Wednesday, April 1, 2026
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Census-2027: जनगणना का पहला चरण आज से शुरू, जानिए घर बैठे खुद कैसे भरें अपनी जानकारी

Census-2027: देश में आज से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा। पहले चरण की जनगणना में 33 सवालों के सेट से मकान और परिवार की जानकारी ली जाएगी। पहली बार डिजिटल जनगणना होगी जिसमें वेब पोर्टल के जरिये सेल्फ-एन्युमरेशन का ऑप्शन होगा। सर्वे से पहले लोग अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करवा सकेंगे। महीने भर चलने वाली यह कवायद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तय किए गए कार्यक्रमों के अनुसार आज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी।  सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण-‘मकान सूचीकरण और आवास गणना’ (एचएलओ) के दौरान पूछे जाने वाले 33 सवालों का एक सेट जारी किया है। यह जनगणना 2021 में होनी थी लेकिन कोविड के कारण हो नहीं सकी इसलिए अब यह जनगणना हो रही है। लगभग एक साल तक इसका काम चलेगा।

Census 2027: 1 अप्रैल से शुरू होगी जनगणना की प्रक्रिया… आपको क्या करना होगा? क्या होगा खास? जानें सबकुछ

कैसे होगी इस बार की जनगणना?

  1. जनगणनाकर्मी भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या), जनगणना मकान संख्या और फर्श, दीवारों और छत के निर्माण में प्रयुक्त मुख्य सामग्री जैसी जानकारी एकत्र करेंगे। वे मकान के उपयोग और स्थिति का भी रिकॉर्ड रखेंगे और उसे एक गृह संख्या आवंटित करेंगे।
  2. जनगणना अधिकारी घर में रहने वाले कुल लोगों की संख्या, घर के मुखिया का नाम और लिंग, मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य किसी श्रेणी से संबंधित है या नहीं, घर का मालिकाना हक, रहने के कमरों की संख्या और घर में विवाहित जोड़ों की संख्या के बारे में भी जानकारी जुटाएंगे।
  3. जनगणना अधिकारी पीने के पानी के मुख्य स्रोत और उपलब्धता, प्रकाश के स्रोत, शौचालय की सुविधा और प्रकार, अपशिष्ट जल निकासी, स्नान और रसोई सुविधाओं की उपलब्धता, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन और खाना पकाने के मुख्य ईंधन सहित सुविधाओं और संपत्तियों के बारे में भी जानकारी एकत्र करेंगे।
  4. रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, लैपटॉप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन, साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड और कार/जीप/वैन जैसी वस्तुओं के स्वामित्व से संबंधित डेटा, मुख्य रूप से उपभोग किए जाने वाले अनाज और जनगणना संबंधी संचार के लिए एक मोबाइल नंबर के साथ एकत्र किया जाएगा।
  5. नागरिक अपने संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में गृह गणना शुरू होने से पहले 15 दिनों की अवधि के दौरान 16 भाषाओं में स्व-गणना के माध्यम से जानकारी दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी में, जहां गृह गणना 16 अप्रैल से 15 मई तक निर्धारित है, स्व-गणना 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी।
  6. स्व-गणना करने के लिए, परिवार का मुखिया या कोई भी सदस्य आधिकारिक पोर्टल पर मोबाइल नंबर और अन्य बुनियादी विवरणों का उपयोग करके पंजीकरण कर सकता है, जिले का चयन कर सकता है, मानचित्र पर घर का स्थान चिह्नित कर सकता है और अपनी सुविधानुसार जानकारी जमा कर सकता है।
  7. 16 अंकों की एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी जनरेट की जाएगी, जिसे सत्यापन के लिए फील्ड विजिट के दौरान गणनाकर्ता के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।
  8. नागरिक सत्यापन फील्ड विजिट के दौरान सुधार कर सकते हैं, इस विकल्प से काफी समय की बचत होगी। व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग अदालतों में या सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता है।

कैसे करें सेल्फ एन्युमरेशन? 

इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत- सेल्फ एन्युमरेशन जिसका मतलब है कि लोग घर बैठे वेब-पोर्टल के जरिए 16 भाषाओं में अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे। आपको अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने के लिए 15 दिनों का समय मिलेगा, जो घर-घर सर्वे शुरू होने से ठीक पहले होगा। इसके लिए आपको मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा और जानकारी भरने के बाद मिले सेल्फ एन्युमरेशन आईडी (SE ID) को बाद में आने वाले कर्मचारी (एन्युमरेटर) को दिखाना होगा।

  • सबसे पहले आप एसई पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाएं।
  • यहां मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें और मानचित्र पर स्थान चिन्हित करें।
  • इसके बाद परिवार का विवरण भरें और जानकारी सबमिट करें।
  • SE ID प्राप्त करें, एन्युमरेटर को SE ID दें।

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स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना

बता दें कि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना है। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी। इस बार ये जनगणना पूरी तरीके से गोपनीय है और RTI से भी इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की मशीनरी इस जनगणना के प्रक्रिया को संपन्न करवाएगी। गृहमंत्री की अगुवाई में ये जनगणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी जिनके मंत्रालय से राज्य के चीफ सेकेट्री को निर्देश देंगे।

Census 2027: 1 अप्रैल से शुरू होगी जनगणना की प्रक्रिया… आपको क्या करना होगा? क्या होगा खास? जानें सबकुछ

Census 2027: जनगणना का काम 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगा. रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने 2027 की जनगणना से जुड़ी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत अपनी पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना करने के लिए तैयार है, जिसका पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा. उन्होंने बताया कि आजादी के बाद की यह 8वीं जनगणना होगी. इसमें 30 लाख एन्युमरेटर्स, सुपरवाइजर और अधिकारी शामिल होंगे. देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी और पहली बार ही सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प भी होगा. सेल्फ-एन्युमरेशन एक वेब पोर्टल के जरिए होगा, जिसमें लोग सर्वे से पहले अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे. यह 16 भाषाओं में है. यह जनगणना 2021 में होनी थी लेकिन कोविड के कारण हो नहीं सकी. अब यह जनगणना हो रही है. लगभग एक साल तक इसका काम चलेगा.

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दो चरणों में होगी जनगणना

2027 की जनगणना दो चरणों में होगी. पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा. इस दौरान हाउस लिस्टिंग का काम किया जाएगा. हाउस लिस्टिंग से 15 दिन पहले तक सेल्फ एन्युमरेशन की सुविधा होगी. इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविाओं और उनके पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी. दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा. इस चरण में लोगों की गिनती होगी. इस दौरान लोगों की संख्या, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह चरण सितंबर 2026 से ही शुरू हो जाएगा. इस चरण में जातियों की गिनती भी की जाएगी.

सेल्फ-एन्युमरेशन में क्या होगा?

2027 की जनगणना को डिजिटल रूप से किया जाएगा. एन्युमरेटर मोबाइल ऐप के जरिए अपने स्मार्टफोन से सीधे डेटा जुटाएंगे. दोनों चरणों में सेल्फ-एन्युमरेशन की सुविधा होगा. सेल्फ-एन्युमरेशन के लिए लोगों को अपने मोबाइल नंबर और दूसरी डिटेल से पोर्टल में लॉग-इन करना होगा और अपना फॉर्म भरना होगा. फॉर्म सबमिट होने के बाद एक सेल्फ-एन्युमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे एन्युमरेटर के साथ साझा करना होगा. इस पोर्टल का फायदा ये होगा कि लोगों को एन्युमरेटर के आने से पहले ही अपनी सुविधा के हिसाब से जानकारी भरने की स्वतंत्रता मिलेगी. पहले की ही तरह एन्युमरेटर अपने आवंटित ब्लॉक में घर-घर जाकर गिनती करेंगे, जबकि सेल्फ-एन्युमरेशन इस बार अलग सुविधा के रूप में दी गई है.

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जनगणना में कितना खर्च होगा?

सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसमें एन्युमरेटर्स के लिए मानदेय, ट्रेनिंग का खर्च, आईटी ढांचा और लॉजिस्टिक के लिए प्रावधान किया गया है.

