Sunday, April 26, 2026
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LPG Delivery New Rule : LPG डिलीवरी का नया नियम लागू, सिलेंडर लेते समय अब ये नंबर बताना होगा अनिवार्य, वरना नहीं मिलेगी गैस

LPG Delivery New Rule : LPG गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और अब एक नया सिस्टम तेजी से लागू हो रहा है, जिसे DAC नंबर कहा जा रहा है। अगर आप भी घर पर गैस सिलेंडर मंगवाते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, गैस कंपनियों ने डिलीवरी को ज्यादा सुरक्षित और ब्लैक मार्केटिंग को कम करने के लिए DAC यानी Delivery Authentication Code सिस्टम शुरू किया है। हालांकि, कई लोगों को अभी भी DAC नंबर के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, जिसके कारण डिलीवरी के समय दिक्कतें आती हैं।

अब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त मानक

OTP जैसा होता है DAC नंबर

DAC नंबर OTP की तरह ही होता है, जो गैस बुकिंग के बाद आपके मोबाइल पर भेजा जाता है और डिलीवरी के समय इसे दिखाना जरूरी होता है। इस नए नियम का मकसद फर्जी डिलीवरी, गलत बिलिंग और गैस चोरी जैसी समस्याओं को रोकना है। अब बिना इस कोड के डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाएगी, जिससे ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

क्या है DAC नंबर

DAC नंबर का मतलब होता है Delivery Authentication Code। यह एक यूनिक कोड होता है, जो हर बार गैस सिलेंडर बुक करने के बाद ग्राहक को भेजा जाता है। जब आपका सिलेंडर डिलीवरी के लिए आता है, तो डिलीवरी बॉय आपसे यही कोड मांगता है। सही कोड देने के बाद ही सिलेंडर आपको दिया जाता है।

कैसे मिलता है DAC नंबर

जब आप LPG सिलेंडर बुक करते हैं, तो गैस कंपनी की तरफ से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ऐप या WhatsApp पर एक DAC कोड भेजा जाता है। यह कोड उसी डिवाइस पर भी भेजा जाता है जिससे आपने बुकिंग की होती है, ताकि किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए।

ऐसे काम करता है यह नया रूल

जब डिलीवरी बॉय आपके घर आता है, तो वह आपसे DAC नंबर पूछता है। आपको अपने मोबाइल में आए इस कोड को उसे बताना होता है। अगर कोड सही होता है, तभी डिलीवरी पूरी मानी जाती है। अगर आप कोड नहीं देते हैं, तो सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी जा सकती है।

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DAC नंबर नहीं मिला तो क्या करें

कई बार नेटवर्क या टेक्निकल समस्या की वजह से DAC नंबर समय पर नहीं मिलता। ऐसे में आप घबराएं नहीं। आप डिलीवरी बॉय से कोड दोबारा भेजने के लिए कह सकते हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी या ऐप के जरिए भी इसे फिर से प्राप्त किया जा सकता है।

अब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त मानक

नई दिल्ली : अब गली‑मोहल्लों में छोटे स्तर पर क्लीनिक चलाना पहले जैसा आसान नहीं होगा. केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) ने क्लीनिक संचालन से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए न्यूनतम जगह, स्टाफ और उपकरणों के मानक तय कर दिए हैं. इसके लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं, जिनके लागू होने के बाद देशभर में क्लीनिकों को तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा. नए नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लीनिक में डॉक्टर का कंसल्टेशन रूम अब 70 वर्ग फुट से कम नहीं हो सकता. इसके अलावा मरीजों के लिए कम से कम 35 वर्ग फुट का वेटिंग एरिया होना जरूरी होगा. क्लीनिक में ब्लड प्रेशर मशीन, थर्मामीटर, वजन मापने की मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और जरूरी इमरजेंसी उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है. हर क्लीनिक में कम से कम एक पंजीकृत डॉक्टर और एक प्रशिक्षित स्टाफ सदस्य की मौजूदगी भी जरूरी होगी.

