No Toll Barrier Rules 2027: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया है कि केंद्र सरकार देश भर के सभी टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक टोल प्लाजा पर लगने वाली गाड़ियों की लाइन और वेटिंग टाइम को पूरी तरह खत्म करना है, जिससे वाहनों को टोल चुकाने के लिए रुकना न पड़े. इस मौके पर नितिन गडकरी ने फास्टैग को एक सक्सेस स्टोरी बताते हुए कहा कि शुरुआत में उपयोगकर्ताओं को कुछ समस्याएं जरूर हुईं, लेकिन जनता के फीडबैक के आधार पर इसे लगातार बेहतर बनाया गया है.
हाइब्रिड टेक्नोलॉजी: नया बैरियर-फ्री सिस्टम FASTag और ऑटोमेटिक नंबर-प्लेट रिकग्निशन कैमरों के साथ मिलकर काम करेगा.
सड़कों पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां: हाई-स्पीड कैमरों की मदद से वाहन के गुजरते ही नंबर प्लेट और फास्टैग से अपने-आप टोल की कटौती हो जाएगी.
समय सीमा: अगले साल फरवरी-मार्च तक इस तकनीक को प्रमुख टोल प्लाजा पर लागू करने की योजना है, जिससे टोल बूथों के बैरियर हटा दिए जाएंगे.
ओवरलोडिंग वाहनों के लिए लागू होगी वे-इन-मोशन तकनीक
सड़कों की समय से पहले खराबी और दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनने वाली कमर्शियल ट्रकों की ओवरलोडिंग को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है. इसके तहत सरकार एक ऐसी तकनीक तैयार कर रही है, जिससे सड़क पर चलते ही ट्रक के वास्तविक वजन का तुरंत पता चल जाएगा. इस रियल-टाइम ऑटोमैटिक वेट-चेकिंग सिस्टम को चालान और अनुपालन तंत्र से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे वजन में धांधली और टोल चोरी पर पूरी तरह रोक लगेगी.
टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने के दौरान इंजन चालू रहने से होने वाले ईंधन के नुकसान पर चिंता जताते हुए गडकरी ने कहा कि टोल प्लाजा पर गाड़ियों का वेटिंग टाइम 10 सेकंड से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यही इस सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है. ऐसे में टोल पार करने में लगने वाले समय को शून्य के करीब लाने से भारी मात्रा में ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स दक्षता में भी सुधार आएगा. मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में 55 नए फ्लाईओवर्स दिए गए हैं, जिसने ट्रैफिक को संभालने में अहम भूमिका निभाई है.
राजमार्ग निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए धन की उपलब्धता पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश और विदेशी निवेशकों के भरोसे की ओर इशारा किया. गडकरी ने कहा कि एनएचएआई के इन्विट बॉन्ड्स को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं और तनाव के माहौल के बावजूद NHAI के बॉन्ड जारी होने के महज 7 घंटे के भीतर पूरी तरह ओवर सब्सक्राइब हो गए. इससे साफ है कि देश में हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की कोई कमी नहीं है.