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LPG संकट के बीच आज भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आने वाली है। रसोई गैस की किल्लत झेल रहे लोगों को राहत मिलने वाली है और अफवाहबाजों के मुंह पर ताला लगने वाला है क्योंकि दो और जहाज LPG का भंडार लेकर भारत पहुंच रहे हैं, वो भी 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर। एक जहाज आज ही, गुजरात के कच्छ जिले के मुंद्रा पोर्ट पहुंच जाएगा जबकि दूसरा जहाज अप्रैल को पहुंचेगा, जिनपर 94 हजार मीट्रिक टन LPG लदी हुई है और इन जहाजों को भारतीय नौसेना सुरक्षा दे रही है। जाहिर है कि इतनी बड़ी खेप आने से देश को बड़ी राहत मिलेगी LPG संकट कम होगा और जगह-जगह लग रही लाइनें भी खत्म होंगी।

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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

हालांकि सरकार ने तेल-गैस संकट से निपटने के लिए रविवार को एक और बड़ा फैसला लिया जहां केरोसिन के इस्तेमाल पर नियमों में ढील दी गई है। जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में-

  • अब से अगले 60 दिनों तक हर ज़िले के 2 पेट्रोल पंप पर केरोसिन मिलेगा।
  • पेट्रोल पंप वही होंगे, जिन्‍हें सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां चला रही हैं।
  • पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5 हजार लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा।
  • इसका इस्तेमाल सिर्फ़ खाना बनाने और रौशनी के लिए ही होगा।

किन शर्तों के साथ मिलेगा केरोसिन?

  • हालांकि सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं। सभी सुरक्षा नियमों और संचालन गाइडलाइन का पालन जरूरी होगा।
  • केरोसिन के स्टॉक, सप्लाई और वितरण का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
  • साथ ही प्रशासन और संबंधित एजेंसियां कभी भी इसकी जांच कर सकती हैं।
  • केरोसिन बांटने वाले एजेंट और डीलरों को कुछ लाइसेंस लेने से छूट दी गई।
  • और टैंकरों से केरोसिन उतारने के नियम भी आसान किए गए हैं।

यानि कुल मिलाकर सरकार पूरी तरह एक्टिव है। ऐसा नहीं है कि देश में तेल या गैस की कोई कमी है बल्कि सरकार साफ कर चुकी है कि देश में स्टॉक पर्याप्त हैं बावजूद इसके सिर्फ लोगों की सुविधा के लिए ये छूट दी गई है क्योंकि अफवाहबाज और कालाबाजारी करने वाले इस संकट को और बढ़ाना चाहते हैं। शहर-शहर ये गैंग पूरी तरह से एक्टिव है।

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भोपाल में लोग 4 पकड़े गए, छिपाकर रखे थे 59 सिलेंडर

भोपाल में खाद्य विभाग ने चार से पांच लोगों को पकड़ा जिन्होंने 59 सिलेंडरों को छिपाकर रखा था। हालांकि सूचना पर पहुंची टीम से सभी सिलेंडर जब्त कर लिए तो लखनऊ में पट्रोल पंप का संकट तो खत्म हो चुका है लेकिन LPG को लेकर अभी भी लाइनें लग रही है और पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। वहीं आज एक LPG टैंकर के पहुंचने से देश के लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी।

सार्वजनिक जगह पर पेशाब किया तो लगेगा ₹500 जुर्माना, कचरा फैलाने वालों पर भी सख्त एक्शन; सरकार ला रही नया बिल

भारत सरकार नया बिल लाने की तैयारी में है, जिसके तहत सार्वजनिक जगहों पर पेशाब करने वाले लोगों पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। अगर संसद में जन विश्वास बिल, 2025 पास हो जाता है, तो जो लोग पब्लिक में पेशाब करते हुए या सड़कों पर बदबूदार कचरा डालकर परेशानी खड़ी करते हुए पकड़े जाएंगे, उन पर दस गुना यानी 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1957 के तहत अभी पब्लिक में पेशाब करने पर 50 रुपये का जुर्माना लगता है।

शुक्रवार को लोकसभा में कॉमर्स और इंडस्ट्री राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जन विश्वास (अमेंडमेंट ऑफ प्रोविजन्स) बिल, 2026 पेश किया। इसमें दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1957 में कई बदलावों का प्रस्ताव है।

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चाय दुकानों में भी जुर्माने का प्रस्ताव

