Sunday, June 14, 2026
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Patna Violence: ट्रेन लेट होने पर छात्रों का फूटा गुस्सा, स्टेशन पर जमकर तोड़फोड़, कई पुलिसकर्मी घायल

Patna Violence: बिहार की राजधानी पटना से छात्रों के भारी बवाल की खबर सामने आई है. पाटलिपुत्र स्टेशन पर ट्रेन लेट होने से गुस्साएं हजारों छात्रों ने जबरदस्त हंगामा किया, नारेबाजी की. इस दौरान पथराव और तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई. जिसमें कई पुलिसकर्मी के भी घायल होने की सूचना है. फिलहाल पुलिस और रेलवे पुलिस फोर्स की स्थिति को कंट्रोल कर विधि-व्यवस्था सामान्य बनाने की कोशिश में जुटी है. मिली जानकारी के अनुसार आज बिहार में मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा होनी है. दो पालियों में आयोजित होने वाली इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की भारी भीड़ सुबह से ही रेलवे स्टेशनों पर जुटी थी. पाटलिपुत्र स्टेशन पर भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे थे. लेकिन अभ्यर्थी जिस ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, वो लगातार लेट होती जा रही थी. जिससे छात्रों का गुस्सा भड़क उठा. आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि लगभग 2-3 घंटे हंगामा हुआ. पहली पाली के कुछ छात्र शायद समय पर सेंटर नहीं पहुंच पा रहे थे, इसलिए हंगामा किया. उन्होंने यह भी बताया कि पथराव में कुछ जवान घायल हुए हैं. आंसू गैस के गोल और फायरिंग भी दागे गए.

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स्पेशल ट्रेन में तोड़फोड़, पुलिस को करनी पड़ी हवाई फायरिंग

दरअसल पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर मद्य निषेध विभाग की परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों ने ट्रेन की अपर्याप्त व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिससे वहां झड़प हो गई. यह विरोध प्रदर्शन तब और बढ़ गया जब उम्मीदवारों ने परीक्षा स्पेशल ट्रेन में तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा और चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग करनी पड़ी.

रविवार तड़के पाटलिपुत्र स्टेशन पर जुटी छात्रों की भारी भीड़.

असामाजिक तत्वों ने चेन पुलिंग की, स्पेशल ट्रेन के बाद भी हंगामाः डीएम 

पटना डीएम डॉ. त्यागराजन ने हंगामे के बारे में बताया, “आधी रात के आस-पास हमें खबर मिली कि कुछ लोग हंगामा कर रहे हैं. हमने उनसे बार-बार गुज़ारिश की कि वे हंगामा न करें और परीक्षा देने वाले छात्रों का सहयोग करें. लेकिन, कुछ असामाजिक तत्वों ने बार-बार इमरजेंसी चेन खींची और कई तरह की मांगें रखीं, जैसे कि स्पेशल ट्रेनों की मांग, जबकि पहले से ही दो स्पेशल ट्रेनें मौजूद थीं… उन्होंने उन छात्रों को भी रोका जो जाना चाहते थे. इन वजहों से हमें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है और ट्रेनें रवाना हो चुकी हैं; परीक्षा देने वालों के लिए तय ट्रेनें पहले ही निकल चुकी हैं। ट्रेनों का संचालन भी सामान्य रूप से चल रहा है.”