कोरबा : किसी गांव में जब किसान अपनी फसल के लिए बारिश का इंतजार करने के बजाय सिंचाई के भरोसे दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे, जब किसी महिला के हाथों का हुनर परिवार की आय का जरिया बन जाए, जब किसी युवा को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार का अवसर मिले और जब किसी बच्चे को गांव की आंगनबाड़ी में बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, तब विकास केवल एक आंकड़ा नहीं रहता, वह जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन जाता है।
भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास यात्रा समुदाय के साथ मिलकर दीर्घकालिक बदलाव की सोच पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको की पहल ने 123 गांवों में 1.80 लाख लोगों तक पहुंच बनाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के माध्यम से लोगों की क्षमताओं को मजबूत किया गया। किसान आधुनिक कृषि अपनाकर दूसरों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और उद्यमों का संचालन कर रही हैं तथा युवा कौशल के माध्यम से रोजगार और नेतृत्व के अवसर हासिल कर रहे हैं। यह साझी भागीदारी विकास को केवल परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थायी सामाजिक बदलाव की यात्रा बनाती है।
जीवन के हर पड़ाव से जुड़ा विकास
बालको की सामुदायिक विकास रणनीति ‘मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण’ पर आधारित है, जिसमें व्यक्ति और परिवार के जीवन के विभिन्न चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक निरंतर विकास पर ध्यान दिया गया है।
इसी सोच का उदाहरण नंद घर हैं, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और बच्चों के अनुकूल सीखने के स्थानों में विकसित किया गया है। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया तथा चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में बालको ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कोरबा और कवर्धा में 2 कोचिंग केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ। इन प्रयासों ने युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ अपने भविष्य को नई दिशा देने का अवसर दिया।
कृषि नवाचार और तकनीक से खेती में नया विश्वास
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार आज भी कृषि है। इसी सोच के साथ मोर जल मोर माटी कार्यक्रम के माध्यम से जल सुरक्षा, आधुनिक कृषि और आय के विविध स्रोतों को एक साथ जोड़ा गया है। वित्तवर्ष 2026 में यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया।
जल संरक्षण की विभिन्न व्यवस्थाओं, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों के चयन, मिट्टी की जांच तथा फसल में कीट एवं पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। इससे उत्पादन में लगभग 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित हुए। इस तरह खेती अधिक स्थायी आजीविका का आधार बनी।
वेदांता स्किल स्कूल: कौशल से रोजगार तक
ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाने में वेदांता स्किल स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तवर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा स्थित तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 82 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार या उद्यमिता से जुड़ाव हासिल किया। रोजगार उपलब्ध कराने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क 12 राज्यों तक विस्तारित हुआ।
प्रशिक्षण में 61 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ युवाओं को व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से परिचय, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी सत्र और कर्मचारियों का मार्गदर्शन भी मिला। यह पहल युवाओं में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता विकसित कर उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्नति परियोजना: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक
बालको के सामुदायिक विकास प्रयासों में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उन्नति परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है।
वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 561 समूह और 6,003 महिलाओं तक पहुंची। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक रूप से सक्रिय हैं। समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 0.92 करोड़ रुपये हुई, जबकि 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा गया, जिससे लगभग 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।
उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी के अंतर्गत कोसा रेशम जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। वहीं 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अवसर मिला और प्रति महिला लगभग 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर बना।
कोसा रेशम: विरासत से आजीविका तक
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोसाकारी पहल की शुरुआत की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ नाम से ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत ने बुनकरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में नई राह खोली।
स्वास्थ्य: बेहतर उपचार आपके द्वार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अत्याधुनिक कैंसर उपचार तक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की है। आरोग्य परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।
65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच में 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों ने 70 बस्तियों में पखवाड़ेवार सेवाएं दीं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ लिया।
नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,290 मरीजों ने सामुदायिक विकास सहायता के तहत उपचार सेवाओं का लाभ लिया। केंद्र में 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार हुए। साथ ही, मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली स्थापित की गई।