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इन राज्यों में पहले लागू होंगे नियम

संशोधित नियमों के मसौदे के अनुसार, जिन राज्यों में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पहले से लागू है, वहां इन नए मानकों के अनुसार जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे. फिलहाल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित देश के 19 राज्यों में यह एक्ट लागू है. ऐसे में इन राज्यों के क्लीनिकों पर सबसे पहले नए नियमों का असर देखने को मिल सकता है.

शवगृह और अन्य सेवाओं के लिए भी तय मानक

DGHS ने केवल क्लीनिक ही नहीं, बल्कि औषधालय, निगरानी एवं अल्पकालिक प्रवास सुविधा, नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं और सैंपल कलेक्शन सेंटर के लिए भी न्यूनतम मानक तय किए हैं. इसके अलावा शवगृह के लिए भी पहली बार विस्तृत दिशा‑निर्देश बनाए गए हैं. नए नियमों के तहत शवगृह में हर शव को एक यूनिक कोड देना अनिवार्य होगा और तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना होगा.

मरीजों का रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य

संशोधित नियमों के अनुसार अब हर क्लीनिक को मरीजों को रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा और इलाज, जांच व दी गई दवाओं का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना पड़ेगा. बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के कोई भी क्लीनिक दवाएं नहीं बेच सकेगा. दवा वितरण का पूरा लेखा‑जोखा रखना अनिवार्य होगा. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्लीनिक के बाहर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाना होगा, जिसमें डॉक्टर की डिग्री, पंजीकरण और फीस का विवरण डिस्प्ले करना जरूरी होगा.

8 घंटे तक शॉर्ट स्टे की अनुमति

नए नियमों में क्लीनिकों को ऑब्जर्वेशन और शॉर्ट स्टे की सुविधा भी दी गई है. इसके तहत मरीज को अधिकतम 8 घंटे तक क्लीनिक में रखा जा सकेगा. इसके साथ ही जांच के लिए सैंपल लेने, उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने और ट्रांसपोर्ट से जुड़े मानक भी तय कर दिए गए हैं. इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य होगी.

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छोटे क्लीनिकों पर पड़ेगा असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि अगर इन मानकों का सख्ती से पालन कराया गया, तो 50 से 60 फीसदी छोटे क्लीनिकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. कई छोटे क्लीनिक या तो बंद होने के कगार पर आ सकते हैं या फिर उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करना पड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जहां छोटे क्लीनिक ही प्राथमिक इलाज का साधन हैं, वहां मरीजों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च उठाना छोटे डॉक्टरों के लिए आसान नहीं होगा, जिसका असर अंततः मरीजों की जेब पर भी पड़ सकता है.

नगर के छात्र जगत में खुशी की लहर, लायंस शिक्षण समिति ने किया हर्ष व्यक्त

चांपा : अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी संस्था लायंस इंटरनेशनल की स्थानीय इकाई लायंस क्लब चांपा द्वारा संचालित लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा संबद्धता प्रदान कर दी गयी है। इससे नगर के छात्रों में प्रसन्नता देखी जा रही हैं, वहीं लायंस क्लब शिक्षण समिति ने स्कूल को सी.बी.एस.ई. से संबद्धता प्राप्त होने पर हर्ष व्यक्त किया है।

उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी संस्था लायंस इंटरनेशनल की स्थानीय इकाई लायंस क्लब चांपा द्वारा वर्ष 1978 से लगातार नगर तथा जिले के सर्वप्रथम इंग्लिश मीडियम स्कूल के रूप में लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल का संचालन किया जा रहा है। स्कूल का संचालन प्रारंभ हुए आज 58 वर्ष पूर्ण होने पर एक नवीन उपलब्धि के रूप में नया आयाम जुड़ा है। स्कूल को आज 23 अप्रैल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता प्रदान कर दी गयी है। इस आशय की जानकारी गुरूवार को स्कूल प्रबंधन को सी. बी.एस.ई. के पोर्टल द्वारा प्रदान की गयी है। स्कूल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता क्रमांक-3330572 प्रदान किया गया है। इस बात की जानकारी स्कूल प्रबंधन को मिलते ही उनमें हर्ष की लहर दौड़ गयी। साथ ही स्कूल से जुड़े छात्रों सहित नगर के शिक्षा जगत में भी प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि स्कूल प्रबंधन विगत एक वर्ष से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्धता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत् था। स्कूल प्रबंधन समिति का लगातार एवं अनवरत प्रयास आखिरकार आज 23 अप्रैल को रंग लाया जब सी.बी.एस.ई. से लायंस इंग्लिश हायर सेकेण्ड्री स्कूल को संबद्धता प्रदान कर दी गयी। इस पर लायंस क्लब शिक्षण समिति के चेयरमेन लायन रामप्रपन्न देवांगन, लायन संतोष कुमार सोनी (अध्यक्ष लायंस क्लब चांपा), प्राचार्य श्रीमती अजिता वी. के., उपाध्यक्ष लायन डॉ. के. पी. राठौर, सचिव लायन सी. ए. सुरेश अग्रवाल सहित सदस्य लायन एस. एन. अग्रवाल, लायन राजेश अग्रवाल, लायन गिरधारी लाल अग्रवाल, लायन डॉ. योगेन्द्र शर्मा, लायन बजरंग अग्रवाल, लायन नंदकुमार देवांगन के अलावा लायंस क्लब के समस्त सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि स्कूल को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंण्डल से संबद्धता प्राप्त होने पर यहाँ अध्ययनरत बच्चों को एक समान पाठ्यक्रम होने से अन्य राज्यों में भी शिक्षा ग्रहण के लिए जाने पर पढ़ाई करने में आसानी होगी। उन्हें उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होने पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में भी लाभ होगा। इसके अलावा छात्रों को केन्द्रीय पाठ्यक्रम होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद मिलेगी और निरंतर मूल्यांकन होने से उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। स्कूल को सी.बी.एस.ई. की संबद्धता प्राप्त होने पर लायंस क्लब के सदस्यों ने भी प्रसन्नता जाहिर की है।

Mirzapur Road Accident: अनियंत्रित ट्रक ने बोलेरो को मारी टक्कर, धू-धू कर जली गाड़ी, 11 लोगों की मौत

Mirzapur Road Accident: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में अब तक करीब 11 लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद लोग कार के अंदर ही आग की लपटों में घिरे रहे और बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला. बोलेरो वाहन ड्रमडगंज थाना क्षेत्र के बड़का मोड़ घुमान से नीचे उतर रहा था, तभी उसके पीछे चल रहे एक ट्रक का ब्रेक फेल हो गया. अनियंत्रित ट्रक ने बोलेरो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे बोलेरो आगे चल रहे गिट्टी लदे ट्रक से जा टकराई.

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मिर्जापुर-रीवा हाईवे पर बड़ा हादसा, 11 लोगों की जलकर दर्दनाक मौत

टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई और उसमें सवार सभी यात्री जिंदा जल गए. इस भीषण हादसे की चपेट में 2 वाहन आए हैं. हादसे में एक ऑल्टो कार और एक बोलेरो को नुकसान पहुंचा है. हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. एसपी ने बताया कि आज शाम लगभग 8:30 के आसपास एक सूचना प्राप्त हुई कि जो ड्रमंडगंज घाटी से नीचे उतरने का रास्ता है, जिसे ‘भैसोड़ा’ इलाका बोला जाता है, वहां गाड़ी उतरते टाइम एक्सीडेंट होने की सूचना प्राप्त हुई. मौके पर जो जानकारी प्राप्त हुई, उसमें पता लगा कि एक ट्रक पीछे से आ रहा था.