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IG समेत कई अधिकारियों के चोटिल होने की सूचना

IG समेत कई अधिकारियों को मामूली चोटें आईं. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और ट्रेन में तोड़-फोड़ की खबरें आईं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और लाठीचार्ज किया. हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

DRDO की बड़ी कामयाबी: 24 घंटे में 3 मिसाइलों का सफल परीक्षण, बढ़ी भारत की सैन्य ताकत

नई दिल्ली : भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव करने की अचूक क्षमता है। भारत ने 10 और 11 जून को लगातार तीन मिसाइलों के सफल उड़ान परीक्षण किए, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के साथ-साथ एंटी-शिप मिसाइल टेक्नोलॉजी भी शामिल है।

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24 घंटे के भीतर 3 बड़े परीक्षण

DRDO के अनुसार, इन परीक्षणों ने लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत के बहुस्तरीय यानी मल्टी-लेयर्ड डिफेंस आर्किटेक्चर की ताकत को साबित किया है। परीक्षण के दौरान मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अपने तय किए गए लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। यह सफलता भविष्य के उन्नत मिसाइल खतरों से निपटने के लिए देश की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाती है।

2000 से 5000 किमी की रेंज, अचूक सुरक्षा चक्र

शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक, DRDO ने दो ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है, जो 2,000 किमी से 5,000 किमी के बीच मार करने वाली दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs) को निष्क्रिय करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ये इंटरसेप्टर ‘एक्सो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के बाहर) और ‘एंडो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के भीतर) दोनों ही तरह के हैं। केंद्र सरकार ने फिलहाल इन इंटरसेप्टर्स के नाम उजागर नहीं किए हैं। परीक्षण पूरे होने के बाद अब इन्हें जल्द ही सेना द्वारा ‘यूजर ट्रायल्स’ के लिए भेजा जाएगा।

पाकिस्तान की नई मिसाइलों का मुंहतोड़ जवाब

सूत्रों ने बताया कि DRDO ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस को इतनी उच्च प्राथमिकता इसलिए दी है, क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान मल्टीपल वॉरहेड वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इसमें फतेह-I (Fateh-I), फतेह-II (Fateh-II) और चीन मूल की P282 मिसाइलें शामिल हैं। भारत की यह नई तैयारी पाकिस्तान के इन्हीं मंसूबों का करारा जवाब है।

नौसेना की ताकत में भारी इजाफा

इन सफलताओं के साथ ही DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस टेस्ट ने मध्यम दूरी पर इस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता को साबित कर दिया है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों के समुद्री हमले के विकल्प और ज्यादा मजबूत हो गए हैं।

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रक्षा मंत्री ने दी बधाई

ये सभी परीक्षण DRDO और भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किए गए। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इन मिशनों की बारीकी से निगरानी की। उन्होंने 24 घंटे के भीतर इतने जटिल परीक्षणों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए DRDO के वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के शानदार तालमेल की तारीफ की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर DRDO को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हवाई और समुद्री खतरों का मुकाबला करने में देश की रक्षा तैयारियों को बेहद मजबूत करेगी।

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Ahmedabad Air India Plane Crash: अहमदाबाद में पिछले साल 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे को आज एक साल बीत चुका है और इसमें जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवारों का दर्द आज भी उनके आंसुओं में छलक जाता है। एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI 171 हादसे में अपनों को खोने वाले कुछ लोग आज भी उड़ान भरने से डरते हैं, जबकि कई लोग इस गहरे सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रहे हैं।

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बेटे को खोने के बाद किसी प्लेन में नहीं रखा कदम

कई परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों के लिए इस त्रासदी का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। दीव निवासी रफीक अरब ने 12 जून 2025 को लंदन जाने वाले प्लेन के उड़ान भरते ही हुई दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में अपने 25 साल के बेटे फैजान को खो दिया था। तब से उन्होंने आज तक किसी प्लेन में कदम नहीं रखा है और वह हवाई यात्रा के गहरे डर के साए में जी रहे हैं। फैजान ब्रिटेन में इस्लामिक अध्ययन की पढ़ाई कर रहा था और दीव में अपने परिवार से मिलने के बाद वापस जा रहा था। उसका अपने पिता को आखिरी फोन मैसेज था- ”पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं और मैं जा रहा हूं।”

‘हवाई जहाज की आवाज भी झकझोर देती है’