बेहतर जीवन के लिए सामुदायिक सुविधाएं
विकास का अर्थ बुनियादी सुविधाओं तक सम्मानजनक पहुंच भी है। वित्तवर्ष 2026 में बालको ने 4 सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और 2 सामुदायिक मंच बनाए, जिनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन सुविधाओं ने स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए साझा स्थान उपलब्ध कराए।
खेल और संस्कृति से नई उड़ान
युवाओं की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें अवसर देने के लिए लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ते हुए 29 स्कूलों में तीरंदाजी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई और 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।
आंकड़ों से आगे, बदलाव की कहानी
1.80 लाख लोगों तक पहुंच बालको की सामुदायिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आंकड़ा है, लेकिन इसकी असली पहचान उन बदलावों में है, जो लोगों के जीवन में दिखाई देते हैं। किसान का बढ़ा आत्मविश्वास, महिला की आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता, कौशल और रोजगार से जुड़ता युवा, बेहतर सीखने के अवसर पाता बच्चा और समय पर स्वास्थ्य सेवा से मजबूत होता परिवार, यही इस यात्रा की वास्तविक उपलब्धियां हैं।
बालको का प्रयास सामुदायिक विकास को परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय साझी विकास यात्रा बनाना है, जहां समुदाय अपनी क्षमताओं को मजबूत कर भविष्य की चुनौतियों का सामना स्वयं कर सके। स्थायी विकास तभी संभव है, जब सहयोग आत्मविश्वास में, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत में बदल जाए। यही बालको की भावना है, प्रेरित करना, सक्षम बनाना और समुदाय के साथ मिलकर बेहतर, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना।
नई दिल्ली: 18वें ब्रिक्स समिट की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली छावनी में तब्दील हो गई है। सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। लुटियंस दिल्ली और VVIP इलाकों को सुरक्षा के कई घेरों में रखा गया है। एयरपोर्ट से लेकर भारत मंडपम और विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटलों तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की नजर है।
सामने आई जानकारी के अनुसार, करीब 15 हजार पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां दिल्ली में हस्तियों की सुरक्षा में तैनात हैं। दिल्ली में सुरक्षा इतनी सख्त कर दी गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। अधिकारी के मुताबिक, VVIP इलाके में 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनमें फेस रिकग्निशन सिस्टम और गाड़ियों के नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस होटलों की सुरक्षा, कई लेयर में कर रही हैं। 30 हजार से अधिक सुरक्षाबल तैनात हैं और चप्पे-चप्पे की निगरानी रखी जा रही है।
VVIP इलाकों में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे
VVIP इलाकों में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनमें फेस रिकग्निशन और गाड़ियों के नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। सुरक्षा के लिए एक केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से अलग-अलग इलाकों में लगे कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। विदेशी मेहमान जिन होटलों में ठहरेंगे, वहां भी सुरक्षा की कई परतें बनाई गई हैं। VVIP इलाकों को अलग-अलग जोन में बांटा गया है और हर जोन की जिम्मेदारी एक DCP को दी गई है। एयरपोर्ट, होटल और कार्यक्रम स्थल के बीच मेहमानों की आवाजाही के दौरान भी सुरक्षा का खास ध्यान रखा जा रहा है। बता दें कि BRICS सम्मेलन में शामिल होने कई देशों के प्रमुख भारत आ रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लोगों के लिए सभी रास्ते लगातार बंद नहीं किए जाएंगे। VVIP मूवमेंट के दौरान और जरूरत के मुताबिक ही कुछ रास्तों को थोड़ी देर के लिए बंद किया जाएगा। आम लोगों से प्रभावित रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की गई है। BRICS समिट के दौरान मेट्रो सेवा पर सामान्य तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। यानी सड़क मार्ग पर कुछ समय के लिए बदलाव हो सकता है, लेकिन मेट्रो से सफर करने वालों को सामान्य तौर पर परेशानी नहीं होगी।
नई दिल्ली: 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से त्रस्त नेपाल को भारत से बड़ी मदद मिली है. हादसे के तुरंत बाद भारत ने नेपाल की मदद शुरू की. राहत सामग्री भेजने के साथ-साथ नेपाल में लापता लोगों की तलाश, शवों की डीएनए टेस्टिंग तक में भारतीय दल पूरी तत्परता से जुटे हैं. बुधवार को भारतीय वायुसेना का आठवां विमान 35 टन राहत और बचाव सामग्री लेकर नई दिल्ली से काठमांडू पहुंचा. जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है. काठमांडू में इस राहत सामग्री को नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा, “राहत और बचाव सामग्री के साथ 8वीं भारतीय उड़ान, जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है, काठमांडू पहुंची और नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई.”
मालूम हो कि नेपाल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं. भारत नेपाल को इस भीषण आपदा से उबरने में मदद में लगा है. इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत ने अब तक सात विमानों से 95 टन राहत सामग्री भेजी है.
अभी तक 130 टन राहत सामग्री भेज चुका भारत
पहले के 7 बेड़े में 95 टन और आंठवें बेड़े में 35 टन राहत सामग्री अभी तक भारत नेपाल को भेज चुका है. इसके साथ ही नेपाल के राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भी तैनात की गई हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हम इस आपदा में उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर, भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और आगे भी नेपाल के राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों में मदद करना जारी रखेगा. हमारी फोरेंसिक टीम और हमारी टनल रेस्क्यू टीम, दोनों टीमें जमीन पर काम कर रही हैं. वे बचाव और राहत कार्यों में मदद कर रही हैं.”
