Sunday, July 12, 2026
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Cloudburst in Kashmir: अनंतनाग में 60 मिनट में दो बार बादल फटा, पहलगाम में मची तबाही; होटलों में घुसा पानी, नदियां उफान पर

Cloudburst in Kashmir: कश्मीर के अनंतनाग जिले में 60 मिनट में बादल फटने की दो घटनाएं हुई है. शनिवार की रात यहां एक बादल फटा है. पहलगाम और शांगस इलाके में बाढ़ आ गई है. यहां होटलों और घरों में पानी घुस गया है. जिससे पर्यटन भी प्रभावित हुआ है. मौसम विभाग और प्रशासन ने पर्यटकों सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं और बारिश में बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है. वहीं बादल फटने से खेती और फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है. बाढ़ की स्थिति के बाद राहत टीमें मौके पर पहुंच गई हैं. मौसम विभाग ने कश्मीर में अगले 24 घंटे तक तेज बारिश होने की संभावना जताई है.

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पहलगाम में बाढ़

अनंतनाग में बादल फटने के बाद पहलगाम और शंगुस में अचानक से भीषण बाढ़ आ गई. यहां पानी होटलों और घरों में घुस गया. पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि देखते ही देखते रिहायशी इलाकों, खेतों और होटलों में मलबा जमा हो गया. अच्छी बात यह है कि इस पूरी तबाही के बीच किसी भी तरह की जनहानि की कोई खबर अब तक नहीं है. लेकिन नुकसान इलाके में हुआ है. बादल फटने के बाद स्थानीय प्रशासन एक्टिव बना हुआ है, मौके पर राहत-बचाव दल की टीमें लगी है. क्योंकि कई जगहों पर भूस्खलन भी हुआ है. जिससे मलबा जमा था, जिसे हटाने का काम जारी है. वहीं अनंतनाग जिले में ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ है.

60 मिनट में 2 बार फटा बादल 

अनंतनाग जिले में 60 मिनट के भीतर 2 बार बादल फटने की घटना सामने आई है. बादल फटने की पहली घटना  शंगुस के चटरगुल के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में हुई थी. बादल फटने से आरिपथ नाले का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ गया. पहाड़ों से उतरा यह सैलाब अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, विशालकाय पत्थर और पेड़ों का मलबा लेकर आया था.  यह पानी सीधे स्थानीय लोगों के खेतों और सेब के बागों में घुस गया, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका एक दरिया में तब्दील हो गया था. यहां पानी भरने से भारी नुकसान हुआ है. इसके बाद पहलगाम के ओवेरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी क्षेत्र में दूसरा बादल फट गया. इसके चलते ओवेरा नाले में आई बाढ़ का पानी करीब आधा दर्जन होटलों, शानदार रिसॉर्ट्स और स्थानीय लोगों के घरों में घुस गया. अचानक आए इस सैलाब से पर्यटकों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया.

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अनंतनाग में अलर्ट जारी 

बादल फटने के बाद अनंतनाग में रविवार को भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.  जिला प्रशासन ने तुरंत सभी विभागों को हाई अलर्ट पर डाल दिया. ओवेरा नाले के पास स्थित होटलों में फंसे सभी पर्यटकों को रेस्क्यू टीमों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आरिपथ और ओवेरा नाले सहित सभी जल निकायों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है. फिलहाल राहत और बचाव दल मलबे को हटाने और नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटे हैं.

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Bank Holiday on 11 July 2026: अगर आज 11 जुलाई 2026 को आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो घर से निकलने से पहले एक बार यह जरूर चेक कर लें कि आपके शहर में बैंक खुला है या बंद (Bank Open or Closed Today). कई बार लोग चेक जमा कराने, पासबुक अपडेट कराने, कैश निकालने या दूसरे जरूरी काम के लिए बैंक पहुंच जाते हैं और वहां जाकर पता चलता है कि छुट्टी है. खासकर शनिवार की छुट्टी (Saturday Bank Holiday) को लेकर अक्सर लोगों के मन में यही सवाल रहता है कि बैंक खुले हैं या नहीं (Bank Open or Not Today). ऐसे में बैंक जाने से पहले RBI की छुट्टियों की लिस्ट देख लेना बेहतर रहेगा.

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आज 11 जुलाई को बैंक खुले हैं या बंद?