त्रासदी को याद करते हुए रफीक ने कहा, ”कौन सोच सकता था कि यह उसका आखिरी मैसेज होगा? हमने उस दिन के बाद से कभी विमान यात्रा नहीं की। यहां तक कि सिर के ऊपर से गुजरने वाले विमान की आवाज भी हमें झकझोर देती है और याद दिलाती है कि कैसे 260 जिंदगियां पल भर में खत्म हो गईं।” फैजान की मां और दो छोटे भाई अब भी उसकी कमी महसूस करते हैं।

माता-पिता को खोने वाली मुक्ति अभी भी उबर नहीं पाई

इस त्रासदी ने सूरत निवासी मुक्ति वांसडिया के माता-पिता दिव्या (60) और अर्जुनसिंह (65) को छीन लिया। मुक्ति ने कहा, ”मेरे माता-पिता ही मेरी रोशनी थे।” मुक्ति के माता-पिता अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जा रहे थे और जीवन में पहली बार हवाई जहाज में बैठे थे। वे अपनी बड़ी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। मुक्ति ने याद करते हुए बताया, ”मिडिल क्लास लोगों के लिए विदेश यात्रा करना एक बड़ी बात होती है। वे बच्चों की तरह एक्साइटेड थे। मैंने उनसे कहा था कि अगर विमान में झटके महसूस हों तो डरना मत सब ठीक हो जाएगा।”

जब मुक्ति ने मां के पैर छुए, लेकिन पिता के पैर छूना भूल गई

पहले उन्होंने एक दूसरी कनेक्टिंग उड़ान बुक की थी, लेकिन बाद में अहमदाबाद से जाने वाली इस फ्लाइट को चुना, ताकि वे गुजराती भाषी सह-यात्रियों के साथ यात्रा करने में अधिक कंफर्ट महसूस कर सकें। जाने से ठीक पहले के आखिरी पल मुक्ति की यादों में कैद हैं। मुक्ति बताती है, एयरपोर्ट पर मैंने अपनी मां के पैर छुए लेकिन पिता के पैर छूना भूल गई। मैं वापस दौड़ी, उनके पैर छुए और उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। मैं उस अहसास को कभी नहीं भूल सकती। ऐसा लग रहा था मानो वह मुझे किसी युद्ध के लिए तैयार कर रहे हों।

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एक फोन कॉल ने हमेशा के लिए बदल दी दुनिया

इसके कुछ ही घंटों बाद, जब भाई-बहन वडोदरा में लंच कर रहे थे, तब एक फोन कॉल ने उनकी दुनिया हमेशा के लिए बदल दी। अविवाहित मुक्ति अपने माता-पिता को खोने के बाद काफी संघर्ष कर रही हैं और अब सूरत में अकेली रहती हैं, जबकि उनके भाई-बहनों की शादी इस हादसे से पहले ही हो चुकी थी। इस प्लेन क्रैश ने मुक्ति को डिप्रेशन में धकेल दिया। उसने एक ट्रैवल एजेंसी की अपनी नौकरी छोड़ दी और महीनों काउंसलिंग में बिताए। आज, वह टाटा ग्रुप की एक सीएसआर पहल के साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं, लेकिन आज भी उसके अंदर गहरा डर बैठा हुआ है।

Train Seat Availability: TTE से पूछने की जरूरत नहीं, IRCTC के इस फीचर से मिनटों में जानें खाली सीटों का स्टेटस

Train Seat Availability: अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं तो ये खबर आपके लिए काफी ज्यादा जरूरी हो सकती है. कई लोग प्लानिंग के तहत ट्रेन टिकट रिजर्व करते हैं, तो कुछ को जल्दबाजी में सफर करना पड़ता है. ऐसे में ट्रेन का टिकट रिजर्व करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता और वेटिंग टिकट के साथ सफर करना पड़ता है. कई लोग खाली सीट पाने के लिए टीटीई के पीछे चक्कर लगाते हैं. इसके बाद भी कभी-कभी कुछ परिणाम नहीं मिल पाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं IRCTC में एक ऐसा फीचर मिलता है जिसकी मदद से आप चलती ट्रेन में खाली सीट का पता लगा सकते हैं और TTE से बोलकर सीट अलॉट कर सकते हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…