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उसने ब्रेक फेल होने के कारण संभवतः टक्कर मारते हुए वह आगे गया है. उस टक्कर से उसने एक अन्य ट्रक में टक्कर मारी, एक ऑल्टो गाड़ी उन दोनों ट्रकों के बीच में फंस गई और एक अन्य गाड़ी जो बोलेरो गाड़ी थी, उसको भी जब टक्कर लगी तो उसमें आग लग गई. इसमें अभी तक 11 लोगों के मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई है. नेशनल हाईवे के निर्माण के बाद से सड़क की खराब संरचना को लेकर कई बार नेशनल हाईवे अथॉरिटी से शिकायत की जा चुकी है. ड्रमंडगंज घाटी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है, जहां अक्सर ट्रकों और कारों के ब्रेक फेल होने की घटनाएं होती रहती हैं और लगभग रोज ही इस पूरे इलाके में सड़क हादसे हो रहे हैं.

Pahalgam Attack Anniversary: पहलगाम नरसंहार होने से बचा सकते थे ये 2 लोग, 3000 रुपये के लालच में कर दी गद्दारी

Pahalgam Attack Anniversary: 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले में 26 नागरिकों को उनके परिवारों के सामने ही बेरहमी से भून दिया गया था। अब इस मामले की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद पहलू सामने आया है। जांच से पता चला है कि अगर जेल में बंद दो स्थानीय कश्मीरी निवासियों ने समय रहते पुलिस को सूचना दी होती, तो इस भीषण नरसंहार को आसानी से रोका जा सकता था।

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चंद रुपयों के लिए आतंकियों को दी पनाह

इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो स्थानीय लोगों की पहचान परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि इन दोनों ने महज 3000 रुपये के लालच में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी और उनकी मदद की थी। 21 अप्रैल की रात यानी हमले से ठीक एक रात पहले तीनों आतंकी इन दोनों के घर आए थे। उन्होंने वहां करीब 5 घंटे बिताए और खाना भी खाया।

बातचीत के दौरान आतंकी पाकिस्तानी लहजे वाली उर्दू-पंजाबी मिश्रित भाषा बोल रहे थे। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे और वे ‘अली भाई’ नाम के शख्स का जिक्र कर रहे थे। अली भाई असल में लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का शीर्ष कमांडर और मुख्य आरोपी साजिद जट्ट है, जो पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:30 बजे आतंकी वहां से निकले। जाते समय उन्होंने अपने साथ कुछ खाना पैक किया और खाना पकाने का बर्तन, कंबल व तिरपाल भी साथ ले गए। इन सब संदिग्ध हरकतों के बावजूद परवेज और बशीर ने चुप्पी साधे रखी।

हमले वाले दिन आतंकियों को देखा, फिर भी रहे खामोश

हमले वाले दिन (22 अप्रैल, 2025) दोपहर करीब 12:30 बजे- यानी कत्लेआम शुरू होने से कुछ घंटे पहले परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन में एक बाड़ के पीछे छिपते हुए देखा था। इन आतंकियों की पहचान बाद में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई।

यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला होने वाला है। वे चाहते तो तुरंत पुलिस या स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन को इसकी सूचना दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे अपने घोड़ों (टट्टुओं) के साथ वहां से दूर चले गए और अपने पर्यटक ग्राहकों के लौटने का इंतजार करने लगे। दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे के बीच, उन्होंने पर्यटकों को घोड़ों पर बिठाकर वापस पहलगाम सुरक्षित पहुंचा दिया।

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हमले के बाद फरार और एनआईए की कार्रवाई

जब इन दोनों को बैसरन में हुए दिल दहला देने वाले कत्लेआम की खबर मिली, तो वे समझ गए कि यह काम उन्हीं आतंकियों ने किया है जिन्हें उन्होंने पनाह दी थी। खुद को बचाने के लिए वे तुरंत अपनी ‘ढोक’ (पहाड़ों पर बनी अस्थायी झोपड़ी) छोड़कर वहां से भाग गए और छिप गए। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आखिरकार उन्हें ढूंढ निकाला और 22 जून, 2025 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन और चार्जशीट