भारतीय फोरेसिंक टीम काठमांडू की दो लैब में कर रही डीएनए टेस्टिंग
उन्होंने बताया, “फोरेंसिक टीम अभी काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में काम कर रही है, जहां वे इन दो प्रयोगशालाओं में 1200 डीएनए नमूनों पर काम कर रहे हैं. हम नेपाल की जरूरत के हिसाब से उनकी मदद करना जारी रखेंगे. जैसा कि मैंने पिछली बार बताया था, इस आपदा में 275 भारतीय नागरिक लापता हैं. एमईए के अनुसार, नेपाल के चल रहे बचाव, राहत और फॉरेंसिक अभियानों का समर्थन करने के लिए भारत से 54 विशेषज्ञ कर्मियों की तैनाती के अलावा 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी गई है.
भारत ने नेपाल को मदद में क्या कुछ भेजा?
भारत द्वारा नेपाल को भेजे गए राहत बचाव सामग्री में अस्थायी आश्रयों, कंबलों, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाओं से युक्त मानक राहत सामग्री के अलावा, भारतीय पक्ष ने विशेष वस्तुएं और उपकरण भी प्रदान किए हैं. जिसमें टनल और मड रेस्क्यू उपकरण, जिसमें मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, श्वास उपकरण, इन्फ्लेटेबल वॉकवे आदि शामिल हैं. डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए DNA किट, अभिकर्मक और उपकरण; पोर्टेबल जेनसेट, लाइटिंग टावर और डीवाटरिंग पंप जैसी वस्तुएं शामिल है.
चिलिमे और लांगटांग में टनल में तलाशी अभियान चला रही भारतीय टीम
भारत की विशेष टनल बचाव टीम ने शुरू में नेपाल में दो स्थानों – चिलिमे और लांगटांग – पर नेपाली सेना के साथ समन्वय में अपना अभियान शुरू किया था. एमईए ने कहा, “चल रहे खोज प्रयास अब चिलिमे में केंद्रित हैं, जहां इलाके, कठिन पहुंच की स्थिति और सुरंग की ढलान ने चुनौतियां पेश की हैं. भारतीय टनल बचाव दल अपने काम में दृढ़ रहा है और मैनुअल प्रयासों और नवीन तकनीकों के उपयोग से अच्छी प्रगति सुनिश्चित की है.”
लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट को अनस्टेबल एप्रोच के कारण लैंडिंग को टालते हुए गो-अराउंड करना पड़ा. एयर इंडिया की यह फ्लाइट दिल्ली से आ रही लखनऊ आ रही थी और खास बात यह यही कि राहुल गांधी भी इसी फ्लाइट में सवार थे. पायलट की सूझबूझ से दूसरे प्रयास में विमान को अमौसी एयरपोर्ट (CCSI Airport) पर सुरक्षित उतार लिया गया. एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को एप्रोच अनस्टेबल होने के कारण पायलट ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लैंडिंग रोक दी और विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर नए एप्रोच के लिए भेजा.
लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को लैंडिंग से ठीक पहले गो-अराउंड करना पड़ा. खास बात यह रही कि इस फ्लाइट में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सवार थे. हालांकि, पायलट की सूझबूझ से दूसरे प्रयास में विमान की सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई. घटना के बाद यात्रियों और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली. जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया का यह विमान जब रनवे के करीब था, तभी अचानक झटका महसूस हुआ और पायलट ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को दोबारा ऊपर उठा लिया. अचानक हुई इस घटना से फ्लाइट में बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. गो-अराउंड विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया है.
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह घटना पायलट की ओर से अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रिया से जुड़ी थी. यह विमान (AI-1717) दिल्ली से दोपहर 2:20 बजे चला था और इसे शाम करीब 3:30 बजे लखनऊ पहुंचना था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसी विमान में सवार थे.
पिछले छह महीने से जनवितरण प्रणाली यानी PDS दुकानों से अनाज नहीं उठाने वाले लाभार्थियों का राशन कार्ड बंद हो सकता है. जो लाभार्थी छह महीने से PDS दुकान से अनाज नहीं ले रहे हैं उन्हें साइलेंट कार्डधारी कहा जाता है. झारखंड में यह नियम लागू किया जा रहा है, जिसके बाद ऐसे राशन कार्ड धारियों का कार्ड 1 अक्टूबर से अस्थायी रूप से निष्क्रिया कर दिया जाएगा. इसका मतलब है 1 अक्टूबर से उन राशन कार्ड धारियों को अनाज नहीं मिल पाएगा. बताया जा रहा है कि यह फैसला दिल्ली में हाल ही में हुई खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से जुड़े मुद्दों पर हुई खाद्य सचिवों की बैठक में लिया गया है. जो राशन कार्डधारी जो 6 महीने से अनाज नहीं ले रहे हैं उन्हें राशन उठान के लिए 21 सितंबर तक का वक्त दिया गया है. अगर 21 सितंबर तक अपने हिस्सा का राशन उठा लेगें तो आपका राशन कार्ड सक्रिय रहेगा.
