Sunday, July 26, 2026
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“समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो फिर लौटेंगे” : नए शिक्षा मंत्री को CJP की दोटूक चेतावनी

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास कहते हैं, “युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने वाले व्यक्ति को चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे जंतर-मंतर लौटेंगे और सरकार से जवाबदेही की मांग करेंगे…” वहीं पार्टी के आशुतोष रांका ने कहा, हमें सच में उम्मीद है कि आज कुछ न्याय हुआ है। हमें उम्मीद है कि अगला शिक्षा मंत्री जो भी होगा, वह जवाबदेह होगा और ईमानदारी और निष्ठा से अपना काम करेगा… जंतर मंतर युवाओं के लिए बनाया गया एक मंच है। यह युवाओं के मुद्दों को उठाता रहेगा। हम अपने मुद्दों को पूरे देश के सामने रखेंगे।

BALCO की साख और मजबूत, CRISIL ने बढ़ाई क्रेडिट रेटिंग; स्मेल्टर विस्तार और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन का मिला लाभ…

असली फिल्म अभी बाकी है-बोले सौरव

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, “यह तो बस एक ट्रेलर है, असली फ़िल्म तो अभी बाकी है। देश के युवा जाग चुके हैं, देश के युवा ही इस देश की सभी समस्याओं का समाधान करेंगे। एक पार्टी और एक आंदोलन के तौर पर, यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होने वाला है। अब हम पूरे देश में जाएंगे, युवाओं की बात सुनेंगे, उनके लिए बेहतरीन नीतियां लाएंगे और सभी से जवाबदेही की मांग करते रहेंगे। यह तो बस शुरुआत है। अभी बहुत कुछ करना बाकी है…”

आशुतोष ने कहा-छात्रों ने अधिकारों की लड़ाई लड़ी
CJP नेता आशुतोष रांका ने कहा, “37 दिनों का संघर्ष… हमें यहां आए हुए डेढ़ महीने हो गए। देश के युवा जाग गए हैं। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने सही चीज़ के लिए लड़ाई लड़ी है। और आज, आखिरकार, हमारी मांगें मान ली गई हैं। हम उन सभी परिवारों के बारे में सोच रहे हैं जिन्होंने पेपर लीक होने के बाद अपने करीबी लोगों को खो दिया। हम उन लाखों-करोड़ों छात्रों के बारे में सोच रहे हैं जिनका भविष्य पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो गया।”

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CJP का क्या है प्लान
कॉकरोच जनता पार्टी आगे क्या करेगी, इस सवाल के जवाब में आशुतोष रांका ने कहा,”हम पूरे देश में जाकर दूसरे मुद्दे भी उठाएंगे, जैसे हमने शिक्षा का मुद्दा उठाया था।इस देश के युवाओं के लिए, हम जो कुछ भी करना पड़े, करेंगे, फिलहाल हमारा यही प्लान है।”

BALCO की साख और मजबूत, CRISIL ने बढ़ाई क्रेडिट रेटिंग; स्मेल्टर विस्तार और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन का मिला लाभ…

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कोरबा, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) को वित्तीय क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। देश की अग्रणी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CRISIL Ratings ने कंपनी की दीर्घकालिक बैंक सुविधाओं की क्रेडिट रेटिंग ‘CRISIL AA+/Stable’ कर दी है। इससे पहले BALCO की यह रेटिंग ‘CRISIL AA/Positive’ थी। वहीं, कंपनी की अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म) बैंक सुविधाओं की रेटिंग ‘CRISIL A1+’ को यथावत रखा गया है। रेटिंग में यह सुधार कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति, परिचालन क्षमता में वृद्धि और भविष्य की बेहतर संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है।

CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, रेटिंग अपग्रेड का सबसे बड़ा आधार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नई स्मेल्टर क्षमता का सफल संचालन और उत्पादन में आई उल्लेखनीय बढ़ोतरी रही। पहली तिमाही के दौरान BALCO का कुल एल्युमिनियम उत्पादन 168 किलो टन (KT) दर्ज किया गया, जिसमें 24 किलो टन उत्पादन नई स्थापित स्मेल्टर क्षमता से हुआ।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक नई क्षमता का पूर्ण उपयोग शुरू हो जाएगा। इसके बाद कंपनी का वार्षिक उत्पादन बढ़कर लगभग 750 किलो टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में BALCO का कुल उत्पादन 597 किलो टन रहा था। उत्पादन क्षमता में यह बढ़ोतरी कंपनी को देश के प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादकों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी।