दिसंबर 2025 में एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर की। इस चार्जशीट में परवेज अहमद और बशीर अहमद के साथ-साथ मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट, तीनों पाकिस्तानी हमलावरों (जो अब मारे जा चुके हैं) और लश्कर/TRF को एक आतंकी संगठन के तौर पर नामजद किया गया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का सीधा हाथ होने की पुष्टि फेसबुक द्वारा दी गई जानकारी से भी हुई है। भारत में एक भ्रामक पोस्ट फैलाई गई थी जिसमें दावा किया गया था कि ‘जिब्रान हमारा आदमी था’। फेसबुक की जांच में यह पोस्ट पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर के फोन नंबरों से जुड़ी पाई गई, जो इस हमले में पाकिस्तानी साजिश का एक और पुख्ता सबूत है।

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Anniversary of Pahalgam Attack: एक दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल पूरे हो रहे हैं. इस हमले में आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने आए सैलानियों पर अंधाधूंध गोलीबारी की थी. आतंकियों की इस गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हुई थी. इस हमले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आतंकियों ने लोगों ने नाम और धर्म की पूछ कर उनके घर की महिलाओं और बच्चों के सामने गोली मारी थी. पहलगाम की यह आतंकी घटना भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी. इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कटूता के नए दौर में गए.

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पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपेशन सिंदूर में तबाह किए 9 आतंकी ठिकाने

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए. इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए. लेकिन सेना को असली कामयाबी 28 जुलाई 2025 को तब मिली, जब सेना ने ऑपेरशन महादेव के तहत पहलगाम में मौत का खूनी खेल खेलने वाले तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारा.

सेना ने बताया कि दाछीगाम के घने जंगलों में पहलगाम के आतंकी इस तरह छिप कर रह रहे थे.

ऑपेरशन महादेव से जुड़ी अहम जानकारियां सेना ने की साझा

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से दो दिन पहले सेना ने ऑपरेशन महादेव से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की है. सेना ने बताया कि पहलगाम में हुए हमले के कुछ ही घंटों में सेना मौके पर पहुंच गई. घटना की जांच तुरंत शुरू की गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने तीन आतंकियों की पहचान बताई. खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की पहचान हुई. ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे.

सुलेमान शाह, हमजा और जिब्रान नामक आतंकी हुए थे ढेर

पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई. इसके बाद बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया गया. सुरक्षा बलों की घेराबंदी से आतंकियों के भागने के रास्ते बंद किए गए. पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया गया. आतंकी दक्षिण कश्मीर के ऊंचे इलाकों में छिपते रहे.

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हप्तानार, बुगमार, त्राल होते हुए दाछीगाम के जंगलों में छिपे थे आतंकी

आतंकी हप्तानार, बुगमार और त्राल से होते हुए आगे बढ़े. आखिर में दाछीगाम के घने जंगलों में पहुंच गए. यह इलाका बहुत कठिन और ऊंचाई वाला है. घने जंगलों में ऑपरेशन करना मुश्किल था. फिर भी सेना ने दबाव बनाए रखा. मई के अंत तक स्थिति साफ हो गई. आतंकी पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे थे. ज्यादा देर होने पर ये आतंकी अमरनाथ यात्रा के लिए खतरा बन सकते थे.

पहलगाम हमले के गुनाहगार तक कैसे पहुंची सेना.

बरसी से पहले जम्मू कश्मीर में बढ़ाई गई सुरक्षा

ऑपरेशन महादेव सेना की दृढ़ता का उदाहरण है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा. इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ. देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता फिर साबित हुई. इस बीच पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. सीमाई इलाकों के साथ-साथ सेना और पुलिस के जवान विशेष चौकसी बरत रहे हैं.