21 सितंबर तक साइलेंड कार्डधारकों का समय है और अगर PDS दुकानों से तय तारीख तक राशन नहीं लिया तो उनका कार्ड 1 अक्टूबर से अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिए जाएंगे. इस संबंध में झारखंड सरकार जल्द ही सूचना जारी करेगी, जिससे संबंधित लाभार्थियों को समय रहते जानकारी मिल सके.
कौन लोग नहीं उठा रहे राशन
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में राशन कार्ड लाभार्थी जिन्होंने केवल आयुष्मान भारत और मंईयां सम्मान योजना जैसे स्कीम का लाभ उठाने के लिए राशन कार्ड बनवाया है. वह PDS दुकानों से राशन नहीं उठा रहे हैं. ऐसे ही कार्ड धारियों की पहचान कर उनका राशन कार्ड बंद करने की तैयारी की गई है. इससे फर्जी राशन कार्ड धारियों को खत्म किया जा सके.
बता दें, केंद्रीय मंत्रालय ने ऐसे साइलेंट राशन कार्ड धारियों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने और अगले 3 महीनों में उनकी e-KYC कराने को लेकर गजट जारी किया गया है. इससे पहले जुलाई 2025 में केंद्रीय अधिसूचना में राज्य सरकारों को उन लाभार्थियों के राशन कार्ड अस्थायी रूप से निष्क्रिया करने का निर्देश दिया गया था जो छह महीने से PDS दुकानों से राशन नहीं ले रहे हैं.
हालांकि जो लोग 21 सितंबर तक e-KYC नहीं कराते हैं, उन्हें 1 अक्टूबर के बाद 1 जनवरी 2027 तक यानी 3 महीने का समय KYC के लिए दिया जाएगा. इस दौरान उन्हें फील्ड सत्यापन के जरिए अपनी e-KYC पूरी करानी होगी.
Bank Account Cash Deposit Limit: बचत खाते (Savings Account) में कैश जमा करना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सीमा से ज्यादा नकद जमा करने पर बैंक इसकी सूचना सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को देते हैं? सरकार और आयकर विभाग का मुख्य उद्देश्य बड़ी नकदी के लेनदेन पर नजर रखना, अघोषित आय (Unaccounted Money), टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाना है. यदि आप भी अपने खाते में बार-बार भारी नकद जमा करते हैं, तो आपको बैंक और टैक्स नियमों की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है.
मौजूदा आयकर नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा करता है, तो बैंकों को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देना जरूरी होता है. यह भी याद रखे कि यह सीमा किसी एक लेनदेन पर नहीं, बल्कि पूरे साल के दौरान किए गए सभी नकद जमा के कुल योग पर लागू होती है. हालांकि, 10 लाख से ज्यादा कैश जमा करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपको तुरंत टैक्स नोटिस आ जाएगा. यदि आपके पास जमा की गई रकम का सही हिसाब और वैध स्रोत है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
10 लाख से ज्यादा नकद जमा करने पर क्या होता है?
बैंक खाते में पैसे जमा करने पर अपने आप में कोई टैक्स नहीं लगता. हालांकि, अगर कोई नकद जमा निर्धारित सीमा 10 लाख पर छू लेता है, तो आपको उस राशि के स्रोत का प्रमाण देना पड़ सकता है. अगर वह पैसा आपकी सैलरी, बिजनेस, रेंटल इनकम या कृषि आय से आया है और आपने उसे अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाया है, तो कोई समस्या नहीं होगी. बड़े नकद लेनदेन के समय आय के स्रोत का प्रमाण जैसे सैलरी स्लिप, बिजनेस सेल रिकॉर्ड, रेंट एग्रीमेंट या जमीन की बिक्री के कागजात हमेशा संभालकर रखें, ताकि विभाग द्वारा पूछे जाने पर आप आसानी से जवाब दे सकें.