CRISIL ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि BALCO की कारोबारी स्थिति आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। इसके पीछे कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता, उत्पादन लागत में कमी, परिचालन दक्षता में सुधार तथा वैल्यू-एडेड एल्युमिनियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी जैसे प्रमुख कारण हैं। इन कारकों से कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

रिपोर्ट में BALCO की मजबूत वित्तीय प्रोफाइल को भी रेटिंग अपग्रेड का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। CRISIL के अनुसार, वेदांता समूह के पुनर्गठन के बाद BALCO अब Vedanta Aluminium Metal Limited (VAML) की सहायक कंपनी है, लेकिन कंपनी का स्वतंत्र परिचालन, मजबूत नकदी प्रवाह और संतुलित वित्तीय ढांचा उसकी साख को मजबूती प्रदान कर रहा है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट रेटिंग में सुधार से BALCO को भविष्य में बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपेक्षाकृत कम लागत पर ऋण उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। इससे कंपनी की विस्तार योजनाओं, तकनीकी उन्नयन और दीर्घकालिक निवेश को भी गति मिलने की संभावना है। साथ ही, यह उपलब्धि कोरबा स्थित BALCO संयंत्र के औद्योगिक विकास और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

पेपर लीक मामले में NTA का बड़ा एक्शन! 47 अधिकारियों को किया बर्खास्त

NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शन के बीच एनटीए ने बड़ा एक्शन लिया है. नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA ने 47 कर्मचारियों को हटा दिया है. इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी. इसके अलावा कुछ और कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिससे एनटीए की व्यवस्था में सुधार हो सके. एनटीए में बड़े लेवल पर सुधार करने की तैयारी है. यह इसका एक हिस्सा है. सरकार अब NTA में व्यापक स्तर पर बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. अगले महीने एजेंसी का पुनर्गठन किया जाएगा और इसके आउटसोर्सिंग के तौर-तरीकों में भी बदलाव होगा. यह पूरी कार्रवाई एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है, ताकि आगे एक लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार की जा सके. आपको बता दें कि NTA देश भर में जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी करीब 15 से 20 बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित कराती है.

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NTA में सिर्फ 24 स्थायी कर्मचारी करते हैं काम 

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, NTA में स्वीकृत 39 स्थायी पदों में से केवल 24 पर ही अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 15 पद खाली पड़े हैं. एजेंसी के कामकाज को सुचारू रखने के लिए फिलहाल 73 संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) और 124 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात किए गए हैं. संविदा कर्मियों में कंसलटेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपर और यंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं. शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में बताया कि NTA को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने निदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर के 16 नए पद सृजित किए हैं, जिन्हें जल्द भरा जाएगा.

शिक्षा मंत्रालय में भी प्रशासनिक फेरबदल

परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और विवादों के चलते शिक्षा मंत्रालय में भी बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए गए हैं. हालांकि विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात बड़े प्रशासनिक कदम उठाते हुए उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को इस पद से हटा दिया और उन्हें पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त कर दिया है.

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विनीत जोशी अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम पदों पर रह चुके हैं. वह सीबीएसई के अध्यक्ष, NTA के पहले महानिदेशक और यूजीसी के कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनके कार्यकाल में ही सीयूईटी परीक्षा की शुरुआत हुई थी, जिसे लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. उनके स्थान पर अब नरेश कुमार गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव और टी के अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है. सरकार के इन सख्त फैसलों से साफ है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से गंभीर हो चुका है.

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Traffic Challan Alert: अगर आप ट्रैफिक चालान भरने में लापरवाही करते हैं, तो आने वाले समय में यह भारी पड़ सकता है. केंद्र सरकार ने Central Motor Vehicles Rules में बदलाव का मसौदा (Draft Rules) जारी किया है. नए प्रस्ताव के तहत अगर कोई ई-चालान तय समय तक न भरा गया और न ही उसे चुनौती दी गई, तो वाहन मालिक को ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से जुड़ी कई सेवाओं से वंचित किया जा सकता है. हालांकि फिलहाल यह सिर्फ ड्राफ्ट नियम है और अभी कानून नहीं बना है.