इस एक्ट के सेक्शन 397(1) के तहत प्रस्तावित बदलाव, पब्लिक में पेशाब करने, शोर मचाकर पब्लिक शांति भंग करने, या कमिश्नर से बिना लिखी इजाजत के रात की गंदगी, गोबर, खाद या कचरा जमा करने जैसे कामों के लिए मौजूदा जुर्माने की जगह ज्यादा सजा का प्रावधान करता है। इस बदलाव में सिविक बॉडी के लिए एक और सख्त कदम का प्रस्ताव है। बिना लाइसेंस या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर लॉजिंग हाउस, ईटिंग जॉइंट और चाय की दुकानें चलाने पर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव है। इस जुर्म के लिए अभी 100 रुपये का जुर्माना है, जिसे सेक्शन 421 के तहत 1,000 रुपये के जुर्माने में बदला जाएगा, जो अनरेगुलेटेड कमर्शियल एक्टिविटी पर सख्त रुख का संकेत है।

कुत्ता खुला छोड़ने पर भी सख्त एक्शन

कुत्ते को बिना पट्टे के पब्लिक सड़क पर घूमने के लिए छोड़ने पर 50 रुपये का जुर्माना है, अब इसे 1000 रुपये करने का प्रस्ताव है। गंदगी या प्रदूषित चीज न हटाने पर, जिस पर पहले मामूली 50 रुपये का जुर्माना लगता था, अब पहले चेतावनी दी जाएगी और फिर बार-बार उल्लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। इस बिल के आने से कई नियम पूरी तरह से हट जाएंगे। इनमें सबसे अहम सेक्शन 337(4) है, जिसके तहत बिना नोटिस के बिल्डिंग का काम शुरू करने पर 10,000 रुपये और हर दिन के लिए 500 रुपये का जुर्माना देना होता था। इस नियम को पूरी तरह से हटा दिया गया है।

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अपराध की श्रेणी से हटेगा सेक्शन 387

प्रस्तावित कानून में सेक्शन 387 को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव है, जिसके तहत बिना नोटिस के गैरहाजिर रहने वाले म्युनिसिपल स्वीपर को एक महीने तक की जेल हो सकती है और इसकी जगह 500 रुपये की सिविल पेनल्टी लगाई गई है। नए विधेयक में सेक्शन 461A के जरिए, ज्यादातर उल्लंघनों का फैसला क्रिमिनल कोर्ट से हटाकर असिस्टेंट कमिश्नर रैंक से नीचे के म्युनिसिपल ऑफिसर को सौंप दिया गया है, जिसमें 30 दिन की अपील विंडो और छह महीने की निपटान की डेडलाइन होगी।

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत समन्वय सुनिश्चित करना था. पीएम ने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष पर पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है.

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बैठक में कई राज्यों के सीएम हुए शामिल

बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्रियों में एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश), योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), भगवंत मान (पंजाब), भूपेंद्र पटेल (गुजरात), उमर अब्दुल्ला (जम्मू-कश्मीर), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश), पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश) और अन्य मुख्यमंत्री शामिल थे. बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे।

चुनावी राज्यों के सीएम नहीं हुए शामिल

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों व योजनाओं की समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना था.’ चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हुए. कैबिनेट सचिवालय तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक करेगा.

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के मद्देनजर स्थिति की समीक्षा करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की. आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, नागरिकों के हितों की रक्षा करने, तथा उद्योग और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बनाने के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया.’

सरकार ने सर्वदलीय बैठक भी की थी

25 मार्च को सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करके उन्हें पश्चिम एशिया की स्थिति की जानकारी दी थी और उठाए गए कदमों पर विस्तार से चर्चा की थी. 23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और देश को एकजुट व तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था. उन्होंने संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू पर ध्यान दिलाते हुए चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसे हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.

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अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

मोदी ने कहा था कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमावर्ती, साइबर तथा रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘चाहे तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा या रणनीतिक ठिकाने सभी की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है.’ मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता की अपील करते हुए और अफवाह फैलाने, कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों से सावधान रहने का अनुरोध किया. उन्होंने राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया.

लोकसभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश की सामूहिक शक्ति पर विश्वास जताते हुए कहा कि जब हर सरकार और हर नागरिक साथ चलता है, तो हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं, यही हमारी पहचान और ताकत है.