अगर आप किसी बैंक में एक ही दिन में 50,000 से ज्यादा का कैश जमा करने जाते हैं, तो आपको अपना पैन (PAN) कार्ड नंबर देना अनिवार्य होता है. यदि आपके पास पैन नंबर नहीं है, तो आपको फॉर्म 60 भरकर जमा करना होता है. इस नियम का मकसद कैश लेनदेन का रिकॉर्ड रखना है. आयकर अधिनियम की धारा 269ST एक और बेहद कड़ा नियम है. इसके तहत आप एक दिन में किसी एक व्यक्ति से दो लाख या उससे अधिक का कैश नहीं ले सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर ली गई नकद राशि के बराबर 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है.
World New Map: दुनिया का नक्शा अब आपको थोड़ा बदला-बदला नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को एक अहम प्रस्ताव पास किया है। इसके तहत दुनिया का नक्शा ऐसे तरीके से दिखाने को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें देशों और महाद्वीपों का असली आकार ज्यादा सही नजर आए। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट किया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे और अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात ये है कि जमीन पर कुछ नहीं बदलेगा। न किसी देश का क्षेत्रफल बदलेगा और न ही सीमाएं। बस नक्शे पर देशों का आकार थोड़ा अलग नजर आएगा। अफ्रीका बड़ा दिखेगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। तो भारत पर इसका क्या असर होगा, समझते हैं।
UN ने दुनिया का नक्शा बदलने का प्रस्ताव क्यों पास किया?
संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के नक्शे को लेकर ये प्रस्ताव इसलिए पास किया है, क्योंकि जिस नक्शे का इस्तेमाल हम लंबे समय से करते आ रहे हैं, उसमें कई देशों और महाद्वीपों का आकार सही नजर नहीं आता। खासकर अफ्रीका असल में जितना बड़ा है, उससे काफी छोटा दिखाई देता है। ये प्रस्ताव टोगो की तरफ से आगे बढ़ाया गया और अफ्रीकी देशों के साथ अफ्रीकी संघ ने भी इसका समर्थन किया। मकसद ये है कि दुनिया को ऐसे नक्शे पर दिखाया जाए, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी असली जमीन के ज्यादा करीब हो। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि दुनिया की जमीन या देशों की सीमाएं बदल रही हैं।
नए Equal Earth Map में क्या बदलेगा?
अब बात करते हैं नए Equal Earth Projection की। आसान भाषा में समझें तो इस नक्शे में देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी असली जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखता है। इसका सबसे बड़ा फर्क अफ्रीका में नजर आएगा। अफ्रीका पुराने नक्शे के मुकाबले काफी बड़ा दिखाई देगा। वहीं यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे इलाके पहले से छोटे नजर आएंगे। ध्रुवों के पास मौजूद इलाके भी पुराने नक्शे की तुलना में कम खिंचे हुए दिखाई देंगे। यानी बदलाव सिर्फ नक्शे पर होगा। असल दुनिया में कुछ भी नहीं बदलेगा। न किसी देश की जमीन बढ़ेगी और न ही कोई सीमा इधर से उधर होगी।
भारत पर नए नक्शे का क्या असर होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल- भारत पर इसका क्या असर होगा? तो इसका सीधा जवाब है कि भारत का क्षेत्रफल और सीमाएं बिल्कुल नहीं बदलेंगी। हां, नए नक्शे पर भारत का आकार थोड़ा अलग दिखाई दे सकता है। इसकी वजह ये है कि मर्केटर नक्शे में भूमध्य रेखा से दूर जाने वाले इलाके ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं। भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए उस पर इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा। लेकिन जब भारत की तुलना रूस, कनाडा या यूरोप जैसे ज्यादा उत्तरी इलाकों से करेंगे, तो भारत नए नक्शे में अपने असली आकार के मुकाबले ज्यादा सही और कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है।
मर्केटर मैप में आखिर दिक्कत क्या थी?
