Mamata Banerjee in Calcutta High Court: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कानूनी प्रैक्टिस के दर्जे की जांच शुरू कर दी है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो कल ही कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के लिबास में पेश हुईं। उनके कानूनी पोशाक पहनने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक प्रैक्टिसिंग वकील के तौर पर उनके मौजूदा दर्जे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कल पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके बाद की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन कार्यकाल सहित कई अहम राजनीतिक पदों पर काम किया है। उन्होंने आखिरी बार 1980 के दशक के आखिर में कानून की प्रैक्टिस करने के लिए रजिस्टर्ड हुई थीं। उनकी कलकत्ता हाईकोर्ट की मौजूदगी ने उन लोगों के लिए कानूनी प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा छेड़ दी है, जो एक ही समय पर कोई राजनीतिक पद संभालते हुए कानूनी प्रैक्टिस में भी शामिल रहते हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी प्रैक्टिसिंग वकील मौजूदा नियमों का पालन करें। उसने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के दर्जे के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। इस तरह की जांचें कानूनी पेशे के भीतर ईमानदारी और पेशेवर मानकों को बनाए रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। अगर ममता सभी मानकों को पूरा नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ ऐक्शन भी लिया जा सकता है।
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बार काउंसिल ने क्या-क्या पूछा?
बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से यह स्पष्ट करने को भी कहा है कि क्या 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने वाली ममता बनर्जी ने सार्वजनिक पद पर रहने के दौरान कभी भी काउंसिल को कानूनी प्रैक्टिस के स्वैच्छिक निलंबन या रुकने की सूचना दी थी। यदि ऐसा कोई पत्राचार हुआ था, तो परिषद ने संबंधित आदेशों की प्रतियां मांगी हैं। इसके अलावा, काउंसिल ने इस बारे में भी विवरण मांगा है कि क्या पद छोड़ने के बाद प्रैक्टिस फिर से शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया गया था और क्या वर्तमान में उनके पास वैध ‘प्रैक्टिस प्रमाणपत्र’ है। परिषद ने राज्य इकाई से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान या उसके बाद अदालत में पेश होने के अधिकार के संबंध में कोई अन्य आदेश या रिकॉर्ड मौजूद है। बीसीआई ने निर्देश दिया है कि स्टेट रोल, नामांकन रजिस्टर, निलंबन या बहाली के रिकॉर्ड और फाइल नोटिंग सहित सभी प्रासंगिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अगले दो दिनों के भीतर भेजी जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी दस्तावेजों की मूल प्रतियों का उचित जांच के बाद सत्यापन किया जाना चाहिए।