आज 11 जुलाई 2026 को महीने का दूसरा शनिवार है. RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक दूसरे शनिवार की वजह से देशभर में सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहेंगे. यानी आज SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, Punjab National Bank समेत सभी बैंकों की ब्रांच में कामकाज नहीं होगा. इसलिए अगर आपका कोई ऐसा काम है जिसके लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, तो वह आज नहीं हो पाएगा. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम के अनुसार देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक हर रविवार के साथ साथ महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय त्योहारों और खास मौकों पर भी बैंक छुट्टी रहती है. इसी वजह से हर शहर की बैंक छुट्टी एक जैसी नहीं होती.

जुलाई में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

RBI के कैलेंडर के मुताबिक, जुलाई 2026 में कुल 12 दिन बैंक बंद रहेंगे. इनमें राष्ट्रीय और स्थानीय छुट्टियों के साथ दूसरे शनिवार, चौथे शनिवार और सभी रविवार की छुट्टियां शामिल हैं.

  • 11 जुलाई को दूसरे शनिवार की वजह से पूरे देश में बैंक बंद हैं.
  • 12 जुलाई को रविवार होने के कारण सभी बैंक बंद रहेंगे.
  • 16 जुलाई को भुवनेश्वर में रथ यात्रा, देहरादून में हरेला और इंफाल में कांग (रथ यात्रा) के मौके पर बैंक बंद रहेंगे.
  • 17 जुलाई को शिलांग में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के कारण बैंक बंद रहेंगे.
  • 18 जुलाई को गंगटोक में द्रुकपा त्से जी के अवसर पर बैंक बंद रहेगा.
  • 22 जुलाई को अगरतला में खारची पूजा की वजह से बैंक में छुट्टी रहेगी.
  • 25 जुलाई को महीने का चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे.

क्या बैंक बंद होने पर आपके जरूरी काम रुक जाएंगे?

अगर आज बैंक की ब्रांच बंद है तो घबराने की जरूरत नहीं है. सिर्फ ब्रांच में होने वाले काम जैसे चेक क्लीयरेंस, पासबुक अपडेट, कैश काउंटर से लेनदेन और दूसरे ब्रांच वाले काम ही नहीं हो पाएंगे. बाकी ज्यादातर बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी.

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बैंक बंद होने पर भी चालू रहेंगी ये सर्विस

बैंक की ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग 24 घंटे चालू रहेंगी. आप UPI के जरिए Google Pay, PhonePe, Paytm या अपने बैंक के मोबाइल ऐप से पैसे भेज कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर किसी भी नजदीकी ATM से कैश भी निकाल सकते हैं. NEFT, RTGS जैसी ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ATM कार्ड से जुड़े कई काम भी ऑनलाइन किए जा सकते हैं.

इसके अलावा खाते से जुड़े कई आवेदन और दूसरी डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी. हालांकि कभी-कभी बैंक की तरफ से तय समय पर मेंटेनेंस के कारण कुछ सर्विस थोड़ी देर के लिए प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जानकारी बैंक पहले ही दे देते हैं.

बैंक जाने से पहले छुट्टी जरूर कर लें चेक

अगर आपको बैंक ब्रांच जाकर कोई जरूरी काम कराना है तो घर से निकलने से पहले RBI की बैंक हॉलिडे लिस्ट या अपनी बैंक ब्रांच से छुट्टी की जानकारी जरूर देख लें. इससे आपका समय बचेगा और बेवजह की भागदौड़ से भी बच जाएंगे.

100 KM दूर से दुश्मन का होगा खात्मा! टारगेट लॉक होते ही अचूक वार करती है भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइल

भारत डिफेंस सेक्टर में तेजी से आत्मनिर्भर होता जा रहा है. भारत खुद के लिए तो एडवांस मिसाइलों से लेकर फाइटर जेट बना रहा है साथ ही दुनिया के दूसरे देशों को एक्सपोर्ट भी कर रहा है. हाल ही में पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान ऐसी ही एक भारतीय मिसाइल की डील हुई है. यह मिसाइल है ‘अस्त्र’. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के बाद अब इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ‘अस्त्र’ (Astra) मिसाइल खरीदने का फैसला किया है. आखिर इस स्वदेशी मिसाइल की ऐसी क्या खासियत है जो पूरी दुनिया में इसकी डिमांड बढ़ रही है? आइए बताते हैं.