जिस मर्केटर मैप को हम लंबे समय से देखते आ रहे हैं, उसे 1569 में जेरार्डस मर्केटर ने बनाया था। इस नक्शे की एक बड़ी खासियत ये है कि समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशाएं समझने में ये काफी काम आता है। लेकिन इसमें एक दिक्कत है। जैसे-जैसे आप भूमध्य रेखा से दूर जाते हैं, वहां के इलाके नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़े दिखाई देने लगते हैं। यानी असली जमीन और नक्शे पर दिखने वाली जमीन में फर्क आ जाता है। यही वजह है कि ग्रीनलैंड, कनाडा और रूस जैसे उत्तरी इलाके नक्शे पर असल से काफी बड़े नजर आते हैं।
इस पूरे मामले को समझने का सबसे आसान उदाहरण है- ग्रीनलैंड और अफ्रीका। पुराने मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका कई बार लगभग एक जैसे बड़े दिखाई देते हैं। लेकिन असल में दोनों के बीच जमीन के आकार का बहुत बड़ा फर्क है। ग्रीनलैंड करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जबकि अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से कई गुना बड़ा है। लेकिन नक्शे पर दोनों को देखने पर ये अंतर उतना साफ नहीं दिखता। Equal Earth जैसे नक्शे में यही फर्क ज्यादा सही तरीके से दिखाई देता है।
कोरबा : वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘वरदान’ अपार्टमेंट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश कुमार सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में युवा कर्मचारियों को उनके नए आवास की चाबियां सौंपी गईं।
‘वरदान’ अपार्टमेंट को बालको के युवा कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। ‘वरदान’ नाम शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इसी भावना के साथ इस आवासीय परिसर को आधुनिक जीवनशैली और बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। जी+9 संरचना वाले ‘वरदान’ अपार्टमेंट में कुल 172 सुसज्जित आवास हैं। प्रत्येक आवास को वन बीएचके स्टूडियो अपार्टमेंट की अवधारणा पर तैयार किया गया है, जो खास तौर पर युवा कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखता है।
इस अवसर पर श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको की प्रगति में हमारे कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका कल्याण हमारी विकास यात्रा का एक अहम हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहाँ कर्मचारी कार्यस्थल के साथ-साथ अपने घर और समुदाय में भी बेहतर जीवन जी सकें। ‘वरदान’ अपार्टमेंट इसी दिशा में एक कदम है। यह हमारे युवा कर्मचारियों को सुविधाजनक और बेहतर आवास उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। हमें विश्वास है कि यह बालकोनगर में बेहतर जीवनशैली और सुखद आवासीय वातावरण बनाने के हमारे प्रयासों को और मजबूती देगा।”
प्रत्येक आवास में मॉड्यूलर किचन, टेलीविजन, फर्निश्ड अलमारी, सोफा-कम-बेड तथा फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं से कर्मचारियों को अपने नए घर में आराम और सुविधा के साथ रहने में मदद मिलेगी। परिसर में तीन लिफ्ट, आधुनिक कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण की व्यवस्था, सुरक्षित वातावरण और लगभग 35,000 वर्गफुट का हरित एवं मनोरंजन क्षेत्र विकसित किया गया है। इसके अलावा कैफेटेरिया-कम-डाइनिंग स्पेस और बैंक्वेट हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ये सुविधाएं कर्मचारियों को साथ एक साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में 50 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था की गई है। यह बालको और वेदांता समूह के स्थायित्व लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जल संरक्षण के लिए 80 किलोलीटर प्रतिदिन (80 हजार लीटर) क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और तीन वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इन व्यवस्थाओं से पानी के बेहतर उपयोग और संरक्षण में मदद मिलेगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि यह बालको की कर्मचारी-केंद्रित सोच का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को काम के साथ-साथ बेहतर जीवन के लिए भी सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। आधुनिक सुविधाओं से तैयार यह परिसर कर्मचारियों को बेहतर जीवन, आपसी जुड़ाव और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करता है। यह पहल बालको की कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Train Alcohol Rules: करोड़ों यात्री भारतीय रेलवे से रोजाना सफर करते हैं, लेकिन ट्रेन में शराब ले जाने को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है. कई लोग मानते हैं कि अगर बोतल सीलबंद है और उसकी रसीद पास में है, तो उसे ट्रेन में ले जाना पूरी तरह से कानूनी है. हालांकि, सच यह है कि ट्रेन में शराब ले जाने की कोई एक राष्ट्रव्यापी सीमा तय नहीं है. शराब ले जाने की अनुमति और उसकी मात्रा पूरी तरह से आपके शुरुआती स्टेशन, रास्ते में पड़ने वाले राज्यों और गंतव्य राज्य के आबकारी नियमों पर निर्भर करती है.