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Petrol Diesel Crisis In India : मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर भारत में अफवाह और डर के रूप में दिखने लगा है. हालांकि सरकार और तेल कंपनियां लगातार यह साफ कर रही हैं कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर फैली अटकलों के चलते लोग पैनिक बाइंग में जुट गए हैं. बीते दो दिनों में देशभर में ईंधन की मांग 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई, जबकि कुछ इलाकों में यह बढ़ोतरी 50 फीसदी तक पहुंच गई.

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तेल कंपनियों की अपील: अनावश्यक खरीद से बचें

सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा है कि देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. अचानक बढ़ी मांग की वजह अफवाहें और पैनिक हैं. लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन न खरीदें. HPCL के मुताबिक, लगातार सप्लाई जारी है और किसी भी राज्य में आपूर्ति बाधित नहीं हुई है.

कीमतों ने बढ़ाई चिंता

इसी बीच निजी क्षेत्र की कंपनी Nayara Energy ने पेट्रोल ₹5 प्रति लीटर, डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा कर दिया, जिससे लोगों की बेचैनी और बढ़ गई.

महाराष्ट्र: सबसे ज्यादा अफरा‑तफरी

महाराष्ट्र के कई जिलों में अचानक हालात बिगड़ गए. कोल्हापुर में दोपहिया वाहनों को ₹200 तक पेट्रोल चार पहिया वाहनों को ₹1000 की सीमा तय कर दी गई है. सीमित वितरण से लोगों में भ्रम है.

नाशिक (येवला) में रात में अफवाह फैली कि पेट्रोल बंद होने वाला है. इसके नतीजतन 1-1.5 किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिलीं. आधी रात को पंपों पर भीड़ उमड़ी.

छत्रपति संभाजीनगर में बाइक के लिए ₹200, कारों के लिए ₹2000 की सीमा तय कर दी गई है. बोतल और कैन में पेट्रोल पर पूरी तरह रोक. प्रशासन का कहना है कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है.

आंध्र प्रदेश: 5,000 पेट्रोल पंप सीधे निगरानी में

आंध्र प्रदेश सरकार ने करीब 5,000 पेट्रोल पंपों को रियल‑टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत ला दिया है. टैंकर मूवमेंट की सीधी निगरानी की जा रही है.  ईंधन वितरण में पारदर्शिता बरती जाए. अनियमितता पर कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बंकों को मॉनिटरिंग सिस्टम का लॉगिन देना अनिवार्य होगा.

उत्तर प्रदेश: अफवाहों से हालात बेकाबू

बलिया

पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ है. लोग बोतल और गैलन में पेट्रोल भरकर ले जाते दिखे.

अमेठी

डिब्बे में तेल देने को लेकर विवाद हो गया. पेट्रोल पंप पर मारपीट के भी मामले सामने आए. पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.

श्रावस्ती

डीज़ल न मिलने से किसानों ने NH‑730 जाम कर दिया. कई घंटे यातायात बाधित रहा. फिर प्रशासन के समझाने पर हाईवे खोला गया.

गोंडा

पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखने को मिलीं. ADM और SP खुद माइक लेकर लोगों को समझाते दिखे.

प्रयागराज

सुबह से पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली. DM ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति स्पष्ट की. कंट्रोल रूम नंबर जारी किया गया है. साथ सोशल मीडिया पर निगरानी शुरू की गई है कि कोई अफवाह न फैलाए.

जम्मू-कश्मीर: अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी

पुंछ में पेट्रोल‑डीज़ल और LPG को लेकर अफवाह फैली. DDC ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की और कहा कि पर्याप्त स्टॉक मौजूद, पैनिक की जरूरत नहीं है.

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मध्य प्रदेश: हालात सामान्य होने लगे

इंदौर में बुधवार को कई पेट्रोल पंप बंद दिखे जिससे अन्य पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं. अगले दिन इंदौर में मांगलिया डिपो से एक ही दिन में 73 टैंकर रवाना किए गए.  HPCL, BPCL और IOCL की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है.

झाबुआ

पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली. प्रशासनिक अपील के बाद स्थिति सामान्य है.

क्या कहता है प्रशासन?