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क्या होगा अगर चालान नहीं भरा?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक, जब कोई ई-चालान अंतिम रूप से तय हो जाएगा और उसके बाद भी उसका भुगतान नहीं किया जाएगा, तो संबंधित वाहन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड पर “Not to be Transacted” का टैग लगा दिया जाएगा. इसका मतलब होगा कि वाहन मालिक RC या ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कई सेवाएं, जैसे नवीनीकरण और अन्य परिवहन विभाग के काम, तब तक नहीं करा पाएगा जब तक लंबित चालान का भुगतान नहीं कर दिया जाता. इसके अलावा वाहन मालिक या लाइसेंस धारक को बकाया चालान की जानकारी डिजिटल अलर्ट के जरिए भी भेजी जाएगी.

क्या गाड़ी जब्त हो जाएगी?

ड्राफ्ट नियमों में सीधे तौर पर वाहन जब्त करने की बात नहीं कही गई है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है और लंबित चालान के बावजूद वाहन चलाता रहता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे मामलों में वाहन जब्त किए जाने की नौबत भी आ सकती है.

किन मामलों में लागू नहीं होगा नियम?

सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी चालान का मामला अदालत या किसी अन्य सक्षम कानूनी प्राधिकरण के पास लंबित है, तो यह नियम उस पर लागू नहीं होगा. इसके अलावा लंबित चालान होने के बावजूद वाहन मालिक अपने वाहन का टैक्स जमा कर सकेगा.

ऑनलाइन होगी सुनवाई, तय होगी समय सीमा

प्रस्तावित नियमों के तहत सभी राज्य सरकारों को नियम लागू होने के छह महीने के भीतर ट्रैफिक चालान मामलों के निपटारे के लिए ऑनलाइन सिस्टम तैयार करना होगा. इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की सुविधा भी शामिल होगी.

सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर फैसला देना होगा. अगर कोई अपील की जाती है, तो उसका भी निपटारा 30 दिन के भीतर करना होगा. तय समय सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

दोबारा गलती करने वालों पर होगी सख्ती

नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक चेतावनियों का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा. भविष्य में यदि कोई व्यक्ति दोबारा ट्रैफिक नियम तोड़ता है, तो पहले मिली चेतावनियों को भी ध्यान में रखा जाएगा. इसके अलावा स्क्रैप, पूरी तरह क्षतिग्रस्त या विदेश भेजे गए वाहनों का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.

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ऑनलाइन ऐसे भरें ट्रैफिक चालान

अगर आपके वाहन पर ट्रैफिक चालान लंबित है, तो आप इसे ऑनलाइन आसानी से भर सकते हैं.

  • आधिकारिक eChallan पोर्टल पर जाएं.
  • Check Challan Status विकल्प पर क्लिक करें.
  • चालान नंबर, वाहन नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज करें.
  • CAPTCHA भरकर Get Details पर क्लिक करें.
  • लंबित चालान दिखाई देने पर Pay Now पर क्लिक करें.
  • OTP वेरिफिकेशन पूरा करें.
  • ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद डाउनलोड या सेव कर लें.

महिला कर्मचारियों ने संभाली बालको की 24×7 सुरक्षा की कमान

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कोरबा : कभी सुरक्षा को केवल शारीरिक शक्ति से जोड़कर देखा जाता था और महिलाओं को सुरक्षा की आवश्यकता वाले वर्ग के रूप में माना जाता था। लेकिन समय के साथ यह सोच बदल रही है। आज महिलाएं केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। यही बदलाव बालको के सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सीएसओसी) में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसे अब पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित शी-एसओसी (सिक्योरिटी हार्मनी एंड एक्सीलेंस) के रूप में विकसित किया गया है। यह रूढ़िवादी धारणाओं से आगे बढ़कर एक ऐसी आधुनिक सुरक्षा संस्कृति को दर्शाती है, जिसमें शारीरिक शक्ति से अधिक योग्यता, सतर्कता, तकनीकी दक्षता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को महत्व दिया जाता है।

बालको का सीएसओसी कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह केंद्र दिन-रात, पूरे सप्ताह लगातार संचालित रहता है। संयंत्र परिसर में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, सुरक्षा अलर्ट का विश्लेषण, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित समन्वय, सुरक्षा टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना और महत्वपूर्ण निर्णयों में सहयोग जैसी सभी जिम्मेदारियां अब महिलाओं की टीम निभा रही है। यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं की क्षमता, नेतृत्व और पेशेवर दक्षता पर संगठन के विश्वास का प्रतीक है।

औद्योगिक सुरक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे वातावरण में धैर्य, बारीकियों पर ध्यान, तार्किक सोच और बेहतर संवाद कौशल जैसी विशेषताएं बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। महिलाओं की भागीदारी इन सभी पहलुओं को और मजबूत बनाती है तथा सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाती है।