अगर आपने किसी एक राज्य से कानूनी रूप से शराब खरीदी है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप उसे ट्रेन के जरिए किसी भी राज्य में ले जा सकते हैं. बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है. ऐसे में अगर आपकी ट्रेन इन राज्यों से गुजरती है या आपका गंतव्य इन्हीं राज्यों से एक है, तो सील बंद बोतल होने के बावजूद आपके खिलाफ संबंधित राज्य के कड़े आबकारी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है. दरअसल, किसी भी एक राज्य में कानूनी मानी जाने वाली चीजें दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश करते ही वहां के कानून के हिसाब से अवैध हो सकती है. इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले अपने पूरे रूट पर पड़ने वाले राज्यों के आबकारी नियमों की जांच करना जरूरी है.
ट्रेन के भीतर शराब पीना है गुनाह
शराब साथ लेकर चलना और ट्रेन के अंदर उसका सेवन करना ये दोनों पूरी तरह से अलग मामले हैं. ट्रेन के भीतर या स्टेशन परिसर में शराब पीना या उपद्रव करना पूरी तरह गैरकानूनी है. रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत ट्रेन में शराब पीने, नशे की हालत में पाए जाने या सह-यात्रियों को परेशान करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर यात्री को 6 महीने तक की जेल या 5000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है. दरअसल, इस कानून के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल हो सकती है. वहीं, दोबारा गलती करने पर जुर्माना बढ़ाकर 5,000 रुपये तक किया जा सकता है. इसके साथ ही ऑन-ड्यूटी रेलवे अधिकारी या पुलिस शराबी यात्री का टिकट जब्त कर सकती है और उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार भी सकती है.
ट्रेंन में खाली बोतल रखना और भी खतरनाक
अगर आपके पास शराब की खुली हुई बोतल पाई जाती है, तो रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या जीआरपी (GRP) परिस्थिति के मुताबिक सख्त कदम उठा सकती है. खुली बोतल होने पर यह माना जा सकता है कि आप यात्रा के दौरान इसका सेवन कर रहे थे. इसलिए सबसे सुरक्षित यही है कि ट्रेन यात्रा में कभी भी खुली बोतल साथ न रखें.
दिल्ली मेट्रो और रेलवे के नियमों को एक न समझें
अक्सर लोग दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) के नियमों को भारतीय रेलवे पर भी लागू मान लेते हैं, जो कि गलत है. DMRC ने नियमों के तहत यात्रियों को केवल मेट्रो नेटवर्क में अधिकतम 2 सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति दी है. यह छूट केवल मेट्रो सिस्टम तक सीमित है. इसे भारतीय रेलवे के सामान्य नियम के रूप में नहीं देखा जा सकता. इसके अलावा, दिल्ली से हरियाणा या किसी दूसरे राज्य में प्रवेश करते ही संबंधित राज्य की आबकारी सीमाएं लागू हो जाती हैं. लिहाजा, वहां की शराब ले जाने से पहले वहां के आबकारी कानून की जानकारी भी हासिल कर लें. वरना स्थानीय पुलिस आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
केवल बोतलों की संख्या ही नहीं, बल्कि शराब खरीदने और पास में रखने की कानूनी उम्र भी अलग-अलग राज्यों में अलग होती है, जैसे दिल्ली में कानूनी उम्र 21 वर्ष है, जबकि कुछ राज्यों में यह 25 वर्ष है. इसलिए उम्र की पात्रता भी ध्यान में रखना जरूरी है. दरअसल, ट्रेन में शराब ले जाना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस राज्य से किस राज्य की यात्रा कर रहे हैं. अगर आपका रूट किसी ड्राई स्टेट से होकर गुजरता है, तो शराब साथ ले जाने से पूरी तरह बचें. शराब ले जाने के संबंध में सबसे जरूरी बात ये है कि भले ही आपको सीलबंद बोतल ले जाने की छूट मिली हो, ट्रेन के भीतर शराब का सेवन करना आपको कानूनी मुसीबत के साथ ही जेल भी पहुंचा सकता है.