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दुर्ग : भिलाई के छावनी थाना क्षेत्र के कैंप-2 में एक पत्नी ने अपने पति की हत्या कर दी। यह घटना दुर्गा पारा, वार्ड 35 की है, जहां बीती रात पत्नी ने गुस्से में आकर अपने पति पर सिलबट्टे से हमला कर दिया। इस हमले में 40 साल के डोमन साहू की मौके पर ही मौत हो गई। डोमन साहू और उसकी पत्नी हीरामणी साहू (करीब 35 साल) के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों के दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी।

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पड़ोसियों का कहना है कि घर में अक्सर झगड़ा होता था और इसका असर बच्चों पर भी पड़ रहा था। कई बार आसपास के लोग भी इस विवाद से परेशान हो चुके थे। पति-पत्नी के बीच आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता था। मोहल्ले को लोग भी इस बात से परेशान थे। जानकारी के मुताबिक पत्नी हीरामणी साहू ने 19 अप्रैल को अपने पति के खिलाफ जामुल थाना में शिकायत की थी। जिसके बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 170 के तहत उसे गिरफ्तार कर एसडीएम कोर्ट भेजा था।

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छावनी पुलिस ने आरोपी पति को एसडीएम कोर्ट में पेश किया। हालांकि वहां से उसे जमानत मिल गई। बताया जा रहा है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी शाम को घर पहुंचा और पुलिस में शिकायत करने की बात को लेकर विवाद करने लगा। दोनों पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में पत्नी ने अपने पति के सिर पर सिलबट्टे से वार कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना जब पुलिस को लगी तो पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सुपेला अस्पताल भिजवा दिया। पड़ोसियों का कहना है कि मृतक आए दिन शराब पीकर घर में विवाद करता था और कई बार बच्चों के साथ भी मारपीट करता था। इसी वजह से पत्नी पहले भी परेशान रहती थी और कई बार शिकायत कर चुकी थी।

Iran Attack On Indian Ships: होर्मुज में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग, सभी क्रू मेंबर सुरक्षित, भारत ने ईरानी के राजदूत को किया तलब

Iran Attack On Indian Ships: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 2 जहाजों पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की फायरिंग के बाद भारत ने कड़ा कदम उठाया है। शनिवार को भारत ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली को विदेश मंत्रालय में तलब किया। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह कदम भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता के चलते उठाया गया है। ईरानी राजदूत मंत्रालय आए और मुलाकात के बाद दूतावास लौट गए। इस दौरान भारत ने इस घटना पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है।

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विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा?

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि नई दिल्ली में मौजूद ईरान के राजदूत को आज शाम विदेश सचिव से मुलाकात के लिए बुलाया गया था। इस बैठक के दौरान विदेश सचिव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आज हुई फायरिंग की घटना पर गहरी चिंता जताई, जिसमें 2 भारतीय ध्वज वाले जहाज शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत के लिए व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही यह भी याद दिलाया कि पहले ईरान ने भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद की थी। विदेश सचिव ने इस गंभीर घटना पर चिंता दोहराते हुए ईरानी राजदूत से कहा कि वे भारत की बात अपने देश की सरकार तक पहुंचाएं और जल्द से जल्द भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन की प्रक्रिया फिर से शुरू कराएं। ईरान के राजदूत ने भरोसा दिलाया कि वे भारत की चिंताओं को अपने देश के अधिकारियों तक जरूर पहुंचाएंगे।

होर्मुज से गुजर रहे थे कई कमर्शियल जहाज

भारत के ध्वज वाले जहाजों पर हमले की घटना उस समय हुई जब कई वाणिज्यिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ईरान ने पहले इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में कहा कि अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन के कारण इसे फिर से बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गनबोट्स ने एक टैंकर पर फायरिंग की, जबकि एक कंटेनर जहाज को भी प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचा, जिससे कुछ कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए।

फायरिंग के बाद वापस लौट गए दोनों जहाज

गोलीबारी के बीच दो भारतीय ध्वज वाले जहाज, जिनमें इराकी तेल ले जा रहा एक सुपरटैंकर भी शामिल था, फायरिंग के बाद रास्ता बदलकर वापस लौटने को मजबूर हो गए। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब उसके सशस्त्र बलों के ‘सख्त नियंत्रण’ में है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा, तब तक इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित रहेगी।

