR का प्रावधान मुख्य रूप से निर्धारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन से संबंधित है। आम UPI यूजर्स के लिए पैसे भेजना और प्राप्त करना पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेगा।

KORBA : एल्यूमिनियम निर्माण के अगले अध्याय को आकार देते बालको के इंजीनियर…

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कोरबा : हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।

बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।

पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”

बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”

समय और कैलेंडर

एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”

कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”

कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।