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IRCTC का चार्ट वैकेंसी फीचर

IRCTC के इस फीचर का नाम चार्ट वैकेंसी है. इस फीचर की मदद से आप ये पता लगा सकते हैं कि चलती ट्रेन में कितनी सीटें खाली हैं. दरअसल, इसमें ऑनलाइन और लाइव रिजर्वेशन चार्ट होता है, जो ट्रेन का फाइनल चार्ट बनाने के बाद लोग देख सकते हैं. इसमें ये जानकारी लाइव उपलब्ध होती है कि किस डिब्बे में कौन सी सीट और कौन सा बर्थ खाली है. ऐसे में अगर आपके पास वेटिंग टिकट है, तो आप इस फीचर की मदद से खाली सीट का पता लगा सकते हैं और फिर TTE से अलॉट करवा सकते हैं.

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क्या है खाली सीट पाने का पूरा प्रोसेस?

  • सबसे पहले IRCTC की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं या फिर Rail Connect ऐप को खोलें.
  • इसके बाद होम पेज पर  Charts / Vacancy पर क्लिक करें.
  • फिर आपकी स्क्रीन पर Reservation Chart पेज खुल जाएगा.
  • इस पेज पर ट्रेन नंबर, ट्रैवल डेट और बॉर्डिंग स्टेशन दर्ज करें और Get Train Chart पर क्लिक करें.
  • अब स्क्रीन पर क्लास-वाइज लेआउट में चार्ट खुल जाएगा.
  • अब अपना कोच टाइप चुनें और आपके सामने खाली सीटों की पूरी लिस्ट आ जाएगी.

अब इसके बाद अपने पसंद अनुसार खाली सीट का नंबर और कोच नोट कर लें और तुरंत टीटीई से संपर्क करें. इसके बाद टीटीई नियमों के अनुसार पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर सीट अलॉट करेगा. इस दौरान टीटीई वेटिंग टिकट के बदले में किराया लेकर रसीद दे देगा. इसके बाद आप सीट पर सफर कर सकते हैं.

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नई दिल्ली: चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में एक यात्री द्वारा खिड़की का शीशा तोड़ने का मामला सामने आया है. यह घटना रविवार (7 जून) की है, बताया जा रहा है कि जब विमान दिल्ली में लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, उसी वक्त यात्री ने खिड़की का अंदरूनी शीशा तोड़ दिया, जिसके बाद हड़कंप मच गया. एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार, केबिन क्रू ने यात्री को कई बार मौखिक और लिखित चेतावनी दी, लेकिन उसने चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए खिड़की का शीशा तोड़ दिया.

हालांकि, विमान के दिल्ली पहुंचने पर ग्राउंड स्टाफ और सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही घटना की सूचना दे दी गई थी. ऐसे में लैंडिंग के बाद यात्री को तुरंत एयरपोर्ट सुरक्षा कर्मियों के हवाले कर दिया गया. फिलहाल मामले को एयर इंडिया की आंतरिक समिति के पास भेजा गया है, जहां समिति जांच के बाद ययह तय करेगी कि यात्री को “अनुशासनहीन यात्री” घोषित किया जाए या नहीं और उस पर कितने समय के लिए यात्रा करने का प्रतिबंध लगाया जाए.

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समिति को फैसला लेने के लिए 30 दिन का समय

नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार, समिति को फैसला लेने के लिए 30 दिन का समय मिलता है. इस दौरान एयरलाइन यात्री पर अधिकतम 30 दिनों का अस्थायी प्रतिबंध भी लगा सकती है.  घटना की पुष्टि करते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “फ्लाइट AI1879, जो 7 जून को चंडीगढ़ से दिल्ली जा रही थी, में यात्रा के दौरान एक यात्री ने अनुचित व्यवहार किया. हालांकि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा गया. फ्लाइट के पायलट और क्रू ने निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की और यात्री को कई बार चेतावनी दी. इसके बाद मामले की जानकारी दिल्ली एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम को दी गई.”