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इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल खरीदने का किया फैसला

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल खरीदने का फैसला किया. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के बाद इंडोनेशिया द्वारा भारत की स्वदेशी ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का फैसला भारतीय तकनीक पर वैश्विक भरोसे को दिखाता है. इंडोनेशिया न केवल अस्त्र खरीद रहा है, बल्कि अतिरिक्त कोस्टल डिफेंस बैटरी के साथ अपनी ब्रह्मोस इन्वेंट्री को भी बढ़ा रहा है.

क्यों खास और अनोखी है अस्त्र मिसाइल?

अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल को DRDO ने डेवलेप किया है. यह बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल है. यानी यह मिसाइल फाइटर जेट्स को बिना दुश्मन के सीधे संपर्क में आए, विजुअल रेंज से बहुत दूर तबाह कर सकती है. यह करीब 100 किमी दूर तक कुछ सेकंड में टारगेट का खात्म करने की ताकत रखती है.

टारगेट लॉक होने पर नहीं बच पाएगा दुश्मन

DRDO ने अस्त्र मिसाइल में एक्टिव रडार सीकर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. जो अंतिम क्षणों में दुश्मन के लड़ाकू विमानों को ट्रैक कर उन्हें सटीक निशाना बनाती है. एक बार टारगेट लॉक हो जाने पर दुश्मन के विमान का इससे बचना नामुमकिन हो जाता है.

कई फाइटर जेट के साथ होंगे इंटीग्रेट

अस्त्र की सबसे बड़ी खूबी इसका अलग-अलग फाइटर जेट के साथ आसानी से इंटीग्रेट हो जाना है. इसे भारतीय वायुसेना के फ्रंट लाइन के फाइटर जेट सुखोई-30MKI और स्वदेशी LCA तेजस के साथ पहले ही इंटीग्रेट किया जा चुका है. भविष्य में इसे तेजस Mk-2 और भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर  एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए भी मुख्य हथियार के रूप में शामिल किया जाएगा.

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दुनिया के कई देशों ने दिखाई दिलचस्पी

इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल को खरीदने का फैसला कर लिया है. दुनिया के अन्य कई देशों ने भी इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है. इंडोनेशिया के अलावा ब्राजील अपने ग्रिपेन लड़ाकू विमानों के लिए और आर्मेनिया अपने Su-30 फाइटर जेट के लिए इसे खरीदने पर विचार कर रहे हैं. इसके साथ ही वियतनाम, मलेशिया और अल्जीरिया जैसे देशों ने भी अस्त्र मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. यह बताता है कि भारत अब केवल दुनिया से हथियारों का खरीदार नहीं रहा बल्कि स्वदेशी तकनीक के दम पर ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम के साथ ‘डिफेंस सुपरपावर’ बनकर उभर रहा है.

दुश्मन पर सटीक प्रहार की तैयारी, DRDO ने लंबी दूरी के पिनाका रॉकेट का सफल परीक्षण किया

नई दिल्लीः डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने बुधवार को ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का सफल फ़्लाइट टेस्ट किया। इसकी जानकारी देते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कि रॉकेट का टेस्ट ज़रूरत के हिसाब से तय 60 किलोमीटर की कम से कम रेंज के लिए किया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रॉकेट ने उड़ान के दौरान सभी तय किए गए मैन्यूवर (गतिविधियां) दिखाए और ठीक वैसे ही टारगेट पर निशाना साधा जैसा अनुमान लगाया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पनीका के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ और भारतीय सेना को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने इसे लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के लिए स्वदेशी डिज़ाइन और डेवलपमेंट क्षमता में एक बड़ी उपलब्धि बताया। 

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DRDO के चेयरमैन ने की निगरानी

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी और आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी और रिसर्च सेंटर इमारत के सहयोग से इस रॉकेट को डेवलप किया है। रॉकेट को पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया जो पहले से ही सर्विस में है। सरकार ने बताया कि DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह, जो रक्षा सचिव और रक्षा R&D विभाग के सचिव भी हैं, ने इस रॉकेट के परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की और उनकी मदद की। रॉकेट को पहले से इस्तेमाल हो रहे पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया, जिससे इसकी वर्सटैलिटी (बहुमुखी प्रतिभा) का पता चला और एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज वाले पिनाका वैरिएंट्स को लॉन्च करने की क्षमता भी देखने को मिली ।

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सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा

अधिकारियों ने बताया कि योजना के मुताबिक उड़ान के दौरान सभी मानकों पर खरा उतरते हुए एलआरजीआर ने पहले से तय रास्ते का बिल्कुल सटीक तरीके से पालन किया और बेहतरीन सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को भेदा। उन्होंने बताया कि परीक्षण की निगरानी करने के लिए लगाए गए सभी उपकरणों ने उड़ान के समय रॉकेट के पूरे रास्ते पर नजर रखा।

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नई दिल्ली: भारत जल्द ही अंतरिक्ष के दुनिया में नया इतिहास रचने जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि इस बार यह इबारत हमारी भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO नहीं बल्कि एक प्राइवेट कंपनी लिखेगी. भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-1’ अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार है. यह मिशन भारत के लिए बेहद खास होने वाला है. यह रॉकेट पूरी तरह स्वदेशी है. आम रॉकेट की तुलना में यह काफी एडवांस और हल्का है. यह रॉकेट पृथ्वी की ऑर्बिट में अपने साथ कुछ ऐसा भी ले जाएगा, जो पहले कभी कोई भारतीय रॉकेट लेकर नहीं गया. विक्रम रॉकेट अपने साथ हीरे और सोना लेकर जाएगा. यह पूरा मिशन है क्या और यह क्यों इतना अहम है? आइए बताते हैं.

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रॉकेट कब होगा लॉन्च?

विक्रम रॉकेट की खासियत बताने से पहले ये जान लीजिए कि यह मिशन कब लॉन्च होगा. हैदराबाद आधारित कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि देश के निजी तौर पर डेवलेप ऑर्बिटल कैटेगरी के पहले रॉकेट ‘विक्रम-1′ की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है. इसे ‘आगमन’ कहा जाता है. लॉन्चिंग की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्चिंग पैड पर टेस्टिंग से जुड़े काम पूरे होने और मौसम, सुरक्षा व ‘रेंज क्लीयरेंस’ पर निर्भर करेगी. यह मिशन स्काईरूट एयरोस्पेस के लिए पहला इतना बड़ा मिशन है. यह कंपनी भारत की सबसे नई स्पेस टेक्नोलॉजी यूनिकॉर्न है, जिसकी अनुमानित कीमत $1.1 बिलियन से ज्यादा है. इसे ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका द्वारा शुरू किया गया है. हैदराबाद की यह कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर की लीडर बनकर उभरी है. अब, जब इसका पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल पूरी तरह से असेंबल होकर फाइनल चेक का इंतजार करते हुए उड़ान के लिए तैयार है.

विक्रम रॉकेट की खासियत?

भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर, विक्रम-1 भारत का सबसे छोटा ऑर्बिटल रॉकेट है और देश का पहला प्राइवेट तौर पर डेवलप किया गया लॉन्च व्हीकल है जिसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने के लिए बनाया गया है.  विक्रम-1 सात मंजिला लंबा, बहु-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्चिंग व्हीकल है. इसे कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके और स्काईरूट के चर्चित 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन को शामिल करके बनाया गया है. इस रॉकेट को 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में रखने के लिए डिजाइन किया गया है.

विक्रम-1 असल में एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन है, इसके कुछ पेलोड स्पेस की दुनिया के बाहर भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. पहली बार, एक भारतीय रॉकेट से हीरे स्पेस में लॉन्च किए जाएंगे. कॉस्मॉस डायमंड्स द्वारा डेवलप किया गया कॉस्मिक ब्लूम नाम का एक खास पेलोड, विक्रम-1 पर उड़ेगा. पेलोड में एक एल्युमिनियम बेस प्लेट पर लगा एक डायमंड ज्वेलरी क्रिएशन है. यह चीज स्पेसफ्लाइट के साथ क्राफ्टमैनशिप को जोड़ती है, जो दिखाती है कि ऑर्बिट में आर्ट, लग्जरी और टेक्नोलॉजी कैसे मिल सकते हैं.

यह मिशन स्पेस में सोना भी ले जाएगा. आर्टिस्ट अजय कुमार मटेवाड़ा ने माइक्रोआर्ट नाम का एक अनोखा आर्टवर्क बनाया है जो रॉकेट पर उड़ेगा. इस छोटी मूर्ति में 18 कैरेट सोने का रॉकेट है जिसमें भारत के तीन सबसे बड़े साइंटिफिक विजनरी की छोटी मूर्तियां हैं. इसमें नोबेल प्राइज जीतने वाले वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन, भारतीय स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई और पूर्व राष्ट्रपति और अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शामिल हैं. इस आर्टवर्क की खास बात इसका साइज है. हर छोटी मूर्ति चावल के दाने से भी छोटी है. ये सब मिलकर साइंटिफिक लीडरशिप की तीन पीढ़ियों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने मॉडर्न इंडिया को बनाने में मदद की.