शी-एसओसी की प्रभारी वर्षा द्विवेदी बताती हैं कि बालको ने उन्हें सुरक्षा संचालन का नेतृत्व करने का अवसर और विश्वास दिया है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, नवीन तकनीकों और नियमित प्रशिक्षण के कारण उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ा है। उनके अनुसार, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने से निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई है और संगठन की महिला सशक्तिकरण की सोच ने उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। उनका कहना है कि महिलाएं भी सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व कर सकती हैं।

रेखा श्रीवास्तव का मानना है कि अब समय आ गया है कि सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं को लेकर बनी पुरानी धारणाओं को बदला जाए। उनके अनुसार, सुरक्षा केवल शारीरिक शक्ति का विषय नहीं है। इसमें सतर्कता, अनुशासन, ईमानदारी, प्रभावी संवाद और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं ने अपने कौशल, प्रशिक्षण और समर्पण के माध्यम से बार-बार यह सिद्ध किया है कि किसी भी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाने की क्षमता लिंग नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत से तय होती है।

पूजा टंडन का कहना है कि इस क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं, जो कुछ नया सीखने और बेहतर बनने का अवसर देती हैं। सीएसओसी में तकनीक और सुरक्षा संचालन के साथ काम करने का अनुभव उनके पेशेवर जीवन को और अधिक समृद्ध बना रहा है। उनके अनुसार, जब किसी आपात स्थिति में सही समय पर लिया गया निर्णय किसी बड़े जोखिम को टाल देता है, तब अपने कार्य की वास्तविक सार्थकता का एहसास होता है।

बालको का शी-एसओसी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि विविधता, समान अवसर और योग्यता पर आधारित कार्य संस्कृति किसी भी संगठन को अधिक सक्षम बनाती है। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित यह सुरक्षा नियंत्रण केंद्र न केवल उनकी क्षमता और नेतृत्व कौशल को नई पहचान देता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिलने पर महिलाएं किसी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को सफलता के साथ निभा सकती हैं। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की यह भागीदारी बदलती सोच, समावेशी कार्य संस्कृति और सशक्त नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है।

CJP Protest Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन में बवाल, हिंसा के बीच ACP को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का VIDEO वायरल

CJP Protest Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच भड़की हिंसा में कई लोग घायल हो गए. घायलों में पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं और प्रदर्शनकारी भी. बुधवार रात जंतर-मंतर के पास एक बार फिर से हिंसा भड़की. जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के अधिकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. इसका वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी ACP को खदेड़ कर पीटते नजर आ रहे हैं. प्रदर्शन के बीच भड़की इस हिंसा के शिकार हुए ACP की पहचान विवेक भगत के रूप में हुई है. वीडियो में कई प्रदर्शनकारी विवेक भगत पर बुरी तरह से हमला करते नजर आ रहे हैं.

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ACP विवेक भगत को आई काफी चोट

हमले में घायल हुए ACP विवेक भगत को इलाज के लिए RML हॉस्पिटल लाया गया. हॉस्पिटल प्रशासन ने बताया कि रात में विवेक भगत को इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था.  जांच में उनके हाथ-पैर और कंधे पर कई चोटों के निशान पाए गए. एसीपी के सिर के पीछे (पैरिएटो-ऑक्सिपिटल हिस्से) में सूजन भी मिली है.

AIIMS में ACP विवेक भगत का इलाज

एसीपी ने कान से खून आने और उल्टी होने की भी शिकायत बताई. सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने उनकी जांच की और जरूरी इलाज दिया.इसके बाद एसीपी विवेक भगत ने AIIMS, नई दिल्ली में आगे इलाज कराने की इच्छा जताई. आवश्यक मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उन्हें उनके अनुरोध पर RML अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, ताकि वे AIIMS में आगे इलाज करा सकें.

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CCTV में कैद हुआ हमले का वीडियो

जनपथ स्थित पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में उपद्रवियों को भारी पथराव करते और पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाकर भागते देखा जा सकता है. इस हिंसा में होटल पार्क के सामने सीपी के एसीपी विवेक भगत को बुरी तरह पीटा गया, जिन्हें लहूलुहान अवस्था में वहां से निकाला गया. भीड़ के हमले का शिकार हुए दूसरे अधिकारी की पहचान स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन में तैनात इंस्पेक्टर नंदकिशोर के रूप में हुई है. जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर उनके साथ बर्बरता से मारपीट की. बताया गया कि विवेक भगत होटल पार्क के पास ड्यूटी पर थे. तभी अचानक कुछ लोग उन पर टूट पड़े. दूसरा वीडियो इंस्पेक्टर नंद किशोर का है. ये भी जंतर-मंतर में ड्यूटी पर थे. उसी दौरान उग्र भीड़ ने इन पर हमला किया. पुलिस के मुताबिक छात्रों के आंदोलन में कई असामाजिक तत्व भी आ गए हैं, जो लगातार छात्रों की आड़ में हिंसा पर उतारू हैं. 20 जुलाई को भी कई ऐसे लड़के थे, जिन्होंने हिंसा की.