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यात्रियों, क्रू या विमान की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा

एयर इंडिया ने कहा कि इस घटना से किसी भी समय यात्रियों, क्रू या विमान की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा. दिल्ली पहुंचने के बाद संबंधित यात्री को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया. इस घटना की जानकारी विमानन नियामक (DGCA) को भी दे दी गई है. एयर इंडिया ने दोहराया कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है और ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एयर इंडिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, उड़ान के दौरान यात्री का व्यवहार आक्रामक था और वह क्रू की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहा था. हालांकि, सुरक्षा कर्मियों को सौंपे जाने के बाद उसने बार-बार माफी मांगनी शुरू कर दी.

India nuclear weapons: दुनिया के पास कितने परमाणु बम? SIPRI रिपोर्ट में खुलासा, भारत ने बढ़ाया न्यूक्लियर जखीरा

India nuclear weapons: साल 2026 में दुनिया में परमाणु बमों की संख्या का आंकड़ा सामने आ गया है। राहत देने वाली बात ये है कि साल 2025 के मुकाबले 2026 में दुनिया के परमाणु शस्त्रागार में कमी देखने को मिली है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि साल 2026 में वैश्विक परमाणु भंडार 12,187 वॉरहेड्स है। वहीं, 1 साल पहले 2025 में दुनिया का परमाणु भंडार 12,241 का था।

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किन देशों के पास कितने परमाणु बम?

SIPRI का अनुमान है कि जनवरी 2026 में वैश्विक परमाणु बमों के भंडार 12,187 वॉरहेड्स था, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 12,241 थी। रूस और अमेरिका के न्यूक्लियर वॉरहेड्स में कमी देखी गई है। हालांकि, दूसरी ओर चीन, फ्रांस और भारत के परमाणु भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। इनमें सबसे बड़ी बढ़ोतरी फ्रांस के परमाणु शस्त्रागार में दिखाई जा रही है।

देश 2025 में परमाणु बमों की संख्या 2026 में परमाणु बमों की संख्या
रूस 5469 5420
अमेरिका 5177 5042
चीन 600 620
फ्रांस 290 370
ब्रिटेन 225 225
भारत 180 190
पाकिस्तान 170 170
इजरायल 90 90
उत्तर कोरिया 50 60
कुल 12241 12187

भारत ने बढ़ाई परमाणु बमों की संख्या

SIPRI की रिपोर्ट में भारत के लिए अनुमान लगाया गया है कि इस देश का परमाणु शस्त्रागार 2026 में बढ़कर 190 हो जाएगा। जबकि में साल 2025 में ये संख्या 180 वॉरहेड्स की थी। भारत के परमाणु शस्त्रागार में में ये बढ़ोतरी देश की रणनीतिक क्षमताओं के निरंतर विस्तार को दर्शाती है। भारत परमाणु बमों के मामले में पाकिस्तान से आगे है। पाकिस्तान का शस्त्रागार 2025 से लेकर 2026 तक 170 वॉरहेड्स पर बिना किसी बदलाव के रहने का अनुमान है।

LPG Price Hike : रसोई गैस उपभोक्ताओं को झटका… 14.2 किलो LPG सिलेंडर हुआ महंगा, लगातार तीसरे महीने बढ़े दाम

SIPRI के अनुसार, दुनिया में परमाणु बमों की कुल संख्या में मामूली गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह प्रवृत्ति जल्द ही उलट सकती है क्योंकि देश नए परमाणु प्रणालियों की तैनाती में तेजी ला रहे हैं और पुराने वॉरहेड्स को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।