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भारत के लिए यह क्यों बेहद अहम है?

दुनियाभर में छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने की मांग काफी बढ़ रही है. विक्रम रॉकेट के जरिए भारत दुनिया के देशों को सस्ता और ऑन डिमांड लॉन्चिंग ऑप्शन दे सकेगा. इस मिशन के बाद ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत बड़ा लीडर बन जाएगा. इसके अलावा भारत में सभी स्पेस मिशनों का जिम्मा भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ही संभालती है. लेकिन अब निजी कंपनियों के आने के बाद ISRO बड़े मिशनों जैसे चंद्रयान और गगनयान पर फोकस कर पाएगा. वहीं छोटे और कमर्शियल मिशनों को प्राइवेट कंपनियां संभाल पाएंगी.

LIONS ENGLISH HIGHER SECONDARY SCHOOL, CHAMPA District – Janjgir-Champa (C.G.)

Established in 1978 by Lions Club Champa, Lions English Higher Secondary School is one of the oldest and most reputed institutions in Janjgir-Champa district, committed to providing quality education and shaping the future of young minds.

Under the able guidance of the Management Committee, led by Lion Ramprappan Dewangan (Chairman), along with MJF Lion Santosh Kumar Soni (President), Lion Dr. K. P. Rathore (Vice Chairman), Lion CA Suresh Agrawal (Secretary), Lion Dr. V. K. Agrawal, MJF Lion Santosh Kumar Agrawal, Lion Vinod Agrawal, Lion G. P. Dubey, Lion Baijanath Dewangan, and Lion Vasudevchand Dewangan (Committee Members) the institution has been progressing steadily with a vision of excellence in education.

Over the years, the school has nurtured and produced successful doctors, engineers, teachers, and professionals serving across India and abroad. Under the dynamic leadership of Principal Mrs. Ajitha V. K., supported by nearly 70 teaching staff and 30 non-teaching staff, the institution is dedicated to imparting quality education to around 1500 students.

The main objective of the school is to provide quality education at affordable fees while ensuring the all-round development of every child through academic excellence, discipline, and co-curricular activities.

Special Features

* Smart classrooms for all students.

* Spacious playground facility

* Well-furnished classrooms for Nursery, KG-I, and KG-II

* Additional computer education facilities

* Well-equipped Composite Lab along with separate Physics, Chemistry, Biology, Mathematics, and Computer Labs

* Well-equipped auditorium

* Students have represented the school at district, state, and national levels in sports

* Continuous surveillance through CCTV cameras

* Generator backup and RO drinking water facility

ADMISSIONS OPEN FROM NURSERY TO CLASS XII

Contact: 7819796804, 9425533099

Website: www.lionsschoolchampa.com

Email: lionsschoolchampa@gmail.com

SIR के तहत चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई, 4 राज्यों में 22 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए

नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने मतदाता पुनरीक्षण को लेकर चलाए जा रहे एसआईआर अभियान के तहत चार राज्यों की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. ये राज्य ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम है. इन राज्यों में से SIR प्रक्रिया के तहत 22 लाख से अधिक लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा अपना नाम जुड़वाने का मौका दिया जाएगा. चुनाव आयोग के अनुसार, ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में SIR अभियान के तहत मतदाता सूची की जांच की गई, जिसके बाद 22 लाख से अधिक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं.

अगर करना है ट्रेन से सफर, पहले जान लें: 216 स्पेशल ट्रेनों की नई तारीखें, रूट और बुकिंग अपडेट

पिछले साल जून में ही चुनाव आयोग ने SIR अभियान की शुरुआत की थी. यह अभियान बिहार, बंगाल, असम, और यूपी जैसे राज्यों में संपन्न हो चुका है. इस अभियान के अंतर्गत बिहार में 65 लाख, बंगाल में 37 लाख और उत्तर प्रदेश में 25 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. ओडिशा राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर.एस. गोपालन के अनुसार 20 लाख से अधिक लोगों के  नाम हटा दिए गए, जिनमें 8.3 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी, 10 लाख लोग स्थानांतरित या फिर अनुपस्थित मिले और 1.5 लाख लोग कई जगह पर पंजीकृत मिले.