Covid-19 Alert: इस राज्य में फिर Covid-19 की एंट्री! 7 नए मरीज मिले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 26 हुई

Covid-19 Alert: आंध्र प्रदेश में मंगलवार को कोरोना वायरस (Covid-19) के 7 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही, राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नए मामलों में से 4 मामले गुंटूर जिले से, 2 पूर्वी गोदावरी से और 1 मामला बापटला से सामने आया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये मामले अलग-अलग इलाकों से हैं और राज्य में कहीं भी संक्रमण का बड़ा फैलाव यानी क्लस्टर आउटब्रेक नहीं है।

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कहां कितने संक्रमित मिले?

  • कडपा: 8
  • गुंटूर: 6
  • पूर्वी गोदावरी: 3
  • काकीनाडा: 2
  • बापटला: 2
  • विशाखापटनम: 1
  • एलुरु: 1
  • नेल्लोर: 1
  • एनटीआर: 1
  • पार्वतीपुरम मान्यम: 1

मरीजों का इलाज और रिकवरी

  • विभाग ने बताया कि राज्य में अब तक कुल 145 सैंपलों की जांच की गई है।
  • कुल 26 मरीजों में से 10 का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जबकि 9 मरीज होम आइसोलेशन में हैं।
  • 3 मरीज पूरी तरह ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
  • 4 मरीजों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इन सभी चार मृतकों को कोरोना से संक्रमित होने से पहले ही अन्य गंभीर समस्याएं थीं।

कोविड-19 क्या है, यह कब शुरू हुआ?

बता दें कि COVID-19 विनाशकारी महामारियों में से एक रही है, जिसने पूरी दुनिया के स्वास्थ्य ढांचे, अर्थव्यवस्था और सामान्य जीवन को गहराई से प्रभावित किया। यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो SARS-CoV-2 नामक वायरस के कारण होती है और मुख्य रूप से इंसान के फेफड़ों एवं सांस की नली पर हमला करती है। विश्व स्तर पर इस बीमारी का पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आया था, जिसके बाद यह देखते ही देखते दुनिया भर में फैल गई। इसके गंभीर खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 11 मार्च 2020 को इसे आधिकारिक रूप से वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था।

भारत में इसका पहला मामला जनवरी 2020 को केरल के त्रिशूर जिले में दर्ज किया गया था, जब वुहान विश्वविद्यालय से लौटी एक छात्रा कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने संक्रमण की रोकथाम के लिए मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया था।

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यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या बोलने के दौरान हवा में छूटने वाली बारीक बूंदों के जरिए फैलत था। इसके अलावा संक्रमित सतहों को छूने के बाद हाथ को मुंह, नाक या आंखों पर लगाने से भी लोग इसकी चपेट में आते थे। इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में बुखार, सूखी खांसी, अत्यधिक थकान, सांस लेने में तकलीफ और स्वाद या गंध का चले जाना शामिल था। चूंकि यह एक नया वायरस था, इसलिए इसका कोई सीधा सटीक इलाज उपलब्ध नहीं था।

शुरुआती दौर में मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाएं, पैरासिटामोल, विटामिन, एंटीवायरल दवाएं और फेफड़ों में सूजन कम करने के लिए स्टेरॉयड दिए गए। गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर जीवनरक्षक साबित हुए। महामारी पर अंतिम रूप से काबू पाने में वैश्विक स्तर पर विकसित की गई टीकों की बड़ी भूमिका रही, जिनमें भारत में निर्मित ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ प्रमुख थीं। व्यापक टीकाकरण और लोगों में विकसित हुई प्रतिरोधक क्षमता के कारण मई 2023 में WHO ने कोविड-19 को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की श्रेणी से बाहर कर दिया और अब यह एक सामान्य मौसमी संक्रमण की तरह रह गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कोविड-19 से पीड़ित अधिकांश लोग हल्के से मध्यम लक्षणों के बाद ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बुजुर्गों और दिल की बीमारी, डायबिटीज या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