राशन से जुड़ी शिकायतें अब होंगी घर बैठे दूर, ऑनलाइन जनसुनवाई में सीधे अधिकारियों से करें बात

नई दिल्ली : राशन से जुड़ी समस्याएं आज भी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं. कहीं लोगों को समय पर राशन नहीं मिल पाता, तो कहीं राशन कार्ड से जुड़े कामों के लिए उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. इन दिक्कतों के चलते आम जनता को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन अब इन समस्याओं का समाधान आसान और तेज तरीके से संभव हो रहा है. अगर, आपको भी राशन से जुड़ी कोई भी समस्या आ रही है, तो आप जनसुनवाई में अपनी बात रख सकते हैं. जन सुनवाई में अधिकारी ही सीधे आपकी बात सुनेंगे और जल्द समाधान होगा.

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घर बैठे अधिकारी सीधे आपकी बात सुनेंगे

दरअसल, अब खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग राशन से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए हर महीने के दूसरे और चौथे बुधवार दोपहर 3 से 4 बजे तक ऑनलाइन जनसुनवाई बैठक आयोजित करता है. इस बैठक में घर बैठे ऑनलाइन ही जुड़ा जा सकता है और अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकती है. Webex के माध्यम से घर बैठे अधिकारी सीधे आपकी बात सुनेंगे और समाधान की प्रक्रिया शुरू करेंगे.

इन समस्याओं का होगा निवारण

राशन से जुड़ी किसी भी समस्या, जैसे राशन न मिलना, कम राशन मिलना, नाम जुड़वाना या कटवाना, डीलर का व्यवहार या ई-पॉश (e-PoS) मशीन से जुड़ी दिक्कत के समाधान के लिए अब ⁠खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के अधिकारी सीधे आपकी बात सुन रहे हैं. भारत सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन जनसुनवाई या शिकायत निवारण बैठक शुरू की है.

ऑनलाइन जनसुनवाई में कैसे जुड़ें

  • हर महीने के दूसरे और चौथे बुधवार दोपहर 3 से 4 बजे तक
  • प्लेटफॉर्म- Webex वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से
  • लिंक- आप ⁠DFPD की आधिकारिक वेबसाइट (dfpd.gov.in) पर उपलब्ध लिंक या सीधे bharatvc.nic.in के माध्यम से जुड़ सकते हैं.
  • यह लिंक केवल बुधवार को बैठक के समय ही एक्टिव होता है.

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अन्य शिकायत निवारण के लिए क्या करें?

अगर आप ऑनलाइन बैठक में नहीं जुड़ पा रहे हैं, तो इन माध्यमों का उपयोग करें. IVRS नंबर- 14457, टोल-फ्री नंबर 1967 (8am-8pm) इसके अलावा WhatsApp नंबर 9868200445 या ऑनलाइन शिकायत वेबसाइट ⁠nfsa.gov.in पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

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LPG Price Hike : देश में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोत्तरी हुई है। 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये का इजाफा हुआ है। दिल्ली में 14.2 kg वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। नया रेट 7 जून से लागू होगा। तीन महीने में दूसरी बार घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में वृद्धि के चलते सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से एलपीजी, पेट्रोल और डीजल समेत अन्य तरह के फ्यूल के भी दाम बढ़े हैं। सीएनजी भी महंगी हुई है।

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पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। इस वजह से फ्यूल के दाम सभी देशों में बढ़े हैं। सबसे ज्यादा असर उन देशों पर हुआ है, जहां स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल या गैस की सप्लाई होती थी। भारत और पड़ोसी देश इससे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों को हर सिलेंडर बेचने पर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था। इसी वजह से कीमतें बढ़ाई गई हैं।

मार्च में 60 रुपये बढ़ी थीं कीमतें

अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में वृद्धि होने के बाद सात मार्च को एलपीजी के दाम बढ़े थे। प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके तीन महीने बाद गैस के दाम फिर 29 रुपये बढ़े हैं। तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाला गैस सिलेंडर कुल 89 रुपये महंगा हो चुका है।