ISRO की बड़ी कामयाबी: आदित्य-L1 ने खोले सूरज के छिपे रहस्य, वैज्ञानिकों को मिली अहम सफलता

मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि 7,394 मतदाताओं के नाम एक से ज्यादा जगहों पर पाए गए और 43,000 मतदाता मृत. 1,08,283 मतदाता ऐसे है जिनकी जानकारी ठोस तरीके से नहीं मिल पाई है. राज्य में 19,34,399 मतदाता है, जिनमें पुरुष मतदाता 9,40,466 और महिला मतदाता, 9,93,660 और तृतीय लिंग के मतदाता महज 294 हैं. मिजोरम में मतदाता सूची से 46,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो कि चारों राज्यों में से मिजोरम में सबसे कम 5.2% ही हटाए गए है. सिक्किम में पहले राज्य में 4.7 लाख मतदाता थे जो अब इस अभियान के चलाए जाने के बाद से सूची में 4.3 लाख मतदाता हैं. हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा अपना नाम जुड़वाने का मौका दिया जाएगा. सभी दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी.

अगर करना है ट्रेन से सफर, पहले जान लें: 216 स्पेशल ट्रेनों की नई तारीखें, रूट और बुकिंग अपडेट

नई दिल्ली : रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. सेंट्रल रेलवे रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले महीनों में अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलता रहेगा. बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए सेंट्रल रेलवे ने 216 स्पेशल ट्रेन सेवाओं के संचालन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है. सेंट्रल रेलवे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है. रेलवे के अनुसार, यात्रियों की बढ़ती संख्या और यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन आगे भी जारी रखा जाएगा. रेलवे द्वारा विस्तारित की गई सेवाओं में 150 डेली स्पेशल ट्रेनें और 66 वीकली स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं. इससे यात्रियों को टिकट उपलब्धता और यात्रा के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे. रेलवे ने फिलहाल ट्रेनों के समय, रूट और स्टॉपेज में किसी बदलाव की जानकारी नहीं दी है, यानी ये ट्रेनें पहले की तरह ही अपने तय समय और मार्ग पर चलती रहेंगी. यह फैसला खास तौर पर उन यात्रियों के लिए राहत भरा है, जो नियमित रूप से इन रूटों पर यात्रा करते हैं या त्योहारों एवं छुट्टियों के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों की जरूरत महसूस करते हैं.

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किन ट्रेनों का संचालन बढ़ाया गया है?

सेंट्रल रेलवे ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच चलने वाली कई स्पेशल ट्रेनों की अवधि बढ़ा दी है. इसमें डेली और वीकली दोनों तरह की ट्रेनें शामिल हैं.

डेली स्पेशल ट्रेनें

पुणे-दानापुर डेली स्पेशल (ट्रेन नंबर 01449) का संचालन पहले 15 जुलाई 2026 तक होना था. अब इसे 16 जुलाई से 28 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है. इससे यात्रियों को 75 अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा. इसी तरह दानापुर-पुणे डेली स्पेशल (ट्रेन नंबर 01450), जो पहले 17 जुलाई 2026 तक चलने वाली थी, अब 18 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी. इन ट्रेनों के कोचों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इनमें पहले की तरह 1 एसी 2-टियर कोच, 5 एसी 3-टियर कोच, 6 स्लीपर कोच, 4 जनरल सेकेंड क्लास कोच, 2 सेकेंड सीटिंग कोच और एक ब्रेक वैन लगी रहेगी.

वीकली स्पेशल ट्रेनें भी जारी रहेंगी

सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए 6 साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन सेवाओं के संचालन को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इन ट्रेनों के जरिए महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी. रेलवे का कहना है कि बढ़ती यात्री संख्या और टिकटों की मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. फिलहाल ट्रेनों के समय, रूट और स्टॉपेज में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यात्री पहले की तरह इन स्पेशल ट्रेनों में सफर कर सकेंगे.

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ट्रेन संख्या और रूट

  • 04152 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-कानपुर 18 जुलाई – 26 सितंबर, 2026 तक
  • 04151 कानपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 17 जुलाई – 25 सितंबर, 2026 तक
  • 01921 हडपसर-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी 23 जुलाई – 1 अक्टूबर, 2026 तक
  • 01922 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-हडपसर 22 जुलाई – 30 सितंबर, 2026 तक
  • 01923 हडपसर-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी 19 जुलाई – 27 सितंबर, 2026 तक
  • 01924 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-हडपसर 18 जुलाई – 26 सितंबर, 2026 तक

यात्रा से पहले ट्रेन की जानकारी कैसे चेक करें?