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Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर सीमा पार से बढ़ते शोर-शराबे के बीच भारत ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। केंद्र सरकार के आला सूत्रों के अनुसार, सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में अब दोबारा लागू नहीं होगी। 1960 की सिंधु जल संधि प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि सिंधु जल संधि 1950 के दशक की परिस्थितियों और तकनीक पर आधारित थी, जो आज के समय के अनुरूप नहीं है। यह संधि आपसी सद्भावना के आधार पर बनी थी, आतंकवाद जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं।

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“50% पानी अरब सागर में बह जाता है”

सरकारी सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने पिछले छह दशकों में एक भी नया बड़ा बांध नहीं बनाया। पाकिस्तान अपने हिस्से के मौजूदा जल संसाधनों का भी समुचित प्रबंधन नहीं कर पा रहा है। पाकिस्तान के हिस्से के बहाव वाले पानी का केवल 10% ही संग्रहित किया जाता है, जबकि लगभग 50% पानी अरब सागर में बह जाता है। भारत की हर जल परियोजना पर पाकिस्तान की आपत्तियों का उद्देश्य केवल उन्हें धीमा करना रहा है। उन्होंने बताया कि कश्मीर के लिए लाभकारी साबित होने वाली तुलबुल परियोजना भी पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण स्थगित करनी पड़ी। भारत अब नई जल परियोजनाओं में तेजी लाएगा और इसके लिए विभिन्न स्थानों पर सर्वेक्षण किए जा रहे हैं। पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लगातार भारत विरोधी बयान दे रहे हैं। आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान की ओर से कोई विश्वसनीय और ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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भारत का कड़ा फैसला, पाकिस्तान में बौखलाहट

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। भारत की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने पाकिस्तान को सीधा संदेश दिया कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संधियों का लाभ एक साथ नहीं चल सकता यानी “रक्त और पानी एक साथ नहीं बहेंगे”। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत भारत ने नदियों के पानी का डेटा शेयरिंग, सालाना बैठकें, परियोजनाओं का आपसी निरीक्षण और अंतरराष्ट्रीय अदालती कार्यवाहियों में हिस्सा लेना पूरी तरह बंद कर दिया। साथ ही, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जैसे जल-विद्युत प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से बढ़ा दिया गया, जिन पर पाकिस्तान सालों से अड़ंगे लगा रहा था।

भारत के इस फैसले से पाकिस्तान में हड़कंप और खौफ का माहौल बन गया है, क्योंकि उसकी लगभग 80% खेती और पेयजल आपूर्ति भारत से होकर बहने वाली इन्हीं पश्चिमी नदियों पर निर्भर है। पहले से ही गंभीर आर्थिक कंगाली, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान को डर है कि संधि की कानूनी बाध्यताओं से परे हटकर अगर भारत ने बांधों के निर्माण में तेजी लाई या पानी का बहाव नियंत्रित किया, तो उसके यहां भुखमरी और सूखे के हालात बन जाएंगे। पाकिस्तान का भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने का पैंतरा भी पूरी तरह विफल हो चुका है, क्योंकि भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पर पूरी तरह और स्थायी रूप से रोक नहीं लगती, तब तक यह संधि बहाल नहीं होगी।

CJP का संसद मार्च आज, जंतर-मंतर पर 10 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं शर्तें

आज से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। मोदी सरकार वंदे मातरम् से जुड़े बिल समेत कई अहम बिल लाने की तैयारी कर रही है। वहीं विपक्ष सरकार को कई मुद्दों घेरने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पूरे देश की नजर इस वक्त दिल्ली के जंतर-मंतर पर है, जहां आज बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा संसद मार्च के ऐलान को लेकर दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। इसलिए जंतर-मंतर पर भारी पुलिस फोर्स तैनात है। जंतर-मंतर से संसद तक जाने वाले रात्से में तीन लेयर की सिक्योरिटी बैरिकेडिंग की गई है।