देश के अलग‑अलग जिलों में प्रशासन का एक ही संदेश है कि पेट्रोल‑डीजल की कोई कमी नहीं है.  अफवाहें सोशल मीडिया से फैल रही हैं. जरूरत से ज्यादा खरीद से हालात बिगड़ सकते हैं. प्रशासन का कहना है कि गलत सूचना फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.

ट्रक और यात्री बस की भीषण टक्कर के बाद दोनों वाहन आग के गोले में बदले, 14 लोगों की दर्दनाक मौत

आंध्र प्रदेश के मारकापुरम जिले में रायवरम के पास एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। गुरुवार को एक यात्रियों से भरी बस और बजरी से लदे टिपर ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों ने आग पकड़ ली, जिससे बस में सवार यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

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आग के गोले में तब्दील हुई बस

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि बस के पिछले हिस्से में बैठे यात्री अंदर ही फंस गए। धुएं और लपटों के कारण दम घुटने और जलने से 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। करीब एक दर्जन घायलों को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

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मलबे में फंसे हो सकते हैं कुछ शव

मारकापुरम के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) नागराजू ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “हादसे में करीब 14 लोग जिंदा जल गए हैं। अब तक एक दर्जन घायलों को बचाकर अस्पताल शिफ्ट किया गया है। आशंका है कि कुछ शव अभी भी बस के मलबे के अंदर फंसे हो सकते हैं, जिन्हें निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

बचाव दल फिलहाल मृतकों की शिनाख्त करने और उनके परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है। शिनाख्त पूरी होने के बाद ही शवों को परिजनों को सौंपा जाएगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया है।

IQAir’s Annual report on Pollution: पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश, केवल 13 देश WHO के मानकों पर खरे उतरे, जानें भारत की रैंकिंग

IQAir’s Annual report on Pollution: पूरी दुनिया में एयर क्वालिटी दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। वायु गुणवत्ता की गिरावट के मामले में दक्षिण एशिया एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी ‘आईक्यूएयर’ (IQAir) द्वारा जारी 8वीं विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिकपाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश घोषित किया गया है। वहीं बांग्लादेश इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर है जबकि भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश है।

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आंकड़े काफी चिंताजनक

रिपोर्ट में 143 देशों, क्षेत्रों और भूभागों के 9,446 शहरों में स्थित निगरानी स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं, क्योंकि दुनिया के  25 सबसे प्रदूषित शहरों में से अधिकांश भारत, पाकिस्तान और चीन में स्थित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं।

दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कौन?

शहरों की बात करें तो उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर पाया गया जबकि दूसरे स्थान पर चीन का होता है। तीसरे स्थान पर मेघालय के बर्नीहाट और राजधानी दिल्ली इस लिस्ट में चौथे स्थान पर है जबकि पाकिस्तान का फैसलाबाद पांचवें नंबर पर है।

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13 देश ही मानकों पर खरे उतरे

दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में चीन 20वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका 120वें स्थान पर और ब्रिटेन 110वें स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 13 देश या क्षेत्र – फ्रेंच पॉलिनेशिया, प्यूर्टो रिको, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, बारबाडोस, न्यू कैलेडोनिया, आइसलैंड, बरमूडा, रीयूनियन, एंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेनाडा, पनामा और एस्टोनिया – विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक औसत पीएम 2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाये हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ”143 देशों या क्षेत्रों में से 130 (91 प्रतिशत) विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक औसत पीएम 2. 5 दिशानिर्देश को पूरा नहीं कर पाये हैं। सबसे प्रदूषित पांच देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य हैं। दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं, जिनमें से चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं।”

कौन है दुनिया का सबसे साफ शहर?

दक्षिण अफ्रीका का न्यूबॉउटविल शहर दुनिया का सबसे स्वच्छ शहर है, जहां पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 1.0 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। रिपोर्ट में कहा गया है,” 2025 में, जंगल की आग की घटनाओं ने उन क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया, जहां ऐतिहासिक रूप से पीएम2.5 का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा है। परिणामस्वरूप, 2025 में वैश्विक शहरों में से केवल 14 प्रतिशत ही डब्ल्यूएचओ के वार्षिक पीएम2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत था।”

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नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट से दो और भारतीय जहाज सुरक्षित निकलकर भारत के तटों की ओर रवाना हो चुके हैं। यह जानकारी Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने दी है। बताया गया कि भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर जग वसंत और पाइन गैस सोमवार शाम को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रूप से पार कर गए हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इन जहाजों का सुरक्षित निकलना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से राहत की खबर है।