अगर आप ट्रेन से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले ट्रेन का समय, रूट और रनिंग स्टेटस जरूर जांच लें. इसके लिए आप इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.

NTES- यहां ट्रेन की लाइव लोकेशन और रनिंग स्टेटस देखा जा सकता है.

RailOne मोबाइल ऐप- भारतीय रेलवे का आधिकारिक ऐप, जहां ट्रेन से जुड़ी कई जानकारी मिलती हैं.

IRCTC- टिकट बुकिंग, रिजर्वेशन स्टेटस और यात्रा से जुड़े अपडेट देखने के लिए.

भारतीय रेलवे इंक्वायरी पोर्टल- ट्रेन के समय, रूट, आगमन और प्रस्थान की जानकारी के लिए.

ISRO की बड़ी कामयाबी: आदित्य-L1 ने खोले सूरज के छिपे रहस्य, वैज्ञानिकों को मिली अहम सफलता

नई दिल्ली : भारत के पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ ने  बड़ी सफलता हासिल की है. आदित्य एल-1 स्पेस क्राफ्ट हमारे सबसे करीबी तारों के रहस्यों को उजागर कर रहा है. 2024 में लैग्रेंजियन पॉइंट 1 (L1) पर काम करने के अपने पहले साल के दौरान, सूरज बहुत ज्यादा एक्टिव था और उसने कई जबरदस्त सोलर फ्लेयर इवेंट्स पैदा किए. खास L1 पॉइंट से आदित्य-L1 ने खास और अनोखी ‘आयरन फ्लोरेसेंस’ की घटना दर्ज की है.

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क्या है आयरन फ्लोरेसेंस?

ISRO के अनुसार, जब कोई बड़ा सोलर फ्लेयर फूटता है, तो यह सूरज के ऊपरी वायुमंडल (कोरोना) को बहुत ज्यादा तापमान तक गर्म कर देता है, जिससे हाई-एनर्जी वाली X-रेज का जबरदस्त विस्फोट होता है. हालांकि इनमें से ज्यादातर X-रेज बाहर अंतरिक्ष में निकल जाती हैं, लेकिन कुछ नीचे की ओर जाती हैं और सूरज की ठंडी, घनी सतह की परत, जिसे फोटोस्फीयर कहते हैं के साथ इंटरैक्ट करती हैं. यहां वे बड़ी मात्रा में मौजूद न्यूट्रल आयरन एटम्स के साथ इंटरैक्ट करती हैं.

जब ये कोरोनल X-रेज न्यूट्रल आयरन एटम्स से टकराती हैं, तो आयरन एटम्स एनर्जी को सोख लेते हैं और 6.40 keV की एनर्जी पर अपनी खास X-रे चमक छोड़ते हैं. इस प्रोसेस को ‘X-रे फ्लोरेसेंस’ कहा जाता है. आदित्य-L1 पर लगा सोलर लो एनर्जी X-रे स्पेक्ट्रोमीटर (SoLEXS) फ्लेयर से निकलने वाली X-रेज और तेज फ्लेयर्स से फोटोस्फेरिक आयरन फ्लोरेसेंस का पता लगाने के लिए उपयुक्त है. SoLEXS इंस्ट्रूमेंट को ISRO के UR राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है.

सोलर फ्लेयर को समझिए

‘सोलर फिजिक्स’ मैगजीन में छपी स्टडी में कहा गया है कि आयरन फ्लोरेसेंस की देखी गई चमक काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि फ्लेयर सूरज की डिस्क यानी सतह पर कहां होता है. सूरज की डिस्क के सेंटर के पास होने वाले फ्लेयर्स एक मजबूत फ्लोरेसेंस सिग्नल दिखाते हैं, जबकि सूरज के किनारे (लिम्ब) के पास होने वाले फ्लेयर्स के लिए सिग्नल बहुत ज्यादा दबा हुआ था.