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलने पर मिलेगी राहत

भारत अपनी ईंधन की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और गैस का आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यहां ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर रोक है। इसी वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर है, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार छिटपुट हमले कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। अगर जल्द ही यह समझौता होता है तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है और भारत में गैस की कीमतें कम होने की उम्मीद लगाई जा सकती है।

IRCTC AI Kitchen Monitoring: रेल यात्रियों को बड़ी राहत! अब AI रखेगा खाने की गुणवत्ता पर नजर, IRCTC ने उठाया बड़ा कदम

IRCTC AI Kitchen Monitoring: लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले लाखों लोग रेलवे के खाने पर निर्भर रहते हैं। हालांकि समय-समय पर यात्रियों की तरफ से खाने की क्वालिटी, साफ-सफाई और हाइजीन को लेकर शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अब इन समस्याओं को कम करने और यात्रियों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे और IRCTC ने बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने अपने किचन और फूड प्रोडक्शन यूनिट्स में AI बेस्ड सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस नई तकनीक के जरिए किचन में होने वाले काम पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों तक पहुंचने वाला खाना साफ-सुथरा, सुरक्षित और तय मानकों के अनुसार तैयार किया जाए।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि AI तकनीक की मदद से खाने की क्वालिटी में सुधार होगा और यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा। आने वाले समय में इस सिस्टम को और अधिक रेलवे किचन तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इसकी वजह यह है कि कई बार यात्रियों की तरफ से खाने में गड़बड़ी, खराब पैकिंग, साफ-सफाई की कमी या कर्मचारियों द्वारा नियमों का पालन न करने जैसी शिकायतें मिलती रही हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए रेलवे ने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है।

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ऐसे काम करेगा नया AI सिस्टम

रेलवे किचन में लगाए गए AI कैमरे सामान्य CCTV कैमरों से काफी अलग होंगे। ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे बल्कि वीडियो का एनालिसिस भी करेंगे। अगर कोई कर्मचारी बिना ग्लव्स के काम कर रहा है, हेड कैप नहीं पहन रहा है या साफ-सफाई के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो AI सिस्टम इसे पहचान सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजा जा सकता है। यानी अब केवल कैमरे लगाने तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक खुद संभावित गड़बड़ियों को पकड़ने में मदद करेगी।

खाने की क्वालिटी पर होगी बेहतर निगरानी

रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराना है। AI आधारित सिस्टम की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खाना तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार हो। अगर कहीं कोई कमी दिखाई देती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है और शिकायतों की संख्या भी कम हो सकती है।

यात्रियों को होगा फायदा

रेलवे के इस नए कदम का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलने वाला है। यात्रियों को अधिक सुरक्षित और बेहतर क्वालिटी वाला भोजन मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा खाने को लेकर आने वाली शिकायतों में भी कमी आ सकती है। अगर सिस्टम सफल रहता है तो ट्रेन में मिलने वाले भोजन को लेकर यात्रियों का भरोसा पहले से ज्यादा मजबूत हो सकता है।

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रेलवे में तेजी से बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

रेलवे सिर्फ किचन तक ही AI का इस्तेमाल सीमित नहीं रख रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने टिकटिंग, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी नई तकनीकों को अपनाना शुरू किया है। अब AI का उपयोग यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में रेलवे के कई अन्य विभागों में भी AI तकनीक देखने को मिल सकती है।

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. नौसेना ने देश की रक्षा कंपनियों को 80 मिमी एयरो रॉकेट विकसित और बनाने के लिए आमंत्रित किया है. यह एक बिना गाइडेंस वाला हवा से जमीन पर मार करने वाला हथियार है, जिसे अभी विदेश से आयात किया जाता है. इस पहल का उद्देश्य युद्धक हथियारों के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता कम करना है.