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10 हजार जवान तैनात

जंतर मंतर पर इस वक्त पांच छह हजार प्रदर्शनकारी मौजूद हैं तो दस हजार सुरक्षाबल के जवान तैनात है। टियर गैस, बैटन, वज्र वाहन जंतर-मंतर पर तैनात हैं। नई दिल्ली में BNS की धारा 163 लगी है। जंतर-मंतर को छोड़कर कहीं भी 5 लोगों के एक जगह पर जमा होने की मनाही है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वो लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रखें और कानून को अपने हाथ में ना लें। हालांकि पुलिस सूत्रों बता रहे हैं कि मार्च संसद तक जाने नही दिया जाएगा। मैक्सिमम रेंज केरल भवन तक है। इस लोगों को बेरिकेटिंग के आगे किसी को नही जाने दिया जाएगा। इस वक्त दिल्ली पुलिस के अफसरों और प्रदर्शनकारियों के बीच में बातचीत हो रही है। दिल्ली पुलिस पहले ही साफ कर दिया है कि संसद मार्च की ना तो परमिशन ली गई है और ना ही मार्च की इजाजत दी गई है। प्रदर्शनकारियों को संसद मार्च से रोकने के लिए जंतर मंतर पर जबरदस्त सिक्योरिटी है।

सोनम वांगचुक ने रखीं शर्तें

इसी बीच, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। उन्होंने सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी नजरबंदी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मेरे आने-जाने, बोलने और बातचीत करने की आजादी पर रोक लगी हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी चिट्ठी पोस्ट कर उन शर्तों के बारे में बताया है। उन्होंने चिट्ठी में चार बातें लिखी हैं-:

  • पहली शर्त, सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की जिम्मेदारी ले
  • दूसरी, सोनम और CJP की लीडरशिप संसद तक पहुंचने दिया जाए
  • तीसरी, वहां अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता भरोसा दिलाएं कि वे अब संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे
  • चौथी शर्त, अगर उनकी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा करना मुमकिन न हो, तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता अस्पताल में आकर चिट्ठी में बताई गई बातों का भरोसा दिलाएं

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कई मेट्रो स्टेशन बंद

सोमवार को दिल्ली मेट्रो के भी कई स्टेशन बंद रहेंगे। DMRC ने इस बात की जानकारी दी है। एक ट्वीट में DMRC ने कहा- “सुरक्षा कारणों से, जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं।” जानकारी के अनुसार, पार्लियामेंट स्ट्रीट रोड पर मीडिया, प्रोटेस्टसर कोई नही जा सकता जंतर मंतर से बेरिगेड्स से सील कर दिया है। अगर तोड़ेंगे तभी जा सकते है जो फिलहाल मुमकिन नहीं लग रहा है।

Vikram-1 Success: विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान… मंगल, चांद, सूरज और समुद्र मिशनों के बाद अंतरिक्ष में भारत का एक और बड़ा परचम

Vikram-1 Success: भारत ने मंगल और चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान भेजे हैं, सैकड़ों उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया है और अब अपना पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च कर दिया है। भारत की स्पेस इकॉनमी 8.4 अरब डॉलर की है। 2020 में इस सेक्टर के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट खुलने के बाद से ये तेजी से बढ़ी है और इसने 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स को आकर्षित किया है।

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भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के लिए बड़ा कदम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर काम करने वाली कई प्रमुख सरकारी और निजी कंपनियां रक्षा क्षेत्र में भी काम करती हैं, जिससे अंतरिक्ष और सुरक्षा के बीच का दायरा आपस में जुड़ता जा रहा है। अब देश के पहले प्राइवेट तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट लॉन्च करने का स्काईरूट एयरोस्पेस तेजी से बढ़ते भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के लिए अगला बड़ा कदम है। अंतरिक्ष विभाग ने कहा, “भारत डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन, अंतरिक्ष विज्ञान, मानव अंतरिक्ष उड़ान और ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में बड़े लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। ये उपलब्धियां भारत के बढ़ते आत्मविश्वास, तकनीकी परिपक्वता और ग्लोबल स्पेस इकोसिस्टम में भारत की भूमिका के लिए एक दूरदर्शी सोच को दर्शाती हैं।”

भारत की बड़ी उपलब्धियां

2014 में भारत मंगल की कक्षा में अंतरिक्ष यान भेजने वाला पहला एशियाई देश बना। इसरो ने अपने चंद्र मिशन कार्यक्रम में भी काफी प्रगति की है। इसे संस्कृत में ‘चंद्रयान’ या ‘मूनक्राफ्ट’ भी कहा जाता है। इस प्रोग्राम में 2008 का लूनर ऑर्बिटर, 2019 में लैंडिंग की नाकाम कोशिश और 2023 का सफल मिशन शामिल था, जिसमें एक रोवर को तैनात किया गया था। इस रोवर मिशन ने भारत को रूस, अमेरिका और चीन के बाद चंद्रमा पर बिना इंसानों वाला यान उतारने वाला चौथा देश बना दिया।