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तनाव की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान ने पहले 10 दिन के संघर्ष विराम के बाद इस मार्ग को कुछ समय के लिए खोला था, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉक जारी रखने की घोषणा के बाद स्थिति फिर बिगड़ गई।

IAF aircraft incident: पुणे में वायुसेना के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग, रनवे अस्थायी रूप से बंद, कैंसिल हुईं 91 फ्लाइट्स

IAF aircraft incident: महाराष्ट्र के पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार देर रात एक बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन इसके असर से पूरे एयरपोर्ट की व्यवस्था हिल गई। भारतीय वायुसेना के एक विमान की हार्ड लैंडिंग के कारण रनवे को तुरंत बंद करना पड़ा, जिससे रातभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार रात करीब 10:25 बजे भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए आ रहा था। इसी दौरान विमान में तकनीकी खराबी आ गई। बताया गया कि, विमान का लैंडिंग गियर अचानक काम करना बंद कर गया, जिसके कारण विमान सामान्य तरीके से उतर नहीं सका और रनवे पर जोर से टकरा गया। इस स्थिति को हार्ड लैंडिंग कहा जाता है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से रनवे को बंद कर दिया गया, ताकि किसी अन्य विमान को खतरा न हो और स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

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क्या होती है हार्ड लैंडिंग?

जब कोई विमान रनवे पर उतरते समय सामान्य गति और संतुलन बनाए रखने में असफल हो जाता है और तेज झटके के साथ जमीन को छूता है, तो उसे हार्ड लैंडिंग कहा जाता है। आमतौर पर विमान धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से उतरता है, लेकिन तकनीकी खराबी, मौसम की खराब स्थिति या पायलट के आकलन में मामूली गड़बड़ी के कारण यह स्थिति पैदा हो सकती है। हार्ड लैंडिंग के दौरान विमान को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है और यात्रियों व क्रू को चोट भी लग सकती है, हालांकि इस घटना में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

रनवे तुरंत बंद, उड़ानें ठप

घटना के बाद इंडियन एयर फोर्स ने पुष्टि की है कि, सुरक्षा के मद्देनजर रनवे को तुरंत बंद कर दिया गया है। वायुसेना ने बताया कि, विमान का चालक दल पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह की नागरिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, रनवे बंद होने के कारण एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें रोक दी गईं और संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। अधिकारियों ने तुरंत रनवे को साफ करने और स्थिति सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

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91 फ्लाइट्स रद्द, यात्रियों की बढ़ी मुश्किल

इस घटना के चलते एयरपोर्ट डायरेक्टर के अनुसार कुल 91 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इनमें सबसे ज्यादा असर इंडिगो की उड़ानों पर पड़ा, जिनकी 65 फ्लाइट्स रद्द हुईं। इसके अलावा एयर इंडिया की 6, स्पाइसजेट की 5, अकासा एयर की 5 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 10 उड़ानें भी कैंसिल करनी पड़ीं।

Women Reservation Act 2023: आधी रात लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023, संसद में बहस के बीच जारी हुआ नोटिफिकेशन

Women Reservation Act 2023: सरकार ने गुरुवार से 2023 का नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम देशभर में लागू कर दिया।  सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इस पर संसद में बहस जारी है इस अधिनियम में बदलाव के लिए कल यानी गुरुवार को ही लोकसभा में बिल आया और देर रात करीब 1.20 बजे तक चर्चा चली।

आज भी इस पर दिनभर चर्चा होगी और शाम में करीब 4 बजे इस पर वोटिंग होगी। वहीं कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर आगे विचार करते हुए, निम्नलिखित विधेयक लोकसभा में पारित करने के लिए पेश किए जाएंगे।

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  • संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक
  •  2026 और परिसीमन विधेयक, 2026।

गुरुवार की देर रात तक बहस चली

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गुरुवार की देर रात तक संसद में बहस चली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में बहस जारी है और इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल बृहस्पतिवार से लागू कर दिया है।केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया है?

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क्या है महिला आरक्षण कानून

अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार  16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।

इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ है।