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92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी

मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक दोनों जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी है। एलपीजी की यह बड़ी खेप भारत की घरेलू गैस सप्लाई को बनाए रखने के लिए बेहद अहम है। बताया गया कि जग वसंत और पाइन गैस दोनों जहाज होर्मुज स्ट्रेट के खतरनाक इलाके से निकलकर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं और इनके 26 और 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।

जानकारी के मुताबिक जग वसंत पर 33 भारतीय नाविक और पाइन गैस पर 27 भारतीय नाविक तैनात हैं। कुल 60 नाविकों के साथ दोनों जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के सबसे संवेदनशील हिस्से से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। शिपिंग मिनिस्ट्री और नौसेना इन जहाजों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस शिपिंग मार्गों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी से होकर गुजरता है। ईरान के साथ अमेरिका- इजरायल का युद्ध जारी रहने से इस इलाके से गुजरने वाले शिपिंग टैंकर और कार्गो पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने होर्मुज से जहाजों के गुजरने पर पाबंदी लगा रखी है। हालांकि बाद में ईरान की ओर से कहा गया कि वह केवल अपने दुश्मन देश के जहाजों को नहीं गुजरने देगा।

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Air India Plane Crash: इंडियन एयरलाइंस एयर इंडिया के AI‑171 विमान दुर्घटना की जांच को लेकर पायलट संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को एक पत्र लिखा है. संगठन ने जांच प्रक्रिया में कुछ अहम तकनीकी बिंदुओं को शामिल करने और सिमुलेटर आधारित परीक्षण कराने की मांग की है.

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CCTV फुटेज में दिखे अहम संकेत

FIP ने अपने पत्र में अहमदाबाद एयरपोर्ट के CCTV फोटो फ्रेम का जिक्र किया है. संगठन के मुताबिक फुटेज में विमान के नीचे एक छोटा काला हिस्सा दिखाई देता है, जो धीरे‑धीरे बड़ा होता हुआ दिख रहा है. असल में FIP का मानना है कि यह हिस्सा संभवत रैम एयर टरबाइन (RAT) के दरवाजे के खुलने या RAT के बाहर आने का संकेत हो सकता है.

RAT निकलने के संभावित कारण

पायलट संगठन ने बताया है कि RAT आमतौर पर तब अपने‑आप बाहर आता है, जब विमान का बिजली या हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हो जाता है. इसी आधार पर संगठन ने जांच एजेंसी से इस पहलू की गहराई से पड़ताल करने की मांग की है.

CCTV और फ्लाइट डेटा मिलान की मांग

FIP ने AAIB से कहा है कि CCTV तस्वीरों को विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) की टाइमलाइन से मैच किया जाए. विशेष रूप से यह देखा जाए कि विमान ने रनवे कब छोड़ा, दोनों इंजनों के फ्यूल कट‑ऑफ स्विच RUN से CUTOFF कब हुए और RAT ने हाइड्रोलिक पावर देना कब शुरू किया.

दो संभावित परिस्थितियों पर सिमुलेटर जांच की मांग

पायलट संगठन ने जांच के दौरान सिमुलेटर में दो संभावित परिस्थितियों पर परीक्षण कराने को कहा है. पहली स्थिति यह कि अगर विमान का बिजली सिस्टम फेल हुआ और RAT अपने‑आप बाहर आया. दूसरी स्थिति यह कि अगर पायलट ने स्वयं फ्यूल स्विच को CUTOFF किया. इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई या पायलट की किसी कार्रवाई की वजह से.

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फाइनल रिपोर्ट से पहले सिमुलेटर जांच पूरी करने पर जोर

FIP ने मांग की है कि AAIB की फाइनल रिपोर्ट तभी जारी की जाए, जब सिमुलेटर आधारित जांच पूरी हो जाए और उसके निष्कर्षों को रिपोर्ट में शामिल किया जाए. पायलट संगठन का कहना है कि CCTV सबूत, फ्लाइट डेटा और सिमुलेटर जांच, तीनों को मिलाकर ही दुर्घटना की सही वजह सामने आ सकती है.