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MiG-29K विमानों में होता है इस्तेमाल

यह रॉकेट भारतीय नौसेना के मिग 29k लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल किया जाता है. ये रूस में विकसित दो इंजन वाले लड़ाकू विमान हैं. इन्हें विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात किया गया है. आईएनएस विक्रमादित्य भारतीय नौसेना का एकमात्र सक्रिय विमानवाहक पोत है. MiG-29K उसके प्रमुख आक्रमणकारी लड़ाकू विमान माने जाते हैं.

बख्तरबंद वाहनों को कर सकता है नष्ट

यह रॉकेट B8M-1 पॉड लॉन्चर से दागा जाता है.रॉकेट का इस्तेमाल दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है. इसके अलावा यह रडार स्टेशनों, जमीन पर खड़े विमानों और सैनिक ठिकानों जैसे लक्ष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. विस्फोट के बाद इससे निकलने वाले धातु के टुकड़े आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकते हैं.

क्या हैं इसकी खासियतें?

नौसेना द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार पूरे रॉकेट का वजन लगभग 11.3 किलोग्राम होगा. इसकी लंबाई करीब 1.54 मीटर होगी. रॉकेट की अधिकतम गति 600 मीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है. इसकी प्रभावी मारक क्षमता 1.3 किलोमीटर से 4 किलोमीटर तक रखी गई है. रॉकेट में 0.9 किलोग्राम का विस्फोटक वारहेड होगा. यह सीधे प्रहार की स्थिति में 400 मिमी मोटे कवच को भेदने में सक्षम होना चाहिए. विस्फोट के दौरान कम से कम 400 धातु के टुकड़े निकलने चाहिए. प्रत्येक टुकड़े का वजन लगभग 3 ग्राम होगा.

कठिन परिस्थितियों में भी करना होगा काम

नौसेना ने रॉकेट के लिए कड़े मानक तय किए हैं. इसे पूरी तरह सीलबंद बनाना होगा ताकि यह 20,000 मीटर तक की ऊंचाई पर सुरक्षित रहे. साथ ही यह 17,500 मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान से भी इस्तेमाल किया जा सके. रॉकेट को माइनस 60 डिग्री सेल्सियस से लेकर प्लस 60 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने योग्य होना चाहिए .  यह बेहद ठंडे पहाड़ी इलाकों से लेकर समुद्र के गर्म और नम वातावरण तक हर स्थिति में उपयोग किया जा सके.

प्रशिक्षण के लिए अलग संस्करण भी बनेगा

नौसेना केवल युद्धक रॉकेट ही नहीं चाहती. पायलटों के प्रशिक्षण के लिए एक अभ्यास संस्करण भी विकसित किया जाएगा. इसकी उड़ान क्षमता असली रॉकेट जैसी होगी, लेकिन इसमें विस्फोटक वारहेड नहीं होगा. इससे प्रशिक्षण सुरक्षित और कम खर्चीला बनेगा.

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2026-27 तक शामिल करने की योजना

नौसेना ने संकेत दिया है कि परीक्षण सफल रहने के बाद 273 वास्तविक रॉकेट खरीदे जा सकते हैं. इसके अलावा 2,400 अभ्यास राउंड भी लिए जाएंगे. यदि विकास और परीक्षण समय पर पूरे हो जाते हैं तो इस रॉकेट को 2026-27 के दौरान नौसेना में शामिल किया जा सकता है.

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

यह कदम केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुरूप है. पिछले कुछ वर्षों में सेना, वायुसेना और नौसेना ने कई हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद के स्वदेशीकरण पर जोर दिया है. नौसेना की यह नई परियोजना भी उसी प्रयास का हिस्सा है. इसका लक्ष्य है कि भविष्य में महत्वपूर्ण युद्धक हथियारों के लिए भारत को विदेशी आपूर्ति पर कम से कम निर्भर रहना पड़े.