यह ‘सेंटर-टू-लिम्ब’ बदलाव थ्योरेटिकल मॉडल से मेल खाता है, यह एफिशिएंसी कैसे बदलती है, इसकी स्टडी करके, रिसर्चर अब आयरन फ्लोरेसेंस को एक संभावित डायग्नोस्टिक टूल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि सोलर एटमॉस्फियर में ऊपर कोरोनल एक्स-रे सोर्स की ऊंचाई की जांच की जा सके और इन एक्सप्लोसिव घटनाओं की यूनिक व्यूइंग ज्योमेट्री की स्टडी की जा सके.

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क्यों खास है आदित्य-L1 की यह खोज?

  • सूर्य को समझने में बड़ी मदद: ‘आयरन फ्लोरोसेंस’ से वैज्ञानिक यह पता लगा सकेंगे कि सोलर फ्लेयर के दौरान सूर्य का बाहरी वातावरण यानी कोरोना में एक्स-रे किस तरह पैदा और फैलते हैं.
  • सौर तूफानों की स्टडी: इससे सोलर फ्लोरेसेंस की ऊंचाई, संरचना और ज्योमेट्री की स्टडी पहले से ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकेगा.
  • स्पेस वेदर की भविष्यवाणी: सौर तूफान सैटेलाइट, GPS, कम्युनिकेशन सिस्टम और पावर ग्रिड पर असर डाल सकते हैं. इस तरह की स्टडी भविष्य में स्पेस वेदर मॉनिटरिंग को बेहतर बना सकते हैं.

Medicine Price Control: महंगी दवा बेचने वालों पर सख्ती! तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगा कड़ा एक्शन, केंद्र ने बदले नियम

Medicine Price Control: आने वाले दिनों में मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ मिलेगा. इसके लिए केंद्र सरकार ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. अधिसूचना के अनुसार, अब एक ही दवा के अलग-अलग पैक की अलग कीमत तय की जा सकेगी. इसके मुताबिक सरकार अब जरूरत पड़ने पर एक ही दवा के अलग-अलग पैक साइज, पैकेजिंग, डोज या दवा के स्वरूप (जैसे तरल या गैस) के आधार पर अलग-अलग अधिकतम या खुदरा कीमत तय कर सकेगी. इससे अलग पैक में आने वाली दवाओं की कीमत तय करना आसान होगा.

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नई दवा लॉन्च करने की प्रक्रिया आसान

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब अगर किसी नई दवा की खुदरा कीमत पहले ही तय हो चुकी है, तो अगले 12 महीनों के भीतर वही दवा लॉन्च करने वाली दूसरी कंपनी को दोबारा कीमत तय कराने के लिए आवेदन नहीं करना होगा. उसे दवा लॉन्च करने के एक महीने के भीतर सरकार को सिर्फ इसकी सूचना देनी होगी

कीमत घटने की जानकारी लोगों तक जल्दी पहुंचेगी

नियमों में बदलाव के तहत अब दवा कीमतों की निगरानी को लेकर सख्ती की गई है. संशोधन के अनुसार, अब दवा की कीमत कम होने पर कंपनियों को दो सप्ताह के भीतर डीलरों और मेडिकल स्टोर को नई मूल्य सूची भेजनी होगी. इसके अलावा कम से कम दो राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन देकर नई कीमत की जानकारी देगी होगी. साथ ही कंपनी की वेबसाइट पर भी नई कीमत की जानकारी डालनी होगी और संशोधित मूल्य सूची राज्य औषधि नियंत्रकों और सरकार को भेजनी होगी.

तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगी कार्रवाई

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी कंपनी ने सरकार द्वारा तय कीमत से अधिक दाम पर दवा बेचती पाई गई, तो उसे ज्यादा वसूली गई रकम ब्याज सहित जमा करनी होगी. इसके अलावा उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. सरकार ने नई दवा लॉन्च करने वाली कंपनियों के लिए नई सूचना फॉर्म (Form-IA) नाम का नया फॉर्म जोड़ा है. इसमें दवा का नाम, लॉन्च की तारीख, पैक साइज, उपयोग और लॉन्च कीमत जैसी सभी सूचना देनी होगी.

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7 साल तक रखना होगा रिकॉर्ड

आदेश के तहत अब हर दवा निर्माता को बिक्री, उत्पादन और अन्य जरूरी रिकॉर्ड कम से कम 7 वित्तीय वर्षों तक सुरक्षित रखने होंगे.ताकि अगर सरकार को जरूरत पड़े तो वो इन रिकॉर्ड की जांच कर सके. अधिकारियों के अनुसार, इन संशोधन का मकसद दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना, मरीजों को तय कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराना और नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित करना है.