2027 के लिए तय चौथे चंद्रयान मिशन से चांद के सैंपल वापस लाने की उम्मीद है और 2028 के लिए शुक्र ग्रह की कक्षा में जाने वाला मिशन तय किया गया है। सूर्य का अध्ययन करने वाला मिशन ‘आदित्य’ सूर्य की सबसे बाहरी परतों और अंतरिक्ष के मौसम पर नजर रख रहा है।

पृथ्वी पर इसरो की टेक्नोलॉजी भारत की ‘मत्स्य’ पनडुब्बी को विकसित करने में मदद कर रही है, जिसका नाम हिंदू देवता विष्णु के मत्स्य अवतार के नाम पर रखा गया है। साइंस मिनिस्टर जितेंद्र सिंह के अनुसार, 2027 तक यह वैज्ञानिकों को समुद्र में छह किलोमीटर (3.7 मील) नीचे ले जाएगा, ताकि ‘गहरे समुद्र के संसाधनों’ (जिनमें रेयर अर्थ और जरूरी मिनरल शामिल हैं) का इस्तेमाल किया जा सके।

सैटेलाइट्स

1975 में सोवियत रॉकेट से अपना पहला सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद से ही इसरो ने कम लागत वाले मिशन के लिए अपनी पहचान बनाई है। तेजी से बढ़ते कमर्शियल सैटेलाइट मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी पाने के मकसद से 2014 के बाद से इसके स्पेस प्रोग्राम में तेजी आई है। इसरो ने 430 से ज्यादा विदेशी सैटेलाइट लॉन्च किए हैं जिनसे उसे 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई है और साथ ही अपने 144 से ज्यादा सैटेलाइट भी लॉन्च किए हैं।

भारत अब आंध्र प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर श्रीहरिकोटा में अपने लॉन्चपैड का विस्तार कर रहा है और भारत के दक्षिणी सिरे पर तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में एक दूसरा स्पेसपोर्ट बनाया जा रहा है। नई दिल्ली का अनुमान है कि उसका स्पेस इंडस्ट्री 2033 तक 44 बिलियन डॉलर और 2040 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाएगा। भारत यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) नासा के अलावा फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और सऊदी अरब के साथ भी काम करता है। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की उसकी तैयारियों में रूस मदद कर रहा है।

प्राइवेट प्लेयर्स

टेक्नोलॉजी और एआई के क्षेत्र में अपनी बड़ी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत का प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री भी तेजी से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में स्काईरूट एयरोस्पेस भी शामिल है। विक्रम-1 रॉकेट को छोटे सैटेलाइट्स को लो-अर्थ ऑर्बिट (पृथ्वी की निचली कक्षा) में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। एक और कंपनी Pixxel है, जो खेती से लेकर पर्यावरण की निगरानी जैसे कामों के लिए ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बना रही है। Bellatrix Aerospace सैटेलाइट प्रोपल्शन सिस्टम बना रही है और Agnikul Cosmos 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन से चलने वाले छोटे सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल बना रही है।

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सैन्य सहयोग

भारत के सिविल स्पेस और डिफेंस इंडस्ट्रीज आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और कई सरकारी व प्राइवेट कंपनियां दोनों सेक्टरों को सप्लाई करती हैं। इनमें लॉन्च रॉकेट, प्रोपल्शन, सैटेलाइट, इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम शामिल हैं। ये ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसका इस्तेमाल स्पेस और भारत के बढ़ते मिसाइल और मिलिट्री ड्रोन प्रोग्राम में होता है। इसरो ने सरकार के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के साथ सक्रिय तालमेल की तारीफ की है और भारत-रूस के जॉइंट वेंचर, ब्रह्मोस मिसाइल प्रोग्राम के साथ भी उसके करीबी संबंध रहे हैं। इसरो को एवियोनिक्स और गाइडेंस सिस्टम सप्लाई करने वाली कंपनियों को मिलिट्री ऑर्डर में बढ़ोतरी से फायदा हो रहा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ 2025 के टकराव के बाद भारत ने डिफेंस से जुड़ी खरीद पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

मानवीय मिशन

इसरो अपने पहले क्रू वाले मिशन की भी योजना बना रहा है, जिसके तहत तीन बिना क्रू वाले टेस्ट रन में से पहला 2026 के आखिर में होने की उम्मीद है। ‘गगनयान’ नाम के इस मिशन का मकसद तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिनों के लिए भेजना है। तैयारियों के हिस्से के तौर पर भारतीय वायु सेना के पायलट शुभांशु शुक्ला 2025 में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से जुड़े और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा और 2040 तक चांद पर एक अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना है।